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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal May 04, 2026 03:52 7 0

‘ऑपरेशन नेत्र 1.0’

भारतीय सेना ने लद्दाख जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में नेत्र देखभाल संबंधी उन्नत सेवा प्रदान करने के लिए ‘ऑपरेशन नेत्र 1.0’ (Op Netra 1.0) के तहत मेगा नेत्र शिविर का आयोजन किया।

‘ऑपरेशन नेत्र 1.0’ के बारे में

  • भारतीय सेना ने लेह के 153 अस्पतालों में एक उन्नत सर्जिकल नेत्र शिविर, ‘ऑपरेशन नेत्र 1.0’ का आयोजन किया।
  • यह पहल ऊँचाई वाले और सुदूर इलाकों में विशेष चिकित्सा सहायता पहुँचाने का एक मानवीय प्रयास है। 
  • उद्देश्य: लद्दाख में वंचित आबादी को सुलभ, उच्च गुणवत्ता वाली नेत्र देखभाल सेवा प्रदान करना।
  • इसका लक्ष्य भौगोलिक बाधाओं को दूर करना और दुर्गम क्षेत्रों में समावेशी स्वास्थ्य सेवा वितरण सुनिश्चित करना था।
  • लाभार्थियों में हानले, डेमचोक और तुरतुक जैसे लद्दाख के सुदूर क्षेत्रों के मरीज शामिल थे।

मुख्य विशेषताएँ

  • व्यापक सहायता: शिविर में कई दूरदराज के जिलों के लगभग 950 मरीजों की जाँच की गई।
    • इसने दुर्गम ऊँचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा की पहुँच सुनिश्चित की।
  • उन्नत सर्जिकल देखभाल: कुल 214 विशिष्ट उपचार प्रक्रियाएँ संपन्न हुईं, जिनमें जटिल मोतियाबिंद और रेटिनल सर्जरी प्रमुख थीं।
  • स्वदेशी डिजिटल नवाचार: ‘ऑपरेशन नेत्र ऐप’ के लॉन्च ने क्यूआर-आधारित रोगी पहचान और सूचनाओं के डिजिटलीकरण को सक्षम बनाया।
    • इसने उच्च-क्षमता वाले चिकित्सा कार्यों में दक्षता, सुरक्षा और समन्वय में सुधार किया।

महत्त्व

  • स्वास्थ्य सेवा समावेश: इस पहल के माध्यम से कई दृष्टिबाधित रोगियों की आंखों की रोशनी वापस आ सकी, जिससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया। 
  • नागरिक-सैन्य समन्वय: इस अभियान ने लद्दाख जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में रक्षा बलों और नागरिक प्रशासन के बीच मजबूत समन्वय का प्रदर्शन किया।
  • सैन्य चिकित्सा क्षमता को मजबूत करना: यह देश भर में हजारों नेत्र सर्जरी प्रदान करने वाली एक व्यापक पहल का हिस्सा है।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक, 2026

मीडिया स्वतंत्रता, सुरक्षा और संस्थागत दबावों पर बढ़ती चिंताओं को दर्शाते हुए, भारत विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक, 2026 में 157वें स्थान पर पहुँच गया है।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक, 2026 के बारे में

  • भारत की रैंक: वर्ष 2026 में 180 देशों में से भारत 157वें स्थान पर रहा, जो वर्ष 2025 में 151वें स्थान से नीचे है।
  • वैश्विक प्रवृत्ति: विश्व भर में प्रेस की आजादी कम हुई है, जिसके परिणामस्वरूप अब आधे से अधिक देश ‘चुनौतीपूर्ण’ या ‘बेहद चिंताजनक’ स्थितियों का सामना कर रहे हैं। 
  • शीर्ष देश: नॉर्वे, नीदरलैंड, एस्टोनिया, डेनमार्क और स्वीडन इस सूची में शीर्ष पर हैं।
  • सबसे कम रैंक वाले देश: सबसे कम रैंक वाले देशों में इरीट्रिया, उत्तर कोरिया, चीन और ईरान शामिल हैं।
  • पड़ोसी देशों से तुलना: भारत का स्थान नेपाल (87), श्रीलंका (134), बांग्लादेश (152) और पाकिस्तान (153) से नीचे है; यह केवल चीन (178) से ऊपर है।

