संदर्भ
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और वेंचर कैपिटल को प्रोत्साहित करने के लिए ₹10,000 करोड़ के स्टार्ट-अप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी दी है।
स्टार्ट-अप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 के बारे में
- स्टार्ट-अप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (FoF 2.0) एक ₹10,000 करोड़ का सरकारी समर्थित कोष है, जिसे वर्ष 2026 में भारतीय स्टार्ट-अप्स में दीर्घकालिक घरेलू वेंचर कैपिटल निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए स्वीकृत किया गया है।
- यह स्टार्ट-अप इंडिया पहल के अंतर्गत वर्ष 2016 में शुरू किए गए पहले फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्ट-अप्स (FFS 1.0) पर आधारित है।
- नोडल मंत्रालय: यह योजना वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) द्वारा संचालित की जाती है तथा इसका कार्यान्वयन SIDBI के माध्यम से किया जाता है।
- SIDBI (स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया) एक वैधानिक वित्तीय संस्था है, जो MSMEs और स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने, वित्तपोषण करने और विकसित करने का कार्य करती है।
- उद्देश्य
- भारत के स्टार्ट-अप विकास के अगले चरण को गति देना।
- घरेलू वेंचर कैपिटल पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना।
- प्रारंभिक चरण के वित्तपोषण अंतर और उच्च-जोखिम पूँजी की कमी को कम करना।
- डीप-टेक और प्रौद्योगिकी-आधारित विनिर्माण नवाचार को बढ़ावा देना।
- वित्तपोषण तंत्र: FoF 2.0 “फंड ऑफ फंड्स” मॉडल का अनुसरण करता है, जिसके अंतर्गत सरकारी पूँजी को SEBI-पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs) में निवेश किया जाता है, जो आगे पात्र स्टार्ट-अप्स में निवेश करते हैं।
- यह दृष्टिकोण पेशेवर फंड प्रबंधन और व्यापक पूंजी संग्रह सुनिश्चित करता है।
- लाभार्थी
- प्रारंभिक विकास और डीप-टेक स्टार्ट-अप्स।
- प्रौद्योगिकी-आधारित विनिर्माण उद्यम।
- प्रमुख महानगरों से बाहर के स्टार्ट-अप्स।
- छोटे और उभरते AIFs, जिन्हें एंकर कैपिटल समर्थन की आवश्यकता होती है।
- महत्त्व
- FFS 1.0 पर आधारित, जिसने 1,370 से अधिक स्टार्ट-अप्स में ₹25,500 करोड़ से अधिक के निवेश को उत्प्रेरित किया।
- AI, रोबोटिक्स, बायोटेक, क्लीन-टेक और उन्नत विनिर्माण में नवाचार को बढ़ावा देता है।
- आर्थिक लचीलापन, रोजगार सृजन और विकसित भारत 2047 के तहत भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र बनाने के लक्ष्य को सुदृढ़ करता है।
वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs) के बारे में
- AIFs वे निवेश साधन हैं, जिन्हें भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा विनियमित किया जाता है।
- फरवरी 2026 तक, भारत में 1,768 से अधिक AIFs पंजीकृत थे।
- भूमिका: ये उच्च-निवल-मूल्य वाले व्यक्तियों (HNIs) और संस्थागत निवेशकों से पूँजी एकत्र करते हैं और मुख्य रूप से श्रेणी I (वेंचर कैपिटल, एंजेल फंड) तथा श्रेणी II (प्राइवेट इक्विटी/डेब्ट) के माध्यम से स्टार्ट-अप्स में निवेश करते हैं।
- महत्व: AIFs उच्च-जोखिम और गैर-पारंपरिक व्यवसायों को प्रारंभिक, विकास और विस्तार पूँजी प्रदान करते हैं।
- वे प्रायः वित्तपोषण के साथ-साथ रणनीतिक मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं।