संक्षेप में समाचार

21 Mar 2026

डिएगो गार्सिया द्वीप

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ईरान ने डिएगो गार्सिया स्थित संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, यह युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान द्वारा किया गया सबसे लंबी दूरी का मिसाइल हमला है।

संबंधित तथ्य

  • यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थित दो महत्त्वपूर्ण अमेरिकी बमवर्षक अड्डों में से एक है, दूसरा गुआम में एंडरसन वायु सेना अड्डा है।

डिएगो गार्सिया द्वीप के बारे में

  • स्थान: डिएगो गार्सिया लाल सागर के मुहाने पर स्थित बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर के निकट मलक्का जलडमरूमध्य से लगभग 3,000 किमी. दूर है।
    • यह रणनीतिक स्थिति लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों को इन दो महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों तक पहुँचने में सक्षम बनाती है।
  • यह चागोस द्वीपसमूह का हिस्सा है, जो ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र (BIOT) का भाग है।
    • भारत से लगभग 1,600 किमी. दक्षिण और अफ्रीका से 3,500 किमी. पूर्व में स्थित यह द्वीप, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के बीच रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।
  • भूगोल: डिएगो गार्सिया एक एटॉल है, जिसकी विशेषता एक केंद्रीय लैगून को घेरने वाली प्रवाल भित्ति है। द्वीप का आकार घोड़े की नाल जैसा है, जिसका उत्तरी भाग समुद्र की ओर खुलता है।
  • सामरिक महत्त्व: डिएगो गार्सिया में एक नौसैनिक और सैन्य अड्डा है, जिसे यूनाइटेड किंगडम ने वर्ष 1971 से संयुक्त राज्य अमेरिका को पट्टे पर दिया हुआ है।
    • यह हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य अभियानों और निगरानी के लिए एक महत्त्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करता है।
  • पारिस्थितिकी महत्त्व: यह एटोल विविध समुद्री जीवों का घर है, जिसमें लुप्तप्राय प्रवाल प्रजातियाँ और उष्णकटिबंधीय मछलियाँ शामिल हैं।
  • यह एक रामसर स्थल है:-
    • एटोल का वह हिस्सा जो रामसर साइट में शामिल नहीं है, वह क्षेत्र है, जिसे वर्ष 1976 के यू.के./यू.एस.ए समझौते के तहत अमेरिकी नौसेना सहायता सुविधा के रूप में सैन्य उपयोग के लिए आरक्षित किया गया है।
    • इसकी एकांत स्थिति इस क्षेत्र की अनूठी जैव विविधता को संरक्षित करने में सहायक है।
  • चागोसियन विस्थापन: यह द्वीप कभी चागोसियन लोगों का निवास स्थान था, जो अफ्रीकी दासों और भारतीय मजदूरों के वंशज थे। इन्हें 1960 और 1970 के दशक में ब्रिटेन द्वारा जबरन विस्थापित कर दिया गया था।

घर पर मतदान की सुविधा

भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावी समावेशिता को बढ़ाने के लिए 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं और दिव्यांगजनों के लिए डाक मतपत्र और घर पर मतदान की सुविधा का विस्तार किया है।

  • केंद्रीय चुनाव आयोग ने स्वास्थ्य, अग्निशमन, बिजली, परिवहन और विमानन जैसी आवश्यक सेवाओं में लगे मतदाताओं को भी नामित नोडल अधिकारियों के माध्यम से डाक मतपत्र सुविधा का लाभ उठाने की अनुमति दी है।
    • मतदान दिवस कवरेज के लिए अधिकृत मीडिया कर्मियों को भी इस श्रेणी में शामिल किया गया है।