भारत में प्रमुख चिंताएँ

  • कानूनी और संस्थागत मुद्दे: प्रेस की स्वतंत्रता को नियंत्रित करने के लिए देशद्रोह, मानहानि और आतंकवाद विरोधी कानूनों का उपयोग करना।
  • आर्थिक दबाव: सरकारी विज्ञापन राजस्व पर भारी निर्भरता, जो मीडिया पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण को सक्षम बनाती है।
  • सुरक्षा चिंताएँ: भारत पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देशों में बना हुआ है, जहाँ सालाना 2-3 हत्याएँ होती हैं।
  • विविधता का ह्रास: मीडिया नेतृत्व और विमर्श में महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले समूहों का सीमित प्रतिनिधित्व देखा गया है।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के बारे में

यह एक वार्षिक वैश्विक रैंकिंग है, जो दुनिया भर के देशों में प्रेस स्वतंत्रता के स्तर का आकलन करती है।

  • प्रकाशक: यह रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा जारी किया जाता है।
  • कवरेज: यह प्रत्येक वर्ष 180 देशों और क्षेत्रों का मूल्यांकन करता है।
  • उपयोग किए जाने वाले संकेतक: यह पत्रकारों के लिए राजनीतिक, कानूनी, आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा स्थितियों पर आधारित है।
  • उद्देश्य: यह मापता है कि पत्रकार बिना किसी सेंसरशिप, दबाव या हिंसा के कितने स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग कर सकते हैं।

व्हिटली अवार्ड, 2026

भारतीय संरक्षणवादी बरखा सुब्बा और परवीन शेख को हिमालयन सैलामैंडर  (Himalayan Salamander) और इंडियन स्किमर (Indian Skimmer) के आवास की रक्षा के प्रयासों के लिए व्हिटली अवार्ड, 2026 (Whitley Awards 2026) से सम्मानित किया गया है।

व्हिटली अवार्ड, 2026 के बारे में

  • यह एक वैश्विक संरक्षण पुरस्कार है, जो जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले पर्यावरण संरक्षण संबंधी कार्यकर्ताओं को पहचान दिलाने के लिए ‘व्हिटली फंड फॉर नेचर’ (Whitley Fund for Nature) द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।  
  • ग्रीन ऑस्कर: वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्टता के लिए इसे व्यापक रूप से ‘ग्रीन ऑस्कर’ के रूप में जाना जाता है।
  • वित्तीय सहायता: प्रत्येक विजेता को संरक्षण परियोजनाओं के लिए लगभग £50,000 की फंडिंग प्राप्त होती है।
  • फोकस क्षेत्र: यह एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्रों में समुदाय के नेतृत्व वाले तथा विज्ञान-आधारित संरक्षण का समर्थन करता है।
  • बरखा सुब्बा: दार्जिलिंग के आर्द्रभूमि में आवास पुनर्स्थापन, आक्रामक प्रजातियों को पृथक करने और उनमें रोग की निगरानी के माध्यम से हिमालयन सैलामैंडर की रक्षा करती हैं।
    • वे लगभग 30 प्रजनन स्थलों की सुरक्षा और स्थायी भूमि उपयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित एक समुदाय-आधारित संरक्षण मॉडल का नेतृत्व करती हैं।
  • परवीन शेख: चंबल नदी में इंडियन स्किमर (Indian Skimmer) के घोंसलों की रक्षा के लिए ‘गार्जियंस ऑफ द स्किमर’ पहल का नेतृत्व करती हैं।
    • इसमें उन्होंने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है क्योंकि घोंसलों की स्थायित्त्व दर में वृद्धि हुई (14% से बढ़कर 27%) और आबादी 400 से बढ़कर लगभग 1,000 (2017-2025) हो गई।

हिमालयन सैलामैंडर (Himalayan Salamander)

