माउंट अकांकागुआ

|
नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM), उत्तरकाशी और जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान (JIM&WS), पहलगाम की संयुक्त अभियान टीम ने अर्जेंटीना में माउंट अकांकागुआ की चोटी सफलतापूर्वक फतह की।
माउंट अकांकागुआ के बारे में
- स्थिति: दक्षिण अमेरिका का सबसे ऊँचा शिखर और एशिया के बाहर विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत।
- महाद्वीपीय महत्त्व: पश्चिमी गोलार्द्ध और दक्षिणी गोलार्द्ध का सबसे ऊँचा बिंदु।
- ऊँचाई: लगभग 6,961 मीटर (22,838 फीट)।
- स्थान: एंडीज पर्वत शृंखला, अर्जेंटीना, अर्जेंटीना–चिली सीमा के पास।
- एंडीज पर्वत शृंखला: दुनिया की सबसे लंबी महाद्वीपीय पर्वत शृंखला, दक्षिण अमेरिका में स्थित।
- भू-वैज्ञानिक उत्पत्ति: ज्वालामुखीय मूल (एंडीज की प्लेट टेक्टॉनिक क्रिया के कारण निर्मित), परंतु सक्रिय ज्वालामुखी नहीं (सुप्त/निष्क्रिय)।
- सेवन समिट्स: सेवन समिट्स चुनौती का अर्थ है प्रत्येक महाद्वीप की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ाई करना।
- माउंट अकांकागुआ दक्षिण अमेरिका का प्रतिनिधित्व करता है।
- सभी सेवन समिट्स
- माउंट एवरेस्ट (एशिया): 8,848.86 मीटर; विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत, नेपाल–चीन सीमा, हिमालय।
- अकांकागुआ (दक्षिण अमेरिका): 6,961 मीटर; एंडीज और पश्चिमी गोलार्द्ध की सबसे ऊँची चोटी, अर्जेंटीना।
- डेनेली (उत्तरी अमेरिका): 6,190 मीटर; उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊँची चोटी, अलास्का, अमेरिका।
- किलिमंजारो (अफ्रीका): 5,895 मीटर; विश्व का सबसे ऊँचा स्वतंत्र खड़ा पर्वत, तंजानिया।
- माउंट एल्ब्रस (यूरोप): 5,642 मीटर; यूरोप की सबसे ऊँची चोटी, काकेशस पर्वत, रूस।
- माउंट विन्सन (अंटार्कटिका): 4,892 मीटर; अंटार्कटिका का सबसे ऊँचा पर्वत, एल्सवर्थ पर्वत, अंटार्कटिका।
- पुनकाक जाया (ओशिनिया): 4,884 मीटर; ओशिनिया की सबसे ऊँची चोटी, पपुआ, इंडोनेशिया (कार्स्टेंस पिरामिड के नाम से भी जाना जाता है)।
- भौगोलिक महत्त्व: नाज्का प्लेट–दक्षिण अमेरिकी प्लेट की अवमज्जन प्रक्रिया (सबडक्शन) के कारण यह क्षेत्र प्लेट टेक्टॉनिक रूप से सक्रिय है।
|
चिकोरी (Chicory)
|
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक नया महत्त्वपूर्ण नियम पेश किया है, जिसके तहत सभी ब्लेंडेड कॉफी पैकेटों पर चिकोरी की मात्रा पैकेट के सामने प्रमुख रूप से प्रदर्शित करनी होगी।
चिकोरी क्या है?
- परिभाषा: चिकोरी एक पौधा है, जिसका जड़ सुखाई, भुनी और पिसी जाती है, जिसे कॉफी में मिलाने के लिए उपयोग किया जाता है।
- विशेषताएँ: यह प्राकृतिक रूप से कैफीन-मुक्त होती है और पेय को गहरा रंग व पृथ्वी-समान, हल्का लकड़ी जैसा स्वाद प्रदान करती है।
- लागत: असली कॉफी की तुलना में काफी सस्ती होती है, जिससे ‘मास-मार्केट ब्रांड’ लागत कम करने के लिए आकर्षित होते हैं।
- इतिहास: युद्धकाल के दौरान कॉफी की कमी के कारण चिकोरी को सस्ती कॉफी विकल्प के रूप में पेश किया गया और बाद में व्यावसायिक रूप से सामान्यीकृत हो गया।
- भारत में उपयोग: भारत में ‘मास-मार्केट कॉफी’ ब्लेंड में चिकोरी का उपयोग मुख्यतः लागत कम करने और कॉफी के रंग को बनाए रखने के लिए किया जाता है।
- कानूनी सीमा: भारतीय नियमों के अनुसार किसी कॉफी ब्लेंड में अधिकतम 49% चिकोरी की अनुमति है।
भारत में कॉफी बाजार की वर्तमान स्थिति
- बाजार का आकार: भारत का कॉफी बाजार लगभग 2 अरब डॉलर का है।
- ब्लेंड की लोकप्रियता: भारत में खपत होने वाली ‘मास-मार्केट कॉफी’ का लगभग 75% कॉफी-चिकोरी ब्लेंड है। ये ब्लेंड आमतौर पर 30% से 35% चिकोरी शामिल करते हैं।
|
सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा ने एडविन ल्यूटियंस की प्रतिमा को प्रतिस्थापित किया

|
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) का बस्ट अनावरण किया, जिसने एडविन लुटियंस की प्रतिमा का स्थान लिया, यह भारत के उपनिवेशवाद विरोधी प्रयास का हिस्सा है।
- इस स्थापना का प्रतीक है कि भारत, उपनिवेश काल के प्रतीकों को उन राष्ट्रीय नेताओं से परिवर्तन का प्रयास कर रहा है, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता के बाद की शासन व्यवस्था को आकार दिया।
सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) के बारे में
- पूरा नाम: चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (1878–1972)
- भूमिका: स्वतंत्र भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल (1948–1950) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता।
- प्रारंभिक राजनीतिक कॅरियर
- वर्ष 1906 (कोलकाता) और 1907 (सूरत) कांग्रेस सत्र में भाग लिया।
- वर्ष 1916 में होम रूल लीग में शामिल हुए।
- वर्ष 1919 के बाद महात्मा गांधी से संपर्क।
- वर्ष 1917 में सलेम नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष रहे।
- मुख्य योगदान
- असहयोग आंदोलन में भाग लिया और वेदरनय्यम नमक सत्याग्रह (1930) का नेतृत्व किया।
- “C.R. फॉर्मूला” (1944) प्रस्तावित किया, जो कांग्रेस–मुस्लिम लीग विवाद (पाकिस्तान) को सुलझाने का प्रारंभिक प्रयास था।
- मद्रास प्रेसिडेंसी के प्रधानमंत्री रहे (1937–1939)।
- इंडिपेंडेंस पार्टी की स्थापना की (1959), जो बाजार-केंद्रित सुधारों की वकालत करती थी।
- विरासत: राजाजी को प्रशासनिक ईमानदारी, सामाजिक सुधार, साहित्यिक कार्य, और सिद्धांतपूर्ण, विकेंद्रीकृत शासन के लिए याद किया जाता है।
- उन्हें वर्ष 1954 में ‘भारत रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया, वे यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वाले पहले व्यक्ति बने।
एडविन लुटियंस के बारे में
- पूरा नाम: सर एडविन लुटियंस (1869–1944)।
- भूमिका: ब्रिटिश वास्तुकार, जिन्होंने नई दिल्ली के प्रमुख भवनों का डिजाइन किया।
- भारत में भूमिका: वर्ष 1911 के दिल्ली दरबार के बाद उन्हें ब्रिटिश भारत की नई राजधानी दिल्ली के डिजाइन का काम दिया गया।
