संदर्भ
हाल ही के एक निर्णय में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को उच्च शर्करा, नमक तथा संतृप्त वसा वाले पैकेज्ड खाद्य उत्पादों पर अनिवार्य फ्रंट-ऑफ-पैकेज चेतावनी लेबल शुरू करने पर विचार करने का निर्देश दिया।
संबंधित तथ्य
- फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग सुधार हेतु उच्चतम न्यायालय का आग्रह: वर्ष 2025 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के अंतर्गत एक विशेषज्ञ समिति को फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग को लागू करने हेतु खाद्य सुरक्षा और मानक (लेबलिंग और प्रदर्शन) विनियम, 2020 में संशोधन की सिफारिश करने का निर्देश दिया।
फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (FoPL) के बारे में

- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, फ्रंट-ऑफ-पैकेज (FoP) लेबल सरल, प्रायः पोषण संबंधी जानकारी से संबंधित होते हैं, जिन्हें खाद्य पैकेट के सामने प्रदर्शित किया जाता है ताकि उपभोक्ता उत्पाद की पोषण गुणवत्ता को शीघ्र समझ सकें।
- यह उपभोक्ताओं को शर्करा, सोडियम और वसा जैसे अस्वास्थ्यकर घटकों के उच्च स्तर के बारे में सचेत करता है।
- कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन के अनुसार, फ्रंट-ऑफ-पैकेज (FoP) लेबलिंग का उद्देश्य उपभोक्ताओं को खाद्य उत्पादों पर प्रदान की गई पोषण संबंधी जानकारी को आसानी से समझने में सहायता करना है।
भारत में ‘फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग’ (FOPL) का विकास
- भारत में फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (FOPL) का विचार पहली बार वर्ष 2014 में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2013 में स्थापित एक विशेषज्ञ समिति द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
- वर्ष 2019 में, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा और मानक (लेबलिंग और प्रदर्शन) विनियम का मसौदा जारी किया, जिसमें FOPL के प्रावधान शामिल थे।
- मसौदा विनियमों में पैकेज्ड खाद्य उत्पादों पर रंग-कोडित लेबल के उपयोग का प्रस्ताव किया गया था, ताकि उपभोक्ताओं के लिए पोषण संबंधी जानकारी को समझना आसान हो सके।
- दिसंबर 2019 में, FOPL को व्यापक लेबलिंग और प्रदर्शन विनियमों से अलग कर स्वतंत्र विचार के लिए रखा गया।
- 15 फरवरी, 2022 को, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (FOPL) को लागू करने हेतु अपने मसौदा विनियमों में “हेल्थ स्टार रेटिंग” प्रणाली को अपनाने का प्रस्ताव किया।
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भारत में FoPL की आवश्यकता
- असंचारी रोगों (NCDs) का बढ़ता बोझ: भारत असंचारी रोगों (NCDs) जैसे मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी रोगों के बढ़ते बोझ का सामना कर रहा है, जो प्रसंस्कृत और अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के उच्च उपभोग से जुड़े हैं।
- उदाहरण के लिए: वर्ष 2023 के ICMR-INDIAB अध्ययन में पाया गया कि भारत में 101 मिलियन लोग (जनसंख्या का 11.4%) मधुमेह से ग्रस्त हैं, जबकि अतिरिक्त 136 मिलियन लोग प्री-डायबिटीज से पीड़ित हैं।
- सूचित विकल्प बनाना: पारंपरिक लेबलिंग में पोषण संबंधी जानकारी अक्सर पीछे की ओर छोटे अक्षरों में दी जाती है, जिसे अनेक उपभोक्ता नहीं देखते, जिससे बिना जानकारी के विकल्प चुने जाते हैं।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्य: यह SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) के अंतर्गत भारत की प्रतिबद्धताओं का समर्थन करता है।