  • हिमालयन सैलामैंडर (Tylototriton Himalayanus) एक दुर्लभ और संकटग्रस्त उभयचर है, जो आवास के विखंडन, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहा है।
  • वितरण: यह भारत (दार्जिलिंग और पूर्वोत्तर), नेपाल, भूटान से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया और दक्षिण-पश्चिम चीन तक पाया जाता है।
  • आवास: यह ठंडे पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्रों, वनों, आर्द्रभूमि, चाय के बागानों, धान के खेतों और तालाबों के किनारों पर निवास करता है।
  • अनूठी विशेषताएँ: छिपकली जैसा शरीर जिसमें हड्डीदार उभार, पृष्ठीय मस्से (Dorsal Warts), चपटी पूँछ होती है।
  • संरक्षण स्थिति: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (1972) की अनुसूची I के तहत संरक्षित और IUCN द्वारा ‘सुभेद्य’ (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध है।

इंडियन स्किमर (Indian Skimmer)

  • इंडियन स्किमर (Rynchops Albicolli) नदी के किनारे रहने वाली एक दुर्लभ पक्षी प्रजाति है, जो जल की सतह के ऊपर कम ऊँचाई पर उड़कर शिकार करने के अपने अनोखे तरीके के लिए पहचानी जाती है।
  • आवास: यह गंगा, चंबल, यमुना और उनकी सहायक नदियों जैसे रेत के टीलों वाली बड़ी, धीमी गति से बहने वाली नदियों के किनारे पाया जाता है।

  • विशिष्ट विशेषताएँ: चमकीली नारंगी चोंच, ऊपरी हिस्सा काला और निचला हिस्सा सफेद होता है; ये रेत के टीलों पर समूहों में घोंसला बनाते हैं।
  • पारिस्थितिकी भूमिका: यह स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी तंत्र और तलछट की गतिशीलता के लिए एक प्रतीक और संकेतक प्रजाति के रूप में कार्य करता है। 
  • संरक्षण स्थिति: IUCN द्वारा ‘लुप्तप्राय’ (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध है।

BEA ग्लोबल फोरम (2026–27)

असम के डॉ भास्कर ज्योति सोनोवाल को वर्ष 2026-27 के लिए ब्रिक्स एंटरप्रेन्योर्स एलायंस ग्लोबल फोरम का अध्यक्ष चुना गया है।

पृष्ठभूमि

  • इंडिया ब्रिक्स बिजनेस समिट: डॉ भास्कर ज्योति सोनोवाल का चुनाव 18-19 अप्रैल, 2026 को हैदराबाद में आयोजित इंडिया ब्रिक्स बिजनेस समिट के बाद हुआ है।
  • ‘इंडिया ब्रिक्स बिजनेस समिट’ का मुख्य परिणाम: ‘हैदराबाद घोषणा’ को अपनाना, जिसमें MSME विकास और उन्नत वैश्विक सहयोग के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है।

ब्रिक्स एंटरप्रेन्योर्स एलायंस (BEA) के बारे में

  • यह ब्रिक्स+ के तहत एक व्यावसायिक मंच है, जो सदस्य देशों के उद्यमियों, उद्योग जगत के नेताओं और नीति निर्माताओं को जोड़ता है।
  • ब्रिक्स+ एक अनौपचारिक शब्द है, जिसका उपयोग ब्रिक्स के विस्तारित संस्करण के लिए किया जाता है।
  • स्थापना:ब्रिक्स एंटरप्रेन्योर्स एलायंस’ औपचारिक रूप से सितंबर 2025 में पारंपरिक मूल्यों पर II ब्रिक्स फोरम (ब्राजील) के दौरान स्थापित किया गया था।

BEA की संगठनात्मक संरचना

  • जनरल काउंसिल: सभी राष्ट्रीय इकाइयों के प्रतिनिधि।
  • ग्लोबल प्रेसिडेंट: प्रतिवर्ष चयन (ब्रिक्स की अध्यक्षता के अनुरूप)।
  • महासचिव: दीर्घकालिक समन्वय के लिए जिम्मेदार।
  • राष्ट्रीय इकाइयाँ (नेशनल चैप्टर्स): उद्यमियों और व्यापारिक नेताओं की देश-स्तरीय इकाइयाँ।

