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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal June 12, 2026 05:39 9 0

ब्लू वैली क्लस्टर (Blue Valley Cluster)

असम सरकार और यूरोपीय संघ ने ब्लू वैली क्लस्टर (Blue Valley Cluster) की शुरुआत की है, जो जनवरी 2026 के यूरोपीय संघ-भारत (EU–India) शिखर सम्मेलन में अपनाए गए यूरोपीय संघ-भारत व्यापक रणनीतिक एजेंडा में निर्धारित प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

ब्लू वैली क्लस्टर (Blue Valley Cluster)

  • ब्लू वैली क्लस्टर एक भारत–यूरोपीय संघ सहयोगात्मक पहल है, जिसका उद्देश्य जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) आधारित क्षेत्रों का विकास करना है, जैसे—प्राकृतिक फ्लेवर, सुगंध , अगरवुड उत्पाद तथा आयुष-आधारित वेलनेस उद्योग।
  • उद्देश्य: पूर्वोत्तर भारत में सतत् जैव-अर्थव्यवस्था-आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना, जिसमें भारत–यूरोपीय संघ निवेश, नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, मूल्य श्रृंखला एकीकरण तथा बेहतर बाजार पहुँच को प्रोत्साहित किया जाता है।
  • क्रियान्वयन संस्थाएँ
    • असम सरकार
    • यूरोपीय संघ (EU)
    • फेडरेशन ऑफ यूरोपियन बिजनेसेज इन इंडिया (FEBI)
    • असम इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (AIDC)

सैपलिंग डायलॉग 2026 (SAPLING Dialogue 2026)

हाल ही में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री ने अहमदाबाद में सैपलिंग डायलॉग 2026 का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य दक्षिण एशिया में खाद्य प्रसंस्करण-आधारित रोजगार सृजन एवं सतत विकास को आगे बढ़ाना है।

  • इस अवसर पर “असेसमेंट ऑफ द लेवल ऑफ फूड प्रोसेसिंग इन इंडिया” (Assessment of the Level of Food Processing in India) रिपोर्ट भी जारी की गई।

सैपलिंग के बारे में

  • सैपलिंग- साउथ एशियन पॉलिसी लीडरशिप फॉर इम्प्रूव्ड न्यूट्रिशन एंड ग्रोथ (South Asian Policy Leadership for Improved Nutrition and Growth-SAPLING) एक क्षेत्रीय नीति संवाद मंच है, जो दक्षिण एशिया में पोषण-संवेदनशील, लचीली एवं सतत् खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देता है।
  • नोडल मंत्रालय: यह संवाद संयुक्त रूप से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) तथा विश्व बैंक समूह द्वारा संचालित सैपलिंग पहल के सहयोग से आयोजित किया जाता है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • क्षेत्रीय नीतिगत सहयोग: सैपलिंग नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के भागीदारों, शोधकर्ताओं, विकास भागीदारों, स्टार्ट-अप्स एवं निवेशकों को एक साथ लाकर खाद्य प्रसंस्करण में क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करता है।
    • खाद्य प्रणाली परिवर्तन पर ध्यान: यह पहल मूल्य संवर्द्धन, तकनीक अपनाने, खाद्य सुरक्षा, आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ीकरण तथा असंगठित खाद्य प्रसंस्करण के औपचारीकरण को बढ़ावा देती है।
    • निवेश एवं नवाचार मंच: यह निजी निवेश, नवाचार, MSME विकास एवं तकनीक-आधारित समाधानों को प्रोत्साहित कर प्रतिस्पर्द्धी एवं सतत् खाद्य मूल्य शृंखलाएँ विकसित करता है।
    • एग्रीकनेक्ट पहल के साथ संरेखण: सैपलिंग, विश्व बैंक समूह की एग्रीकनेक्ट पहल के साथ संरेखित है, जो लचीली एवं पोषण-केंद्रित कृषि प्रणालियों का समर्थन करती है।
  • महत्त्व
    • रोजगार सृजन एवं किसान समृद्धि: खाद्य प्रसंस्करण गैर-कृषि से संबंधित रोजगार सृजित करता है, मूल्य संवर्द्धन बढ़ाता है, अपव्यय कम करता है तथा बेहतर बाजार संपर्कों के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करता है।
  • खाद्य सुरक्षा एवं पोषण सुदृढ़ीकरण: कुशल प्रसंस्करण, भंडारण एवं आपूर्ति शृंखलाएँ खाद्य उपलब्धता, गुणवत्ता एवं पोषण परिणामों में सुधार करती हैं।
  • क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण: देशों के बीच सहयोग, तकनीकी साझेदारी एवं निवेश के माध्यम से सतत् विकास को गति मिलती है तथा दक्षिण एशिया की खाद्य अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है।