- व्यावहारिक प्रभाव: प्रमुख चेतावनी लेबल अस्वास्थ्यकर पोषक तत्त्वों के अत्यधिक उपभोग को हतोत्साहित कर सकते हैं और खाद्य उद्योग को पुनर्संयोजन के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
- पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का उच्च उपभोग: तीव्र शहरीकरण, जीवनशैली में परिवर्तन और आक्रामक विपणन ने प्रसंस्कृत और रेडी-टू-ईट खाद्य उत्पादों पर निर्भरता बढ़ा दी है।
चुनौतियाँ
- सीमित परिणामों वाली अनेक समितियाँ: वर्ष 2015, 2018 और बाद के कार्य समूहों सहित कई विशेषज्ञ समितियाँ गठित की गईं, परंतु उनकी रिपोर्टें सदैव सार्वजनिक नहीं की गईं और प्रक्रियाएँ धीमी रहीं।
- उद्योग का विरोध: खाद्य निर्माताओं ने सशक्त चेतावनी लेबल (जैसे उच्च पोषक तत्त्व सामग्री के लिए लाल रंग कोडिंग) का विरोध किया, जिससे क्रियान्वयन में महत्त्वपूर्ण विलंब हुआ।
- कमजोर मसौदे और शिथिल पोषक तत्त्व संबंधी मानदंड: वर्ष 2018 के मसौदे में निर्धारित सीमाओं को पार करने वाले पोषक तत्त्वों के लिए लाल चेतावनी लेबल अनिवार्य किए गए थे, परंतु वर्ष 2019 के मसौदे में कुल शर्करा से अतिरिक्त शर्करा तथा कुल वसा से संतृप्त वसा की ओर स्थानांतरण कर मानदंडों को शिथिल किया गया—जिसे उद्योग-समर्थक माना गया, परंतु उपभोक्ताओं के लिए यह कम सूचनात्मक था।
आगे की राह
- विज्ञान-आधारित पोषक तत्त्व सीमा-निर्धारण: विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य आँकड़ों के आधार पर शर्करा, नमक और संतृप्त वसा के लिए कठोर सीमा-निर्धारण निर्धारित किए जाएँ।
- व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति के साथ एकीकरण: FoPL को Eat Right India तथा राष्ट्रीय कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और आघात की रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NPCDCS) जैसी पहलों के साथ जोड़ा जाए।
- उपभोक्ता जागरूकता अभियान: FoPL प्रतीकों की व्याख्या के बारे में उपभोक्ताओं को शिक्षित करने हेतु राष्ट्रव्यापी IEC (Information, Education, Communication) अभियान प्रारंभ किए जाएँ।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के बारे में
- FSSAI की स्थापना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत की गई है, जो विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में खाद्य संबंधी मुद्दों को प्रबंधित करने वाले विभिन्न अधिनियमों और आदेशों को समेकित करता है।
- नोडल मंत्रालय: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय।
- FSSAI की संरचना
- FSSAI में एक अध्यक्ष और 22 सदस्य होते हैं, जिनमें एक-तिहाई सदस्य महिलाएँ होती हैं।
- FSSAI के अध्यक्ष की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
- मानक निर्धारित करने में इसे वैज्ञानिक समितियों और पैनलों द्वारा सहायता प्रदान की जाती है तथा प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय के लिए केंद्रीय सलाहकार समिति द्वारा सहायता की जाती है।
- कार्य
- खाद्य पदार्थों से संबंधित मानकों और दिशा-निर्देशों को निर्धारित करने तथा अधिसूचित विभिन्न मानकों के प्रवर्तन हेतु उपयुक्त प्रणालियों को निर्दिष्ट करने के लिए विनियमों का निर्माण।
- खाद्य व्यवसायों के लिए खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणालियों के प्रमाणीकरण में संलग्न प्रमाणन निकायों की मान्यता हेतु तंत्र और दिशा-निर्देश निर्धारित करना।
- प्रयोगशालाओं की मान्यता और मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की अधिसूचना हेतु प्रक्रिया और दिशा-निर्देश निर्धारित करना।
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