‘घर पर मतदान सुविधा’ के बारे में

  • घर से मतदान करना एक वैकल्पिक सुविधा है, जो वरिष्ठ नागरिकों (85+) और दिव्यांग व्यक्तियों (≥40% मानक दिव्यांगता) को अपने निवास से वोट डालने में सक्षम बनाती है, जिससे सुलभता और गोपनीयता सुनिश्चित होती है।
  • उत्पत्ति
    • लोकसभा चुनाव 2024: समावेशी चुनावों के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुनाव आयोग द्वारा देशव्यापी स्तर पर घर से मतदान की शुरुआत।
    • राज्य चुनाव: सहभागी लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के लिए विधानसभा चुनावों में इसे विस्तारित और संस्थागत रूप दिया गया।
  • प्रक्रिया
    • आवेदन प्रक्रिया: पात्र मतदाताओं को चुनाव अधिसूचना जारी होने के 5 दिनों के भीतर बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) के माध्यम से फॉर्म 12D जमा करना होगा।
      • दिव्यांग व्यक्तियों को वैध विकलांगता प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा।
    • सत्यापन एवं पारदर्शिता: रिटर्निंग अधिकारी (RO) सूची तैयार करते हैं और उम्मीदवारों के साथ साझा करते हैं।
      • उम्मीदवार प्रक्रिया का अवलोकन करने के लिए प्रतिनिधियों को नामित कर सकते हैं।
    • घर पर मतदान: मतदान दल (अधिकारी + सुरक्षाकर्मी) निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार घरों का दौरा करते हैं।
      • सूचना/SMS के माध्यम से अग्रिम सूचना से तैयारी सुनिश्चित होती है।
    • गोपनीयता एवं निष्पक्षता: मतदान कठोर गोपनीयता प्रोटोकॉल के तहत किया जाता है।
      • पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती है।

महत्त्व

  • समावेशी चुनावी भागीदारी: भौतिक और आवागमन संबंधी बाधाओं को दूर करके, ‘कोई भी मतदाता पीछे न छूटे’ के सिद्धांत को सुनिश्चित करता है।
  • लोकतंत्र को सशक्त बनाना: कमजोर समूहों में मतदान को बढ़ाता है, जिससे चुनावी परिणामों की प्रतिनिधित्व क्षमता में सुधार होता है।
  • प्रशासनिक नवाचार: नागरिक-केंद्रित शासन के लिए प्रौद्योगिकी, रसद और संस्थागत तंत्रों का उपयोग करते हुए अनुकूल चुनावी सुधारों को दर्शाता है।

राष्ट्रीय दंत आयोग (NDC)

सरकार ने दंत चिकित्सा शिक्षा में परिवर्तन लाने और स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय दंत आयोग (National Dental Commission-NDC) का गठन किया है।

राष्ट्रीय दंत आयोग (NDC) के बारे में 

  • भारत में किफायती मौखिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच और दंत सेवाओं की समग्र गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय दंत आयोग भारत में दंत शिक्षा और पेशे के लिए नया सर्वोच्च नियामक निकाय है।
  • इसने पूर्ववर्ती भारतीय दंत परिषद (DCI) का स्थान लिया है।
  • कानूनी ढाँचा: NDC राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 के तहत स्थापित एक वैधानिक स्वायत्त निकाय है, जिसने दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 का स्थान लिया है।
  • उद्देश्य: वैश्विक मानकों के अनुरूप एक पारदर्शी, जवाबदेह और गुणवत्ता-संचालित नियामक प्रणाली सुनिश्चित करना।
  • नोडल मंत्रालय: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (भारत सरकार)।
  • संरचना: इसमें एक अध्यक्ष, 8 पदेन सदस्य और 24 अंशकालिक सदस्य शामिल हैं, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
  • तीन स्वायत्त बोर्ड
    • स्नातक एवं स्नातकोत्तर दंत शिक्षा बोर्ड: दंत शिक्षा का विनियमन करता है।
    • दंत मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड: मान्यता और मूल्यांकन का कार्य संभालता है।
    • नैतिकता एवं दंत पंजीकरण बोर्ड: नैतिकता एवं पंजीकरण की देख-रेख करता है।
  • राष्ट्रीय दंत आयोग के प्रमुख कार्य
    • शिक्षा, अनुसंधान और नैतिकता के लिए नियम और मानक तैयार करना।
    • संस्थानों का मूल्यांकन और रेटिंग करना।
    • दंत चिकित्सा में मानव संसाधन विकास को बढ़ावा देना।
    • एनडीसी निजी दंत चिकित्सालयों में शुल्क के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित करेगा, जिससे वहनीयता और पारदर्शिता में सुधार होगा।
    • सामुदायिक दंत चिकित्सा देखभाल, शिक्षा, अनुसंधान और पेशेवर नैतिकता के लिए मानक स्थापित करना।
  • राज्य स्तरीय तंत्र: राज्यों को एक वर्ष के भीतर राज्य दंत परिषदें स्थापित करनी होंगी, जो शिकायतों का निवारण करें और दंत चिकित्सकों का रजिस्टर बनाए रखें।

