भारत का वर्ष 2025 का साइबर अपराध संबंधी परिदृश्य

23 Feb 2026

संदर्भ

गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में साइबर अपराध से भारतीयों द्वारा गँवाई गई कुल धनराशि का 75% से अधिक हिस्सा निवेश धोखाधड़ी से संबंधित था।

फिशिंग (Phishing): यह एक साइबर धोखाधड़ी तकनीक है, जिसमें हमलावर ईमेल, संदेश या वेबसाइट के माध्यम से वैध संस्थाओं का प्रतिरूपण करते हैं, ताकि व्यक्तियों को पासवर्ड, बैंक विवरण या ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए भ्रमित किया जा सके।

रैनसमवेयर (Ransomware): यह एक प्रकार का दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर है, जो पीड़ित के डेटा को एन्क्रिप्ट कर देता है या उसकी प्रणाली को लॉक कर देता है तथा पहुँच बहाल करने के बदले फिरौती की माँग करता है।

संबंधित तथ्य

  • पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराध में वृद्धि का कारण उन्नत प्रौद्योगिकी का बढ़ता उपयोग तथा फिशिंग, रैनसमवेयर, डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले और पहचान चोरी जैसी विधियों का प्रयोग है।

भारत में साइबर अपराध (2025): प्रमुख प्रवृत्तियाँ और चिंताएँ

  • वित्तीय हानि का पैमाना: वर्ष 2025 में भारतीयों ने साइबर धोखाधड़ी के कारण ₹22,495 करोड़ गँवाए, जबकि वर्ष 2024 में यह राशि ₹22,845 करोड़ थी।
    • यद्यपि कुल वित्तीय हानि में आंशिक कमी आई, तथापि साइबर अपराध के मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
  • निवेश घोटालों का प्रभुत्व: वर्ष 2025 में साइबर अपराध से हुई कुल वित्तीय हानि का 76% निवेश धोखाधड़ी से संबंधित था। इन घोटालों में पोंजी योजनाएँ, नकली शेयर व्यापार मंच तथा क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी सम्मिलित हैं।
    • प्रारंभिक निधि-निरोधक हस्तक्षेपों के कारण प्राथमिकी की संख्या वर्ष 2024 के 66,370 से घटकर वर्ष 2025 में 55,484 रह गई।
  • प्रमुख साइबर धोखाधड़ी का वितरण (2025): डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले कुल वित्तीय हानि का 9% थे, जबकि सेक्सटॉर्शन 4% था।
    • रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या के संदर्भ में, निवेश धोखाधड़ी 35%, सेक्सटॉर्शन 19% तथा डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले 6% थे।

साइबर अपराध के बारे में

  • साइबर अपराध वह कोई भी अवैध कृत्य है, जिसमें कंप्यूटर, संचार उपकरण या कंप्यूटर नेटवर्क का उपयोग अपराध करने या उसे सुगम बनाने के लिए किया जाता है।
    • उदाहरणार्थ: हैकिंग, पहचान चोरी, धोखाधड़ी तथा साइबर स्टॉकिंग।
  • सातवीं अनुसूची के अनुसार, साइबर अपराध राज्य सूची का विषय है।

वास्तविक जीवन में साइबर अपराध के रूप

  • साइबर बुलिंग: कंप्यूटर, मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि इलेक्ट्रॉनिक या संचार उपकरणों के माध्यम से किया गया उत्पीड़न या धमकाना।
  • साइबर स्टॉकिंग: किसी व्यक्ति द्वारा इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति का पीछा करना या स्पष्ट असहमति के बावजूद बार-बार संपर्क स्थापित करने का प्रयास करना।
  • साइबर ग्रूमिंग: जब कोई व्यक्ति किसी नाबालिग के साथ ऑनलाइन संबंध स्थापित कर उसे यौन कृत्य के लिए छलपूर्वक प्रेरित करता है।
  • सेक्सटिंग: प्रायः मोबाइल फोन के माध्यम से यौन स्पष्ट डिजिटल चित्र, वीडियो, पाठ संदेश या ईमेल भेजने की क्रिया।
  • सिम स्वैप घोटाला: जब धोखेबाज मोबाइल सेवा प्रदाता के माध्यम से पंजीकृत मोबाइल नंबर पर धोखाधड़ीपूर्वक नया सिम कार्ड जारी करवा लेते हैं।

