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भारत का ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र

19 Feb 2026

संदर्भ

फरवरी 2026 तक, भारत ने 38,500 से अधिक पंजीकृत ड्रोन (UNI), 39,890 DGCA-प्रमाणित रिमोट पायलट और 244 अनुमोदित प्रशिक्षण संगठनों के साथ एक विनियमित ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है।

संबंधित तथ्य

  • भारत में कुशल और त्वरित सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए ड्रोन तकनीक एक महत्त्वपूर्ण साधन बन गई है।
  • ग्राम सर्वेक्षण एवं ग्राम क्षेत्रों में उन्नत तकनीक से मानचित्रण (SVAMITVA) और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं में एकीकृत ड्रोन शासन में सटीकता और पारदर्शिता को बढ़ा रहे हैं।

UAVs क्या हैं?

  • मानवरहित हवाई वाहन (UAVs), जिन्हें आमतौर पर ड्रोन के नाम से जाना जाता है, ऐसे विमान हैं, जो बिना किसी ह्यूमन पायलट के संचालित होते हैं।
  • इन्हें ऑपरेटर द्वारा दूर से नियंत्रित किया जा सकता है या पूर्व-निर्धारित उड़ान पथ और AI-आधारित नेविगेशन प्रणालियों का उपयोग करके स्वायत्त रूप से संचालित किया जा सकता है।

UAVs के प्रकार

  • आकार के आधार पर
    • माइक्रो और नैनो UAVs: निकट दूरी की निगरानी के लिए उपयोग किए जाने वाले छोटे ड्रोन (जैसे- क्वाडकॉप्टर)।
    • सामरिक UAVs: सैन्य टोही और सीमा गश्ती के लिए मध्यम आकार के ड्रोन।
    • रणनीतिक/लड़ाकू UAVs: लंबी उड़ान क्षमता और युद्धक क्षमता वाले बड़े ड्रोन (जैसे, MQ-9 रीपर, बायराकटार TB-2)।
  • कार्य के आधार पर
    • निगरानी ड्रोन (UAVs): खुफिया जानकारी जुटाने और सीमा सुरक्षा के लिए उपयोग किए जाते हैं।
    • लड़ाकू UAVs (UCAVs): सैन्य हमलों के लिए मिसाइल और बम ले जाने वाले सशस्त्र ड्रोन।
    • लॉजिस्टिक्स UAVs: दूरदराज के क्षेत्रों में आपूर्ति, दवाएँ या हथियार पहुँचाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
    • वाणिज्यिक UAVs: फोटोग्राफी, कृषि और डिलीवरी सेवाओं के लिए उपयोग किए जाते हैं।
  • परिचालन सीमा के आधार पर
    • कम दूरी के UAVs: कुछ किलोमीटर के दायरे में उड़ान भर सकते हैं, स्थानीय टोही के लिए उपयोग किए जाते हैं।
    • मध्यम दूरी के UAVs: 100-300 किलोमीटर के दायरे में काम करते हैं, आमतौर पर सामरिक अभियानों के लिए उपयोग किए जाते हैं।
    • लंबे समय तक हवा में रहने वाले UAVs: 24 घंटे या उससे अधिक समय तक हवा में रह सकते हैं, रणनीतिक अभियानों के लिए उपयोग किए जाते हैं।

ड्रोन प्रौद्योगिकी के माध्यम से सार्वजनिक सेवा वितरण में परिवर्तन

  • कृषि एवं किसान सेवाएँ: नमो ड्रोन दीदी योजना (नवंबर 2023) के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि कृषि दक्षता और उत्पादकता को बढ़ाया जा सके, लागत कम की जा सके और स्थायी आजीविका सृजित की जा सके।
  • भूमि मानचित्रण: ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ ग्राम सर्वेक्षण और मानचित्रण (SVAMITVA) योजना के तहत ड्रोन का उपयोग ग्रामीण आबादी क्षेत्रों का मानचित्रण करने के लिए किया जाता है, जिससे भूमि विवादों को सुलझाने और बैंक ऋण तक पहुँच में सुधार करने में सहायता मिलती है।
  • राजमार्ग विकास के लिए हवाई मानचित्रण: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) सभी राजमार्ग परियोजनाओं के लिए मासिक ड्रोन वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करता है।
    • ठेकेदारों को महीने-दर-महीने तुलना के लिए वर्तमान माह और पिछले माह दोनों के फुटेज NHAI के डेटाबेस पर अपलोड करने होते हैं।
  • आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया में ड्रोन का उपयोग: प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भारत को बेहतर प्रतिक्रिया देने में ड्रोन मदद कर रहे हैं।
    • उदाहरण के लिए: ‘नॉर्थ ईस्ट सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन एंड रीच’ (NECTAR) ने आपदा स्थितियों के लिए एक विशेष ड्रोन प्रणाली विकसित की है।
  • रेलवे ड्रोन निगरानी: रेल मंत्रालय ने अपने सभी जोन और डिवीजनों को रेलवे ट्रैक, पुलों और अन्य बुनियादी ढाँचे की बेहतर निगरानी और रखरखाव के लिए UAV/ड्रोन तैनात करने का निर्देश दिया है।
    • उदाहरण के लिए: जोनल रेलवे और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों ने भी नियमित रखरखाव और बुनियादी ढाँचे के प्रबंधन में सहायता के लिए UAV सिस्टम स्थापित किए हैं।
  • रक्षा क्षेत्र में ड्रोन: ड्रोन भारत की सामरिक सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, सशस्त्र बलों को सीमाओं की निगरानी करने, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमले करने में सहायता करते हैं।
    • उदाहरण के लिए: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारतीय ड्रोन और ‘लोइटरिंग मुनिशन्स’ ने दुश्मन के ठिकानों को सुरक्षित और सटीक रूप से नष्ट कर दिया।

