100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन

Lokesh Pal March 14, 2026 02:46 113 0

संदर्भ

भारत के राष्ट्रपति ने नई दिल्ली में कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन (GCWAS-2026) के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।

संबंधित तथ्य 

  • राष्ट्रपति ने जन, ग्रह (पृथ्वी), समृद्धि, शांति और साझेदारी की वैश्विक प्राथमिकता पर बल दिया और इस बात पर जोर दिया कि लैंगिक समानता सतत विकास और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए केंद्रीय होनी चाहिए।
  • संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ घोषित किया है।
    • इस घोषणा में कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में लैंगिक असमानताओं को दूर करने और महिलाओं के लिए नेतृत्व की भूमिकाओं को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया गया है।

कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन (GCWAS-2026) के बारे में

  • कृषि विज्ञान संवर्द्धन ट्रस्ट (TAAS), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान सलाहकार समूह (CGIAR) और पौध किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण प्राधिकरण (PPV एंड FRA) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित।
  • उद्देश्य
    • नीतिगत ढाँचों और पारिस्थितिक तंत्रों को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श करना ताकि लैंगिक भागीदारी को मुख्यधारा में लाया जा सके।
    • सतत और समावेशी कृषि-खाद्य प्रणालियों के निर्माण में महिलाओं की अपरिहार्य भूमिका को उजागर करना।

कृषि-खाद्य प्रणालियों के बारे में

  • खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, कृषि-खाद्य प्रणालियों को उन सभी परस्पर जुड़ी गतिविधियों और हितधारकों के रूप में परिभाषित किया जाता है जो भोजन को खेत से लेकर थाली तक पहुँचाने में शामिल होते हैं।
    • इसमें कृषि उत्पादन और प्रसंस्करण से लेकर वितरण, उपभोग और अपशिष्ट प्रबंधन तक सब कुछ शामिल है।
  • कृषि-खाद्य प्रणाली दिवस प्रत्येक वर्ष 5 दिसंबर को मनाया जाता है।

कृषि-खाद्य प्रणालियों के प्रमुख घटक

  • कृषि उत्पादन: फसलों की खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और वानिकी।
    • उदाहरण: भारत-गंगा के मैदान में चावल और गेंहूँ की खेती।
  • इनपुट आपूर्ति: कृषि में प्रयुक्त बीज, उर्वरक, सिंचाई, मशीनरी और प्रौद्योगिकी की आपूर्ति।
    • उदाहरण: भारत में हरित क्रांति के दौरान उच्च गुणवत्ता वाले बीजों और उर्वरकों का उपयोग।
  • प्रसंस्करण और मूल्यवर्द्धन: कच्चे कृषि उत्पादों को प्रसंस्कृत या पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में परिवर्तित करना।
    • उदाहरण: अमूल द्वारा दूध को डेयरी उत्पादों में संसाधित करना।
  • भंडारण और परिवहन: फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स सिस्टम।
    • उदाहरण: भारतीय खाद्य निगम द्वारा अनाज का भंडारण।
  • वितरण और विपणन: थोक बाजार, खुदरा प्रणाली और निर्यात नेटवर्क जिनके माध्यम से भोजन उपभोक्ताओं तक पहुँचता है।
    • उदाहरण: ई-एनएएम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) के माध्यम से कृषि विपणन।
  • उपभोग और पोषण: जनसंख्या के बीच आहार पैटर्न और भोजन तक पहुँच।
    • उदाहरण: सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से खाद्य वितरण।

कृषि-खाद्य प्रणालियों का महत्व

  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना: कृषि-खाद्य प्रणालियाँ जनसंख्या के लिए खाद्य उपलब्धता और सुलभता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
    • उदाहरण के लिए: भारत में, वर्ष 2023-24 में खाद्यान्न उत्पादन 33 करोड़ टन से अधिक रहा, जिससे 14 लाख से अधिक लोगों की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा किया जा सका।
  • आजीविका का प्रमुख स्रोत: कृषि और संबंधित गतिविधियाँ जनसंख्या के एक बड़े हिस्से को रोजगार प्रदान करती हैं।
    • नीति आयोग के अनुसार, भारत के लगभग 45-46% कार्यबल कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
  • अर्थव्यवस्था में योगदान: कृषि-खाद्य क्षेत्र राष्ट्रीय आय में महत्वपूर्ण योगदान देता है। कृषि और संबद्ध क्षेत्र भारत के सकल मूल्यवर्द्धित (GVA) का लगभग 18% हिस्सा हैं।
  • ग्रामीण विकास को गति प्रदान करना: कृषि-खाद्य क्षेत्र ग्रामीण अवसंरचना, बाजारों और लघु उद्यमों को सहयोग प्रदान करता है।
    • उदाहरण के लिए: प्रधानमंत्री की सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिककरण योजना जैसे कार्यक्रम मूल्यवर्धन और ग्रामीण खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देते हैं।
  • कृषि व्यापार और निर्यात को प्रोत्साहन: कृषि-खाद्य प्रणालियाँ निर्यात आय में योगदान देती हैं।
    • उदाहरण के लिए: कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के प्रयासों से भारत का कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात वर्ष 2022-23 में 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया।

कृषि-खाद्य प्रणालियों में चुनौतियाँ

  • जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय तनाव: बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और बार-बार होने वाली चरम मौसमी घटनाएँ कृषि उत्पादकता को कम कर रही हैं और खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल रही हैं।
    • उदाहरण के लिए: लू और अनियमित मानसून पैटर्न ने भारत-गंगा के मैदानी इलाकों में गेंहूँ और चावल के उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
  • फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान और कमजोर आपूर्ति श्रृंखलाएँ: अपर्याप्त भंडारण अवसंरचना, सीमित कोल्ड चेन सुविधाएँ और अक्षम परिवहन कृषि उपज के भारी नुकसान का कारण बनते हैं।
    • उदाहरण के लिए: ग्रामीण क्षेत्रों में अपर्याप्त कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के कारण बड़ी मात्रा में फल और सब्जियाँ नष्ट हो जाती हैं।
  • छोटे और खंडित भू-भाग: अधिकांश किसान छोटे और खंडित भूखंडों पर खेती करते हैं, जो आधुनिक तकनीकों को अपनाने में बाधा उत्पन्न करता है और पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं को कम करता है।
    • उदाहरण के लिए: भारत में, अधिकांश किसान दो हेक्टेयर से कम भूमि पर खेती करते हैं।
  • कुपोषण और आहार असंतुलन: पर्याप्त खाद्य उत्पादन के बावजूद, आहार विविधता की कमी और भोजन तक असमान पहुँच के कारण कई आबादी अभी भी खराब पोषण परिणामों से पीड़ित है।
    • उदाहरण के लिए: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFSH) में बच्चों में बौनापन और एनीमिया के उच्च स्तर की रिपोर्ट की गई है।

कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका

  • कृषि कार्यबल में प्रमुख योगदानकर्ता: कृषि उत्पादन और संबद्ध गतिविधियों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
    • उदाहरण के लिए: खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार, भारत में कृषि श्रम बल में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 43% है।
  • कृषि कार्यों में भागीदारी: महिलाएँ बुवाई, रोपाई, निराई, कटाई और कटाई के बाद के प्रसंस्करण जैसी प्रमुख कृषि गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होती हैं।
    • अनुमान बताते हैं कि विकासशील देशों में खाद्य उत्पादन में महिलाओं का श्रम योगदान 60-80% है।
  • खाद्य प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन में भूमिका: महिलाएँ खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और घरेलू स्तर पर मूल्यवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
    • उदाहरण के लिए: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं के नेतृत्व वाली डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण पहल।
  • खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करना: घरेलू खाद्य प्रबंधन, पोषण और आहार विविधता में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका होती है, जिसका सीधा प्रभाव परिवार के स्वास्थ्य और पोषण परिणामों पर पड़ता है।

आगे की राह 

  • जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना: सरकारों को जलवायु परिवर्तन के कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए सूखा प्रतिरोधी फसलों, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष 2023 के तहत बाजरा को बढ़ावा देना।
  • भंडारण और शीत श्रृंखला अवसंरचना को मजबूत करना: भंडारण सुविधाओं, शीत भंडारण नेटवर्क और कुशल रसद प्रणालियों का विस्तार फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है और खाद्य उपलब्धता में सुधार कर सकता है।
    • उदाहरण के लिए: भारतीय खाद्य निगम द्वारा भंडारण क्षमता का विस्तार।
  • किसान सामूहिक संगठनों और बाजार पहुँच को प्रोत्साहित करना: किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और डिजिटल कृषि बाजारों का समर्थन करने से किसानों की सौदेबाजी की शक्ति और बाजारों तक पहुँच में सुधार हो सकता है।
    • उदाहरण के लिए: ई-NAM (राष्ट्रीय कृषि बाजार) के माध्यम से ऑनलाइन कृषि व्यापार।
  • पोषण-संवेदनशील कृषि को बढ़ावा देना: कुपोषण से निपटने और आहार विविधता में सुधार के लिए कृषि उत्पादन को पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से खाद्य पहुँच को मजबूत करना।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.