संदर्भ:
परीक्षा निष्पक्षता, लोकतांत्रिक जवाबदेही और संस्थागत उत्तरदायित्व को लेकर हुए सार्वजनिक विमर्श ने भारत की संवैधानिक लोकतंत्र, समावेशी विकास और नागरिक भागीदारी को सुदृढ़ करने से संबंधित चर्चाओं को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है, विशेषकर ऐसे समय में जब देश विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
- लोकतांत्रिक नवीनीकरण : शांतिपूर्ण जनभागीदारी एवं नागरिक सहभागिता, संवाद और संस्थागत सुधारों के माध्यम से सरकार को जन-सरोकारों के प्रति उत्तरदायी बनाकर लोकतांत्रिक जवाबदेही को मज़बूत करती है।
- संवैधानिक मूल्य: संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित शासन व्यवस्था की नींव प्रदान करता है, जिससे विकास समावेशी और अधिकार-आधारित बना रहे।
- युवा आकांक्षाएँ: परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोज़गार के अवसर और सामाजिक गतिशीलता संबंधी चिंताएँ इस बात को उजागर करती हैं कि शासन-व्यवस्था को भारत के युवाओं की आकांक्षाओं के अनुरूप सम्बद्ध किया जाना आवश्यक है।
- समावेशी विकास: सतत आर्थिक वृद्धि के लिए क्षेत्रीय, सामाजिक और लैंगिक असमानताओं को कम करना तथा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोज़गार और डिजिटल अवसरों तक समान पहुँच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): AI शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, विनिर्माण और लोक सेवा वितरण में परिवर्तनकारी संभावनाएँ प्रस्तुत करती है। अर्थात तकनीकी प्रगति मानव-केंद्रित और नैतिक सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होनी चाहिए।
- वैज्ञानिक सोच : ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण तथा जटिल विकासात्मक चुनौतियों के समाधान हेतु वैज्ञानिक अन्वेषण, साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण, नवाचार और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देना आवश्यक है।
मुख्य चुनौतियाँ
- संस्थागत विश्वसनीयता: परीक्षा अनियमितताओं संबंधी आरोप तथा संस्थागत स्वायत्तता को लेकर चिंताएँ शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनविश्वास को कमज़ोर कर सकती हैं।
- रोज़गार सृजन: उच्च युवा बेरोज़गारी और गुणवत्तापूर्ण रोज़गार सृजन की सीमित गति भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को बाधित करती रहती है।
- शैक्षिक गुणवत्ता: शिक्षा तक पहुँच के विस्तार के साथ-साथ गुणवत्ता, कौशल विकास, अनुसंधान और रोज़गार-योग्यता में भी सुधार आवश्यक है।
- सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ: आय, पोषण, स्वास्थ्य सेवा और क्षेत्रीय विकास में बनी हुई असमानताएँ समावेशी विकास के क्षेत्र में बाधक बनी हुई हैं।
- लोकतांत्रिक ध्रुवीकरण: बढ़ता राजनीतिक और सामाजिक ध्रुवीकरण रचनात्मक सार्वजनिक विमर्श को कमज़ोर कर सकता है तथा आम सहमति निर्माण के अवसरों को कम कर सकता है।
- प्रौद्योगिकी का नैतिक उपयोग: AI और डिजिटल तकनीकों के तीव्र गति से होते प्रसार से गोपनीयता, कलनविधि पूर्वाग्रह , जवाबदेही, दुष्प्रचार और समान पहुँच से संबंधित चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
आगे की राह
- लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करना: संवैधानिक मूल्यों तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में नागरिक भागीदारी की रक्षा करते हुए संस्थागत पारदर्शिता, जवाबदेही और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना।
- शिक्षा में विश्वास की स्थिति को पुनः बहाल करना: शैक्षिक गुणवत्ता, व्यावसायिक प्रशिक्षण और अनुसंधान तंत्र में सुधार करते हुए पारदर्शी, निष्पक्ष एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना।
- रोज़गार-आधारित विकास को बढ़ावा देना: श्रम-प्रधान उद्योगों, उद्यमशीलता, नवाचार, ज़िला-स्तरीय विकास और कौशल-आधारित रोज़गार सृजन को प्रोत्साहित करना।
- AI का दायित्वपूर्ण उपयोग: नैतिक शासन, डेटा संरक्षण, पारदर्शिता और मानवीय निगरानी सुनिश्चित करते हुए नवाचार को बढ़ावा देने वाला व्यापक AI तंत्र विकसित करना।
- मानव पूँजी में निवेश: दीर्घकालिक उत्पादकता के निर्माण हेतु स्वास्थ्य सेवा, पोषण, शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक अवसंरचना को प्राथमिकता प्रदान करना।
- संवैधानिक शासन को सुदृढ़ करना: नीति-निर्माण और राष्ट्रीय विकास हेतु मार्गदर्शक ढाँचे के रूप में न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और वैज्ञानिक सोच के सिद्धांतों को बनाए रखना।
निष्कर्ष
विकसित भारत 2047 बनने की भारत की आकांक्षा के लिए तकनीकी उत्कृष्टता को संवैधानिक मूल्यों, नैतिक नेतृत्व और समावेशी शासन के साथ संतुलित करना आवश्यक है। सतत राष्ट्रीय प्रगति केवल आर्थिक वृद्धि पर ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने, अवसरों का विस्तार करने तथा यह सुनिश्चित करने पर भी निर्भर करेगी कि विकास जन-केंद्रित और समतापूर्ण बना रहे।
सिविल सेवा मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: संवैधानिक नैतिकता’ (Constitutional Morality) का भारतीय लोकतंत्र में क्या महत्त्व है? लोकतांत्रिक शासन में इसके समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।(250 शब्द)
सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: भारतीय संविधान की प्रस्तावना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
- प्रस्तावना संविधान का भाग है।
- प्रस्तावना में निहित आदर्श संविधान के मूल ढाँचे (Basic Structure) का हिस्सा माने गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों |