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संक्षिप्त समाचार

Lokesh Pal July 11, 2026 03:50 7 0

ऑस्ट्रेलिया से भारतीय प्राचीन धरोहरों का भारत में प्रत्यावर्तन

 

हाल ही में आयोजित भारत–ऑस्ट्रेलिया तीसरे वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने भारत को तीन प्राचीन पुरावस्तुओं (Antiquities) के सांस्कृतिक प्रत्यावर्तन (Cultural Repatriation) की घोषणा की है।

  • पारस्परिक सद्भावना (Reciprocal Gesture) के एक विशिष्ट उदाहरण के रूप में, भारत, चेन्नई के सरकारी संग्रहालय में संरक्षित ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी समुदाय के एक पूर्वज के पार्थिव अवशेष ऑस्ट्रेलिया को वापस करेगा।

प्रमुख घटनाक्रम

  • वापस की गई पुरावस्तुएँ: 11वीं–12वीं शताब्दी की नंदी की प्रतिमा, माँ भद्रकाली का त्रिशूल तथा षडानन (छह मुखों वाली) कार्तिकेय भगवान की प्रतिमा।
  • वर्तमान संरक्षण: ये पुरावस्तुएँ नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया तथा आर्ट गैलरी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (NSW) में संरक्षित हैं।
  • पारस्परिक सद्भावना का कदम: भारत वर्ष 1935 से चेन्नई के सरकारी संग्रहालय में संरक्षित ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी (First Nations) के एक पूर्वज के पार्थिव अवशेष ऑस्ट्रेलिया को वापस करेगा।
  • सांस्कृतिक संपदा की वापसी: भारत–ऑस्ट्रेलिया पारस्परिक विधिक सहायता संधि (MLAT) के अंतर्गत ऑस्ट्रेलिया ने चोल काल की तीन पुरावस्तुएँ भारत को लौटाईं, इससे सांस्कृतिक संपदा की अवैध तस्करी रोकने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग और मजबूत हुआ ।
  • भारत–ऑस्ट्रेलिया पारस्परिक विधिक सहायता संधि (MLAT)
    • यह आपराधिक जाँच, अभियोजन एवं न्यायिक कार्यवाहियों में पारस्परिक विधिक सहायता प्रदान करने हेतु एक कानूनी ढाँचा प्रदान करती है।
    • यह साक्ष्यों के आदान-प्रदान, तलाशी एवं जब्ती संबंधी अनुरोधों के निष्पादन, अपराध से अर्जित संपत्तियों का पता लगाने एवं उनकी पुनर्प्राप्ति, तथा दस्तावेजों एवं गवाहों के हस्तांतरण को सुगम बनाती है।
    • यह संधि अवैध रूप से तस्करी की गई सांस्कृतिक संपदा एवं अन्य आपराधिक परिसंपत्तियों की पहचान, जब्ती, अधिहरण (Forfeiture) तथा प्रत्यावर्तन (Repatriation) में भी सहयोग प्रदान करती है।
    • हाल ही में ऑस्ट्रेलिया से भारत को चोल काल की तीन पुरावस्तुओं का प्रत्यावर्तन MLAT के अंतर्गत किया गया, जो पुरावस्तुओं की अवैध तस्करी से निपटने में इस संधि की महत्त्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

भारतीय पुरावस्तुओं का पूर्व प्रत्यावर्तन

  • वर्ष 2014 से अब तक भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम तथा कनाडा सहित विभिन्न देशों से 600 से अधिक पुरावस्तुओं को वापस प्राप्त किया है।
  • प्रत्यावर्तित (वापस लाई गई) अनेक पुरावस्तुएँ चोल, विजयनगर, गुप्त तथा कुषाण काल से संबंधित हैं।
  • हाल के वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को सर्वाधिक संख्या में भारतीय पुरावस्तुएँ वापस लौटाई हैं।

तीनों पुरावस्तुओं के बारे में

पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार, 100 वर्ष या उससे अधिक पुरानी मूर्ति, चित्रकला, पांडुलिपि, अभिलेख (Epigraph) अथवा अन्य कलाकृति को पुरावस्तु (Antiquity) माना जाता है।