ड्रोन के लिए नीतिगत ढाँचा

  • ड्रोन नियम, 2021 और ड्रोन (संशोधन) नियम 2022 और 2023: ड्रोन नियम, 2021 और 2022 और 2023 में किए गए संशोधनों ने भारत के ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र को काफी उदार बना दिया है।
    • नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया, प्रपत्रों की संख्या 25 से घटाकर 5 कर दी गई और अनुमोदन आवश्यकताओं को 72 से घटाकर मात्र 4 कर दिया गया।
    • शुल्कों को युक्तिसंगत बनाया गया और ड्रोन के आकार से उनका संबंध समाप्त कर दिया गया।
    • 500 किलोग्राम तक के ड्रोनों के लिए नागरिक ड्रोन संचालन की अनुमति दी गई, जिससे वाणिज्यिक और औद्योगिक अनुप्रयोगों का विस्तार हुआ।
    • भारत के लगभग 90% हवाई क्षेत्र को ड्रोन संचालन के लिए ग्रीन जोन घोषित किया गया, जिससे 400 फीट तक की उड़ान की अनुमति मिल गई।
  • उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI): ड्रोन और ड्रोन घटकों के लिए PLI योजना के लिए ₹120 करोड़ का स्वीकृत परिव्यय है। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करके उच्च मूल्य वाले घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
  • ड्रोन पर GST: ड्रोन पर GST को सितंबर 2025 में घटाकर एक समान 5% कर दिया गया।
    • पहले की 18% और 28% कर दरों को हटा दिया गया। इस सरलीकृत कराधान से ड्रोन के व्यापक वाणिज्यिक और व्यक्तिगत उपयोग को बढ़ावा मिलता है।
  • प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र विकास और क्षमता निर्माण: भारत ड्रोन शक्ति, भारत ड्रोन महोत्सव और ड्रोन इंटरनेशनल एक्सपो जैसे मंच ड्रोन-एज-ए-सर्विस (DAAS) स्टार्ट-अप और नए व्यावसायिक मॉडलों को बढ़ावा देते हैं।

भारत के लिए चुनौतियाँ

  • सीमा सुरक्षा: पाकिस्तान सीमा पार हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी  के लिए अक्सर छोटे ड्रोन (UAV) का प्रयोग करता है। भारत को महँगी मिसाइलों का सहारा लिए बिना इन खतरों से निपटने के लिए किफायती तरीकों की आवश्यकता है।
  • पड़ोसी देशों में UAV की तैनाती: भारतीय सीमा के पास बांग्लादेश द्वारा तुर्की के बायराकटार TB-2 UAV की तैनाती, बड़े और अधिक उन्नत ड्रोन के लिए रणनीतिक प्रतिक्रिया की आवश्यकता को उजागर करती है।
  • तनाव प्रबंधन: भारत को तनाव बढ़ाए बिना UAV घुसपैठ से निपटने के लिए प्रोटोकॉल विकसित करने चाहिए, खासकर पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों के साथ।

आगे की राह

  • लागत प्रभावी जवाबी उपायों का विकास: भारत को जैमिंग सिस्टम या ड्रोन इंटरसेप्टर जैसी सस्ती ड्रोन-रोधी तकनीकों में निवेश करना चाहिए।
  • UAV क्षमताओं को बढ़ाना: भारत को निगरानी, ​​टोही और युद्धक भूमिकाओं के लिए अपने UAV बेड़े का विस्तार करने की आवश्यकता है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: उन्नत UAV तकनीकों और जवाबी उपायों को विकसित करने के लिए अन्य देशों के साथ साझेदारी भारत की स्थिति को मजबूत कर सकती है।

निष्कर्ष

  • प्रगतिशील नियमों, वित्तीय प्रोत्साहनों और समर्पित क्षमता-निर्माण पहलों के माध्यम से, भारत ने एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है जो ड्रोन के उपयोग और विनिर्माण को गति प्रदान करता है।
  • सरलीकृत ड्रोन नियम, PLI समर्थन, GST में कटौती, डिजिटल स्काई और कौशल कार्यक्रम ड्रोन के व्यापक उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं और एक आत्मनिर्भर, भविष्य के लिए तैयार क्षेत्र का निर्माण कर रहे हैं।
भारत का ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र

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