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विदहोल्डिंग टैक्स

Lokesh Pal May 16, 2026 01:46 11 0

संदर्भ

सरकार विदेशी निवेश को आकर्षित करने और भारत की बाह्य वित्तीय स्थिति को स्थिर करने के लिए सरकारी बॉण्ड पर विदहोल्डिंग टैक्स (Withholding Tax) को कम करने पर विचार कर रही है।

विदहोल्डिंग टैक्स (Withholding Tax) के बारे में

  • विदहोल्डिंग टैक्स वह कर है, जो गैर-निवासियों को किए जाने वाले भुगतान जैसे ब्याज, लाभांश, रॉयल्टी या बॉन्ड आय पर स्रोत पर आरोपित किया जाता है
  • कर संग्रह तंत्र: भुगतानकर्ता भुगतान करने से पहले ही कर का भुगतान प्राप्त कर लेता है और उसे सीधे सरकार के पास जमा करता है, जिससे समय पर कर संग्रह तथा अनुपालन सुनिश्चित होता है।
  • अनिवासियों पर उच्च कर: विदेशी निवेशक जैसे FPI वर्तमान में भारतीय सरकारी बॉण्ड से अर्जित ब्याज पर लगभग 20% विदहोल्डिंग टैक्स का भुगतान करते हैं, क्योंकि रियायती दरें (5%) वर्ष 2023 में समाप्त हो गईं।
  • TDS से संबंध: भारत में टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) सामान्यतः घरेलू लेन-देन पर लागू होता है, जबकि विदहोल्डिंग टैक्स मुख्यतः सीमा-पार भुगतान पर लागू होता है।
  • डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट (DTAA) की भूमिका: DTAA भागीदार देशों के निवेशकों को कम विदहोल्डिंग टैक्स दरों का लाभ उठाने की अनुमति देता है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) के बारे में

  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) वे विदेशी निवेशक होते हैं, जो किसी अन्य देश में वित्तीय परिसंपत्तियों जैसे शेयर, बॉण्ड और प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं।
  • पात्र निवेशक: विदेशी संस्थागत निवेशक, पेंशन फंड, संप्रभु संपत्ति कोष, बीमा कंपनियाँ, म्यूचुअल फंड और परिसंपत्ति प्रबंधन फर्में।
  • नियामक प्राधिकरण: भारत में FPI को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा SEBI (FPI) विनियमों के तहत विनियमित किया जाता है।
  • निवेश की प्रकृति: FPI सूचीबद्ध प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं बिना प्रबंधन नियंत्रण प्राप्त किए, जो कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से भिन्न है।
  • महत्त्व: FPI पूँजी उपलब्धता को बढ़ाते हैं, बाजार तरलता में सुधार करते हैं और भारतीय वित्तीय बाजारों के वैश्विक बाजारों के साथ एकीकरण को सुदृढ़ करते हैं।

विदहोल्डिंग टैक्स कम करने की आवश्यकता

  • विदेशी पूँजी प्रवाह में सुधार: उच्च विदहोल्डिंग टैक्स निवेश में बाधा उत्पन्न करता है और भारतीय ऋण बाजारों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को हतोत्साहित करता है।
    • वर्ष 2026 में वैश्विक अनिश्चितता के मध्य विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय वित्तीय बाजारों से लगभग 22.5 बिलियन डॉलर की निकासी की।
  • विदेशी मुद्रा भंडार को सुदृढ़ करना: भारत तेल की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में तनाव और रुपये पर अवमूल्यन के दबाव के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहा है।
    • RBI के हस्तक्षेप और बाह्य खाते के दबावों ने भंडार की पर्याप्तता को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाना: भारत का विदहोल्डिंग टैक्स वैश्विक स्तर पर उच्चतम में से एक है, जबकि—
    • चीन: 10% (छूट के साथ)
    • वियतनाम: 5%
    • मलेशिया: सरकारी बॉण्ड पर छूट।
  • बॉण्ड बाजार के विकास को समर्थन: अल्प कर भार से सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी भागीदारी बढ़ सकती है और भारत के घरेलू बॉण्ड बाजार तंत्र को मजबूती मिलती है।

विदहोल्डिंग टैक्स कम करने का संभावित प्रभाव

  • उच्च विदेशी निवेश: कम विदहोल्डिंग टैक्स विदेशी निवेशकों के लिए प्रतिफल में सुधार कर सकता है और भारतीय सरकारी बॉण्ड तथा ऋण बाजारों में अधिक निवेश आकर्षित कर सकता है।
  • रुपये का स्थिरीकरण: बढ़ते विदेशी पूँजी प्रवाह से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो सकता है और रुपये की विनिमय दर में अत्यधिक अस्थिरता कम हो सकती है।
  • सरकारी उधारी लागत में कमी: सरकारी बॉण्ड की अधिक माँग से बॉण्ड प्रतिफल (यील्ड) घट सकते हैं, जिससे सरकार की उधारी लागत कम होगी और राजकोषीय प्रबंधन में सुधार होगा।
  • निवेशक विश्वास में सुधार: एक स्थिर और निवेशक-अनुकूल वातावरण का संकेत देने वाले कर सुधार, भारत को दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में अधिक आकर्षक बना सकते हैं।

निष्कर्ष

विदहोल्डिंग टैक्स में कमी भारत की निवेश आकर्षण क्षमता को बढ़ा सकती है, लेकिन दीर्घकालिक पूँजी प्रवाह समष्टि आर्थिक स्थिरता और नीतिगत विश्वसनीयता पर निर्भर करेगा।

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