प्रारंभ 2026 (PRARAMBH 2026)

केंद्रीय वित्त मंत्री ने नई दिल्ली में प्रारंभ 2026 अभियान का शुभारंभ किया।

प्रारंभ 2026 (PRARAMBH 2026) के बारे में

  • प्रारंभ (PRARAMBH) आयकर विभाग द्वारा आयकर अधिनियम, 2025 पर चलाया गया एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान है।
  • पूर्ण रूप: प्रारंभ (PRARAMBH) का अर्थ है:- नीतिगत सुधार और मिशन विकसित भारत के लिए जिम्मेदार कार्रवाई (Policy Reform and Responsible Action for Mission Viksit Bharat)।
  • उद्देश्य: एक सरल, स्थिर और करदाता-हितैषी व्यवस्था को बढ़ावा देना, विवादों को कम करना और स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करना।
  • मल्टी-प्लेटफॉर्म प्रचार: प्रिंट, टीवी, रेडियो, डिजिटल, सोशल मीडिया और MyGov पहलों को शामिल करते हुए व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना।
  • बहुभाषी संचार: अंग्रेजी और हिंदी के अलावा 10 क्षेत्रीय भाषाओं में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और वीडियो के माध्यम से जानकारी प्रसारित की जाती है।
  • डिजिटल रूपांतरण: बेहतर उपयोगिता और कुशल सेवा वितरण के साथ आयकर वेबसाइट 2.0 का शुभारंभ।
  • कर साथी (Kar Saathi): करदाताओं को अधिनियम, नियमों और प्रपत्रों पर सहायता प्रदान करने के लिए AI चैटबॉट ‘कर साथी’ (Kar Saathi) की शुरुआत की गई।
  • नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण: ‘नागरिक देवो भव’ के सिद्धांत पर आधारित, सहानुभूतिपूर्ण, विश्वास-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित कर प्रशासन पर केंद्रित।

आयकर अधिनियम, 2025

  • आयकर अधिनियम, 2025, 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा और पूर्ववर्ती आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों का स्थान लेकर उन्हें आधुनिक बनाएगा।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य एक सरल, स्पष्ट और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल कर प्रणाली का निर्माण करना है, जिससे जटिलता और कानूनी अस्पष्टता कम हो।
  • मुकदमेबाजी में कमी और बेहतर अनुपालन: विवादों को कम करने, स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने और करदाताओं के व्यवहार को विश्वास-आधारित भागीदारी की ओर मोड़ने के लिए प्रावधानों को संशोधित किया गया है।

कृषि सखी पहल

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र द्वारा खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के माध्यम से वर्ष 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ के रूप में मान्यता दिए जाने के अनुरूप कृषि सखी पहल शुरू की गई थी।

कृषि सखी पहल के बारे में

  • कृषि सखी पहल, भारतीय कृषि बीमा कंपनी लिमिटेड द्वारा शुरू किया गया एक महिला-केंद्रित जनसंपर्क कार्यक्रम है।
  • उद्देश्य: महिला किसानों को सशक्त बनाना और समावेशी विकास की दिशा में कार्य करना।
  • नोडल मंत्रालय: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (भारत सरकार)।
  • पहल की विशेषताएँ
    • जागरूकता एवं संपर्क गतिविधियाँ: कृषि में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाओं, सोशल मीडिया प्रचार और पदयात्राओं सहित मासिक अभियान।
    • क्षमता निर्माण एवं सहायता: फसल बीमा योजनाओं और जोखिम निवारण रणनीतियों के बारे में महिला किसानों को शिक्षित करने के लिए जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण सत्र।
    • पात्रता एवं लक्षित समूह: मुख्य रूप से महिला किसानों, ग्रामीण परिवारों और कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में कार्यरत महिला हितधारकों को लक्षित किया गया है।
    • लाभ एवं सहायता: फसल बीमा तक पहुँच बढ़ाता है, वित्तीय सुरक्षा में सुधार करता है और कृषि जोखिमों के प्रति लचीलापन बढ़ाता है।
    • सामुदायिक सहभागिता उपाय: इसमें स्वच्छता और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और महिलाओं के योगदान को मान्यता देने के लिए लेख/साक्षात्कार प्रकाशित करना शामिल है।

