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भारत–इंडोनेशिया संबंध

Lokesh Pal July 10, 2026 02:51 9 0

संदर्भ

हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने भारत एवं इंडोनेशिया के मध्य व्यापक सामरिक साझेदारी (CSP) को सुदृढ़ करने एवं द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से इंडोनेशिया की यात्रा की।

संबंधित तथ्य

  • इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करना था।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर परिसर, जो संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की विश्व धरोहर स्थल है, में भारत–इंडोनेशिया संयुक्त संरक्षण परियोजना का उद्घाटन किया।

यात्रा के प्रमुख परिणाम

पहल विवरण
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) सहयोग

इंडोनेशिया ने भारत के डिजिटल वाणिज्य हेतु मुक्त नेटवर्क (ONDC) की संरचना से प्रेरित होकर इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (ION) का शुभारंभ किया, जिससे डिजिटल वाणिज्य के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को नई दिशा मिली  जो भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) मॉडल के निर्यात का प्रतीक है।

समुद्री सुरक्षा सहयोग का सुदृढ़ीकरण

समुद्री क्षेत्रीय जागरूकता, खुफिया सूचना साझाकरण तथा क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय को सुदृढ़ करने हेतु इंडोनेशिया गुरुग्राम स्थित भारतीय महासागर क्षेत्र सूचना संलयन केंद्र (IFC-IOR) में एक संपर्क अधिकारी (Liaison Officer) नियुक्त करेगा।

प्राचीन विरासत संरक्षण में सहयोग भारत, इंडोनेशिया के योग्याकार्ता स्थित सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसर प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन हेतु तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा।
सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कूटनीति का संवर्द्धन 

दोनों देशों ने रबींद्रनाथ टैगोर की यात्रा की शताब्दी के उपलक्ष्य में वर्षभर चलने वाले सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से वर्ष 2026–27 को भारत–इंडोनेशिया टैगोर–देवांतरा सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कूटनीति वर्ष घोषित किया गया है।

निर्वाचन प्रबंधन में सहयोग

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) तथा इंडोनेशिया के सामान्य निर्वाचन आयोग (KPU) ने व्यापक लोकतांत्रिक चुनावों के संचालन में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान तथा निर्वाचन संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

उच्च शिक्षा सहयोग का विस्तार

भारत एवं इंडोनेशिया ने प्रबंधन शिक्षा तथा क्षमता निर्माण में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए पूर्वी जावा के सिंघासारी विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में IIM बंगलूरू के एक विदेशी परिसर की स्थापना पर सहमति व्यक्त की।

कृषि एवं खाद्य सुरक्षा

कृषि एवं खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों पर एक व्यापक समझौता ज्ञापन (MoU) संपन्न किया गया। भारत ने इंडोनेशिया की कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए DWR-162 किस्म का 100 टन उच्च गुणवत्ता वाला गेहूँ उपलब्ध कराने की भी घोषणा की।

स्वास्थ्य एवं आपदा प्रत्यास्थता

 भारत और इंडोनेशिया ने चिकित्सा उत्पादों के विनियमन में सामंजस्य स्थापित करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारत के CDSCO तथा इंडोनेशिया के औषधि नियामक प्राधिकरण के बीच संपन्न हुआ।

इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य क्षेत्र के मानव संसाधन सहयोग संबंधी एक समझौता भी संपन्न हुआ। इसके अंतर्गत आपदा प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया तथा क्षमता निर्माण में सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) एवं इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी के मध्य भी एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

अंतरिक्ष सहयोग

बाह्य अंतरिक्ष के अन्वेषण एवं शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग संबंधी रूपरेखा समझौते का विस्तार किया गया। साथ ही अनुसंधान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार तथा अगली पीढ़ी की दूरसंचार प्रौद्योगिकियों में सहयोग को प्रोत्साहित करने हेतु अतिरिक्त समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए।

रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा

इंडोनेशिया ने 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुबंध के अंतर्गत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज प्रक्षेपास्त्र प्रणाली की दो इकाइयों की खरीद का समझौता किया तथा भारत की वायु-से-वायु में मार करने वाली प्रक्षेपास्त्र प्रणाली अस्त्र का पहला निर्यात हेतु आदेश प्राप्त हुआ, जिससे भारत के रक्षा निर्यात तथा मेक इन इंडिया पहल को सुदृढ़ता प्राप्त होगी।