“असेसमेंट ऑफ द लेवल ऑफ फूड प्रोसेसिंग इन इंडिया रिपोर्ट” की मुख्य विशेषताएँ

  • प्रसंस्करण स्तर में वृद्धि: भारत में खाद्य प्रसंस्करण का स्तर वर्ष 2016 में लगभग 10% से बढ़कर वर्ष 2023 में लगभग 17% हो गया है, जो मूल्य संवर्द्धन एवं कृषि-औद्योगिक विकास में महत्त्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।
  • संभावनाएँ: इस रिपोर्ट में फल, सब्जी एवं डेयरी क्षेत्रों में व्यापक अवसरों की पहचान की गई है तथा बुनियादी ढांचे के सुधार, फसल- कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी, किसानों की आय में वृद्धि एवं वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को मजबूत करने पर बल दिया गया है।

ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉण्ड इंडेक्स (BGABI)

 

वर्तमान में भारत अपने सरकारी बॉण्ड्स को ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉण्ड इंडेक्स (BGABI) में शामिल कराने के लिए प्रयास कर रहा है।

ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉण्ड इंडेक्स (BGABI) के बारे में 

  • यह विश्व के सबसे व्यापक रूप से अनुसरण किए जाने वाले नियत आय (Fixed Income) सूचकांकों में से एक है, जो विभिन्न देशों एवं मुद्राओं में निवेश-ग्रेड (Investment Grade) सरकारी, कॉरपोरेट एवं प्रतिभूतिकृत बॉण्ड के प्रदर्शन को ट्रैक करता है।
  • सेंसेक्स/निफ्टी के बॉण्ड बाजार समकक्ष के रूप में: जिस प्रकार सेंसेक्स/निफ्टी इक्विटी बाजार के प्रदर्शन को मापते हैं, उसी प्रकार BGABI वैश्विक बॉण्ड बाजार के प्रदर्शन को मापने वाला सूचकांक है।

ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉण्ड इंडेक्स (BGABI) की विशेषताएँ

  • व्यापक परिसंपत्ति कवरेज: यह वैश्विक बाजारों में निवेश-ग्रेड सरकारी, कॉरपोरेट एवं प्रतिभूतिकृत बॉण्ड को सम्मिलित करता है।
  • वैश्विक बाजार प्रतिनिधित्व: इसमें विकसित देशों के साथ-साथ चुनिंदा उभरती अर्थव्यवस्थाओं के ऋण साधन भी शामिल होते हैं, जिससे व्यापक भौगोलिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होता है।
  • बहु-मुद्रा कवरेज: यह विभिन्न मुद्राओं में जारी बॉण्ड्स को ट्रैक करता है, जिससे वैश्विक नियत आय निवेश अवसरों का प्रतिबिंब मिलता है।
  • वैश्विक निवेशकों के लिए मानक सूचकांक: अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्ति प्रबंधकों एवं इंडेक्स-आधारित निवेश फंडों द्वारा पोर्टफोलियो आवंटन के लिए इसका व्यापक उपयोग किया जाता है।
  • उच्च बाजार पहुँच मानक: इसमें शामिल होने के लिए मजबूत सेटलमेंट प्रणाली, परिचालन दक्षता, पारदर्शिता तथा विदेशी निवेशकों के लिए सुगम बाजार पहुँच जैसी शर्तों को पूरा करना आवश्यक होता है।

ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉण्ड इंडेक्स (BGABI) का महत्त्व

  • बॉण्ड निवेशों के लिए वैश्विक मानक: यह अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्ति प्रबंधकों के लिए नियत आय निवेशों के मूल्यांकन एवं आवंटन का एक प्रमुख निर्देशित बेंचमार्क है।
  • फंड प्रबंधकों के लिए पोर्टफोलियो मानक: सक्रिय फंड प्रबंधक अपने निवेश प्रदर्शन का आकलन इस सूचकांक के आधार पर करते हैं तथा उसी के अनुरूप पोर्टफोलियो आवंटन में परिवर्तन करते हैं।
  • निष्क्रिय निवेश प्रवाह का उत्प्रेरक: इंडेक्स फंड्स एवं एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) सूचकांक में शामिल बॉण्ड्स में स्वतः निवेश करते हैं, जिससे इन बॉण्ड्स की निरंतर माँग बनी रहती है।

ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉण्ड इंडेक्स (BGABI) में शामिल किए जाने हेतु विचाराधीन बॉण्ड्स का प्रकार

  • पात्र बॉण्ड्स: भारत को BGABI में शामिल करने के लिए जिन बॉण्ड्स पर विचार किया जा रहा है, वे पूर्ण रूप से सुलभ रास्ते (Fully Accessible Route – FAR) के अंतर्गत अधिसूचित सरकारी प्रतिभूतियाँ (G-Secs) हैं।
  • RBI की पहल: फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा वर्ष 2020 में शुरू किया गया था, ताकि भारत के सरकारी बॉण्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की भागीदारी को बढ़ाया जा सके।

ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉण्ड इंडेक्स (BGABI) में भारत की वर्तमान स्थिति

  • भारत अभी तक ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉण्ड इंडेक्स (BGABI) का हिस्सा नहीं है।
  • समावेशन स्थगित (जनवरी 2026): ब्लूमबर्ग ने भारत के समावेशन को स्थगित कर दिया, क्योंकि सेटलमेंट में देरी, जटिल पोस्ट-ट्रेड टैक्स प्रक्रियाएँ, सीमित ट्रेडिंग स्वचालन तथा लंबी फंड पंजीकरण प्रक्रियाओं जैसी चुनौतियों को लेकर चिंताएँ व्यक्त की गई थीं।

भारत के ऑनलाइन बाजारों में डार्क पैटर्न्स 

डेटम इंटेलिजेंस (Datum Intelligence) की वर्ष 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ऑनलाइन उपभोक्ताओं को ‘डार्क पैटर्न्स’ (Dark patterns) के कारण प्रतिवर्ष लगभग ₹25,000–28,000 करोड़ का आर्थिक नुकसान होता है।

डार्क पैटर्न्स (Dark Patterns) क्या हैं?

डार्क पैटर्न्स ऐसे भ्रामक डिजिटल डिजाइन अभ्यास हैं, जो उपभोक्ताओं की पसंद को प्रभावित करते हैं, उनकी सूचित सहमति (Informed Consent) को कमजोर करते हैं तथा वित्तीय या निजता संबंधी क्षति का कारण बन सकते हैं।