  • नंदी की पाषाण प्रतिमा (11वीं–12वीं शताब्दी): नंदी, भगवान शिव के पवित्र वृषभ तथा वाहन हैं, जो शक्ति, भक्ति एवं धर्मनिष्ठा के प्रतीक हैं।
    • परंपरागत रूप से नंदी की प्रतिमा शिव मंदिरों के गर्भगृह की ओर मुख करके स्थापित की जाती है।
  • भद्रकाली युक्त धातु त्रिशूल (11वीं शताब्दी): त्रिशूल, भगवान शिव का प्रमुख आयुध तथा दैवीय शक्ति का प्रतीक है।
    • भद्रकाली, देवी पार्वती का उग्र स्वरूप हैं, जिन्हें अधर्म एवं अन्याय से रक्षा करने वाली तथा शक्ति (दैवी स्त्री ऊर्जा) के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।
    • मूल मंदिर: श्री काशी विश्वनाथ स्वामी मंदिर, कोल्लुमंगुडी, तिरुवारूर जिला (तमिलनाडु)।
  • षडानन (छह मुखों वाली) कार्तिकेय की पाषाण प्रतिमा (12वीं शताब्दी): कार्तिकेय (मुरुगन/स्कंद), भगवान शिव एवं पार्वती के पुत्र तथा युद्ध के देवता हैं। उन्हें प्रायः छह मुखों (षण्मुख) के साथ दर्शाया जाता है, जो ज्ञान, वीरता एवं सर्वज्ञता के प्रतीक हैं।
    • तमिलनाडु में प्रमुख रूप से पूजित हैं तथा वे अरुपडै वीडु (छह पवित्र धाम) के अधिष्ठाता देवता हैं।
    • मूल मंदिर: नागनाथस्वामी मंदिर, मनम्बाड़ी, तंजावुर, जिसका निर्माण राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल में हुआ था।

ऑस्ट्रेलिया के प्रथम राष्ट्र (Australian First Nations) के पूर्वज

  • पारंपरिक स्वदेशी समुदाय: ऑस्ट्रेलिया के प्रथम राष्ट्र (Australian First Nations) से आशय एबोरिजिनल (Aboriginal) तथा टोरेस स्ट्रेट द्वीपसमूह (Torres Strait Islander) के लोगों से है, जो ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी हैं और जिनकी सांस्कृतिक परंपराएँ 65,000 से अधिक वर्षों से निरंतर चली आ रही हैं।
  • पैतृक अवशेष एवं प्रत्यावर्तन: प्रथम राष्ट्र के लोगों के पैतृक अवशेष (मानव अवशेष/खोपड़ियाँ) को उनकी पवित्र सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है। इन अवशेषों का उनके पारंपरिक संरक्षकों (Traditional Custodians) को प्रत्यावर्तन सांस्कृतिक उपचार (Healing), न्याय, मेल-मिलाप (Reconciliation) तथा स्वदेशी अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

कानूनी ढाँचा

  • भारत
    • पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972: पुरावस्तुओं के निर्यात एवं व्यापार को विनियमित करता है तथा उनकी अवैध तस्करी को रोकता है।
    • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI): पुरावस्तुओं के पंजीकरण एवं संरक्षण के लिए नोडल एजेंसी है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर
    • यूनेस्को अभिसमय, 1970 (UNESCO Convention, 1970)
    • सांस्कृतिक संपदा के अवैध आयात, निर्यात एवं स्वामित्व हस्तांतरण को रोकने के लिए वैश्विक ढाँचा प्रदान करता है तथा तस्करी की गई सांस्कृतिक धरोहरों के प्रत्यावर्तन को सुगम बनाता है।
    • भारत इस अभिसमय का एक राज्य पक्ष (State Party) है।

भारत में कैंसर का बढ़ता बोझ 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वैश्विक कैंसर स्थिति रिपोर्ट 2026 तथा GLOBOCAN के अनुमानों के अनुसार, भारत में लगभग प्रत्येक दस में से एक व्यक्ति को 75 वर्ष की आयु से पहले कैंसर होने का जोखिम है।

