अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) ने इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 में 120 से अधिक देशों में AI-आधारित स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के विस्तार के लिए एक वैश्विक AI-फॉर-एनर्जी मिशन का शुभारंभ किया।
वैश्विक AI-फॉर-एनर्जी मिशन के बारे में
यह एक ISA मिशन है, जिसका अनावरण नई दिल्ली में आयोजित भारत AI इंपैक्ट समिट में विद्युत मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (REC) लिमिटेड के साथ साझेदारी में किया गया।
उद्देश्य: सदस्य देशों में नीति, डिजिटल अवसंरचना, वित्त तथा नागरिक-केंद्रित प्लेटफॉर्म को संरेखित कर स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों में AI के अंगीकरण को तीव्र गति प्रदान करना।
फोकस: यह पहल ग्रिड प्रणालियों को रूपांतरित करने, रूफटॉप सौर ऊर्जा को गति देने, विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा को सुदृढ़ करने तथा ऊर्जा शासन के लिए परस्पर क्रियाशील डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर केंद्रित है।
ऊर्जा क्षेत्र में AI की आवश्यकता
ऊर्जा बचत: AI ऊर्जा खपत और CO₂ उत्सर्जन को अनुकूलित तथा संभावित रूप से कम कर सकता है।
मौजूदा AI अनुप्रयोगों के व्यापक अंगीकरण से वर्ष 2035 तक उद्योग की ऊर्जा माँग में लगभग 8 EJ (एक्साजूल) की बचत संभव है।
लागत में कमी: AI-सक्षम प्लेटफॉर्म ने भारत में ऑफ-ग्रिड पायलट परियोजनाओं में परिचालन लागत में कमी प्रदर्शित की है।
लागत में कमी: AI-सक्षम प्लेटफॉर्म ने भारत में ऑफ-ग्रिड पायलट परियोजनाओं में परिचालन लागत में कमी प्रदर्शित की है।
ग्रिड अनुकूलन: AI उपकरण माँग का पूर्वानुमान लगाते हैं, विद्युत प्रवाह का सिमुलेशन करते हैं तथा संचरण हानियों को कम करते हैं।
पूर्वानुमानित अनुरक्षण (Predictive Maintenance): AI-आधारित ऊर्जा प्रबंधन प्रणालियाँ ईवी चार्जिंग तथा वितरण नेटवर्क में विश्वसनीयता को सुदृढ़ करती हैं।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के बारे में
ISA एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना भारत और फ्राँस द्वारा COP21, पेरिस (2015) में की गई थी।
मुख्यालय: गुरुग्राम, भारत।
उद्देश्य: आईएसए का लक्ष्य वर्ष 2030 तक बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा तैनाती और जलवायु कार्रवाई के लिए 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक संसाधनों का संकलन करना है।
सदस्यता: यह गठबंधन 120 से अधिक सदस्य एवं हस्ताक्षरकर्ता देशों से मिलकर बना है (जनवरी 2026 में अमेरिका के अलग होने के बाद 125 सदस्य), जिनमें अधिकांश देश ग्लोबल साउथ से हैं।
मुख्य पहलें: प्रमुख पहलों में वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG), ग्लोबल सोलर फैसिलिटी (GSF) तथा प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए सोलर टेक्नोलॉजी एप्लिकेशन रिसोर्स सेंटर (STAR-C) शामिल हैं।
बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक
बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक वॉशिंगटन, डी.सी. में उस परिसर में आयोजित की गई, जिसे वर्तमान में डोनाल्ड जे. ट्रंप इंस्टिट्यूट ऑफ पीस (पूर्ववर्ती नाम- यू.एस. इंस्टिट्यूट ऑफ पीस) के नाम से जाना जाता है।
प्रथम बैठक की प्रमुख विशेषताएँ
पुनर्निर्माण रूपरेखा का शुभारंभ: बोर्ड ऑफ पीस के अंतर्गत गाजा पुनर्वास कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई।
उपस्थिति और सहभागिता: लगभग 50 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें 27 पूर्ण सदस्य तथा पर्यवेक्षक (जैसे- यूरोपीय संघ, भारत और कुछ यूरोपीय राष्ट्र) शामिल थे।
गाजा के लिए प्रमुख वित्तीय प्रतिबद्धताएँ
नौ देशों ने संयुक्त रूप से गाजा राहत और पुनर्निर्माण के लिए 7 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रतिज्ञा की।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने पृथक रूप से 10 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रतिज्ञा की, जिससे कुल वित्तीय प्रतिबद्धताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल: सुरक्षा बनाए रखने तथा हमास के निरस्त्रीकरण की निगरानी हेतु एक सशस्त्र बल के गठन का प्रस्ताव रखा गया।
इंडोनेशिया ने 8,000 से अधिक सैनिकों की प्रतिज्ञा की, जबकि कजाखस्तान ने सैन्य एवं चिकित्सीय इकाइयों की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
बोर्ड ऑफ पीस के बारे में