  • प्रमुख डार्क पैटर्न्स
    • ड्रिप प्राइसिंग (Drip Pricing): अतिरिक्त शुल्कों का खुलासा केवल अंतिम भुगतान (Checkout) चरण में किया जाना।
    • अदृश्य शुल्क: कर, सुविधा शुल्क या सेवा शुल्क को भुगतान तक छिपाकर रखना।
    • कृत्रिम तात्कालिकता (Artificial Urgency): उपभोक्ताओं में ‘छूट जाने का डर’ (FOMO) पैदा करने के लिए “केवल 1 कमरा शेष है” या “ऑफर 5 मिनट में समाप्त हो जाएगा” जैसे भ्रामक संदेशों के माध्यम से खरीदारी का कृत्रिम दबाव बनाना।
    • अनिवार्य अतिरिक्त सेवाएँ: बीमा, सदस्यता या प्रीमियम सेवाओं को पहले से चयनित (Pre-selected) रखना।
    • सब्सक्रिप्शन ट्रैप: सदस्यता लेना आसान लेकिन उसे रद्द करना कठिन बनाना।
  • वर्ष 2023 में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने भारत में डिजिटल उपभोक्ताओं की सुरक्षा हेतु 13 प्रकार के डार्क पैटर्न्स की पहचान कर उनके नियमन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • उपभोक्ताओं को भारी आर्थिक हानि: भारत के लगभग 304 मिलियन ऑनलाइन खरीदारों में से 88% उपभोक्ताओं को भ्रामक ऑनलाइन प्रथाओं के कारण प्रतिमाह ₹78–87 का नुकसान होता है।
  • अदृश्य शुल्कों में वृद्धि: वर्ष 2026 में 63% उपभोक्ताओं ने अदृश्य शुल्क या ड्रिप प्राइसिंग (Drip Pricing) का अनुभव किया, जबकि वर्ष 2024 में यह आँकड़ा 52% था।
  • उपभोक्ताओं को बाध्य करने वाली प्रक्रियाएँ: 73% प्लेटफॉर्मों ने बाध्यकारी कार्रवाई तंत्र का उपयोग किया, जिसके माध्यम से उपभोक्ताओं को खरीदारी, सब्सक्रिप्शन या अतिरिक्त सेवाएँ लेने के लिए प्रेरित किया गया।
  • जागरूकता के बावजूद भ्रमित होना: यद्यपि 81% उपभोक्ता डार्क पैटर्न्स के बारे में जानते थे, फिर भी 85% उपभोक्ताओं ने स्वयं को इनके द्वारा गुमराह होने की बात स्वीकार की।
  • पारदर्शी प्लेटफॉर्मों की माँग: 74% खरीदारों ने कहा कि वे ऐसे प्लेटफॉर्मों के लिए अधिक भुगतान करने को तैयार हैं, जो पारदर्शी एवं नैतिक उपयोगकर्ता अनुभव प्रदान करते हैं।

आईएमआई-रेजिस्टेंट मस्टर्ड हाइब्रिड्स 

ओरोबैंकी खरपतवार (Orobanche Weed) के प्रकोप से निपटने के लिए भारत वर्ष 2026–27 के रबी मौसम से आईएमआई-रेजिस्टेंट मस्टर्ड हाइब्रिड्स (IMI-Resistant Mustard Hybrids) की बड़े पैमाने पर कृषि प्रारंभ करेगा।