कार्य

  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय निर्माण: ब्रिक्स+ उद्यमियों के बीच सहयोग और विश्वास निर्माण का मंच।
  • साझेदार विश्वसनीयता: विश्वसनीय व्यावसायिक साझेदारी सुनिश्चित करने के लिए एक सत्यापित रजिस्ट्री बनाए रखता है।
  • व्यावसायिक सहायता: नियामक मार्गदर्शन, बाजार अंतर्दृष्टि और नेटवर्किंग सहायता प्रदान करता है।
  • क्षमता निर्माण: वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता के लिए प्रशिक्षण, कार्यशालाएँ और ज्ञान-साझाकरण आयोजित करता है।
  • संस्थागत सहयोग: ब्रिक्स एंटरप्रेन्योर्स एलायंस ने वैश्विक मानवीय पहलों का समर्थन करने के लिए ‘वॉलंटियर्स ऑफ पीस’ (Volunteers of Peace) के साथ एक सहयोग समझौता किया है।
    • वॉलंटियर्स ऑफ पीस एक अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवक मंच है, जो स्वयंसेवकों और मानवीय परियोजनाओं को जोड़ने में सहायता करता है, उन्हें सहायता तथा सहयोग के अवसर प्रदान करता है।

ब्रिक्स (BRICS) के बारे में

  • उत्पत्ति: ‘BRIC’ शब्द जिम ओ’नील द्वारा वर्ष 2001 में गढ़ा गया था।
  • पहला शिखर सम्मेलन: वर्ष 2009 में रूस में आयोजित किया गया।
  • विकास: प्रारंभ में इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे; वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह BRICS बन गया।
  • विस्तार (2024-25): मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया का समावेश किया गया है।
  • उद्देश्य: आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना, वैश्विक शासन में सुधार करना और ‘वैश्विक दक्षिण’ के प्रतिनिधित्व को मजबूत करना।
  • प्रमुख संस्थान: न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) बुनियादी ढाँचे और सतत् विकास परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण करता है।
  • महत्त्व: ब्रिक्स में दुनिया की लगभग 45 से 46 प्रतिशत आबादी और क्रय शक्ति समानता (PPP) के संदर्भ में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 35 से 37 प्रतिशत हिस्सा शामिल है।
    • यह वैश्विक व्यापार के लगभग एक-चौथाई हिस्से के लिए जिम्मेदार है; विस्तारित ब्रिक्स+ सऊदी अरब, रूस और ईरान जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादकों को एक साथ लाता है।

INS महेंद्रगिरी

हाल ही में भारतीय नौसेना को आईएनएस महेंद्रगिरी (यार्ड 12654) की आपूर्ति की गई है।

आईएनएस महेंद्रगिरी के बारे में

भारतीय नौसेना जहाज (INS) महेंद्रगिरी एक स्टील्थ मल्टी-रोल गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है, जिसे प्रोजेक्ट 17A (P-17A) के तहत विकसित किया गया है।

  • यह नीलगिरी-श्रेणी का छठा फ्रिगेट है और मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित चौथा जहाज है।
  • यार्ड 12654, मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा जहाज के डिजाइन और निर्माण के दौरान उसकी पहचान और ट्रैकिंग हेतु आवंटित एक विशिष्ट ‘शिपयार्ड हल नंबर’ है। 
  • नामकरण: इसका नाम ओडिशा में स्थित पूर्वी घाट की एक प्रमुख पर्वत चोटी महेंद्रगिरी के नाम पर रखा गया है।
  • निर्माण: इसे ‘इंटीग्रेटेड मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन’ (Integrated Modular Construction) पद्धति का उपयोग करके बनाया गया है, जो तेजी से निर्माण और समय सीमा के भीतर कुशल डिलीवरी को सक्षम बनाता है।
  • प्रणोदन: यह CODOG (कंबाइंड डीजल या गैस) प्रणाली से सुसज्जित है, जिसमें उच्च गति के संचालन के लिए गैस टरबाइन और किफायती क्रूजिंग के लिए डीजल इंजन का उपयोग किया जाता है, जो एक कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर (CPP) को संचालित करता है।
  • हथियार और सेंसर: यह एंटी-सरफेस वारफेयर (ASuW), एंटी-एयर वारफेयर (AAW) और एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW) के लिए एक व्यापक कॉम्बैट प्रणाली से संबद्ध है।
  • स्वचालन: इसमें मशीनरी और ऑनबोर्ड प्रणालियों के केंद्रीकृत नियंत्रण और निगरानी के लिए एक एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली (IPMS) है।
  • स्वदेशीकरण: डिजाइन, उपकरण और प्रणालियों में लगभग 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसमें 200 से अधिक MSMEs की भागीदारी और लगभग 4,000 प्रत्यक्ष और 10,000 अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन शामिल है।
  • महत्त्व: यह भारत की ब्लू-वाटर नौसेना क्षमता को मजबूत करता है, हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में समुद्री सुरक्षा को बढ़ाता है और बढ़ती स्वदेशी रक्षा विनिर्माण शक्ति को दर्शाता है।