प्रमुख बिंदु

  • बढ़ता रोग बोझ: भारत में वर्ष 2022 में 14.1 लाख नए कैंसर मामले तथा 9.17 लाख मौतें दर्ज की गईं। वर्ष 2024 में नए मामलों की संख्या 16 लाख होने का अनुमान है, जो 2050 तक बढ़कर प्रतिवर्ष 28 लाख तक पहुँचने का अनुमान है।
  • प्रमुख जोखिम कारक: जनसंख्या का वृद्ध होना, शहरीकरण, तंबाकू का सेवन (धूम्रपान एवं धूम्ररहित), अस्वास्थ्यकर आहार, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, शराब का सेवन तथा वायु प्रदूषण कैंसर के बढ़ते बोझ के प्रमुख कारण हैं।
  • भारत में प्रमुख कैंसर: स्तन कैंसर सबसे सामान्य कैंसर है, इसके बाद होंठ एवं मुख गुहा, गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल), फेफड़े तथा अन्नप्रणाली (इसोफेगल) के कैंसर का स्थान है।
    • धूम्ररहित तंबाकू के व्यापक उपयोग के कारण मुख कैंसर के मामले विशेष रूप से अधिक हैं।
  • रोकथाम की प्राथमिकताएँ: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार तंबाकू नियंत्रण, HPV टीकाकरण, नियमित जाँच (स्तन, गर्भाशय ग्रीवा एवं मुख कैंसर), स्वस्थ जीवनशैली तथा जन-जागरूकता कैंसर की रोकथाम के सबसे लागत-प्रभावी (Cost-effective) उपाय हैं।

GLOBOCAN के बारे में

  • GLOBOCAN विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की विशिष्ट कैंसर अनुसंधान एजेंसी अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) द्वारा विकसित वैश्विक कैंसर डेटाबेस है।
  • यह देशवार कैंसर की घटनाओं (Incidence), मृत्यु दर (Mortality) एवं प्रसार (Prevalence) के अनुमान उपलब्ध कराता है, जिससे कैंसर निगरानी एवं नीति-निर्माण में सहायता मिलती है।
  • इस डेटाबेस को राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्रियों तथा सांख्यिकीय मॉडलिंग के आधार पर समय-समय पर अद्यतन किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) के बारे में

  • वर्ष 1965 में स्थापित, यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की विशिष्ट कैंसर अनुसंधान एजेंसी है, जो कैंसर के कारणों, रोकथाम एवं प्रारंभिक पहचान पर अनुसंधान करती है।
  • यह IARC मोनोग्राफ कार्यक्रम (IARC Monographs Programme) के माध्यम से कैंसरकारी (Carcinogenic) कारकों का वर्गीकरण करती है, जिसका व्यापक उपयोग कैंसर जोखिम आकलन में किया जाता है।
  • मुख्यालय: ल्योन (Lyon), फ्रांस

कैंसर नियंत्रण हेतु सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड (National Cancer Grid–NCG) (2012): 300 से अधिक कैंसर केंद्रों का नेटवर्क, जो पूरे भारत में मानकीकृत, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण कैंसर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है।
  • आयुष्मान भारत कार्यक्रम (2018): आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से मुख, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की जनसंख्या-आधारित स्क्रीनिंग तथा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के अंतर्गत वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।
  • राष्ट्रीय गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NP-NCD) (2010; 2023 में पुनर्नामित): सामान्य कैंसरों एवं अन्य गैर-संचारी रोगों (NCDs) की स्क्रीनिंग, प्रारंभिक निदान, उपचार एवं प्रबंधन पर केंद्रित है।

भारत में नियोसेप1 (NeoSep1) परीक्षण प्रारंभ 

नवजात शिशुओं में सेप्सिस के उपचार हेतु एंटीबायोटिक संयोजनों का मूल्यांकन करने वाला अंतरराष्ट्रीय नियोसेप1 (NeoSep1) परीक्षण भारत तक विस्तारित किया गया है।

  • पुडुचेरी स्थित जवाहरलाल स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (JIPMER) ने इस अध्ययन के लिए देश के पहले नवजात शिशु का सफलतापूर्वक नामांकन (Enrolment) किया।

