आईओएस सागर 2026
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मार्च 2026 में, आईओएस सागर (IOS SAGAR 2026) के दूसरे संस्करण ने हिंद महासागर क्षेत्र में सागर दृष्टि के तहत सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की।
सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के बारे में
- सागर भारत की रणनीतिक समुद्री दृष्टि है, जो समावेशन और पारस्परिक विश्वास के आधार पर हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, सहयोग, और सतत् विकास को बढ़ावा देती है।
- प्रारंभ: 12 मार्च, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मॉरीशस की यात्रा के दौरान प्रारंभ किया गया।
- मुख्य उद्देश्य
- समुद्री सुरक्षा: समुद्री डकैती, आतंकवाद और अवैध गतिविधियों का मुकाबला करते हुए सुरक्षित समुद्र सुनिश्चित करता है। साथ ही तटीय और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है।
- क्षमता निर्माण: प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और रडार नेटवर्क जैसे निगरानी अवसंरचना के माध्यम से तटीय राज्यों का समर्थन करता है।
- क्षेत्रीय विकास और ब्लू इकोनॉमी: सतत् मत्स्यपालन, आर्थिक सहयोग, और महासागरीय संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देता है।
- एचएडीआर (आपदा प्रतिक्रिया): क्षेत्र में मानवीय सहायता और आपदा राहत के लिए भारत को प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता के रूप में स्थापित करता है।
- नियम-आधारित व्यवस्था: समुद्री शासन के लिए संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय के पालन की वकालत करता है।
इंडियन ओशन शिप (IOS) सागर के बारे में
- IOS सागर पहल भारतीय नौसेना द्वारा संचालित एक विशिष्ट परिचालन सहभागिता कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच समुद्री सहयोग, पारस्परिक संचालन क्षमता और विश्वास को बढ़ावा देना है।
- उत्पत्ति: आईओएस सागर का पहला संस्करण अप्रैल 2025 में कर्नाटक के करवार में आईएनएस सुनयना पर प्रारंभ किया गया, जिसमें 9 IOR देशों ने भाग लिया।
- आईओएस सागर 2026: यह भारतीय नौसैनिक जहाजों पर हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) के 16 सदस्य देशों के नौसैनिक कर्मियों के संयुक्त प्रशिक्षण और नौकायन को सुगम बनाता है।
- यह कोच्चि (दक्षिणी नौसेना कमान) में तटीय प्रशिक्षण के साथ शुरू हुआ, इसके बाद एक भारतीय नौसैनिक जहाज (आईएनएस सुनयना) पर संयुक्त समुद्री तैनाती की गई।
महत्त्व
- रणनीतिक भूमिका: भारत की “नेट सुरक्षा प्रदाता” के रूप में स्थिति को मजबूत करता है और हिंद महासागर क्षेत्र में बाहरी प्रभाव का मुकाबला करता है।
- आर्थिक सुरक्षा: भारत के व्यापार और ऊर्जा प्रवाह के लिए महत्त्वपूर्ण समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा करता है।
- सतत् और सहयोगात्मक व्यवस्था: पर्यावरण संरक्षण, जलवायु अनुकूलता, और समावेशी समुद्री शासन को बढ़ावा देता है।
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भारत इनोवेट्स 2026 प्री-समिट
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे में आयोजित भारत इनोवेट्स 2026 प्री-समिट में वैश्विक चयन और निवेशक सहभागिता के लिए 137 डीप-टेक स्टार्ट-अप्स का प्रदर्शन किया गया।
भारत इनोवेट्स प्री-समिट के बारे में
- प्री-समिट एक प्रारंभिक मंच है, जो संभावित डीप-टेक स्टार्ट-अप्स, निवेशकों और अकादमिक जगत को एक साथ लाता है, ताकि नवाचार-आधारित उद्यमों का मूल्यांकन और प्रोत्साहन किया जा सके।
- उद्देश्य: उच्च क्षमता वाले स्टार्ट-अप्स की पहचान करना और उन्हें वैश्विक एक्सपोजर, वित्तपोषण, और रणनीतिक साझेदारियों के अवसर प्रदान करना।
- मुख्य विशेषताएँ
- 137 डीप-टेक स्टार्ट-अप्स की पिचिंग सत्रों में भागीदारी।