यह एक नया अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शांति स्थापना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई, जिसकी शुरुआत, वर्षों के संघर्ष के बाद गाजा पट्टी में स्थिरता स्थापित करने से की गई है।
स्थापना: इस बोर्ड की औपचारिक स्थापना जनवरी 2026 में की गई तथा इसका चार्टर दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच में हस्ताक्षरित किया गया।
उद्देश्य: संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण का समन्वय करना, शासन व्यवस्था को पुनर्स्थापित करना तथा स्थायी शांति सुनिश्चित करना। प्रारंभिक फोकस गाजा पर है, किंतु भविष्य में इसका विस्तार अन्य क्षेत्रों तक भी हो सकता है।
यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 से संबद्ध है, जिसमें गाजा के पुनर्निर्माण और स्थिरता ढाँचे के प्रशासन में सहायता हेतु इसके गठन का स्वागत किया गया।
नेतृत्व: डोनाल्ड ट्रंप इसके अध्यक्ष हैं, जिनके लिए कोई कार्यकाल सीमा निर्धारित नहीं है तथा आमंत्रण एवं प्रमुख निर्णयों पर उनका विशिष्ट अधिकार है।
संरचना: बोर्ड में एक कार्यकारी बोर्ड तथा गाजा-केंद्रित विशिष्ट निकाय शामिल हैं, जैसे- गाजा कार्यकारी बोर्ड और एक तकनीकी विशेषज्ञों की टीम।
सदस्य: लगभग 27 देशों ने संस्थापक सदस्यों के रूप में इसमें सहभागिता की है, जिनमें खाड़ी देश तथा अन्य राष्ट्र शामिल हैं।
चार्टर में सदस्यता नियम के अनुसार, स्थायी सदस्यता जैसे विशेष लाभ प्राप्त करने के लिए देशों को निर्धारित वित्तीय योगदान (उदाहरणार्थ 1 अरब अमेरिकी डॉलर) देना अनिवार्य है।
चिंताएँ: कुछ आलोचकों का मत है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकता है या एक वैकल्पिक वैश्विक शांति संस्था के रूप में कार्य कर सकता है।
बोर्ड ऑफ पीस में भारत: भारत 27 संस्थापक/पूर्ण सदस्यों में शामिल नहीं है।
भारत ने इस नए संगठन की पहली बैठक में एक पर्यवेक्षक देश के रूप में भाग लिया।
अमेरिका-इंडिया कनेक्ट
इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 में, गूगल ने भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच AI-संचालित डिजिटल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने हेतु 15 अरब अमेरिकी डॉलर की ‘अमेरिका-इंडिया कनेक्ट’ समुद्री केबल पहल की घोषणा की।
एक समुद्री केबल/सबमरीन केबल एक फाइबर-ऑप्टिक केबल होती है, जिसे देशों और महाद्वीपों के बीच डेटा संचारित करने के लिए समुद्र तल पर बिछाया जाता है।
‘अमेरिका-इंडिया कनेक्ट’ के बारे में
‘अमेरिका-इंडिया कनेक्ट’ गूगल के नेतृत्व में एक सहयोगात्मक अवसंरचना पहल है, जिसे पाँच वर्षों में 15 अरब अमेरिकी डॉलर के AI अवसंरचना निवेश द्वारा समर्थित किया गया है। इसका उद्देश्य विशाखापत्तनम (विजाग) में एक नए अंतरराष्ट्रीय समुद्री केबल गेटवे की स्थापना करना है।
वर्तमान में, भारत के अंतरराष्ट्रीय समुद्री केबल गेटवे मुख्यतः मुंबई और चेन्नई में केंद्रित हैं।
मुख्य विशेषताएँ
पूर्वी तट कनेक्टिविटी कॉरिडोर: विज़ाग को चेन्नई, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से जोड़ने वाले प्रत्यक्ष फाइबर मार्ग।
दक्षिणी गोलार्द्ध के मार्गों के माध्यम से अमेरिका के पूर्वी और पश्चिमी तटों को जोड़ना।
पश्चिमी तट लिंक: मुंबई और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रत्यक्ष फाइबर-ऑप्टिक संपर्क, जो हिंद-प्रशांत डिजिटल एकीकरण को सुदृढ़ करेगा।
मौजूदा केबलों के साथ एकीकरण: यह परियोजना Blue, Raman और Sol जैसी अन्य पनडुब्बी प्रणालियों के साथ पूरक रूप से कार्य करेगी, जिससे यूरोप और अमेरिका के पूर्वी तट से लाल सागर के मार्ग से होते हुए मुंबई तक एक सुदृढ़ एवं लचीला डेटा कॉरिडोर निर्मित होगा।
Blue: इटली–इजरायल–जॉर्डन–सऊदी अरब–ओमान–भारत को जोड़ता है।
Raman: जॉर्डन–सऊदी अरब–जिबूती–ओमान–भारत को जोड़ता है।
Sol: स्पेन–इटली–ग्रीस–इज़राइल–साइप्रस–मिस्र–सऊदी अरब–ओमान–भारत को जोड़ता है।
उद्देश्य
भारत, अमेरिका तथा दक्षिणी गोलार्द्ध के बीच AI-संचालित डेटा हस्तांतरण क्षमता को सुदृढ़ करना।
वैश्विक डिजिटल व्यापार और क्लाउड अवसंरचना में भारत की भूमिका को मजबूत करना।
AI, स्वास्थ्य सेवा, फिनटेक तथा शासन-संबंधी अनुप्रयोगों के लिए उच्च गति एवं निम्न विलंबता (Low-latency) कनेक्टिविटी का समर्थन करना।
महत्त्व
यह पहल विशाखापत्तनम (विजाग) को एक रणनीतिक वैश्विक डिजिटल गेटवे के रूप में स्थापित करती है, जिससे पारंपरिक समुद्री व्यापार मार्ग उच्च क्षमता वाले एआई-सक्षम डेटा कॉरिडोर में परिवर्तित हो रहे हैं।
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