नियोसेप1 (NeoSep1) परीक्षण के बारे में

  • यह नवजात शिशुओं में सेप्सिस के उपचार हेतु एंटीबायोटिक संयोजनों का मूल्यांकन करने वाला एक अंतरराष्ट्रीय बहु-देशीय नैदानिक परीक्षण (Multi-country Clinical Trial) है, जिसका उद्देश्य दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए सुरक्षित, प्रभावी एवं सस्ते उपचारों की पहचान करना है।
  • लक्षित नामांकन (Target Enrolment): इस परीक्षण का लक्ष्य वर्ष 2028 तक एशिया एवं अफ्रीका में 3,000 नवजात शिशुओं का नामांकन करना है।
  • परीक्षण की रूपरेखा (Trial Design): इसमें व्यक्तिकृत यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण (Personalised Randomised Controlled Trial – PRACTical) डिजाइन का उपयोग किया जाता है, जिसके माध्यम से विभिन्न एंटीबायोटिक उपचार योजनाओं का मूल्यांकन एवं क्रम निर्धारण (Ranking) किया जाता है।
  • उपचार का चयन (Treatment Selection): यह चिकित्सकों को उनकी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सबसे प्रभावी उपचार चुनने में सहायता करता है।
  • प्रायोजक (Sponsored by): यह परीक्षण ग्लोबल एंटीबायोटिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट पार्टनरशिप (GARDP) द्वारा यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL), सिटी सेंट जॉर्ज, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन तथा पेंटा फाउंडेशन (Penta Foundation) के सहयोग से प्रायोजित किया जा रहा है।
  • पूर्व चरण (भाग–1)
    • अध्ययन के स्थान: दक्षिण अफ्रीका एवं केन्या (2023)।
    • खुराक का प्रमाणीकरण (Dose Validation): अन्य एंटीबायोटिक दवाओं के साथ दवाओं के संयोजन में फॉस्फोमाइसिन (Fosfomycin) एवं फ्लोमॉक्सेफ (Flomoxef) की नवजात शिशुओं के लिए उपयुक्त खुराक का मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण किया गया।
  • प्राथमिक परिणाम (Primary Outcome): 28 दिनों के भीतर मृत्यु।
  • द्वितीयक परिणाम (Secondary Outcomes)
    • रोगियों के उपचार के परिणामों का मूल्यांकन करने के लिए अध्ययन में प्रमुख संकेतकों में 90 दिनों के भीतर मृत्यु, अतिरिक्त एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता, अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि तथा अस्पताल में पुनः भर्ती (री-एडमिशन) की दर को शामिल किया गया। इन संकेतकों के माध्यम से उपचार की प्रभावशीलता, संक्रमण नियंत्रण तथा रोगी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों का आकलन किया गया।

नवजात सेप्सिस (Neonatal Sepsis) के बारे में

  • 90 दिनों से कम आयु के शिशुओं, विशेषकर समयपूर्व (Premature) अथवा कम जन्म-भार (Low Birth Weight) वाले शिशुओं को प्रभावित करने वाला जानलेवा रक्त संक्रमण (Bloodstream Infection)
  • वर्गीकरण
    • जन्मोपरांत प्रारंभिक सेप्सिस  (Early-Onset Sepsis–EOS): जन्म के पहले 72 घंटों के भीतर।
    • विलंबित सेप्सिस (Late-Onset Sepsis–LOS): जन्म के 28–90 दिनों तक।

नवजात सेप्सिस का बोझ

  • वैश्विक स्तर पर
    • प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक मौतों के लिए उत्तरदायी।
    • नवजात मृत्यु का दूसरा सबसे सामान्य कारण।
  • भारत में
    • सभी नवजात मौतों में 30–40% का योगदान।
    • प्रतिवर्ष 2,00,000–2,50,000 रोकी जा सकने वाली मौतों का अनुमान।

भारत में सूक्ष्मजीवविज्ञानी प्रोफाइल (Microbiological Profile)

  • प्रमुख रोगजनक (Predominant Organisms): भारत में ग्राम-निगेटिव (Gram-negative) जीवाणु नवजात सेप्सिस के प्रमुख कारण हैं।
  • बहु-औषधि प्रतिरोध (Multidrug Resistance) प्रदर्शित करने वाले प्रमुख जीवाणु:
    • क्लेब्सिएला न्यूमोनी (Klebsiella pneumoniae) एशेरिशिया कोलाई (Escherichia coli) एसीनेटोबैक्टर (Acinetobacter) प्रजातियाँ स्यूडोमोनास एरुजिनोसा (Pseudomonas aeruginosa)
  • ग्रुप-बी स्ट्रेप्टोकोकस (Group B Streptococcus–GBS) की कम व्यापकता: विकसित देशों में नवजात सेप्सिस का प्रमुख कारण GBS है, जबकि भारत में यह केवल 2–5% मामलों के लिए उत्तरदायी है।

WSIS पुरस्कार 2026

 

हाल ही में दूरसंचार विभाग (DoT) को WSIS पुरस्कार, 2026 में एक्शन लाइन C6 – ‘सक्षम वातावरण’ श्रेणी में ‘समृद्ध ग्राम: भारतनेट-सक्षम एकीकृत फिजिटल सेवा वितरण मॉडल’ पहल के लिए सम्मानित किया गया।

