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28 Mar 2026

अमराबाद टाइगर रिजर्व

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तेलंगाना सरकार ने मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से अमराबाद टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से जनजातीय परिवारों के स्वैच्छिक पुनर्वास की पहल की है।

अमराबाद टाइगर रिजर्व के बारे में

  • स्थान: अमराबाद टाइगर रिजर्व तेलंगाना के नागरकर्नूल और नलगोंडा जिलों में नल्लमाला पहाड़ियों के मध्य स्थित है।
  • स्थापना: आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद वर्ष 2014 में इसे नागार्जुनसागर–श्रीशैलम टाइगर रिजर्व से अलग कर एक स्वतंत्र टाइगर रिजर्व के रूप में स्थापित किया गया।
  • जैव विविधता: यहाँ बंगाल टाइगर, तेंदुआ, स्लॉथ बियर, ढोल (जंगली कुत्ते) तथा साँभर और चिंकारा जैसे शाकाहारी जीवों सहित समृद्ध शुष्क पर्णपाती वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
  • चेंचू जनजाति: यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से चेंचू जनजाति द्वारा आबाद है, जो एक विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) है और वन-आधारित आजीविका पर निर्भर है।
  • नदियाँ एवं पारिस्थितिकी: कृष्णा नदी इसकी परिधि के साथ बहती है, जो वन पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देती है तथा रिजर्व की जैव विविधता और सूक्ष्म जलवायु को प्रभावित करती है।

यूथेलिया जुबीनगर्गी

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अरुणाचल प्रदेश में एक नई तितली प्रजातियूथेलिया जुबीनगर्गी’ (Euthalia Zubeengargi) की खोज की गई है।

यूथेलिया जुबीनगर्गी के बारे में

  • नामकरण: इस प्रजाति का नाम दिवंगत गायक जुबीन गर्ग के सांस्कृतिक योगदान के सम्मान में रखा गया है।
  • सामान्य नाम: शोधकर्ताओं ने इसका सामान्य नाम “बसार ड्यूक” प्रस्तावित किया है, जो लेपराडा जिले के बसार क्षेत्र पर आधारित है।
  • आवास: यह 600–750 मीटर की ऊँचाई पर स्थित अर्द्ध-सदाबहार वनों में पाई जाती है।
  • दुर्लभता: अब तक केवल दो नर का ही अभिलेखन हुआ है, जिससे संकेत मिलता है कि यह प्रजाति दुर्लभ या अत्यंत सीमित क्षेत्र में पाई जाने वाली हो सकती है।
  • वर्गीकरण: यह यूथेलिया वंश (Genus) से संबंधित है, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापक रूप से वितरित है।
  • व्यवहार: यह ठंडे और छायादार वन क्षेत्रों को पसंद करती है, निम्न वनस्पति पर विश्राम करती है, वृक्षों के रस पर निर्भर रहती है और मुख्यतः देर सुबह से प्रारंभिक दोपहर तक सक्रिय रहती है।
  • महत्त्व: यह खोज पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध जैव विविधता को रेखांकित करती है तथा वन पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की आवश्यकता को उजागर करती है।

नशा मुक्त विद्यालय 

हाल ही में नार्को-समन्वयन केंद्र (NCORD) की 9वीं शीर्ष बैठक में नशा मुक्त विद्यालय अभियान (Nasha Mukt Vidyalaya Initiative) का शुभारंभ किया गया।

नशा मुक्त विद्यालय अभियान के बारे में

  • यह एक विद्यालय-केंद्रित कार्यक्रम है, जो बच्चों और किशोरों में बढ़ते नशीली पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने हेतु व्यापक एंटी-ड्रग ढाँचे के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है।
  • मिशन मोड: इसे तीन वर्ष की कार्ययोजना के रूप में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मिशन मोड में लागू किया जाएगा।
  • उद्देश्य
    • छात्रों के मध्य व्यवहारगत परिवर्तन को बढ़ावा देते हुए नशामुक्त शैक्षिक वातावरण का निर्माण करना।
    • विद्यालयों को नशीली पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध प्रथम रक्षा पंक्ति के रूप में स्थापित करना।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • विद्यालयों के 500 मीटर के दायरे को नशामुक्त क्षेत्र घोषित करना।
    • विद्यालय प्राधिकरणों द्वारा उल्लंघनों की अनिवार्य सूचना स्थानीय प्रशासन और पुलिस को देना।
    • निवारक शिक्षा, जागरूकता अभियान और परामर्श सहायता का समावेश।
    • शिक्षकों की क्षमता निर्माण, छात्र-नेतृत्व वाली पहल तथा IEC (Information, Education, Communication) गतिविधियों पर विशेष ध्यान।
    • विद्यालय, जिला और राज्य स्तर पर निगरानी एवं रिपोर्टिंग तंत्र की स्थापना।

नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के बारे में

  • नशा मुक्त भारत अभियान का शुभारंभ 15 अगस्त, 2020 को भारत में नशीली दवाओं के दुरुपयोग से निपटने के लिए किया गया।
  • नोडल मंत्रालय: इसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा अन्य मंत्रालयों के समन्वय से लागू किया जा रहा है।
  • कवरेज: प्रारंभ में 272 संवेदनशील जिलों को शामिल किया गया था, जिसे वर्ष 2023 में सभी जिलों तक विस्तारित कर दिया गया।
  • उद्देश्य
    • जागरूकता, परामर्श और पुनर्वास के माध्यम से नशीली दवाओं की माँग को कम करना।
    • सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करना।
    • स्वास्थ्य, शिक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के मध्य समन्वय सुनिश्चित करना।
  • महत्त्व: यह पहल नशीली पदार्थों के दुरुपयोग को एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में संबोधित करते हुए शिक्षा, प्रवर्तन और पुनर्वास को एकीकृत करने वाले समग्र, बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण को दर्शाती है।