साइबर अपराध में वृद्धि के प्रमुख कारण

  • वित्तीय लाभ: वित्तीय जानकारी, जैसे क्रेडिट कार्ड नंबर और बैंक खातों की चोरी करके अथवा चोरी किए गए डेटा या संसाधनों के एवज में फिरौती की माँग करके।
    • उदाहरणार्थ, फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन एवं इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2020 से जून 2023 के बीच यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से संबंधित धोखाधड़ी सबसे प्रचलित ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी रही।
  • जासूसी (Espionage): कुछ साइबर अपराधी प्रतिस्पर्द्धात्मक लाभ प्राप्त करने या किसी संगठन की प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाने हेतु गोपनीय या स्वामित्वाधीन जानकारी की चोरी करते हैं।
  • राजनीतिक या वैचारिक उद्देश्य: कुछ साइबर अपराधी किसी विशेष कारण को बढ़ावा देने या किसी एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए संगठनों या व्यक्तियों को लक्ष्य बनाते हैं।
    • उदाहरणार्थ, कैंब्रिज एनालिटिका स्कैंडल (2018) के अंतर्गत फेसबुक के डेटाबेस से 41.9 करोड़ उपयोगकर्ताओं का डेटा लीक हुआ, जिसमें अनेक भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा भी सम्मिलित था।
  • व्यक्तिगत उद्देश्य: कुछ साइबर अपराधी व्यक्तियों या संगठनों को उत्पीड़ित करने, बदनाम करने या हानि पहुँचाने के उद्देश्य से साइबर अपराध करते हैं।
  • अवसरवाद: कुछ साइबर अपराधी केवल इसलिए साइबर अपराध करते हैं क्योंकि वे ऐसा कर सकते हैं, अर्थात् वे प्रौद्योगिकी या व्यक्तियों की सुरक्षा कमजोरियों का लाभ उठाकर जानकारी या संसाधनों की चोरी करते हैं।
    • उदाहरणार्थ, जून 2023 में प्रौद्योगिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट को “अनॉनिमस सूडान” नामक साइबर अपराध समूह के हमले के पश्चात् कंप्यूटिंग सेवाओं में अस्थायी व्यवधान का सामना करना पड़ा।

साइबर आतंकवाद क्या है?

  • साइबर आतंकवाद को सामान्यतः सूचना प्रणालियों, कार्यक्रमों तथा डेटा के विरुद्ध पूर्वनियोजित, राजनीतिक रूप से प्रेरित ऐसे आक्रमण के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो हिंसा की धमकी देता है या हिंसा का परिणाम उत्पन्न करता है।
  • कभी-कभी इस परिभाषा का विस्तार करते हुए किसी भी ऐसे साइबर आक्रमण को सम्मिलित किया जाता है, जो लक्षित जनसंख्या में भय उत्पन्न करे या आतंक फैलाए। अटैकर प्रायः यह कार्य महत्त्वपूर्ण अवसंरचना को क्षति पहुँचाकर या बाधित कर करते हैं।
  • उदाहरणार्थ, इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) द्वारा सैन्य तथा सरकारी वेबसाइटों को घृणा और प्रचार प्रसार के उद्देश्य से लक्ष्य बनाया गया।

भारत में साइबर अपराध से संबंधित चुनौतियाँ

  • तेजी से प्रौद्योगिकीय प्रगति: भारत में प्रौद्योगिकी के तीव्र प्रसार के कारण साइबर अपराधियों के लिए आक्रमण की संभावनाएँ बढ़ गई हैं। जैसे-जैसे इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), क्लाउड कंप्यूटिंग आदि नई प्रौद्योगिकियाँ व्यापक होती जा रही हैं, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों के आक्रमण के साधन भी विस्तृत हो रहे हैं।
    • उदाहरणार्थ, डीप फेक तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा उत्पन्न पहचान एक उभरती हुई चुनौती है, क्योंकि चेहरों और आवाजों का निर्माण एवं आरोपण अब सरल हो गया है।
  • परिष्कृत साइबर हमले: साइबर अपराधी अधिक परिष्कृत होते जा रहे हैं तथा रैनसमवेयर, शून्य-दिवसीय भेद्यता (Zero-day exploit) तथा सोशल इंजीनियरिंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर व्यक्तियों और संगठनों को लक्ष्य बना रहे हैं।
    • शून्य-दिवसीय भेद्यता वह साइबर आक्रमण तकनीक है, जो कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर या फर्मवेयर में अज्ञात सुरक्षा त्रुटि का लाभ उठाती है।
  • साइबर युद्ध और राज्य-प्रायोजित हमले: भारत को साइबर जासूसी तथा राज्य-प्रायोजित साइबर हमलों का खतरा है, जिससे महत्त्वपूर्ण अवसंरचना और संवेदनशील सरकारी जानकारी की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
    • उदाहरणार्थ, वर्ष 2019 में कुडनकुलम न्यूक्लियर पॉवर प्लांट पर ‘डीट्रैक’ नामक मैलवेयर अटैक हुआ। माना जाता है कि यह मैलवेयर “लाजरस ग्रुप” नामक समूह द्वारा विकसित किया गया, जिसका संबंध उत्तर कोरिया से है।
  • साइबर सुरक्षा जागरूकता का अभाव: भारत में अनेक व्यक्ति और व्यवसाय साइबर सुरक्षा से संबंधित जोखिमों तथा निवारक उपायों के प्रति पूर्णतः जागरूक नहीं हैं, जिससे वे साइबर अपराधों का शिकार बनने के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
  • अपर्याप्त विधिक ढाँचा: यद्यपि भारत ने साइबर अपराध से निपटने हेतु विधिक ढाँचा स्थापित करने के प्रयास किए हैं, तथापि इन कानूनों के प्रभावी प्रवर्तन में अभी भी कुछ अंतराल और चुनौतियाँ विद्यमान हो सकती हैं।

