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भारत में अनिवार्य मतदान

23 Mar 2026

संदर्भ

हाल ही में निर्वाचन आयोग ने अप्रैल–मई 2026 में पाँच विधानसभा चुनावों के लिए कार्यक्रम की घोषणा की है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने एक अलग सुनवाई में अनिवार्य मतदान पर चिंताएँ व्यक्त कीं।

अनिवार्य मतदान के बारे में

  • अनिवार्य मतदान एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें पात्र नागरिकों को चुनावों में मतदान करना कानूनी रूप से आवश्यक होता है और कुछ देशों में अनुपालन न करने पर दंड का प्रावधान होता है।
  • वैश्विक परिदृश्य
    • कुछ लोकतंत्र, जैसे कि ऑस्ट्रेलिया और कई लैटिन अमेरिकी देश, अनिवार्य मतदान के प्रावधान रखते हैं।
    • ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, और ब्राजील में, यदि मतदाता बिना वैध कारण के मतदान करने में विफल रहते हैं तो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
    • पेरू में, गैर-मतदाताओं को कुछ सार्वजनिक वस्तुओं और सेवाओं से वंचित किया जाता है।

भारत में अनिवार्य मतदान की दिशा में प्रयास 

  • दिनेश गोस्वामी समिति: वर्ष 1990 में गठित चुनावी सुधारों पर दिनेश गोस्वामी समिति ने अनिवार्य मतदान का समर्थन नहीं किया और इसके क्रियान्वयन में व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला दिया।
    • इसके बजाय, इसने जागरूकता अभियानों के माध्यम से मतदाता भागीदारी बढ़ाने की सिफारिश की।
  • विधि आयोग की 255वीं रिपोर्ट (वर्ष 2015): विधि आयोग ने अपनी 255वीं रिपोर्ट (2015) में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। अनिवार्य मतदान से औसतन मतदान में लगभग 7% वृद्धि होती है।

लाभ

  • उच्च मतदाता भागीदारी: ऑस्ट्रेलिया में, अनिवार्य मतदान 90–95% मतदाता भागीदारी सुनिश्चित करता है, जबकि स्वैच्छिक प्रणालियों में यह लगभग ~60% होती है। इसका अर्थ है कि सरकारें, मतदाताओं के बहुत बड़े हिस्से के समर्थन से चुनी जाती हैं, जिससे लोकतांत्रिक वैधता बढ़ती है।
    • उदाहरण के लिए: इसके विपरीत, यू.के. (वर्ष 2005) में, एक सरकार कुल मतदाताओं के केवल ~21% के समर्थन से बहुमत जीत गई, जो कम भागीदारी के तहत कमजोर वैधता को दर्शाता है।
  • राजनीतिक उदासीनता में कमी: नागरिकों को मतदान को एक नागरिक कर्तव्य के रूप में लेने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे सहभागिता में सुधार होता है।
  • राजनीति में मध्यम मार्ग: व्यापक भागीदारी होने से राजनीतिक दल मध्यम विचार वाले वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश करते हैं, जिससे कट्टरता कम होती है।।
  • भागीदारी में निरंतरता: चुनावों के दौरान लगातार उच्च भागीदारी बनाए रखता है, जिससे लोकतांत्रिक संस्कृति सुदृढ़ होती है।

चुनौतियाँ

  • लोकतांत्रिक दर्शन के विरुद्ध: गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव का निर्वाचन आयोग ने समर्थन नहीं किया और राष्ट्रीय स्तर पर इसकी अव्यावहारिकता का हवाला दिया।
    • पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने कहा कि “लोकतंत्र और अनिवार्यता साथ-साथ नहीं चलते”।

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  • स्वतंत्रता का उल्लंघन: अनिवार्य मतदान, मतदान न करने के अधिकार को सीमित करता है, जो लोकतंत्र में व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है।
    • उदाहरण के लिए: संवैधानिक दृष्टिकोण से, अनिवार्य मतदान को अनुच्छेद-19(1) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना जा सकता है।
  • प्रशासनिक बोझ: गैर-मतदाताओं की निगरानी और दंड लागू करना महँगा और जटिल है, विशेषकर भारत जैसे बड़े देशों में।
  • भारत में प्रवर्तन की चुनौतियाँ: भारत की प्रवासी आबादी और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँच संबंधी समस्याएँ अनुपालन को कठिन बनाती हैं।

भारत में मतदान के अधिकार के बारे में: संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद-325: केवल धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या इनमें से किसी के आधार पर किसी व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल होने के लिए अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा।
  • अनुच्छेद-326: यह प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार प्रदान करता है।
    • यह प्रावधान करता है कि कोई भी नागरिक जिसकी आयु 18 वर्ष से कम नहीं है और जो संविधान या किसी विधि के तहत कुछ आधारों पर अन्यथा अयोग्य नहीं है, मतदाता के रूप में पंजीकृत होने का अधिकारी है।
  • अनुच्छेद-327 और अनुच्छेद-328: इन अनुच्छेदों के अनुसार, संसद और राज्य विधानमंडल संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों से संबंधित सभी विषयों पर प्रावधान बना सकते हैं।
  • अनुच्छेद-329: भारतीय संविधान का यह अनुच्छेद चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप को निषिद्ध करता है।
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 19: यह आवश्यक करता है कि किसी नागरिक की आयु कम-से-कम 18 वर्ष हो और वह किसी निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी हो, ताकि उसे मतदाता के रूप में पंजीकृत किया जा सके।
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62: यह उस प्रत्येक व्यक्ति को मतदान का अधिकार प्रदान करता है, जिसका नाम किसी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है।
    • विभिन्न मामलों में, सर्वोच्च न्यायालय ने यह माना है कि मतदान का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है।

आगे की राह

  • विधि आयोग की 255वीं रिपोर्ट की सिफारिशें: इसमें यह बताया गया कि अनिवार्य मतदान भारत में न तो वांछनीय है और न ही व्यवहार्य।
    • समाधान मतदाताओं के बीच अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग करने के लिए उत्साह उत्पन्न करने में निहित है, विशेषकर सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए नवोन्मेषी अभियानों के माध्यम से।
  • प्रोत्साहन: प्रवासी श्रमिकों के लिए, मतदान के दिन वैधानिक अवकाश के कड़े क्रियान्वयन के साथ-साथ विशेष बसों और ट्रेनों का संचालन करके परिवहन सुविधाओं में वृद्धि, प्रभावी रूप से भागीदारी बढ़ा सकती है।
  • दूरस्थ मतदान को बढ़ावा देना: नई प्रौद्योगिकियों के आगमन के साथ, दूरस्थ मतदान के लिए सभी हितधारकों द्वारा स्वीकार्य मजबूत और सुरक्षित तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए।
भारत में अनिवार्य मतदान

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