- डीप टेक (डीप टेक्नोलॉजी) उन कंपनियों और स्टार्ट-अप्स को संदर्भित करता है, जो जटिल वैश्विक समस्याओं के लिए नवाचारी, विज्ञान-आधारित समाधान विकसित करते हैं, जिनमें अक्सर लंबी अनुसंधान एवं विकास (R&D) अवधि, पर्याप्त पूँजी की आवश्यकता होती है, और मजबूत बौद्धिक संपदा का निर्माण होता है।
- वेंचर कैपिटलिस्ट्स, उद्योग के नेताओं, और नीति निर्माताओं के साथ सहभागिता।
- फ्राँस में वैश्विक प्रदर्शन के लिए स्टार्ट-अप्स का चयन।
- महत्त्व: यह चयनित टीमों के इंटरनेशनल इनोवेशन शोकेस 2026, नीस, फ्राँस में भारत का प्रतिनिधित्व करने से पहले अंतिम घरेलू तैयारी चरण के रूप में कार्य करता है।
भारत इनोवेट्स समिट के बारे में
- भारत इनोवेट्स एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना और देश को एक वैश्विक डीप-टेक हब के रूप में स्थापित करना है।
- यह जून में फ्राँस में आयोजित होने वाला एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन है, जो इंडिया-फ्राँस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 के हिस्से के रूप में होगा।
- उद्देश्य: स्वदेशी नवाचारों को वैश्विक मंच पर ले जाना, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के लिए स्केलेबल और किफायती समाधानों को लक्षित करना।
- आयोजन: शिक्षा मंत्रालय के नेतृत्व में, प्रमुख संस्थानों और नवाचार हितधारकों के सहयोग से आयोजित।
- फोकस क्षेत्र
- डीप-टेक क्षेत्र: एआई, सेमीकंडक्टर्स, बायोटेक, अंतरिक्ष, रक्षा
- जलवायु और सततता प्रौद्योगिकियाँ
- स्वास्थ्य सेवा, गतिशीलता, और इंडस्ट्री 4.0।
- महत्त्व
- नवाचार-आधारित विकास के माध्यम से विकसित भारत विजन का समर्थन करता है।
- स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार को प्रोत्साहित करता है।
- भारत की वैश्विक नवाचार नेतृत्वकर्ता के रूप में भूमिका को सुदृढ़ करता है।
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डिमोना परमाणु सुविधा

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इजरायल–ईरान तनाव के बढ़ने के बीच ईरान द्वारा डिमोना पर मिसाइल हमले ने इजरायल की रणनीतिक परमाणु सुविधा पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है।
डिमोना के बारे में
- स्थान: डिमोना दक्षिणी इजरायल के नेगेव मरुस्थल में स्थित है।
- रणनीतिक महत्त्व: यह नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र (डिमोना रिएक्टर) के लिए जाना जाता है, जो इजरायल के परमाणु कार्यक्रम का केंद्रीय भाग है।
- इस सुविधा का निर्माण वर्ष 1958 में फ्राँस की सहायता से किया गया था।
- परमाणु अस्पष्टता: इजरायल “परमाणु अस्पष्टता” की नीति का पालन करता है, जिसमें वह परमाणु हथियारों के स्वामित्व की न तो पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है।
- मरुस्थलीय विकास: यह नेगेव मरुस्थल क्षेत्र में बसावट और विकास के लिए इजरायल के प्रयासों का भी प्रतिनिधित्व करता है।
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NIOS के माध्यम से ओपन स्कूलिंग को बढ़ावा
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सरकार, विद्यालयी शिक्षा और साक्षरता विभाग के माध्यम से, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के जरिए ओपन स्कूलिंग शिक्षा को सुदृढ़ कर रही है।
संबंधित तथ्य
- उद्देश्य: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और विकसित भारत 2047 विजन के अनुरूप वर्ष 2030 तक 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करना।
चुनौतियों का पैमाना
- स्कूल से बाहर बड़ी आबादी: लगभग 2 करोड़ बच्चे (14–18 वर्ष) वर्तमान में स्कूल से बाहर हैं (PLFS 2023–24)।
- प्रारंभिक कक्षाओं में कम उपस्थिति: कक्षा 3–8 के लगभग 11% बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, जो आधारभूत कमियों को दर्शाता है।
- बोर्ड परीक्षा में उच्च विफलता दर: हर वर्ष 50 लाख से अधिक छात्र बोर्ड परीक्षाओं में असफल होते हैं, जिससे ड्रॉपआउट बढ़ते हैं।
NIOS के माध्यम से ओपन स्कूलिंग शिक्षा के लिए प्रमुख पहलें