साइबर अपराध से निपटने हेतु वैश्विक अभिसमय 

  • इंटरपोल साइबर अपराध वैश्विक रणनीति 2022–2025: इसका उद्देश्य साइबर अपराध के वैश्विक प्रभाव को कम करना तथा समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित कर एक सुरक्षित विश्व का निर्माण करना है। यह रणनीति साइबर अपराध से मुकाबला करने हेतु सदस्य देशों को सहयोग प्रदान करने की इंटरपोल की योजना को रेखांकित करती है।
  • संभावित संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध संधि: संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश साइबर अपराध के प्रतिकार हेतु एक अंतरराष्ट्रीय संधि पर वार्ता कर रहे हैं। यदि इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंगीकृत किया जाता है, तो यह साइबर विषय पर संयुक्त राष्ट्र का पहला बाध्यकारी दस्तावेज होगा।
  • बुडापेस्ट अभिसमय: यह संधि विभिन्न देशों के कानूनों में सामंजस्य स्थापित करने तथा सीमापार सहयोग को बढ़ाने पर केंद्रित है ताकि अनेक प्रभावित देशों में विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों का अभियोजन किया जा सके। भारत ने इस अभिसमय में भाग न लेने का निर्णय लिया।

भारत में साइबर अपराध से संबंधित सरकारी उपाय

  • राष्ट्रीय साइबर फॉरेंसिक प्रयोगशाला (अन्वेषण): इसे नई दिल्ली में स्थापित किया गया है ताकि सभी राज्य/केंद्रशासित प्रदेश पुलिस के अन्वेषण अधिकारियों को ऑनलाइन तथा ऑफलाइन माध्यम से प्रारंभिक चरण की साइबर फॉरेंसिक सहायता प्रदान की जा सके।
  • राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति: इसका उद्देश्य एक सुरक्षित साइबर स्पेस वातावरण का निर्माण करना तथा देश की साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
  • भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र: यह केंद्र भारत में साइबर अपराध से निपटने के प्रयासों के समन्वय हेतु नोडल बिंदु के रूप में कार्य करता है, जिसका मुख्य ध्यान विधि प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमताओं को सुदृढ़ करना है ताकि वे साइबर अपराधों की रोकथाम तथा अन्वेषण प्रभावी ढंग से कर सकें।
    • उदाहरण: बैंकों ने गृह मंत्रालय के साथ 18.43 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं तथा 24.67 लाख म्यूल खातों की जानकारी साझा की है, जिससे स्थापना के बाद से ₹8,031.56 करोड़ मूल्य के धोखाधड़ी लेन-देन को अवरुद्ध करने में प्राधिकारियों को सहायता मिली है।
  • समर्पित साइबर अपराध पुलिस थाने: भारत में 459 समर्पित साइबर अपराध पुलिस थाने स्थापित हैं, जो वर्ष 2020 में 169 थे। उत्तर प्रदेश 75 साइबर अपराध पुलिस थानों के साथ अग्रणी है।
  • नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी मंच: यह एक ऐसा मंच है, जो साइबर धोखाधड़ी की त्वरित रिपोर्टिंग सक्षम बनाता है, जिससे लेन-देन को अवरुद्ध करने तथा धन की प्रभावी वसूली में सहायता मिलती है।
    • उदाहरण: तत्काल रिपोर्टिंग की सुविधा के माध्यम से 23.02 लाख शिकायतों में ₹7,130 करोड़ से अधिक राशि की बचत की गई है।

आगे की राह

  • उन्नत साइबर सुरक्षा रूपरेखा का क्रियान्वयन: साइबर सुरक्षा रूपरेखाएँ सर्वोत्तम प्रथाओं, नीतिगत प्रक्रियाओं, सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा अन्य आवश्यक साधनों की एक शृंखला प्रदान करती हैं, जिनके माध्यम से किसी संगठन के व्यावसायिक परिचालन को सुरक्षित किया जा सकता है।
    • उन्नत साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकियों में निवेश करना महत्त्वपूर्ण सूचना प्रणालियों तथा नेटवर्क की सुरक्षा में सहायक होगा।
  • साइबर स्वच्छता प्रथाएँ: व्यक्तियों तथा संगठनों को नियमित सॉफ्टवेयर अद्यतन, सुदृढ़ पासवर्ड प्रबंधन तथा सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार जैसी उत्तम साइबर स्वच्छता प्रथाएँ अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: अंतरराष्ट्रीय संगठनों, विधि प्रवर्तन एजेंसियों तथा अन्य देशों के साथ सहयोग को सुदृढ़ किया जाना चाहिए ताकि खतरा संबंधी सूचनाओं, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान हो सके तथा सीमापार साइबर अपराधों के अन्वेषण एवं अभियोजन में समन्वित प्रयास किए जा सकें।

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