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संक्षिप्त समाचार

Lokesh Pal July 10, 2026 03:02 11 0

स्मार्ट याक निगरानी उपकरण

भारतीय वैज्ञानिकों ने हिमालयी सीमा क्षेत्रों में रहने वाले उच्च-ऊँचाई वाले याकों के स्वास्थ्य, गतिविधियों और तनाव की निगरानी के लिए IoT-आधारित स्मार्ट कॉलर विकसित किया है।

स्मार्ट याक निगरानी उपकरण (Smart Yak Monitoring Device)

  • स्मार्ट याक निगरानी उपकरण एक इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित स्मार्ट कॉलर है, जिसे याक के स्वास्थ्य और गतिविधियों की वास्तविक समय (Real-time) निगरानी के लिए विकसित किया गया है।
  • विकसित करने वाला संस्थान
    भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय याक अनुसंधान केंद्र (ICAR–NRC-Y), दिरांग, अरुणाचल प्रदेश
    ने असम डॉन बॉस्को विश्वविद्यालय, गुवाहाटी के सहयोग से इसे विकसित किया है।

भारतीय याक (Bos grunniens) के बारे में 

  • भारतीय याक (Bos grunniens) एक पालतू गोवंशीय पशु है, जिसे “हिमालय का जहाज” (Ship of the Himalayas) कहा जाता है।
  • यह हिमालयी समुदायों के लिए दूध, मांस, ऊन, परिवहन और भार वहन (Draught Power) का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है।
  • भारत में याकों की संख्या: 20वीं पशुधन गणना के अनुसार भारत में लगभग 58,000 याक उपस्थित हैं। इनमें से लगभग आधे याक लद्दाख में पाए जाते हैं। अन्य याक अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पाए जाते हैं।
  • विशेषताएँ
    • याक 8,000 फीट (लगभग 2,400 मीटर) से अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड जैसी परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए अनुकूलित होते हैं।
    • इनके शरीर पर घना ऊनी आवरण (Thick Woolly Coat) होता है, जो ठंड से सुरक्षा प्रदान करता है। इनमें बड़े फेफड़े (Large Lungs) और हीमोग्लोबिन की उच्च सांद्रता (High Haemoglobin Concentration) होती है, जिससे ये कम ऑक्सीजन वाले उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में जीवित रह पाते हैं।

याक का वर्गीकरण

  • जंगली याक (Bos mutus): इसे “साइलेंट बुल (Silent Bull)” के नाम से भी जाना जाता है। जंगली याक अपालतू पैतृक वंशावली (Undomesticated Ancestral Lineage) का प्रतिनिधित्व करता है।
    • वर्तमान में इसके केवल 15,000 से 20,000 जीवित सदस्य बचे हैं। ये मुख्य रूप से तिब्बत के चांगतांग (Changtang) क्षेत्र के दूरस्थ एवं संरक्षित अभ्यार  ण्यों में केंद्रित हैं।
  • पालतू याक (Bos grunniens): इसे “ग्रंटिंग बुल (Grunting Bull)” के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रजाति को हजारों वर्ष पूर्व पालतू बनाया गया था।
    • विश्व में 1.2 करोड़ से अधिक पालतू याक पाए जाते हैं। ये उच्च-ऊंचाई वाले समुदायों के लिए एक महत्त्वपूर्ण जीवन आधार (Critical Lifeline) के रूप में कार्य करते हैं तथा प्रदान करते हैं:
      • दूध (Milk)
      • मांस (Meat)
      • रेशा/ऊन (Fiber/Wool)
      • ईंधन के लिए गोबर (Dung for Fuel)
    • भारत में लगभग 58,000 पालतू याक (Bos grunniens) पाए जाते हैं। भारत में सर्वाधिक संख्या लद्दाख में है, जिसके बाद अरुणाचल प्रदेश का स्थान है।
  • संरक्षण स्थिति
    • IUCN रेड लिस्ट (जंगली याक): सुभेद्य  (Vulnerable)
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-I (Schedule I)

 जंगली याक (Wild Yak)