आईएमआई-रेजिस्टेंट मस्टर्ड हाइब्रिड्स के बारे में

  • आईएमआई-रेजिस्टेंट मस्टर्ड हाइब्रिड्स शाकनाशी-सहिष्णु (Herbicide-Tolerant) सरसों की किस्में हैं, जिन्हें विशेष रूप से ओरोबैंकी (Phelipanche/Orobanche) जैसे परजीवी खरपतवारों के प्रभावी नियंत्रण हेतु विकसित किया गया है। ये खरपतवार सरसों की उपज को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
  • विकास: इन हाइब्रिड्स को उत्परिवर्तन प्रजनन (Mutation Breeding) तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया है, जो एक पारंपरिक पौधा-प्रजनन विधि है। यह तकनीक आनुवंशिक अभियांत्रिकी का उपयोग किए बिना प्राकृतिक रूप से उत्पन्न लाभकारी उत्परिवर्तनों को संरक्षित करती है।
    • इन किस्मों के विकास का नेतृत्व दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर जेनेटिक मैनिपुलेशन ऑफ क्रॉप प्लांट्स (CGMCP) के शोधकर्ताओं ने किया, जिसमें प्रसिद्ध आनुवंशिकीविद् डॉ. दीपक पेंटल की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • ALS एंजाइम-आधारित प्रतिरोध: यह तकनीक एसीटोलैक्टेट सिंथेज (Acetolactate Synthase – ALS) एंजाइम में उत्परिवर्तन (Mutation) पर आधारित है, जो पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक होता है तथा सामान्यतः IMI शाकनाशियों (Herbicides) का लक्ष्य होता है।
    • चयनात्मक शाकनाशी सहिष्णुता: प्राकृतिक उत्परिवर्तन के कारण ALS एंजाइम की संरचना में परिवर्तन हो जाता है, जिससे शाकनाशी उससे जुड़ नहीं पाता। परिणामस्वरूप सरसों के पौधे सुरक्षित रहते हैं, जबकि खरपतवार नष्ट हो जाते हैं।
    • ओरोबैंकी का प्रभावी नियंत्रण: शाकनाशी पौधे एवं मिट्टी के माध्यम से संचरित होकर सरसों की जड़ों से जुड़े ओरोबैंकी (Orobanche) परजीवी खरपतवार को नष्ट करता है, जिसे सामान्यतः हाथ से निराई द्वारा प्रभावी रूप से हटाया नहीं जा सकता।
    • श्रम आवश्यकता में कमी: यह तकनीक श्रम-प्रधान निराई-गुड़ाई पर निर्भरता को कम करती है, विशेषकर फसल की महत्त्वपूर्ण वृद्धि अवस्थाओं के दौरान जब श्रमिकों की कमी सामान्य होती है।
    • उच्च उत्पादकता की संभावना: बेहतर खरपतवार प्रबंधन से सरसों की उत्पादकता बढ़ सकती है, घरेलू तिलहन उत्पादन को मजबूती मिल सकती है तथा परजीवी खरपतवारों से होने वाले नुकसान में कमी आ सकती है।
  • यह GM सरसों (GM Mustard) से कैसे भिन्न है? 
    • विकास की विधि: आईएमआई-रेजिस्टेंट हाइब्रिड्स को उत्परिवर्तन प्रजनन (Mutation Breeding) तथा प्राकृतिक आनुवंशिक विविधताओं के चयन के माध्यम से विकसित किया जाता है, जबकि GM सरसों को आनुवंशिक अभियांत्रिकी (Genetic Engineering) तकनीकों द्वारा जीन के प्रत्यक्ष समावेशन या संशोधन के माध्यम से विकसित किया जाता है।
    • नियामकीय ढाँचा: आईएमआई-रेजिस्टेंट हाइब्रिड्स को पारंपरिक रूप से विकसित फसल माना जाता है, जबकि GM सरसों को व्यावसायिक खेती से पूर्व कठोर जैव-सुरक्षा (Biosafety), पर्यावरणीय एवं नियामकीय मूल्यांकन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
      • जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (Genetic Engineering Appraisal Committee – GEAC) ने दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विकसित धारा मस्टर्ड हाइब्रिड (DMH)-11 नामक GM सरसों फसल की व्यावसायिक कृषि एवं बीज उत्पादन हेतु सशर्त पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान की थी।
      • सर्वोच्च न्यायालय की दो-न्यायाधीशीय पीठ ने GEAC की स्वीकृति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विभाजित निर्णय दिया। स्वदेशी स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय अध्ययनों की कमी को लेकर चिंताएँ व्यक्त की गईं, जिसके परिणामस्वरूप अंतिम निर्णय तक इसकी कृषि पर रोक लगी हुई है।

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