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Lokesh Pal
April 20, 2026 05:46
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हाल ही में एक पत्रकार (वित्तीय क्षेत्र से संबंधित) ने दिल्ली के एक न्यायालय के उस व्यापक ‘गैग ऑर्डर’ (प्रकाशन पर रोक के आदेश) को चुनौती दी है, जिसमें स्टर्लिंग बायोटेक बैंक धोखाधड़ी मामले (जिसमें संदेसरा समूह शामिल है) से संबंधित रिपोर्टों को हटाने और उन्हें ‘डी-इंडेक्स’ करने का निर्देश दिया गया था। इस चुनौती के माध्यम से, सार्वजनिक हित के मामलों में ‘भूल जाने के अधिकार’ (RTBF) और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच मौजूद संवैधानिक टकराव को उजागर किया गया है।



RTBF की बहस निजता बनाम प्रेस की स्वतंत्रता से कहीं आगे जाती है, क्योंकि डिजिटल प्लेटफॉर्म सूचना और सार्वजनिक स्मृति तक पहुँच को आकार देते हैं। यह डिजिटल संवैधानिकवाद की माँग करती है, जो यह सुनिश्चित करे कि गरिमा, पारदर्शिता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उचित प्रक्रिया राज्य तथा निजी मध्यस्थों दोनों का मार्गदर्शन करें।
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