- देशव्यापी नामांकन अभियान: जिला-स्तरीय सर्वेक्षण डेटा का उपयोग करके स्कूल से बाहर और ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान और नामांकन।
- “NIOS मित्र” कार्यक्रम: तकनीक-सक्षम पहुँच, जिसमें परामर्श, नामांकन और शैक्षणिक सहायता के लिए विशेष रूप से वंचित समूहों हेतु सुविधा प्रदाता शामिल हैं।
- अवसंरचना विस्तार: पहुँच में सुधार के लिए प्रत्येक ब्लॉक में कम-से-कम एक NIOS अध्ययन/परीक्षा केंद्र स्थापित करने की योजना।
- मौजूदा स्कूल अवसंरचना का उपयोग: पीएम श्री स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, और जवाहर नवोदय विद्यालय जैसे स्कूल NIOS परीक्षा केंद्र के रूप में कार्य करेंगे।
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS)
- स्थापना: NIOS की शुरुआत वर्ष 1979 में CBSE के अंतर्गत एक “ओपन स्कूलिंग” परियोजना के रूप में हुई, जिसे बाद में वर्ष 1989 में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय (NOS) के रूप में स्थापित किया गया।
- इसके बाद जुलाई 2002 में इसका नाम बदलकर राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) कर दिया गया।
- प्रकृति और स्थिति: यह विश्व की सबसे बड़ी ओपन स्कूलिंग शिक्षा प्रणाली है, जो दूरस्थ और ओपन लर्निंग के माध्यम से लचीली शिक्षा प्रदान करती है।
- लक्षित समूह: यह स्कूल से बाहर बच्चों, ड्रॉपआउट, कार्यरत व्यक्तियों और वंचित समूहों को सेवा प्रदान करता है।
- लचीली शिक्षण प्रणाली: यह ओपन एडमिशन, कई परीक्षा प्रयास, और ऑन-डिमांड परीक्षाएँ प्रदान करता है, जिससे शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा संभव होती है।
- मान्यता: NIOS के प्रमाण-पत्र CBSE/राज्य बोर्ड के समकक्ष हैं और उच्च शिक्षा तथा रोजगार के लिए मान्यता प्राप्त हैं।
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माइनर प्लैनेट सेंटर (MPC)

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हाल ही में माइनर प्लैनेट सेंटर ने बृहस्पति और शनि के चारों ओर 15 नए उपग्रहों की खोज की घोषणा की।
माइनर प्लैनेट सेंटर (MPC) की हालिया खोजें
- नए उपग्रहों की खोज: MPC ने 15 नए प्राकृतिक उपग्रहों की पुष्टि की, जिनमें बृहस्पति के 4 और शनि के 11 उपग्रह शामिल हैं, जिससे बाह्य ग्रह प्रणालियों के ज्ञान का विस्तार हुआ है।
- वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग: ये खोजें अंतरराष्ट्रीय टीमों द्वारा की गईं, जो विश्वभर के वेधशालाओं और खगोलविदों के बीच समन्वित प्रयासों को दर्शाती हैं।
- उन्नत ग्रह ट्रैकिंग: इन खोजों से कक्षीय गतिकी और ग्रह प्रणालियों के विकास की समझ में सुधार होता है।
माइनर प्लैनेट सेंटर (MPC) के बारे में
- माइनर प्लैनेट सेंटर सौरमंडल के छोटे पिंडों, जैसे क्षुद्रग्रह, धूमकेतु, और उपग्रहों, पर प्रेक्षणीय डेटा का वैश्विक भंडार है।
- स्थापना: वर्ष 1947 में इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (IAU) द्वारा।
- मुख्यालय: यह स्मिथसोनियन एस्ट्रोफिजिकल ऑब्जर्वेटरी, कैंब्रिज, मैसाचुसेट्स, संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित है।
- वित्तपोषण और प्रशासन: यह IAU के अधीन संचालित होता है और मुख्यतः नासा के ‘नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट ऑब्जर्वेशंस प्रोग्राम’ अनुदान द्वारा वित्तपोषित है।
MPC की प्रमुख भूमिकाएँ
- डेटा संग्रहण और सत्यापन: यह विश्वभर के खगोलविदों से प्रेक्षणीय डेटा प्राप्त करता है और माइनर प्लैनेट्स तथा धूमकेतुओं की खोजों का सत्यापन करता है।
- कक्षा गणना और नामांकन: MPC कक्षीय पथों की गणना करता है और नए खोजे गए खगोलीय पिंडों को आधिकारिक नाम प्रदान करता है।
- नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट्स (NEOs) की निगरानी: यह ऐसे पिंडों का पता लगाता है, जो पृथ्वी के लिए संभावित खतरा उत्पन्न कर सकते हैं और ग्रह सुरक्षा पहलों का समर्थन करता है।
