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Lokesh Pal
July 11, 2026 03:35
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हाल ही में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गांधीनगर के एक अध्ययन में पाया गया कि पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास एवं सतलुज) के जलग्रहण क्षेत्रों में वर्ष 1951 से 2024 के मध्य वर्षा में लगभग 20% की कमी दर्ज की गई है। यह अध्ययन वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करता है कि जलवायु परिवर्तन ने सिंधु नदी बेसिन में जल उपलब्धता को उल्लेखनीय रूप से प्रभावित किया है।
भारत का तर्क है कि निम्नलिखित कारणों से संधि की समीक्षा एवं संशोधन आवश्यक है:
वर्ष 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को “स्थगित” घोषित कर दिया तथा स्पष्ट किया कि यह स्थिति तब तक बनी रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमापार आतंकवाद को पूर्णतः समाप्त नहीं करता है।
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