महत्त्व

  • कृषि में लैंगिक समावेशिता: कृषि संबंधी निर्णय लेने और आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की समान भागीदारी को बढ़ावा देता है।
  • वित्तीय सुरक्षा और जोखिम न्यूनीकरण: फसल बीमा को अपनाने को प्रोत्साहित करता है, जिससे जलवायु और बाजार जोखिमों के प्रति संवेदनशीलता कम होती है।
  • ग्रामीण विकास और सशक्तीकरण: महिला किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है, जिससे समावेशी ग्रामीण विकास में योगदान मिलता है।
  • वैश्विक लक्ष्यों के साथ सामंजस्य: महिला किसानों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्रित करने का समर्थन करता है, जिससे लैंगिक समानता और सतत् कृषि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को बल मिलता है।

स्टॉकहोम वाटर प्राइज 2026

कावेह मदानी ने जल विज्ञान को नीति, कूटनीति और वैश्विक पहुँच से जोड़ने के लिए स्टॉकहोम वाटर प्राइज, 2026 जीता।

कावेह मदानी के बारे में

  • कावेह मदानी संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय के जल पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक हैं और जल विज्ञान को नीति, कूटनीति और जनसंपर्क से जोड़ने के लिए सम्मानित होने वाले सबसे कम आयु के प्राप्तकर्ता तथा पहले संयुक्त राष्ट्र अधिकारी हैं।
  • प्रमुख योगदान: उन्होंने ‘वाटर बैंकरप्सी’ (Water Bankruptcy) की अवधारणा प्रस्तुत की और राजनीतिक बाधाओं के बावजूद विज्ञान को नीति, कूटनीति तथा जनसंपर्क से एकीकृत करने को बढ़ावा दिया।
    • ‘वाटर बैंकरप्सी’ (Water Bankruptcy) एक गंभीर स्थिति है, जहाँ कोई क्षेत्र या देश अपने जल संसाधनों का उपयोग सतत् पुनर्भरण दर से अधिक कर चुका होता है, विशेष रूप से अपने “भूजल भंडार” या जीवाश्म जलभंडारों को समाप्त करके।

स्टॉकहोम वाटर प्राइज, 2026

  • स्टॉकहोम वाटर प्राइज जल संरक्षण और प्रबंधन में उत्कृष्टता को मान्यता देने वाला एक प्रतिष्ठित वैश्विक पुरस्कार है।
  • आयोजक: स्टॉकहोम वाटर फाउंडेशन, स्वीडन।
    • इसे रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंटरनेशनल वाटर एसोसिएशन, वाटर एनवायरनमेंट फेडरेशन और स्टॉकहोम शहर का भी समर्थन प्राप्त है।
  • उत्पत्ति: स्वीडन की सतत् जल प्रबंधन उपलब्धियों से प्रेरित होकर, इसकी स्थापना वर्ष 1991 में हुई थी।
    • यह पुरस्कार सबसे पहले डेविड डब्ल्यू. शेंडलर को दिया गया था।
  • मानदंड: यह पुरस्कार वैज्ञानिक नवाचार, नीतिगत प्रभाव और सतत जल संसाधन प्रबंधन के लिए व्यक्तियों/संगठनों को सम्मानित करता है।
  • भारतीय पुरस्कार विजेता
    • राजेंद्र सिंह (2015): उन्होंने राजस्थान में पारंपरिक जोहड़ों को पुनर्स्थापित किया और हजारों गाँवों में जल सुरक्षा बहाल की, जिसके कारण उन्हें “भारत का जलपुरुष” के रूप में पहचान मिली।
    • बिंदेश्वर पाठक (2009): उन्होंने सुलभ आंदोलन के माध्यम से स्वच्छता और जन स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया तथा जल से संबंधित स्वच्छता में सुधार किया।

महत्त्व

  • वैश्विक मान्यता: विश्व स्तर पर जल संकट और सतत् विकास संबंधी चुनौतियों से निपटने में नवाचार तथा नेतृत्व को प्रोत्साहित करता है।
  • नीतिगत प्रभाव: विज्ञान और शासन के मध्य समन्वय स्थापित करता है तथा साक्ष्य-आधारित जल प्रबंधन रणनीतियों को बढ़ावा देता है।
  • जागरूकता एवं सतत् विकास: जल सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन और पर्यावरण संरक्षण के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाता है।

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