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एथिलीन ग्लाइकोल (EG) एवं डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG)

Lokesh Pal June 26, 2026 02:30 7 0

संदर्भ

भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC) ने औषधि सुरक्षा एवं गुणवत्ता नियंत्रण को सुदृढ़ करने के लिए मौखिक तरल औषधियों में एथिलीन ग्लाइकोल (EG) तथा डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) का गैस क्रोमैटोग्राफी आधारित जाँच हेतु एक विशेषीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।

  • गैस क्रोमैटोग्राफी एक विश्लेषणात्मक तकनीक है, जिसका उपयोग वाहक गैस की सहायता से किसी मिश्रण के वाष्पशील अवयवों को एक स्तंभ से प्रवाहित करके उनका पृथक्करण, पहचान तथा परिमाण निर्धारण करने के लिए किया जाता है।

भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC)

  • भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है, जो भारत में विपणन की जाने वाली औषधियों के लिए आधिकारिक गुणवत्ता मानक निर्धारित करने के लिए उत्तरदायी है।
  • नोडल मंत्रालय: IPC स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के अधीन कार्य करता है तथा इसका मुख्यालय गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में स्थित है।
  • वैधानिक स्थिति: IPC द्वारा निर्धारित मानक औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अंतर्गत कानूनी रूप से प्रवर्तनीय हैं।
  • प्रमुख भूमिकाएँ
    • भारतीय भेषज संहिता (IP) प्रकाशित करता है, जिसमें औषधियों की पहचान, शुद्धता तथा सामर्थ्य के मानक निर्दिष्ट किए जाते हैं।
    • राष्ट्रीय औषध सूची (NFI) प्रकाशित करता है, ताकि औषधियों के युक्तिसंगत उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
    • भारत के औषधि सतर्कता कार्यक्रम (PvPI) तथा भारत के चिकित्सा उपकरण सतर्कता कार्यक्रम (MvPI) के राष्ट्रीय समन्वय केंद्र के रूप में कार्य करता है।
    • भारतीय औषध संहिता संदर्भ मानक (IPRS) का विकास एवं आपूर्ति गुणवत्ता परीक्षण के लिए करता है तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का संचालन करता है।

एथिलीन ग्लाइकोल (EG) के बारे में

  • एथिलीन ग्लाइकोल (CHO) एक रंगहीन, गंधहीन, मीठे स्वाद वाला औद्योगिक अल्कोहल है, जो मनुष्यों के लिए अत्यधिक विषैला है तथा औषधीय निर्माणों में इसका उपयोग प्रतिबंधित है।
  • पेट्रोरसायन उत्पादन: EG का उत्पादन मुख्यतः पेट्रोलियम-आधारित कच्चे पदार्थों से प्राप्त एथिलीन ऑक्साइड के जलयोजन द्वारा किया जाता है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • रासायनिक प्रकृति: EG सबसे सरल एलिफैटिक डायोल है, जिसकी जल में उच्च घुलनशीलता तथा कम वाष्पशीलता होती है।
    • विषाक्त क्षमता: इसकी अल्प मात्रा भी गंभीर विषाक्तता, तीव्र वृक्क क्षति तथा मृत्यु का कारण बन सकती है।
    • लागत लाभ: औषधीय-ग्रेड विलायकों की तुलना में इसकी कम लागत इसे आकस्मिक अथवा जानबूझकर किए गए प्रतिस्थापन के प्रति संवेदनशील बनाती है।
  • अनुप्रयोग
    • एंटीफ्रीज उद्योग: EG का व्यापक रूप से ऑटोमोबाइल शीतलक तथा एंटीफ्रीज निर्माणों में उपयोग किया जाता है।
    • पॉलिएस्टर निर्माण: यह पॉलिएस्टर रेशों तथा PET बोतलों के उत्पादन में एक प्रमुख कच्चे पदार्थ के रूप में कार्य करता है।
    • औद्योगिक विलायक: EG का उपयोग हाइड्रॉलिक द्रवों, पेंट, स्याही तथा रासायनिक प्रसंस्करण उद्योगों में किया जाता है।

डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) के बारे में

  • डाइएथिलीन ग्लाइकोल (CH₁₀O) एक रंगहीन, गंधहीन औद्योगिक विलायक है, जो ईथर बंध के माध्यम से दो एथिलीन ग्लाइकोल अणुओं के योग से निर्मित होता है।
  • उप-उत्पाद निर्माण: DEG का उत्पादन एथिलीन ऑक्साइड के जलयोजन की प्रक्रिया के माध्यम से एथिलीन ग्लाइकोल के निर्माण के दौरान उप-उत्पाद के रूप में होता है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • रासायनिक संरचना: DEG में एथिलीन ग्लाइकोल की तुलना में अधिक श्यानता तथा उच्च क्वथनांक होता है।
    • औद्योगिक उपयोगिता: यह एक प्रभावी विलायक तथा आर्द्रता-अवशोषक के रूप में कार्य करता है।
    • औषधीय जोखिम: सहायक पदार्थों में DEG का संदूषण विश्वभर में औषधियों से संबंधित अनेक मौतों का कारण बना है।
  • अनुप्रयोग
    • वस्त्र उद्योग: DEG का उपयोग वस्त्र स्नेहकों तथा अनुकूलन कारकों में किया जाता है।
    • गैस प्रसंस्करण: इसका उपयोग प्राकृतिक गैस के निर्जलीकरण के लिए किया जाता है।
    • औद्योगिक विलायक: DEG का उपयोग रेजिन, रंजकों तथा मुद्रण स्याही में किया जाता है।

मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव

  • तीव्र वृक्क क्षति (AKI): EG तथा DEG के उपापचयी उत्पाद ऐसे विषैले यौगिक बनाते हैं, जो गुर्दों की नलिकाओं को क्षति पहुँचाकर वृक्क विफलता उत्पन्न करते हैं।
  • तंत्रिका विषाक्तता: इसके संपर्क में आने से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का अवसाद, दौरे, कोमा तथा मृत्यु हो सकती है।
  • जनस्वास्थ्य के लिए खतरा: EG/DEG से संदूषित कफ सिरप तथा मौखिक औषधियों के कारण कई देशों में बच्चों की मृत्यु हुई है, जो कठोर औषधीय विनियमन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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