  • भारत में पालतू याक को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूचियों के अंतर्गत वर्गीकृत या प्रबंधित नहीं किया जाता है। यह अधिनियम इन्हें स्पष्ट रूप से पशुधन (Livestock) और कृषि पशु (Farm Animals) के रूप में वर्गीकृत करते हुए छूट प्रदान करता है।
  • भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) हिमालयी याक को केवल “खाद्य पशु (Food Animal)” के रूप में मान्यता देता है।
  • CITES: परिशिष्ट-I (Appendix I) – जंगली याक (Wild Yak)

पिनाका लंबी दूरी निर्देशित रॉकेट (LRGR) 

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के चाँदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (Integrated Test Range- ITR) में पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (Pinaka Long Range Guided Rocket- LRGR) का सफल उड़ान परीक्षण किया।

पिनाका लंबी दूरी निर्देशित रॉकेट (LRGR) के बारे में

  • यह भारतीय सेना का पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) के लिए विकसित विस्तारित मारक क्षमता (Extended-Range) वाला, सटीक-निर्देशित (Precision-Guided) रॉकेट है।
  • पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS):
    • यह एक युद्ध , सभी मौसमों में कार्य करने वाली, अप्रत्यक्ष प्रहार (Indirect-Fire) करने वाली प्रणाली है।

पिनाका लंबी दूरी निर्देशित रॉकेट (LRGR) की प्रमुख विशेषताएँ

  • परीक्षित न्यूनतम मारक दूरी (Minimum Range Tested): इसका 60 किमी. की उपयोगकर्ता-निर्धारित न्यूनतम मारक दूरी के लिए सफल परीक्षण किया गया।
  • उच्च सटीकता (High Accuracy): रॉकेट ने सभी नियोजित उड़ान के दौरान के युद्धाभ्यास (In-flight Manoeuvres) सफलतापूर्वक पूरे किए। इसने पूर्वानुमानित प्रक्षेप पथ (Predicted Trajectory) का अनुसरण करते हुए लक्ष्य पर उच्च सटीकता के साथ प्रहार किया।
  • लॉन्चर संगतता (Launcher Compatibility): इसका प्रक्षेपण पिनाका लॉन्चर से किया गया। इससे यह प्रदर्शित हुआ कि भिन्न-भिन्न मारक दूरी वाले पिनाका के विभिन्न संस्करणों का प्रक्षेपण एक ही लॉन्चर से किया जा सकता है।
  • विकास (Development): इसे DRDO के आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) द्वारा हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL) के सहयोग से विकसित किया गया है। इसके विकास में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) तथा रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) का भी सहयोग रहा।

प्रम्बानन मंदिर परिसर

 

हाल ही में भारत और इंडोनेशिया ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार हेतु एक संयुक्त परियोजना प्रारंभ की है, जिसमें भारत की ओर से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) नेतृत्व कर रहा है।

