100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

जीन ड्राइव: मलेरिया का उपचार

Lokesh Pal April 21, 2026 03:50 7 0

संदर्भ

नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जो इफाकारा हेल्थ इंस्टिट्यूट (तंजानिया) और इंपीरियल कॉलेज, लंदन के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया, ने प्रदर्शित किया कि आनुवंशिक रूप से संशोधित (जेनेटिकली मॉडिफाइड) मच्छर अफ्रीकी परिस्थितियों में मलेरिया परजीवियों के विकास को अवरुद्ध कर सकते हैं।

संबंधित तथ्य

  • यह ‘ट्रांसमिशन जीरो’ (Transmission Zero) पहल का हिस्सा है, जो जीन-ड्राइव मच्छरों के व्यावहारिक उपयोग की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

जीन ड्राइव के बारे में

  • जीन ड्राइव एक उन्नत आनुवंशिक अभियांत्रिकी तकनीक है, जो किसी विशिष्ट जीन के पक्षपाती (biased) वंशानुक्रम को सुनिश्चित करती है।
  • यह किसी जीन को पीढ़ियों के माध्यम से किसी जनसंख्या में तेजी से फैलने में सक्षम बनाती है।

जीन ड्राइव के प्रकार

  • जनसंख्या दवाब (Population Suppression): इस प्रकार के जीन ड्राइव, उन जीनों को बाधित करते हैं, जो मादा मच्छरों के विकास या प्रजनन क्षमता के लिए आवश्यक होते हैं।
    • जैसे-जैसे यह ड्राइव प्रसारित होता है, अधिक मादाएँ बाँझ हो जाती हैं, जिससे मच्छरों की आबादी कम हो जाती है या समाप्त हो सकती है।
  • जेनिटिकली मॉडिफाइड: इस प्रकार के जीन ड्राइव का उद्देश्य जीवों को समाप्त किए बिना उनमें परिवर्तन करना होता है।
    • ये ऐसे आनुवंशिक परिवर्तन लाते हैं, जो जीव की रोग फैलाने की क्षमता को कम कर देते हैं।
    • उदाहरण के लिए, मच्छरों को आनुवंशिक रूप से इस प्रकार बदला जा सकता है कि वे मलेरिया परजीवी को संचारित करने में असमर्थ हों, जिससे मच्छरों की संख्या घटाए बिना रोग नियंत्रण संभव हो सके।

जीन ड्राइव कैसे कार्य करते हैं?

  • सामान्यतः किसी जीव में किसी विशिष्ट जीन के संतानों में जाने की संभावना लगभग 50 प्रतिशत होती है।
    • जीन ड्राइव इस नियम को बदल देता है।
  • जीन-संपादन उपकरण CRISPR–Cas9 का उपयोग करके वैज्ञानिक एक ऐसा आनुवंशिक तंत्र तैयार करते हैं, जो प्रजनन के दौरान अपने आप को दूसरे समजात गुणसूत्र पर प्रतिलिपि तैयार कर लेता है।
  • इसके परिणामस्वरूप आधे से अधिक संतानों में संशोधित जीन पहुँच जाता है, जो अक्सर 90 प्रतिशत से भी अधिक होता है।
  • कई पीढ़ियों के दौरान यह पक्षपाती वंशानुक्रम किसी जनसंख्या में उस जीन को बहुत तेजी से फैलने में सक्षम बनाता है।

चुनौतियाँ

  • परजीवी-रोधी जीनों के प्रभावी डिजाइन में कठिनाई: प्रभावी जीनों का विकास करना जटिल है क्योंकि मलेरिया परजीवी (जैसे- प्लाज्मोडियम द्वारा होने वाला मलेरिया) के जीवन-चक्र के कई चरण होते हैं और उसमें अनुकूलन क्षमता पाई जाती है।
    • उदाहरण: प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम के किसी एक स्ट्रेन के विरुद्ध प्रभावी जीन किसी अन्य वैरिएंट पर विफल हो सकता है, जिसके लिए संयुक्त रणनीतियों की आवश्यकता पड़ती है।
  • परजीवी प्रतिरोध का जोखिम: जैसे परजीवी ने एंटी-मलेरियल दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित किया है, वैसे ही वह आनुवंशिक रूप से संशोधित मच्छरों की रक्षा प्रणाली को भी नियंत्रित करने के तरीके विकसित कर सकता है।
    • उदाहरण: यदि मच्छर एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड्स उत्पन्न करते हैं, तो समय के साथ परजीवी इन अणुओं में जीवित रहने के लिए उत्परिवर्तन कर सकता है।
  • पारिस्थितिकी चिंताएँ: मच्छरों की आबादी में परिवर्तन या उनका दमन खाद्य शृंखला को प्रभावित कर सकता है, जिससे उन पर निर्भर शिकारी जीव जैसे मछलियाँ, पक्षी और उभयचर प्रभावित हो सकते हैं।
    • उदाहरण: एनोफिलीज गैम्बिए की बड़े पैमाने पर कमी अफ्रीकी आर्द्रभूमियों में कीटभक्षी प्रजातियों को अनजाने में प्रभावित कर सकती है।
  • नैतिक चिंता – जीन ड्राइव की अपरिवर्तनीयता: एक बार उत्पन्न होने के बाद जीन ड्राइव तेजी से सीमाओं के पार प्रसारित हो सकते हैं और इन्हें वापस लेना कठिन या असंभव हो सकता है।
  • मजबूत नियामक ढाँचों की आवश्यकता: सुरक्षा मूल्यांकन, जोखिम प्रबंधन और सीमापार प्रभावों के नियंत्रण के लिए मजबूत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नियमों की आवश्यकता है।
    • उदाहरण: जीन-ड्राइव रिलीज को मंजूरी देने से पहले देशों को वैसी ही जैव-सुरक्षा नीतियाँ अपनानी पड़ सकती हैं, जैसी आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों पर लागू होती हैं।
  • समुदाय की सहमति और भागीदारी की आवश्यकता: जनस्वीकृति अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ परीक्षण किए जा सकते हैं। स्थानीय समुदायों को निर्णय प्रक्रिया में सूचित और शामिल किया जाना चाहिए।
    • उदाहरण: तंजानिया में ट्रांसमिशन जीरो’ जैसी पहलों के अंतर्गत किसी भी संभावित क्षेत्रीय परीक्षण से पहले सामुदायिक परामर्श पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