- मुख्य योगदान
- वायसराय हाउस (वर्ष 1929 में पूरा, वर्तमान राष्ट्रपति भवन) का डिजाइन किया।
- सेंट्रल विस्टा और नई दिल्ली के प्रमुख सरकारी भवनों की योजना में योगदान दिया।
|
सूक्ष्म अल्पसंख्यक का टैग
|
सिरो-मालाबार चर्च ने केंद्र से ‘सूक्ष्म अल्पसंख्यक’ (माइक्रो माइनॉरिटी) का दर्जा प्राप्त करने का अनुरोध किया है, जिससे अल्पसंख्यक वर्गीकरण और संवैधानिक सुरक्षा पर प्रश्न उठे हैं।
सूक्ष्म अल्पसंख्यक का टैग
- ‘सूक्ष्म अल्पसंख्यक’ शब्द उन अपेक्षाकृत छोटे समुदायों के लिए प्रयुक्त होता है, जो आधिकारिक रूप से घोषित धार्मिक अल्पसंख्यकों के वर्ग में आते हैं और विशेष कल्याण सहायता चाहते हैं।
- संवैधानिक और कानूनी ढाँचा
- अनुच्छेद-29 और 30 अल्पसंख्यकों को संस्कृति संरक्षण और शैक्षिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार देते हैं।
- संविधान में ‘सूक्ष्म अल्पसंख्यक’ को अलग कानूनी श्रेणी के रूप में स्पष्ट रूप से मान्यता नहीं दी गई है।
- अल्पसंख्यक स्थिति नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटीज एक्ट, 1992 के तहत अधिसूचित की जाती है।
- किसी भी उप-वर्गीकरण को अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार) के अनुरूप होना चाहिए।
- माँग का तर्क: छोटे संप्रदायों को अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं, छात्रवृत्तियों और संस्थागत सुरक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए यह दर्जा आवश्यक हो सकता है।
सिरो-मालाबार चर्च
- भारत के तीन पूर्वी कैथोलिक चर्चों में से एक, रोम के पोप के साथ संपर्क में।
- उत्पत्ति
- चर्च की उत्पत्ति संत थॉमस अपोस्टल से मानी जाती है।
- भारतीय ईसाइयों ने 189 ईसवी में अलेक्जेंड्रिया के मिशनरी पैंटेन्स के आगमन के बाद फारसी साम्राज्य की ईस्ट चर्च के साथ संबंध बनाए रखा।
- 7वीं सदी में मेट्रोपोलिटन दर्जा प्राप्त किया।
- वर्तमान स्थिति
- मुख्य रूप से केरल में केंद्रित, भारत और विदेशों में डायोसीज।
- मुख्यालय: माउंट सेंट थॉमस, कक्कनाड, कोच्चि।
- महत्त्व
- शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक कल्याण में प्रमुख योगदान।
- केरल में अंतर धार्मिक संवाद और सामुदायिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
|
अभ्यास ‘वज्र प्रहार’- 2026

|
हाल ही में भारत–अमेरिका के संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ का 16वाँ संस्करण हिमाचल प्रदेश के स्पेशल फोर्सेज ट्रेनिंग स्कूल, बकलोह में शुरू हुआ।
अभ्यास वज्र प्रहार के बारे में
- यह भारत और अमेरिका के बीच एक संयुक्त विशेष बल अभ्यास है।
- उद्देश्य: संयुक्त टैक्टिकल ड्रिल के माध्यम से सैन्य सहयोग को मजबूत करना और इंटरऑपरेबिलिटी में सुधार करना।
- इतिहास
- शुरुआत: वर्ष 2010 में भारत–अमेरिका रक्षा सहयोग के हिस्से के रूप में आरंभ।
- आवृत्ति: प्रतिवर्ष आयोजित, भारत और अमेरिका में बारी-बारी से।
- 16वाँ संस्करण
- स्थान: स्पेशल फोर्सेज ट्रेनिंग स्कूल, बकलोह, हिमाचल प्रदेश।
- प्रतिभागी
- भारतीय सेना: विशेष बल यूनिटों के 45 कर्मी।
- अमेरिकी सेना: ग्रीन बरेट्स (अमेरिकी विशेष बल) के 12 कर्मी।
- अन्य भारत–अमेरिका अभ्यास
- द्विपक्षीय अभ्यास: युद्ध अभ्यास (आर्मी), वज्र प्रहार (विशेष बल), कोप इंडिया (वायु सेना)।
- बहुपक्षीय अभ्यास: मालाबार (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाएँ)।
|
महाराष्ट्र: वसई कैथेड्रल को यूनेस्को पुरस्कार प्राप्त

|