प्रम्बानन मंदिर परिसर के बारे में

  • प्रम्बानन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में शास्त्रीय हिंदू वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • स्थान (Location): यह मध्य जावा (Central Java) के योग्याकार्ता (Yogyakarta) में स्थित है। यह भारत और इंडोनेशिया के बीच स्थायी सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है।
  • समर्पित (Dedicated To): यह मंदिर परिसर त्रिमूर्ति—भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित है।
  • निर्माता (Built By): इसका निर्माण 9वीं शताब्दी ईसवी में मध्य जावा के माताराम साम्राज्य (Mataram Kingdom) के संजय वंश (Sanjaya Dynasty) द्वारा कराया गया।
    • इसका निर्माण शाही शैव मंदिर परिसर (Royal Shaivite Temple Complex) के रूप में किया गया, जो जावा में हिंदू धर्म के पुनरुत्थान को दर्शाता है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • प्रारंभ में इस परिसर में 240 बड़े और छोटे मंदिर थे, जिससे यह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर बनता है।
    • केंद्रीय प्रांगण (Central Courtyard) में शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित तीन विशाल मंदिर हैं, जिनमें 47 मीटर ऊँचा शिव मंदिर सबसे ऊँचा है।
    • मुख्य मंदिरों के सामने तीन वाहन (Vahana) मंदिर स्थित हैं, जो क्रमशः नंदी (शिव), गरुड़ (विष्णु) और हंस (ब्रह्मा) को समर्पित हैं।
    • मंदिर की दीवारों पर रामायण और भागवत पुराण पर आधारित सूक्ष्म उत्कीर्ण उभारदार शिल्प (Bas-reliefs) अंकित हैं, जो जावानी संस्कृति में भारतीय महाकाव्यों के प्रसार को दर्शाते हैं।
    • यह परिसर भूकंप, ज्वालामुखीय विस्फोट (माउंट मेरापी) तथा राजनीतिक परिवर्तनों से क्षतिग्रस्त हुआ, जिसके बाद इसका व्यवस्थित संरक्षण एवं पुनर्स्थापन किया गया।
  • यूनेस्को दर्जा
    • 1991 में इसे हिंदू मंदिर वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण तथा असाधारण सांस्कृतिक महत्त्व के कारण यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) के रूप में सूचीबद्ध किया गया।
  • संरक्षण प्रयास (Conservation Effort): भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI), भारत–इंडोनेशिया द्विपक्षीय विरासत साझेदारी के अंतर्गत इस परिसर की चयनित संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन का कार्य कर रहा है।

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 

पिछले वर्ष की तुलना में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) अंतर्वाह में 43.6% की वृद्धि के बाद वर्ष 2025 में भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त करने वाला विश्व का 11वाँ सबसे बड़ा देश बन गया।

एफडीआई प्रवाह 2025 की प्रमुख विशेषताएँ

  • एफडीआई अंतर्वाह में वृद्धि (Growth in Inflow): भारत का एफडीआई अंतर्वाह वर्ष 2024 के 27.1 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2025 में 38.9 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो 43.6% की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।
    • विश्व के सबसे बड़े एफडीआई प्राप्तकर्ता देशों में भारत की रैंकिंग वर्ष 2024 में 13वें स्थान से बढ़कर वर्ष 2025 में 11वें स्थान पर पहुँच गई।
    • भारत में एफडीआई अंतर्वाह की वृद्धि वैश्विक औसत लगभग 6% की वृद्धि से उल्लेखनीय रूप से अधिक रही।
  • वैश्विक रुझान: वैश्विक एफडीआई अंतर्वाह वर्ष 2024 के 1.53 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2025 में 1.62 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे बड़ा एफडीआई गंतव्य (FDI Destination) बना रहा, इसके बाद सिंगापुर, हांगकांग और चीन का स्थान रहा।
  • भारत का बाह्य प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (India’s Outward FDI): भारत का बाह्य एफडीआई (Outward FDI) वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 35.7 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो वर्ष 2024 के 24.3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
    • यह वृद्धि भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी निवेश के माध्यम से वैश्विक विस्तार को दर्शाती है।

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के बारे में

  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment- FDI) से तात्पर्य किसी विदेशी संस्था द्वारा किसी अन्य देश के व्यवसाय अथवा उत्पादक परिसंपत्तियों (Productive Assets) में स्थायी हित (Lasting Interest) एवं प्रबंधन नियंत्रण (Management Control) स्थापित करने के उद्देश्य से किए गए निवेश से है।
  • भारत में FDI का विनियमन विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (Foreign Exchange Management Act- FEMA), 1999 के अंतर्गत किया जाता है।
  • नीति निर्माण: उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) द्वारा।
  • प्रशासन: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा।
  • FDI में दीर्घकालिक निवेश के साथ स्वामित्व अथवा प्रबंधन नियंत्रण शामिल होता है, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (Foreign Portfolio Investment- FPI) में प्रबंधन नियंत्रण के बिना वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश किया जाता है।
  • भारत में FDI को क्षेत्र (Sector) के आधार पर निम्नलिखित दो मार्गों से अनुमति दी जाती है:
    • स्वचालित मार्ग (Automatic Route)
    • सरकारी अनुमोदन मार्ग (Government Approval Route)
  • FDI पूँजी निर्माण, रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, निर्यात संवर्द्धन तथा आर्थिक वृद्धि में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।