प्रोजेक्ट 17A (Project 17A) के बारे में

  • प्रोजेक्ट 17A आधुनिक समुद्री खतरों से निपटने के लिए उन्नत स्टील्थ-गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट (नीलगिरी-श्रेणी) बनाने का एक भारतीय नौसेना का कार्यक्रम है।
  • अनुवर्ती (Follow-on): यह प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक-श्रेणी) का एक बेहतर संस्करण है, जिसमें बेहतर स्टील्थ और युद्ध क्षमताएँ हैं।
  • जहाजों की संख्या: इस परियोजना के तहत 7 फ्रिगेट की योजना है।
  • शिपयार्ड: निर्माण को इनके बीच विभाजित किया गया है:-
    • मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड
    • गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स।
  • डिजाइन: इसे वारशिप डिजाइन ब्यूरो (Warship Design Bureau) द्वारा डिजाइन किया गया है।
  • प्रोजेक्ट 17A के जहाज: नीलगिरी-श्रेणी के फ्रिगेट के तहत आईएनएस नीलगिरी (प्रमुख जहाज), आईएनएस हिमगिरी, आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस तारागिरी, आईएनएस महेंद्रगिरी और आईएनएस विंध्यगिरी शामिल हैं।

ऑपरेशन व्हाइट स्ट्राइक

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ‘ऑपरेशन व्हाइट स्ट्राइक’ (Operation WHITE STRIKE) के तहत मुंबई क्षेत्र में ₹1,745 करोड़ मूल्य की 349 किलोग्राम हाई-ग्रेड कोकीन जब्त की है।

संबंधित तथ्य

यह भारत में कोकीन की अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी में से एक है, जो देश के वार्षिक औसत (200-300 किलोग्राम) से अधिक है।

ऑपरेशन का महत्त्व

  • बहुराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क को समाप्त करना: यह आयात मार्गों और स्थानीय वितरण नेटवर्क से जुड़ी वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का खुलासा करता है। 
  • खुफिया-आधारित पुलिसिंग: यह 6 महीने की निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने पर आधारित थी।
  • रणनीतिक स्थान: बंदरगाहों और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के कारण मुंबई क्षेत्र एक प्रमुख प्रवेश और वितरण बिंदु के रूप में कार्य करता है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के बारे में

  • नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध नशीली दवाओं के उपयोग से निपटने के लिए भारत की शीर्ष एजेंसी है।
  • स्थापना: 17 मार्च, 1986 को NDPS अधिनियम, 1985 की धारा 4(3) के तहत।
  • मुख्यालय: नई दिल्ली।

मुख्य कार्य

  • समन्वय: केंद्रीय और राज्य प्रवर्तन निकायों के बीच समन्वय करने वाली नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
  • खुफिया जानकारी और प्रवर्तन: खुफिया जानकारी एकत्र करता है और देश भर में नशीले पदार्थों के नेटवर्क के विरुद्ध अभियान चलाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए इंटरपोल और ‘संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय’ (UNODC) जैसी वैश्विक एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य करता है।

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