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बेहतर सार्वजनिक व्यय के साथ सभी के लिए एक प्रभावी स्वास्थ्य प्रणालि

बेहतर सार्वजनिक व्यय के साथ सभी के लिए एक प्रभावी स्वास्थ्य प्रणालि 3 Aug 2026

संदर्भ:

वैश्विक स्वास्थ्य सहायता में गिरावट और सार्वजनिक वित्त पर दबाव के मध्य, स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को आगे बढ़ाने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय की दक्षता, गुणवत्ता और शासन में सुधार पर अत्यधिक बल दिया जा रहा है।

मुख्य बिंदु 

  • वैश्विक स्वास्थ्य वित्तपोषण में गिरावट: कोविड-19 महामारी के बाद स्वास्थ्य के लिए विकास सहायता में तीव्र गिरावट आई है, जिसमें अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और जर्मनी जैसे प्रमुख दाता देशों ने विदेशी स्वास्थ्य सहायता में कटौती की है।
  • बढ़ते सार्वजनिक ऋण और ऋण पर बढ़ते ब्याज भुगतान की वजह से अनेक विकासशील देशों में स्वास्थ्य क्षेत्र पर व्यय (Health Spending) के लिए उपलब्ध राजकोषीय देयता में कमी आई है। परिणामस्वरूप, सरकारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं, सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना तथा सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के क्षेत्र में निवेश करना अधिक कठिन होता जा रहा है।
  • स्वास्थ्य वित्तपोषण की सतत कमी: यद्यपि अनेक निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में स्वास्थ्य व्यय का हिस्सा बढ़ा है, फिर भी प्रति व्यक्ति सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय अभी भी सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक स्तर से काफी कम है। परिणामस्वरूप, गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ सभी नागरिकों तक समान रूप से पहुँचाने में अभी भी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय के क्षेत्र में मुख्य चुनौतियाँ 

  • निम्न बजट उपयोग : आवंटित स्वास्थ्य निधि का एक बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो पाता, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रभावशीलता कम होती है। भारत में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कई घटकों के अंतर्गत उपयोग दर निम्न स्तर पर बनी हुई है।
  • उपचारात्मक देखभाल को प्राथमिकता: सार्वजनिक व्यय अभी भी द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवा पर अधिक केंद्रित है, जबकि निवारक और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को अपेक्षाकृत कम निवेश मिलता है।
  • अप्रभावी शासन: भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अक्षमता, निधियों के विलंबित वितरण और कमजोर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन स्वास्थ्य व्यय के स्वास्थ्य परिणामों पर प्रभाव को कम करते हैं।
  • अपर्याप्त विकेंद्रीकृत क्षमता: राज्य और स्थानीय स्तर पर अप्रभावी शासन और संस्थागत क्षमता कुशल सेवा वितरण को प्रभावित करती है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में सुधार हेतु उपाय

  • बजट क्रियान्वयन में सुधार: बेहतर योजना, निगरानी और वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से आवंटित निधियों का समय पर उपयोग सुनिश्चित करना।
  • निवारक स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता: दीर्घकालिक रोग भार को कम करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, रोग निवारण, टीकाकरण, स्वच्छता और स्वास्थ्य संवर्धन में निवेश बढ़ाना।
  • शासन को सुदृढ़ करना: दक्षता बढ़ाने और रिसाव कम करने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेहिता, खरीद प्रणालियों और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में सुधार करना।
  • विकेंद्रीकृत योजना को बढ़ावा: राज्यों और स्थानीय स्वास्थ्य संस्थाओं को अधिक वित्तीय स्वायत्तता और संस्थागत क्षमता के साथ सशक्त बनाना।
  • लचीली बजट व्यवस्था सुनिश्चित करना: सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों और उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम एक अनुकूली वित्तपोषण तंत्र विकसित करना।

संबंधित सरकारी पहलें:

  • आयुष्मान भारत कार्यक्रम: आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ करता है और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे, मानव संसाधन और स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणालियों को सुदृढ़ करने में सहयोग करता है।

आगे की राह 

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य निवेश को बढ़ाना: संसाधन उपयोग में अधिक दक्षता सुनिश्चित करते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को क्रमिक रूप से बढ़ाना।
  • परिणाम-आधारित बजटिंग अपनाना : स्वास्थ्य व्यय को मापने योग्य स्वास्थ्य परिणामों और प्रदर्शन संकेतकों से जोड़ना।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को सुदृढ़ करना: नीतिगत फोकस को निवारक, संवर्धनात्मक और सामुदाय-आधारित स्वास्थ्य सेवा की ओर स्थानांतरित करना।
  • शासन सुधारों में सुधार: सरकार के सभी स्तरों पर बजट विश्वसनीयता, डिजिटल वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शी खरीद और संस्थागत जवाबदेही को बढ़ाना।

निष्कर्ष 

सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण के लिए न केवल अधिक सार्वजनिक निवेश की आवश्यकता है, बल्कि बेहतर शासन, संसाधनों का कुशल उपयोग और निवारक स्वास्थ्य सेवा पर अधिक जोर भी आवश्यक है। सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता में सुधार सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) प्राप्त करने, स्वास्थ्य असमानताओं को कम करने और भारत की दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक होगा।

बेहतर सार्वजनिक व्यय के साथ सभी के लिए एक प्रभावी स्वास्थ्य प्रणालि

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