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चुनौतियाँ

  • व्यापार असंतुलन: भारत इंडोनेशिया से कोयला, पाम ऑयल एवं खनिजों का बड़े पैमाने पर आयात करता है, जिसके परिणामस्वरूप लगातार व्यापार घाटा बना हुआ है।
    • उदाहरण: वाणिज्य मंत्रालय ने इंडोनेशिया को भारत के निर्यात में विविधीकरण की आवश्यकता पर बल दिया है।
  • व्यापार का सीमित विविधीकरण: द्विपक्षीय व्यापार कुछ चुनिंदा वस्तुओं तक सीमित है, जिससे आर्थिक संबंध वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव एवं निर्यात प्रतिबंधों के प्रति संवेदनशील बने रहते हैं।
    • उदाहरण: भारत सरकार एवं जकार्ता स्थित भारतीय दूतावास ने औषधि, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल तथा अभियांत्रिकी उत्पादों को अपार संभावनाओं वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया है।
  • निवेश क्षमता का अपर्याप्त उपयोग: मजबूत राजनीतिक संबंधों के बावजूद अवसंरचना, खनन, नवीकरणीय ऊर्जा तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय निवेश अभी भी अपनी संभावित क्षमता से अत्यधिक न्यून है।
    • उदाहरण: उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) तथा भारत–इंडोनेशिया मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंच ने निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।
  • समुद्री सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ: अंडमान सागर एवं मलक्का जलडमरूमध्य में समुद्री डकैती, अवैध मत्स्यन, समुद्री आतंकवाद तथा अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए अधिक गहन परिचालन सहयोग एवं समुद्री क्षेत्र जागरूकता की आवश्यकता है।
    • उदाहरण: भारत एवं इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा तथा संरक्षा सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन का विस्तार कर समन्वय को सुदृढ़ किया है।
  • चीन के साथ सामरिक संतुलन: इंडोनेशिया की ‘बेबास आक्टिफ’ (स्वतंत्र एवं सक्रिय) विदेश नीति तथा चीन के साथ उसके व्यापक आर्थिक संबंध कभी-कभी विशेषकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के साथ सामरिक सहयोग की गति को सीमित कर देते हैं।
  • सीमित रक्षा औद्योगिक सहयोग: रक्षा संबंध ऐतिहासिक रूप से मुख्यतः संयुक्त सैन्य अभ्यासों एवं प्रशिक्षण तक सीमित रहे हैं, जबकि संयुक्त विनिर्माण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की परियोजनाएँ अपेक्षाकृत कम हैं।
    • उदाहरण: हाल का ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात एवं अस्त्र मिसाइल समझौता महत्त्वपूर्ण कदम हैं, किंतु व्यापक रक्षा सहयोग अभी भी विकासशील अवस्था में है।
  • संपर्क एवं लॉजिस्टिक संबंधी कमियाँ: प्रत्यक्ष समुद्री मार्ग, हवाई संपर्क, बंदरगाह संपर्क तथा आपूर्ति शृंखला एकीकरण अभी भी अपर्याप्त हैं, जिससे लॉजिस्टिक लागत बढ़ती है तथा व्यापार वृद्धि सीमित होती है।
    • उदाहरण: भारत ने साबांग बंदरगाह तथा अंडमान–आचेह समुद्री गलियारे के माध्यम से बेहतर संपर्क का प्रस्ताव रखा है।
  • जन-से-जन संपर्क का निम्न स्तर: साझा सभ्यतागत एवं ऐतिहासिक संबंधों के बावजूद पर्यटन, शैक्षणिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा व्यावसायिक संपर्क अभी भी अपनी संभावित क्षमता से कम हैं।
    • उदाहरण: आसियान–भारत कार्ययोजना के अंतर्गत शिक्षा, संस्कृति एवं युवा आदान-प्रदान को विस्तारित करने की पहल की जा रही है।

भारत–इंडोनेशिया संबंधों का सामरिक महत्त्व

  • हिंद-प्रशांत का प्रवेश द्वार: इंडोनेशिया हिंद महासागर एवं प्रशांत महासागर के संगम पर स्थित है, जिससे यह भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति तथा क्षेत्रीय समुद्री संपर्क के लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण साझेदार बन जाता है।
  • समुद्री एवं संचार मार्गों की सुरक्षा: दोनों देश विशेष रूप से मलक्का जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री संचार मार्गों (SLOCs) की सुरक्षा के लिए सहयोग करते हैं, जहाँ से वैश्विक व्यापार का लगभग 40% तथा भारत के पूर्वी एशिया के साथ अधिकांश व्यापार होकर गुजरता है।
  • चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन: भारत–इंडोनेशिया सहयोग स्वतंत्र, खुले एवं नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मजबूत करता है। साथ ही क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्द्धा का संतुलन स्थापित करता है तथा आसियान की केंद्रीयता को मजबूत करता है।
  • रक्षा एवं सामरिक साझेदारी: समुद्री सैन्य अभ्यासों, रक्षा निर्यात (जैसे ब्रह्मोस मिसाइल समझौता), नौसैनिक यात्राओं तथा क्षमता निर्माण सहित बढ़ता रक्षा सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना को सुदृढ़ करता है।
  • आर्थिक एवं आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता: इंडोनेशिया, आसियान में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है तथा निकेल जैसे महत्त्वपूर्ण खनिजों का प्रमुख स्रोत है, जो भारत के विद्युत वाहन एवं इस्पात उद्योग को समर्थन देने के साथ-साथ आपूर्ति शृंखलाओं में विविधीकरण सुनिश्चित करता है।
  • ऊर्जा एवं संसाधन सुरक्षा: इंडोनेशिया कोयला, पाम ऑयल, द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) तथा महत्त्वपूर्ण खनिजों का विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता है, जिससे भारत की ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा सुदृढ़ होती है।
  • एक्ट ईस्ट नीति एवं आसियान सहभागिता: इंडोनेशिया, भारत की एक्ट ईस्ट नीति के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आसियान के साथ राजनीतिक, आर्थिक एवं सुरक्षा सहयोग को गहरा करने का प्रमुख समुद्री केंद्र है।
  • साझी सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक विरासत: बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म, रामायण परंपरा तथा ऐतिहासिक समुद्री संपर्कों पर आधारित सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध जन-से-जन संपर्क एवं कूटनीतिक सद्भाव को सुदृढ़ करते हैं।

