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Lokesh Pal
June 10, 2026 02:50
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चक्रवात ‘दाना’ (2025) के दौरान, भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान के मैंग्रोव वनों ने तूफानी ज्वार को अवशोषित करने में कंकरीट अवरोधों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे भारत के जलवायु-संवेदनशील तटीय क्षेत्रों एवं तटीय समुदायों की सुरक्षा में पारिस्थितिकी-आधारित अनुकूलन (EbA) का महत्त्व प्रदर्शित हुआ।
मैंग्रोव अपने विशिष्ट संरचनात्मक एवं भौतिक अनुकूलन के कारण अत्यंत प्रभावी प्राकृतिक तटीय अवरोध के रूप में कार्य करते हैं, जो उन्हें कठोर तटीय पर्यावरण में जीवित रहने में सक्षम बनाते हैं।

भारत द्वारा कठोर एवं कंकरीट आधारित सीवॉल्स पर अत्यधिक निर्भरता अल्पकालिक राहत तो प्रदान करती है, किंतु दीर्घकाल में तटीय अपरदन के जोखिम को स्थानांतरित एवं अधिक गंभीर बना देती है। तीव्र चक्रवातों के दौरान मैंग्रोव पारितंत्रों की सफलता यह दर्शाती है कि प्राकृतिक पूँजी में निवेश न केवल आर्थिक रूप से व्यवहार्य है, बल्कि सामाजिक रूप से न्यायसंगत भी है।
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