वर्ष 2025 में इंटरनेट शटडाउन

2 Apr 2026

संदर्भ

राइजिंग रिप्रेशन मीट्स ग्लोबल रेसिस्टेंस: इंटरनेट शटडाउन 2025” शीर्षक रिपोर्ट, जिसे ‘एक्सेस नाउ’ द्वारा प्रकाशित किया गया है, में 52 देशों में 313 इंटरनेट शटडाउन दर्ज किए गए हैं, जो अब तक का सर्वाधिक है, जबकि भारत में वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक संचयी कुल इंटरनेट शटडाउन दर्ज किए गए हैं।

संबंधित तथ्य

  • वर्ष 2025 में 65 शटडाउन भारत के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को प्रभावित करते हैं।
    • ये शटडाउन मुख्यतः प्रदर्शन, संघर्ष, सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक त्योहारों” के दौरान लागू किए गए।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • भारत में इंटरनेट शटडाउन: भारत ने वर्ष 2025 में 65 इंटरनेट शटडाउन लगाए, जो वर्ष 2017 के बाद से सबसे कम संख्या है।
  • क्षेत्रीय एकाग्रता (एशिया-प्रशांत): वैश्विक स्तर पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सर्वाधिक व्यवधान दर्ज किए गए, जहाँ 11 देशों में 195 शटडाउन हुए।
  • वैश्विक तुलना एवं रैंकिंग: म्याँमार लगातार दूसरे वर्ष 95 घटनाओं के साथ विश्व में शीर्ष स्थान पर रहा, जबकि भारत का संचयी आँकड़ा अब भी वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक है।
    • संचयी वैश्विक आँकड़े: वर्ष 2016 से अब तक एक्सेस नाउ द्वारा दर्ज 2,102 इंटरनेट शटडाउन में से 920 भारत में हुए हैं।
  • प्रवृत्ति विश्लेषण (भारत): आँकड़े दर्शाते हैं कि पिछले दशक में भारत में नेटवर्क व्यवधानों की प्रवृत्ति उतार-चढ़ाव के बावजूद लगातार उच्च रही है।
    • भारत में वर्ष 2016 में 30 शटडाउन दर्ज किए गए, जो वर्ष 2017 में बढ़कर 69 हो गए।
  • VPN के उपयोग: रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि प्राधिकरण वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) जैसे प्रतिबंधों को दरकिनार करने वाले उपकरणों को लक्षित कर रहे हैं।
    • VPN ऐसे सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग हैं, जो उपयोगकर्ताओं को उनकी ऑनलाइन पहचान और स्थान को छिपाकर स्थानीय इंटरनेट प्रतिबंधों को बायपास करने की अनुमति देते हैं।

इंटरनेट शटडाउन के बारे में

  • इंटरनेट शटडाउन एक जानबूझकर उत्पन्न किया गया व्यवधान है, जिसमें इंटरनेट या इलेक्ट्रॉनिक संचार सेवाओं को किसी विशिष्ट जनसंख्या या भौगोलिक क्षेत्र के लिए अप्राप्य या प्रभावी रूप से अनुपयोगी बना दिया जाता है, प्रायः सूचना के प्रवाह पर नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से।

इंटरनेट शटडाउन के लाभ और हानि

लाभ हानियाँ
भ्रामक सूचना को रोकता है: संकट के दौरान फर्जी खबरों और अफवाहों के प्रसार को रोकता है। संचार बाधित करता है: आवश्यक सेवाओं, व्यवसायों और आपातकालीन प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करता है।
सुरक्षा को बढ़ाता है: दंगे, सांप्रदायिक हिंसा और आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद करता है। अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाता है: विशेषकर डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए वित्तीय हानि होती है।
परीक्षा की शुचिता बनाए रखता है: प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल को रोकता है। शिक्षा को प्रभावित करता है: ऑनलाइन शिक्षा और अनुसंधान प्रभावित होते हैं।
कानून और व्यवस्था बनाए रखता है: विरोध प्रदर्शनों और नागरिक अशांति को नियंत्रित करने में सहायता करता है। अधिकारों का उल्लंघन करता है: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना तक पहुँच को सीमित करता है।

  • साबू मैथ्यू जॉर्ज बनाम भारत संघ मामला (2018) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इंटरनेट तक पहुँच का अधिकार अनुच्छेद-19 के तहत एक मौलिक अधिकार है।
राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है: साइबर हमलों या बाहरी खतरों के दौरान उपयोग किया जा सकता है। वैश्विक छवि को प्रभावित करता है: बार-बार शटडाउन देश की लोकतांत्रिक छवि को नुकसान पहुँचाते हैं।

भारत में इंटरनेट शटडाउन के प्रावधान

दूरसंचार सेवाओं के अस्थायी निलंबन नियम, 2024

  • दूरसंचार सेवाओं के अस्थायी निलंबन नियम, 2024 को दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अंतर्गत जारी किया गया है।
  • दूरसंचार अधिनियम, 2023 ने निम्नलिखित पुराने कानूनों को प्रतिस्थापित किया है:
    • भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885
    • भारतीय वायरलेस टेलीग्राफ अधिनियम, 1933
    • टेलीग्राफ तार (अवैध अधिकार) अधिनियम, 1950
  • वर्ष 2024 के नियम, भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 के अंतर्गत बनाए गए वर्ष 2017 के नियमों को प्रतिस्थापित करते हैं।

कौन इंटरनेट शटडाउन का आदेश दे सकता है?

  • राष्ट्रीय स्तर पर: गृह मंत्रालय के गृह सचिव को इंटरनेट शटडाउन लागू करने का अधिकार है।
  • राज्य स्तर पर: राज्य गृह विभाग के प्रभारी सचिव को शटडाउन आदेश जारी करने का अधिकार है।
  • अपरिहार्य परिस्थितियों में: यदि उपरोक्त अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं, तो केंद्र स्तर पर संयुक्त सचिव इंटरनेट शटडाउन का आदेश जारी कर सकता है।

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