नार्को-समन्वयन केंद्र (NCORD) के बारे में

  • NCORD की स्थापना 2016 में गृह मंत्रालय द्वारा की गई थी और वर्ष 2019 में इसे 4-स्तरीय तंत्र में पुनर्गठित किया गया:
    शीर्ष (नीतिगत स्तर), कार्यकारी (संचालन स्तर), राज्य स्तर और जिला स्तर।
  • उद्देश्य: केंद्रीय और राज्य स्तरीय मादक पदार्थ प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना।
  • भूमिका: यह NDPS Act के अंतर्गत मादक पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन, खुफिया तथा कल्याणकारी एजेंसियों को एक मंच पर लाता है।
  • प्रमुख पहलें: सूचना साझा करने के लिए NCORD पोर्टल का संचालन। NIDAAN (National Integrated Database on Arrested Narco-offenders) डेटाबेस के माध्यम से अपराधियों की निगरानी। MANAS 24×7 हेल्पलाइन का संचालन, जो सहायता और सूचना प्रदान करती है।

होप द्वीप: ऑलिव रिडले संरक्षण

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आंध्र प्रदेश में ऑलिव रिडले के लिए महत्त्वपूर्ण और तटीय संरक्षण स्थल के रूप में होप द्वीप के पारिस्थितिकी महत्त्व को उजागर करते हुए, लगभग 20,000 ऑलिव रिडले कछुए के अंडों का संरक्षण किया गया।

होप द्वीप के बारे में

  • होप द्वीप एक टैडपोल (tadpole) के आकार का रेतीला स्पिट द्वीप है, जो पिछले 200 वर्षों में अवसाद के निक्षेपण से बना है।
  • स्थान: यह आंध्र प्रदेश में काकीनाडा तट के समीप बंगाल की खाड़ी में स्थित है।
  • मुख्य विशेषताएँ एवं भूमिका
    • जलवायु और वनस्पति: यह उष्णकटिबंधीय सवाना जलवायु (Aw) वाला क्षेत्र है, जहाँ तापमान 19–32 डिग्री सेल्सियस के मध्य रहता है तथा लगभग 110 सेमी. वार्षिक वर्षा होती है। यहाँ घने मैंग्रोव वन और लवणीय दलदली क्षेत्र पाए जाते हैं।
    • समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र: यह कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य के पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है।
      • यह ऑलिव रिडले कछुओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण घोसला स्थल के रूप में कार्य करता है और स्थानिक संरक्षण के माध्यम से  अंडों से निकले बच्चों के जीवित रहने की संभावना बढ़ाता है।
      • यह ग्रेटर फ्लेमिंगो जैसे प्रवासी पक्षियों सहित समृद्ध जैव विविधता का समर्थन करता है।
    • प्राकृतिक आपदा निवारण: यह एक प्राकृतिक जल विभाजक (Breakwater) के रूप में कार्य करता है, जो काकीनाडा तट को चक्रवातों और तूफानी लहरों से संरक्षण प्रदान करता है।
      • साथ ही, यह एक शांत प्राकृतिक बंदरगाह बनाए रखने में सहायक है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और मत्स्यपालन को लाभ मिलता है।
    • रणनीतिक महत्त्व: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निकट होने के कारण यह इसरो के लिए एक नए लॉन्च पैड के विकास हेतु संभावित स्थान के रूप में भी देखा जा रहा है।

ऑलिव रिडले कछुआ (Lepidochelys Olivacea) के बारे में

  • ऑलिव रिडले कछुआ समुद्री कछुओं की सबसे छोटी और सर्वाधिक प्रचुर प्रजाति है, जिसका नाम इसके कवच (Carapace) के जैतूनी-हरे रंग के कारण पड़ा है।
  • आवास: यह उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय समुद्री जल में पाया जाता है तथा घोसला बनाने के लिए मुहानों (Estuaries) और खाड़ियों के निकट तटीय क्षेत्रों को प्राथमिकता देता है।
  • वितरण: ऑलिव रिडले कछुए हिंद, प्रशांत और अटलांटिक महासागरों में पाए जाते हैं।
    • भारत में मुख्य रूप से ओडिशा तट, अंडमान द्वीपसमूह, तमिलनाडु और कर्नाटक में घोसला बनाते हैं।
  • आहार: ये सर्वाहारी होते हैं और शैवाल (algae), जेलीफिश, केकड़े, लॉब्स्टर, मोलस्क तथा ट्यूनिकेट्स का सेवन करते हैं।
  • घोंसला बनाने की प्रक्रिया: एक अनूठी विशेषता अरिबाडा है, जो एक सामूहिक घोंसला बनाने की घटना है, जिसमें हजारों मादाएँ एक ही समुद्र तट पर एक साथ अंडे देती हैं।
    • भारत में, अरिबाडा के प्रमुख स्थलों में गहिरमाथा, देवी नदी का मुहाना और ओडिशा में ऋषिकुल्या शामिल हैं।
      प्रत्येक मादा लगभग 100–140 अंडे देती है।
  • संरक्षण स्थिति
    • IUCN रेड लिस्ट: सुभेद्य (Vulnerable)
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची I
    • CITES: परिशिष्ट I
  • खतरे: मुख्य खतरों में मछली पकड़ने के जालों में आकस्मिक फँसना, तटीय विकास, जलवायु परिवर्तन, समुद्री प्रदूषण, अंडों का अवैध संग्रहण तथा आवारा जानवरों द्वारा शिकार शामिल हैं।

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