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Lokesh Pal
April 20, 2026 05:15
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भारतीय राजनीति में “विकास (Vikas)” शब्द अक्सर कल्याण और संरचनात्मक सुधारों को एक साथ मिला देता है, जिससे एक ऐसा विकास विरोधाभास उत्पन्न होता है जहाँ दिखाई देने वाली वृद्धि के बावजूद असमानता बनी रहती है।
इन उद्देश्यों में संतुलन स्थापित करने में मुख्य चुनौती सीमित कर संसाधनों के आवंटन में निहित है:
कल्याण और विकास को एक-दूसरे के स्थान पर उपयोग होने योग्य नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए।
कल्याण को विकास के साथ मिलाकर देखने से अल्पकालिक लाभ को प्राथमिकता मिलती है, जबकि आर्थिक क्षमता की अनदेखी होती है। “विकसित भारत” के लक्ष्य के लिए आवश्यक है कि नीतियाँ वित्तीय रूप से स्थायी हों और कल्याण, विकास का पूरक बने।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: लोकलुभावन कल्याणकारी वादों को दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के साथ मिलाना भारत की राजकोषीय स्थिरता और संरचनात्मक परिवर्तन के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न करता है। मुफ्त योजनाओं (Freebies) की हालिया बहस के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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