- वैज्ञानिक संचार: यह माइनर प्लैनेट इलेक्ट्रॉनिक सर्कुलर्स (MPECs) के माध्यम से अपडेट प्रकाशित करता है, जिससे शोधकर्ताओं के बीच वैश्विक समन्वय संभव होता है।
- यह 7,00,000 से अधिक माइनर प्लैनेट्स का एक मास्टर डेटाबेस अपडेट करता है।
महत्त्व
- ग्रह सुरक्षा: खतरनाक अंतरिक्ष पिंडों की पहचान और उनकी कक्षाओं की भविष्यवाणी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- खगोल विज्ञान की प्रगति: सौरमंडल के विकास और खगोलीय यांत्रिकी पर अनुसंधान का समर्थन करता है।
- वैश्विक समन्वय केंद्र: विश्वभर की वेधशालाओं और वैज्ञानिकों को जोड़ने वाले एक केंद्रीय नोड के रूप में कार्य करता है।
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वैश्विक आतंकवाद सूचकांक 2026
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इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस ने वैश्विक आतंकवाद सूचकांक 2026 जारी किया, जिसमें पाकिस्तान को सबसे ऊपर स्थान दिया गया, जबकि भारत वैश्विक आतंकवाद के बदलते रुझानों के बीच 13वें स्थान पर रहा।
वैश्विक आतंकवाद सूचकांक 2026 के मुख्य बिंदु
- पाकिस्तान शीर्ष पर: पाकिस्तान आतंकवाद के सबसे अधिक प्रभाव के साथ पहले स्थान पर रहा, जिसका कारण तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे समूहों द्वारा बढ़े हुए हमले हैं।
- पाकिस्तान, बुर्किना फासो, नाइजर, नाइजीरिया, और माली सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल हैं।
- भारत की स्थिति: भारत 6.43 के स्कोर के साथ 13वें स्थान पर रहा, जो निरंतर सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाता है, लेकिन अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिरता को भी प्रतिबिंबित करता है।
- यह स्कोर वर्ष 2025 में दर्ज 140 से अधिक घटनाओं, 100 से अधिक मौतों और 100 से अधिक घायल व्यक्तियों को दर्शाता है।
- वैश्विक रुझानों में परिवर्तन: अफ्रीकी देश शीर्ष स्थानों पर हावी हैं, जो आतंकवाद के केंद्र के साहेल क्षेत्र की ओर स्थानांतरण को दर्शाता है।
- उभरते खतरे के पैटर्न: पश्चिमी देशों में विशेष रूप से अकेले हमलावर (लोन-वुल्फ) हमलों और युवाओं के उग्रवादीकरण में वृद्धि, आतंकवाद की बदलती प्रकृति को दर्शाती है।
वैश्विक आतंकवाद सूचकांक (GTI) के बारे में
- वैश्विक आतंकवाद सूचकांक एक वार्षिक रिपोर्ट है, जो 163 देशों में आतंकवाद के प्रभाव को मापती और रैंक करती है, जो वैश्विक जनसंख्या के 99% से अधिक को कवर करती है।
- द्वारा प्रकाशित: यह इंस्टिट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस द्वारा प्रकाशित की जाती है, जो एक स्वतंत्र वैश्विक थिंक टैंक है।
वैश्विक आतंकवाद सूचकांक (GTI) के मापदंड और कार्यप्रणाली
- संयुक्त स्कोरिंग प्रणाली: GTI प्रत्येक देश को 0 से 10 के बीच एक स्कोर प्रदान करता है, जहाँ 0 आतंकवाद का कोई प्रभाव नहीं दर्शाता है और 10 सबसे अधिक प्रभाव को दर्शाता है।
- समय-आधारित आकलन: यह सूचकांक आतंकवादी गतिविधियों के तात्कालिक और दीर्घकालिक प्रभावों के आकलन के लिए पाँच-वर्षीय भारित औसत का उपयोग करता है।
- मुख्य मापदंड
- आतंकवादी घटनाएँ (श्रेणी: 1): एक वर्ष में कुल हमलों की संख्या।
- मृत्यु (श्रेणी: 3): आतंकवाद के कारण हुई मौतों की संख्या।
- घायल (श्रेणी: 0.5): घायल हुए लोगों की कुल संख्या।
- संपत्ति क्षति (श्रेणी: 0–3): विनाश की गंभीरता के आधार पर आर्थिक प्रभाव।
- यह कार्यप्रणाली हमलों की आवृत्ति, तीव्रता, और प्रभाव को संयोजित करके देशों में आतंकवाद का एक समग्र माप प्रदान करती है।
महत्त्व
- नीति निर्माण और आतंकवाद-रोधी रणनीतियों में सहायता करता है।
- वैश्विक और क्षेत्रीय आतंकवाद रुझानों को प्रस्तुत करता है।
- उभरते खतरों और हॉटस्पॉट्स की पहचान करता है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा परिवेशों का तुलनात्मक आकलन सक्षम बनाता है।
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