100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

भारत और नेपाल ने AI-आधारित बहुभाषी भाषा प्लेटफॉर्म विकसित करने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए

Lokesh Pal June 09, 2026 03:19 11 0

संदर्भ

भारत और नेपाल ने भारत के भाषिणी (BHASHINI) प्रभाग और काठमांडू विश्वविद्यालय के डीपीआई-एआई केंद्र के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) और भाषा प्रौद्योगिकियों में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के बारे में

  • डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) से तात्पर्य उन बुनियादी डिजिटल प्रणालियों से है, जो सार्वजनिक और निजी सेवाओं की सुरक्षित, अंतर-संचालनीय और समावेशी वितरण को सक्षम बनाती हैं। यह शासन और अर्थव्यवस्था का डिजिटल आधार तैयार करता है।
  • भारत के DPI मॉडल में डिजिटल पहचान के लिए आधार, भुगतानों के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और डिजिटल दस्तावेज साझा करने के लिए डिजीलॉकर (DigiLocker) जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
  • DPI की प्रमुख विशेषताओं में अंतर-संचालनीयता, मापनीयता, कम लागत वाली पहुँच, समावेशन और सहमति-आधारित डेटा साझाकरण शामिल हैं, जो कल्याणकारी वितरण, वित्तीय समावेशन और ‘ईज ऑफ लिविंग’ में सुधार करने में सहायता करते हैं।
  • DPI ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और स्टार्ट-अप नवाचार को मजबूत किया है, जबकि निजता, साइबर सुरक्षा और डिजिटल विभाजन को लेकर चिंताएँ भी उत्पन्न की हैं।

इस सहयोग के मुख्य आधार

यह साझेदारी केवल एक साधारण प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान से आगे बढ़कर लैंग्वेज एआई (Language AI) द्वारा संचालित एक समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करती है। इसके मुख्य फोकस केंद्रित क्षेत्र शामिल हैं:-

  • लक्षित डेटासेट अनुसंधान एवं विकास: नेपाली भाषा के उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट, स्पीच कॉर्पोरा (Speech Corpora), ऑटोमैटिक स्पीच रिकग्निशन (ASR), टेक्स्ट-टू-स्पीच (TTS) सिस्टम और मशीन ट्रांसलेशन टूल का संयुक्त रूप से निर्माण करना।
  • ‘डिजिटल विलुप्ति’ को रोकना: भारत-नेपाल के सीमा पार क्षेत्रों में कम संसाधन वाली और प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं की भाषायी और साहित्यिक विरासत का डिजिटलीकरण और संरक्षण करना।
  • अंतिम छोर तक सेवा वितरण: नेपाल सरकार को अपनी डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं का विस्तार करने में सहायता करने के लिए भाषिणी (BHASHINI) के खुले और अंतर-संचालनीय मॉडल का उपयोग करना, जिससे पारंपरिक साक्षरता और डिजिटल पहुँच की बाधाओं को दूर किया जा सके।
  • मानव पूँजी समन्वय: नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और प्रशिक्षण पहलों को स्थापित करना, जो दोनों देशों के तकनीकी पेशेवरों और विश्वविद्यालयों को एक साथ लाते हैं।

प्रोजेक्ट भाषिणी (BHASHINI-BHASHa INterface for India) के बारे में 

  • मिशन: यह भारत की एक राष्ट्रीय एआई (AI) आधारित पहल है, जिसे भाषा की बाधाओं को दूर करने और बहुभाषी डिजिटल समावेशन को सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • तकनीकी पैमाना: यह इंजन वर्तमान में 36 टेक्स्ट लैंग्वेजेज (Text Languages), 23 वॉइस लैंग्वेजेज (Voice Languages) और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को सपोर्ट करता है।
  • शासन व्यवस्था का दायरा: ‘नेशनल हब फॉर लैंग्वेज टेक्नोलॉजी’ के माध्यम से प्रबंधित, यह 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को संचालित करता है और प्रत्येक दिन सफलतापूर्वक 15 मिलियन से अधिक एआई इनफरेंस (AI inferences) को प्रोसेस करता है।

डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (Digital India BHASHINI Division – DIBD) के बारे में 

  • संस्थागत ढाँचा: डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (DIBD) डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC) के तहत एक विशेष प्रभाग है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार के अंतर्गत कार्य करता है।
  • पारिस्थितिकी तंत्र का चालक: यह ओपन-सोर्स नवाचार, डेटासेट निर्माण और स्टार्ट-अप सक्षमता को संचालित करता है, जिससे बाहरी भागीदारों के लिए भारत का बुनियादी तकनीकी ढाँचा सुलभ हो जाता है।
  • ‘ग्लोबल साउथ’ विजन: यह क्षेत्रीय डिजिटल समानता को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत के ओपन-सोर्स तकनीकी मॉडलों को निर्यात करने के प्राथमिक माध्यम के रूप में कार्य करता है।