आगे की राह

  • स्व-सीमित एवं प्रतिवर्ती जीन ड्राइव का विकास: भविष्य के अनुसंधान में ऐसे जीन ड्राइव के डिजाइन पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, जो अपनी प्रसार क्षमता को सीमित कर सकें या यदि कोई अनपेक्षित परिणाम उत्पन्न हों तो उन्हें समाप्त किया जा सके।
  • मलेरिया नियंत्रण की मौजूदा रणनीतियों के साथ एकीकरण: जीन ड्राइव को पारंपरिक उपायों का प्रतिस्थापन नहीं बल्कि पूरक होना चाहिए, जैसे कीटनाशक-युक्त मच्छरदानी, टीके, मलेरिया-रोधी दवाएँ और रोग निगरानी प्रणाली।
    • भले ही जेनिटिकली मॉडिफाइड एनोफिलीज गैम्बिए मच्छर संक्रमण को कम कर दें, फिर भी उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में मच्छरदानी आवश्यक बनी रहेगी।
  • कठोर पारिस्थितिकी जोखिम मूल्यांकन: पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और गैर-लक्षित प्रजातियों पर संभावित प्रभावों का आकलन करने के लिए व्यापक और दीर्घकालिक अध्ययन किए जाने चाहिए, इससे पहले कि किसी क्षेत्र में जीन ड्राइव को लागू किया जाए।
    • नियंत्रित क्षेत्रीय परीक्षण और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन यह अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं कि जीन ड्राइव खाद्य शृंखलाओं को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।
  • वैश्विक सहयोग और शासन तंत्र को बढ़ावा: चूँकि जीन ड्राइव राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर सकते हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, साझा नियमों और नैतिक दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है।
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन और जैव विविधता पर कन्वेंशन जैसे मंच वैश्विक मानक तथा निगरानी ढाँचे विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मलेरिया के बारे में 

  • मलेरिया एक जीवन-घातक परजीवी जनित रोग है, जो प्लाज्मोडियम प्रजातियों के कारण होता है।
  • यह मनुष्यों में संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है।
  • कारक परजीवी: मनुष्यों को संक्रमित करने वाली प्रमुख प्रजातियाँ:
    • प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम (सबसे गंभीर, सर्वाधिक मृत्यु दर)
    • प्लाज्मोडियम वाइवैक्स (व्यापक रूप से पाया जाने वाला, पुनरावृत्ति करने वाला)
    • पी. मलेरी, पी. ओवेल, पी. नोलेसी।
  • लक्षण: सामान्य लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, पसीना आना, मतली शामिल हैं।
    • गंभीर मलेरिया में रक्ताल्पता, मस्तिष्कीय मलेरिया, अंग विफलता और मृत्यु तक हो सकती है।
  • संचरण चक्र: परजीवी मानव (यकृत एवं लाल रक्त कोशिकाएँ) और मच्छर वाहक के बीच में रहता है।
    • मानव-से-मानव प्रत्यक्ष संचरण नहीं होता है, केवल दुर्लभ मामलों जैसे रक्त आधान में हो सकता है।
  • भौगोलिक वितरण: यह उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में स्थानिक है, विशेषकर उप-सहारा अफ्रीका, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में।
  • मलेरिया के लिए WHO वैश्विक तकनीकी रणनीति 2016–2030: इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक मलेरिया के मामलों की घटनाओं और मृत्यु दर को कम-से-कम 90 प्रतिशत तक कम करना है।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.