हाल ही में महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई में स्थित 475 वर्षीय ‘आवर लेडी ऑफ ग्रेस कैथेड्रल’ को वर्ष 2025 के यूनेस्को एशिया–प्रशांत सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण पुरस्कार में अवार्ड ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया।
वसई कैथेड्रल (आवर लेडी ऑफ ग्रेस कैथेड्रल) के बारे में
- काल: लगभग 475 वर्ष पूर्व पुर्तगाली प्रभाव के चरमकाल में कोकण क्षेत्र में निर्मित।
- ऐतिहासिक संदर्भ: वसई (पूर्व में बाकाइम) भारत के पश्चिमी तट पर एक प्रमुख पुर्तगाली किला था।
- निर्माण: पारंपरिक पत्थर और मिट्टी के मोर्टार का उपयोग किया गया, आधुनिक सीमेंट का कोई प्रयोग नहीं, 16वीं सदी के इंजीनियरिंग कौशल का प्रमाण।
- संरक्षण: हाल ही में ₹4.5 करोड़ की बहाली की गई, जिसे स्थानीय समुदाय ने वित्तपोषित किया, जो सहभागिता आधारित धरोहर संरक्षण का सफल मॉडल है।
- आर्किटेक्चरल विशेषताएँ
- शैली: पुर्तगाली गिरजाघर वास्तुकला, भारी पत्थर की दीवार और किले जैसी बाहरी संरचना।
- मुख्य तत्व: एक प्रमुख ‘क्लॉक टॉवर’ और पुनर्निर्मित कॉलोनेड।
- हाथ से नक्काशी किए गए धार्मिक आनुष्ठानिक तत्त्व और लकड़ी की वेदी।
- प्रामाणिक सामग्री (चूना, लकड़ी और पत्थर) का उपयोग ताकि मूल संरचना की अखंडता बनी रहे।
यूनेस्को एशिया–प्रशांत पुरस्कार के बारे में
- स्थापना: वर्ष 2000 (2025 में सिल्वर जुबली)।
- उद्देश्य: निजी क्षेत्र या सार्वजनिक–निजी साझेदारी द्वारा शुरू किए गए सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना।
- मुख्य विशेषताएँ
- पात्रता: निजी व्यक्ति, संगठन और सार्वजनिक–निजी साझेदारियाँ।
- समय सीमा: परियोजनाएँ पिछले 10 वर्षों में पूरी होनी चाहिए।
- श्रेणियाँ
- अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस (सर्वोच्च)
- अवार्ड ऑफ डिस्टिंक्शन
- अवार्ड ऑफ मेरिट
- न्यू डिजाइन इन हेरिटेज कॉन्टेक्स्ट
- विशेष मान्यता सतत् विकास के लिए (वर्ष 2020 से)।
|
संसदीय मित्रता समूह (PFGs)
|
हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने 64 संसदीय मित्रता समूह (Parliamentary Friendship Groups – PFGs) का गठन किया, जिनमें 60 से अधिक देशों को शामिल किया गया, ताकि भारत की संसदीय कूटनीति और वैश्विक विधायी सहभागिता को मजबूत किया जा सके।
संसदीय मित्रता समूह (PFGs) के बारे में
- परिभाषा: यह संरचित मंच हैं, जिनमें दोनों पक्ष (सत्तारूढ़ और विपक्ष) के सांसद शामिल होते हैं, ताकि वे अपने विदेशी समकक्षों के साथ संवाद और सहयोग कर सकें।
- प्रवर्तक: हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला द्वारा प्रस्तावित और औपचारिक रूप से स्थापित।
- स्वरूप: यह अस्थायी प्रतिनिधिमंडलों से हटकर संस्थागत, सतत् सहभागिता की ओर कदम है।
- संरचना: कुल 704 सांसदों (लोकसभा और राज्यसभा) को 64 समूहों में विभाजित किया गया।
- विस्तार: प्रत्येक 64 पैनल में 11 सांसद होंगे, जिसमें कम-से-कम एक महिला शामिल होगी।
- उदाहरण
- भारत–इजरायल: रवि शंकर प्रसाद
- भारत–फ्राँस: शशि थरूर
- भारत–ऑस्ट्रेलिया: अखिलेश यादव
- भारत–यूएस: बैजयंत पांडा।
- उद्देश्य
- संसदीय कूटनीति को संस्थागत रूप देना।
- विदेशी विधायकों के साथ सतत् संवाद स्थापित करना।
- व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, संस्कृति और वैश्विक शासन में सहयोग को बढ़ावा देना।
- विदेशी सहभागिता में भारत के लोकतांत्रिक बहुलवाद और द्विपक्षीय सहमति को प्रतिबिंबित करना।
|