इस सहयोग का महत्त्व

  • DPI कूटनीति की ओर परिवर्तन: यह परियोजना भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति में एक रणनीतिक परिवर्तन को रेखांकित करती है।
    • क्षेत्रीय नेतृत्व: अपने गैर-स्वामित्वाधिकार (Non-Proprietary) तकनीकी मॉडलों को साझा करके भारत दक्षिण एशिया में एक सहयोगात्मक एवं संप्रभु डिजिटल विकल्प प्रस्तुत करता है, जिससे उसका क्षेत्रीय नेतृत्व सुदृढ़ होता है।
    • गैर-स्वामित्वाधिकार प्रौद्योगिकी मॉडल ऐसी प्रौद्योगिकियाँ, सॉफ्टवेयर, मानक या प्रणालियाँ हैं, जो खुली, सार्वजनिक रूप से सुलभ होती हैं तथा किसी एक कंपनी या संस्था के विशिष्ट नियंत्रण में नहीं होती हैं।
      • उनके डिजाइन, सोर्स कोड या परिचालन मानकों को आमतौर पर खुले तौर पर साझा किया जाता है, जिससे दूसरों को उनका उपयोग करने, संशोधन करने, सुधार करने और उन्हें वितरित करने की अनुमति मिलती है।
      • ये मॉडल सहयोग, पारदर्शिता, वहनीयता और नवाचार को बढ़ावा देते हैं।
  • सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण: एक ‘वॉइस-फर्स्ट’ इकोसिस्टम कम साक्षरता या सीमित तकनीकी समझ वाले नागरिकों को डिजिटल वाणिज्य, बैंकिंग, ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन शिक्षा जैसी महत्त्वपूर्ण सेवाओं तक पहुँचने की अनुमति देता है।
  • जन संपर्कों को सुदृढ़ करना: कम प्रतिनिधित्व वाली सीमावर्ती बोलियों (जैसे- मैथिली या भोजपुरी) को लक्षित करके, यह परियोजना एक साझा सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए सॉफ्ट पॉवर का उपयोग करती है।

चुनौतियाँ जिनका समाधान किया जाना आवश्यक है

  • डेटा की कमी: कई स्थानीय भाषाओं में संरचित डिजिटल टेक्स्ट या रिकॉर्डिंग की कमी है, जिससे अत्यधिक सटीक मशीन लर्निंग मॉडल को प्रशिक्षित करना कठिन हो जाता है।
  • बुनियादी ढाँचे की कमियाँ: अंतिम छोर तक जटिल एआई (AI) समाधानों को पहुँचाने के लिए निरंतर विद्युत और हाई-स्पीड इंटरनेट की आवश्यकता होती है, किंतु  नेपाल के दुर्गम एवं पर्वतीय भू-भाग के कारण इन सुविधाओं के विस्तार में भौगोलिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
  • डेटा गवर्नेंस: सीमा पार वॉयस डेटा के लिए दोनों देशों को डेटा प्राइवेसी, संप्रभुता और सुरक्षित भंडारण से संबंधित अपने कानूनी ढाँचे में समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता होगी।

आगे की राह 

  • डीपीआई (DPI) कूटनीति का विस्तार: भारत को इस समझौते का उपयोग भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे अन्य दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के लिए इंटरऑपरेबल डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार करने के लिए एक कार्यशील मॉडल के रूप में करना चाहिए।
  • मूलभूत स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन: तात्कालिक प्राथमिकता कृषि, स्थानीय बैंकिंग तथा आपदा प्रबंधन जैसे उच्च-प्रभाव वाले ग्रामीण क्षेत्रों में लक्षित पायलट प्रोजेक्ट के संचालन पर केंद्रित होनी चाहिए।
  • शैक्षणिक और स्टार्ट-अप केंद्रों को बढ़ावा देना: दोनों देशों को मिलकर ऐसे इनक्यूबेशन इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता है, जो तकनीकी स्टार्ट-अप और शोधकर्ताओं को इस खुले बुनियादी ढाँचे के ऊपर स्थानीयकृत व्यावसायिक ऐप बनाने की अनुमति दें।
  • डेटा मानकों में सामंजस्य स्थापत्य करना: सीमा पार डेटा सुरक्षा और निजता नियमों को तेजी से हल करने के लिए एक संयुक्त द्विपक्षीय कार्य बल की स्थापना करना सुरक्षित और दीर्घकालिक कार्यान्वयन सुनिश्चित करेगा।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.