ट्राइबैक्स (TribeX)

हाल ही में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने ट्राइबैक्स  (TribeX) पोर्टल लॉन्च किया, जो जनजातीय कला, संस्कृति, भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान को समर्पित भारत का पहला डिजिटल शिक्षण मंच (Digital Learning Platform) है।

ट्राइबैक्स  के बारे में

  • ट्राइबैक्स  (TribeX) भारत की जनजातीय विरासत के संरक्षण, संवर्द्धन और वैश्विक स्तर पर प्रदर्शन के लिए विकसित एक समग्र डिजिटल शिक्षण एवं ज्ञान मंच (Comprehensive Digital Learning and Knowledge Platform) है।
  • यह निःशुल्क प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम (Certificate Courses), यूजीसी-मान्यता प्राप्त स्नातकोत्तर डिप्लोमा (PG Diploma) कार्यक्रम, तथा जनजातीय ज्ञान का डिजिटल भंडार (Digital Repository) उपलब्ध कराता है।
  • प्रारंभकर्ता (Launched By): जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार।
  • शैक्षणिक साझेदार (Academic Partner): संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी (स्नातकोत्तर डिप्लोमा कार्यक्रमों के लिए)।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • डिजिटल शिक्षण मंच (Digital Learning Platform): विश्वभर के शिक्षार्थियों के लिए जनजातीय कला, शिल्प, भाषाओं एवं पारंपरिक ज्ञान पर निःशुल्क ऑनलाइन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता है।
      • ऑनलाइन शिक्षण, मूल्यांकन एवं प्रगति की निगरानी हेतु लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) को एकीकृत करता है।
    • ज्ञान भंडार (Knowledge Repository): जनजातीय भाषाओं, मौखिक परंपराओं, प्रदर्शन कलाओं, त्योहारों एवं स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों का डिजिटल अभिलेखागार (Digital Archive) के रूप में कार्य करता है।
      • वर्तमान में 5,000 से अधिक मल्टीमीडिया संसाधन उपलब्ध हैं, जिन्हें बढ़ाकर 10,000 संसाधनों तक ले जाने का लक्ष्य है।
    • कौशल विकास (Skill Development): शिक्षार्थियों को जनजातीय ज्ञान विशेषज्ञों एवं मास्टर शिल्पकारों से प्रत्यक्ष प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है।
    • विरासत संरक्षण (Heritage Preservation): डिजिटल दस्तावेजीकरण के माध्यम से लुप्तप्राय जनजातीय ज्ञान का संरक्षण करता है। भारत की जनजातीय विरासत के पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण (Intergenerational Transmission) को बढ़ावा देता है।
  • उपलब्ध प्रमुख पाठ्यक्रम
    • 20 निःशुल्क प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम: जनजातीय चित्रकला, हस्तशिल्प , हथकरघा, कलाकृतियाँ, पारंपरिक वाद्ययंत्र और भविष्य में 100 से अधिक पाठ्यक्रमों तक विस्तार करने की योजना है।
    • यूजीसी-मान्यता प्राप्त एक-वर्षीय पाँच स्नातकोत्तर डिप्लोमा कार्यक्रम:
      • जनजातीय भाषा: संथाली (ओल चिकी)
      • सतत जनजातीय संस्कृति-आधारित आजीविका पद्धतियाँ
      • संग्रहालय विज्ञान एवं जनजातीय संग्रहालय प्रबंधन
      • भारत की जनजातीय कला एवं शिल्प
      • जनजातीय वस्त्र
  • महत्त्व: ट्राइबैक्स  डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग कर जनजातीय ज्ञान के संरक्षण करता है, सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देता है, आजीविका के अवसरों को सुदृढ़ करता है तथा स्वदेशी ज्ञान को वैश्विक स्तर पर सुलभ बनाता है।

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