प्रमुख बिंदु

  • वैश्विक मान्यता: यह पुरस्कार जिनेवा में आयोजित WSIS फोरम 2026 में प्रदान किया गया, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में दूरसंचार कनेक्टिविटी को नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवा वितरण के साथ एकीकृत करने के भारत के मॉडल को वैश्विक स्तर पर मान्यता दी गई।

समृद्ध ग्राम (Samriddh Gram) के बारे में

  • भारतनेट (BharatNet) नेटवर्क पर आधारित यह पहल समृद्धि केंद्रों (Samriddhi Kendras) की स्थापना करती है, जो फिजिटल (भौतिक + डिजिटल) सेवाएँ प्रदान करने वाले ग्राम-स्तरीय एकल सेवा केंद्र (One-Stop Centres) के रूप में कार्य करते हैं।
  • प्रदान की जाने वाली सेवाएँ: समृद्धि केंद्रों के माध्यम से टेलीमेडिसिन, हेल्थ एटीएम, प्रधानमंत्री जन औषधि सेवाएँ, स्मार्ट कक्षाएँ, AR/VR-आधारित कौशल विकास, IoT-सक्षम मृदा परीक्षण, ड्रोन-आधारित कृषि, डिजिटल बैंकिंग, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) सेवाएँ, ई-कॉमर्स सहायता तथा PM-WANI कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाती है।
  • भारतनेट की भूमिका: यह पहल भारतनेट की अंतिम छोर (Last-Mile) ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का उपयोग करती है। इसके अंतर्गत 2.17 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को सेवा-तैयार (Service-Ready) एवं ऑनलाइन बनाया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं तक पहुँच सुदृढ़ हुई है।
  • वैश्विक चयन प्रक्रिया: समृद्ध ग्राम ने अंतरराष्ट्रीय स्क्रीनिंग, वैश्विक ऑनलाइन मतदान, शीर्ष पाँच ‘चैंपियन परियोजनाओं’ में चयन तथा WSIS विशेषज्ञ समिति द्वारा अंतिम मूल्यांकन के बाद वैश्विक विजेता (Global Winner) का स्थान प्राप्त किया।

WSIS पुरस्कार (WSIS Prizes) के बारे में

  • WSIS पुरस्कार एक प्रमुख वैश्विक मंच है, जो सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का उपयोग कर सतत् विकास को बढ़ावा देने वाली उत्कृष्ट बहु-हितधारक (Multi-Stakeholder) परियोजनाओं को सम्मानित करता है।
  • प्रारंभ: वर्ष 2012।
  • इसका आयोजन विश्व सूचना समाज शिखर सम्मेलन (WSIS) प्रक्रिया के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के नेतृत्व में किया जाता है।
  • यह उन परियोजनाओं को मान्यता प्रदान करता है, जो सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के माध्यम से सतत् विकास तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में योगदान देती हैं।

एक्शन लाइन C6 – सक्षम वातावरण (Enabling Environment) के बारे में

  • यह WSIS की 11 एक्शन लाइनों में से एक है।
  • इसका उद्देश्य समावेशी एवं सुरक्षित सूचना समाज के निर्माण हेतु सहायक नीतिगत, विधिक, नियामक एवं संस्थागत ढाँचे को बढ़ावा देना है।
  • यह निवेश, नवाचार, सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) तथा सस्ती ICT अवसंरचना को प्रोत्साहित करता है, जिससे डिजिटल कनेक्टिविटी एवं डिजिटल सेवाओं का विस्तार हो सके।

भारतनेट (BharatNet) के बारे में

  • वर्ष 2011 में राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (National Optical Fibre Network–NOFN) के रूप में प्रारंभ किया गया; वर्ष 2015 में इसका नाम बदलकर भारतनेट रखा गया। यह विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी कार्यक्रम है, जिसका क्रियान्वयन दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा किया जा रहा है।
  • इसका उद्देश्य ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से सभी ग्राम पंचायतों को उच्च गति ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है, ताकि ई-गवर्नेंस, डिजिटल सेवाओं तथा ग्रामीण डिजिटल समावेशन को बढ़ावा दिया जा सके।

प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफ़ेस (PM-WANI) के बारे में

  • वर्ष 2020 में प्रारंभ की गई इस पहल का उद्देश्य पब्लिक डेटा ऑफिस (PDOs) के माध्यम से सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट का विस्तार करना है, ताकि बिना लाइसेंस शुल्क के किफायती इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