आगे की राह

  • व्यापक सामरिक साझेदारी को सुदृढ़ बनाना: भारत–इंडोनेशिया व्यापक सामरिक साझेदारी दृष्टि (2025–2029) का नियमित शिखर स्तरीय बैठकों एवं संस्थागत संवादों के माध्यम से प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए।
  • समुद्री एवं रक्षा सहयोग का विस्तार: संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों, समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA), तटरक्षक सहयोग, रक्षा औद्योगिक सहयोग, सह-उत्पादन तथा रक्षा निर्यात को बढ़ावा दिया जाए।
  • संपर्क अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना: हवाई, समुद्री एवं डिजिटल संपर्क में सुधार किया जाए, विशेष रूप से अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह–आचेह समुद्री गलियारे के विकास के माध्यम से व्यापार एवं पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाए।
  • व्यापार एवं निवेश का विस्तार: कोयला एवं पाम ऑयल से आगे बढ़कर औषधि, ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश का विविधीकरण किया जाए।
  • महत्त्वपूर्ण खनिज साझेदारी को सुदृढ़ बनाना: निकेल, बॉक्साइट, टिन एवं अन्य महत्त्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग विकसित किया जाए, जिससे भारत की विद्युत वाहन, बैटरी एवं स्वच्छ ऊर्जा संबंधी आकांक्षाओं को समर्थन मिल सके।
  • नीली अर्थव्यवस्था में सहयोग को बढ़ावा: सतत् मत्स्यन, समुद्री संरक्षण, तटीय प्रत्यास्थता, समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी तथा महासागर-आधारित नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित किया जाए।
  • आसियान एवं हिंद-प्रशांत सहयोग को सुदृढ़ बनाना: आसियान, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS), हिंद महासागर परिधि संघ (IORA) तथा हिंद महासागर नौसैनिक संगोष्ठी (IONS) जैसे मंचों के माध्यम से निकट समन्वय स्थापित कर स्वतंत्र, खुले, समावेशी एवं नियम-आधारित हिंद-प्रशांत व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।
  • जन-से-जन एवं सांस्कृतिक संपर्कों का विस्तार: पर्यटन, शैक्षणिक साझेदारियों, कौशल विकास, बौद्ध एवं रामायण सांस्कृतिक परिपथों तथा युवा आदान-प्रदान को बढ़ावा देकर दीर्घकालिक द्विपक्षीय सद्भाव को मजबूत किया जाए।

भारत–इंडोनेशिया: प्रमुख बहुपक्षीय समूहों में साझा सदस्यता 

समूह भारत इंडोनेशिया सामरिक महत्त्व
संयुक्त राष्ट्र  सदस्य सदस्य वैश्विक शांति, सुरक्षा एवं सतत् विकास
G-20  सदस्य सदस्य वैश्विक आर्थिक शासन एवं वित्तीय स्थिरता
विश्व व्यापार संगठन WTO) सदस्य सदस्य नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था
गुटनिरपेक्ष आंदोलन ( NAM) सदस्य सदस्य दक्षिण-दक्षिण सहयोग एवं सामरिक स्वायत्तता
पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) सदस्य सदस्य हिंद-प्रशांत सामरिक संवाद एवं क्षेत्रीय सुरक्षा
आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) सदस्य सदस्य एशिया-प्रशांत में राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग
इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) सदस्य सदस्य समुद्री सुरक्षा, नीली अर्थव्यवस्था एवं क्षेत्रीय संपर्क
हिंद महासागर नौसैनिक संगोष्ठी (IONS) सदस्य सदस्य नौसैनिक सहयोग एवं समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA)
एशिया सहयोग संवाद (ACD) सदस्य सदस्य अखिल एशियाई आर्थिक एवं विकासात्मक सहयोग
दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (ASEAN) व्यापक सामरिक भागीदार संस्थापक सदस्य भारत की एक्ट ईस्ट नीति का प्रमुख मंच
एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) सदस्य नहीं सदस्य एशिया-प्रशांत व्यापार एवं निवेश सहयोग।

निष्कर्ष

अपनी साझी समुद्री भौगोलिक स्थिति, आर्थिक पूरकताओं तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक अभिसरण का प्रभावी उपयोग करते हुए भारत एवं इंडोनेशिया एक सुदृढ़, भविष्योन्मुखी साझेदारी का निर्माण कर सकते हैं, जो क्षेत्रीय शांति, समृद्धि एवं सतत् विकास को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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