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मेघालय में रैट-होल खनन

Lokesh Pal February 07, 2026 05:00 23 0

संदर्भ:

मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स में अवैध रूप से संचालित रैट-होल कोयला खदान में हुए विस्फोट के बाद कम-से-कम 18 श्रमिकों की मौत हो गई।

रैट-होल खनन के बारे में

  • कार्यप्रणाली: रैट-होल माइनिंग कोयला उत्खनन की एक प्राचीन और जोखिम भरी तकनीक है, इसमें बहुत संकीर्ण सुरंगें बनाई जाती हैं, जिससे श्रमिकों को बुनियादी उपकरणों के साथ बैठकर या रेंगते हुए कार्य करना पड़ता है।
  • पतली कोयला परत की बाध्यता: मेघालय में कोयले की परतें पतली (लगभग 2 मीटर) होती हैं, जबकि अन्य कोयला-समृद्ध क्षेत्रों में ये मोटी होती हैं।
  • प्रौद्योगिकीय सीमाएँ: पतली परतों के कारण यंत्रीकृत खनन आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं होता, जिससे मैनुअल श्रम पर निर्भरता बढ़ जाती है।

रैट-होल खनन से जुड़े जोखिम/चिंताएँ

  • सुरक्षा अवसंरचना का अभाव: सुरंगों में वेंटिलेशन प्रणालियाँ, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम, जल-निकासी या संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण का अभाव होता है।
  • सुरक्षा संबंधी जोखिम: कामगार संकरी और अस्थिर सुरंगों में रेंगते हैं, जहाँ धंसने, दम घुटने और अचानक बाढ़ आने का अत्यधिक खतरा रहता है।
    • 2018 क्सान त्रासदी(Ksan Tragedy) (मेघालय): एक रैट-होल खदान में अचानक पानी भर जाने से 15 श्रमिकों की मौत हो गई।
  • दर्ज दुर्घटनाएँ: बार-बार होने वाली घातक घटनाएँ खनन के अंतर्निहित जोखिमों को उजागर करती हैं।

कानूनी स्थिति और निरंतरता

  • नियामक प्रतिबंध: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 2014 में रैट-होल खनन पर प्रतिबंध लगाया।
  • भूमि स्वामित्व की धारणा: छठी अनुसूची के तहत मेघालय में भूमि मालिक यह मानते हैं कि उनकी भूमि के नीचे के खनिज उनके स्वामित्व में हैं (भारत के अन्य हिस्सों के विपरीत, जहाँ खनिज राज्य के होते हैं), जिसके कारण निजी और अनियमित/अवैध खनन का संचालन होता है।
  • अवैध कोयला लॉन्ड्रिंग: अवैध रूप से निकाले गए कोयले को अक्सर “लीगेसी कोल” (नियामक प्रतिबंधों या लाइसेंसिंग ढाँचों से पहले निकाला गया कोयला) के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, ताकि प्रवर्तन से बचा जा सके।

प्रतिबंध विफल होने के कारण

  • आर्थिक निर्भरता: वर्ष 2014 के प्रतिबंध के बावजूद, सीमित वैकल्पिक रोजगार वाले कोयला-समृद्ध क्षेत्रों में आजीविका पर उच्च निर्भरता के कारण रैट-होल खनन जारी है।
  • विखंडित जवाबदेही: भूमि मालिकों, ठेकेदारों और उप-ठेकेदारों की परतदार व्यवस्थाएँ जिम्मेदारी को बाँट देती हैं, जिससे प्रवर्तन और दायित्व कमजोर पड़ जाते हैं।
    • दुर्घटनाओं के बाद ठेकेदार भाग जाते हैं, जबकि भूमि के मालिक खनन गतिविधियों के बारे में जानकारी होने से इनकार करते हैं।
  • अनौपचारिक श्रम प्रथाएँ: कामगारों को औपचारिक अभिलेखों से बाहर रखा जाता है, जिससे दुर्घटनाओं की कम रिपोर्टिंग होती है और श्रम व सुरक्षा नियमों से बचा जाता है।
  • उल्लंघनों का दमन: भय, दबाव और स्थानीय शक्ति असमानताओं के कारण चोटें, बाल श्रम और पर्यावरणीय क्षति की अधिकांशतः रिपोर्ट नहीं हो पाती हैं।