वर्ल्ड इंटैन्जिबल इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2026 

वर्ल्ड इंटैन्जिबल इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट, 2026 भारत में अमूर्त निवेशों की तीव्र वृद्धि को रेखांकित करती है तथा वैश्विक नवाचार महाशक्ति के रूप में भारत के उभरती प्रवृत्ति की पुनः पुष्टि करती है।

प्रमुख बिंदु

  • सर्वाधिक तीव्र वृद्धि: भारत ने विश्व की 15 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अमूर्त निवेश (Intangible Investment) में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की। वर्ष 2023 में यह निवेश 78.2 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा, जिसमें 7.9% वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।
  • भारत के अमूर्त निवेश की संरचना (2023)
    • सॉफ्टवेयर एवं डेटाबेस: कुल अमूर्त निवेश का लगभग 45% (रिपोर्ट में शामिल अर्थव्यवस्थाओं में सर्वाधिक हिस्सा)।
    • संगठनात्मक पूँजी (Organisational Capital): 21.8%।
    • ब्रांड: 9.3%।
  • ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण: भारत में अमूर्त निवेश की वृद्धि मूर्त निवेश (Tangible Investment) की तुलना में अधिक रही, जो ज्ञान-आधारित एवं नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण को दर्शाती है।
  • प्रमुख निवेश क्षेत्र: सॉफ्टवेयर, अनुसंधान एवं विकास (R&D), बौद्धिक संपदा (IP), नवाचार, डेटा तथा संगठनात्मक क्षमताओं में निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
  • वृद्धि के प्रमुख कारक: रिपोर्ट के अनुसार, भारत के युवा नवप्रवर्तक, स्टार्ट-अप, डिजिटल परिवर्तन, नीतिगत सुधार तथा विस्तारित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र इस वृद्धि के प्रमुख प्रेरक रहे हैं।
  • आर्थिक महत्त्व: अमूर्त निवेश में वृद्धि से उत्पादकता, प्रतिस्पर्द्धात्मकता, तकनीकी प्रगति तथा दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।
  • वैश्विक मान्यता: यह रिपोर्ट भारत को विश्व की सर्वाधिक तीव्र गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक तथा नवाचार एवं ज्ञान-आधारित उद्योगों के उभरते वैश्विक केंद्र के रूप में पुनः स्थापित करती है।

वर्ल्ड इंटैन्जिबल इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट के बारे में

  • जारीकर्ता: विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) तथा लुइस बिजनेस स्कूल (इटली)।
  • यह रिपोर्ट अमूर्त परिसंपत्तियों (Intangible Assets) में होने वाले निवेश का आकलन करती है, जो वर्तमान समय में आर्थिक विकास, नवाचार एवं उत्पादकता के प्रमुख प्रेरक बनते जा रहे हैं।
  • यह प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में निवेश की प्रवृत्तियों की तुलना कर ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर हो रहे संक्रमण का मूल्यांकन करती है।

मूर्त निवेश (Tangible Investment) बनाम अमूर्त निवेश (Intangible Investment)

  • मूर्त निवेश (Tangible Investment)
    • ऐसे भौतिक परिसंपत्तियों पर किया गया व्यय है, जिनका स्पर्शीय एवं संरचनात्मक स्वरूप होता है। उदाहरण: विनिर्माण संयंत्र, भारी औद्योगिक मशीनरी, आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) तथा वाणिज्यिक भवन।
  • अमूर्त निवेश (Intangible Investment):
    • ऐसी अभौतिक परिसंपत्तियों में निवेश, जो दीर्घकाल में आर्थिक मूल्य का सृजन करती हैं।
    • इसमें सॉफ्टवेयर, डेटाबेस, अनुसंधान एवं विकास (R&D), पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, ब्रांडिंग, डिजाइन, संगठनात्मक पूँजी तथा कार्यबल कौशल में किया गया निवेश शामिल है।

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) के बारे में

  • विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO), संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशिष्ट एजेंसी (Specialized Agency) है, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से विश्वभर में बौद्धिक संपदा (Intellectual Property-IP) के संरक्षण एवं संवर्द्धन को बढ़ावा देती है।
  • यह 26 अंतरराष्ट्रीय संधियों का प्रशासन करता है, जिनमें पेटेंट सहयोग संधि (Patent Cooperation Treaty-PCT) तथा ट्रेडमार्क के लिए मैड्रिड प्रणाली (Madrid System) प्रमुख हैं।
  • स्थापना: वर्ष 1967।
  • मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड।

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