शासन और प्रवर्तन संबंधित खामियाँ

  • आपूर्ति-श्रृंखला की अपारदर्शिता: एक बार अवैध रूप से निकाला गया कोयला परिवहन और व्यापार नेटवर्क में प्रवेश कर जाता है, तो वह वैध स्रोतों से प्राप्त कोयले से इसे अलग पहचान/कर पाना कठिन हो जाता है।
  • कमज़ोर निगरानी तंत्र: कमज़ोर निगरानी और वेरिफिकेशन सिस्टम की वजह से अवैध तरीके से खनन और सामान की आवाजाही जारी रहती है।
  • प्रशासनिक शिथिलता: प्रशासन के कई स्तरों पर सहनशीलता प्रवर्तन और अनुपालन को कमजोर करती है।
  • संरक्षण (Patronage) नेटवर्क: स्थानीय राजनीतिक–आर्थिक संबंध अवैध संचालकों को संरक्षण प्रदान करते हैं, जिससे MMDR अधिनियम (खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1957) सहित मौजूदा कानूनों का निवारक प्रभाव कमजोर हो जाता है।

पर्यावरणीय और सामाजिक लागत

  • जल प्रदूषण: एसिड माइन ड्रेनेज नदियों को प्रदूषित करता है, जिससे जल गुणवत्ता और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र क्षतिग्रस्त होते हैं।
  • बाल श्रम: संकरी सुरंगें बच्चों के रोजगार को आसान बनाती हैं, जो घरेलू गरीबी से प्रेरित होता है।

आगे की राह

  • GPS-आधारित परिवहन निगरानी: कोयला ट्रकों की ट्रैकिंग कर मार्ग अनुपालन सुनिश्चित करना और अनधिकृत खेपों को अमान्य करना।
  • ड्रोन और उपग्रह निगरानी: केंद्रीकृत डेटा ट्रांसमिशन के साथ खनन क्षेत्रों की वास्तविक समय निगरानी।
  • समुदाय-आधारित पर्यवेक्षण: अवैध खनन और परिवहन की स्थानीय रिपोर्टिंग को प्रोत्साहन देना।
  • मांग-पक्ष विनियमन: अवैध खदानों से कोयला खरीदने वाले खरीदारों को ब्लैकलिस्ट करना और भविष्य की नीलामी पात्रता रद्द करना।
  • नौकरशाही स्थानांतरण: सांठगांठ/मिली भगत के जोखिम को कम करने के लिए फील्ड अधिकारियों का नियमित स्थानांतरण।
  • आजीविका विविधीकरण: अवैध खनन के आर्थिक कारणों से निपटने के लिए वैकल्पिक रोजगार अवसरों का विस्तार करना।

निष्कर्ष

रैट-होल खनन को केवल प्रवर्तन का मुद्दा मानना इस प्रथा को और भूमिगत करने का जोखिम उत्पन्न करता है। सतत समाधान के लिए नियमन, आजीविका सृजन, प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी और संस्थागत जवाबदेही का समन्वय आवश्यक है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: मेघालय में रैट-होल खनन पर्यावरण संरक्षण और आजीविका पर निर्भरता के बीच जटिल अंतःक्रिया को दर्शाता है। नियामक प्रतिबंधों के बावजूद अवैध खनन की निरंतरता के लिए जिम्मेदार कारकों का विश्लेषण कीजिए। प्रभावित समुदायों की आर्थिक सुरक्षा के साथ पारिस्थितिक स्थिरता को संतुलित करने हेतु उपाय सुझाइए।

(10 अंक, 150 शब्द)

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