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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal June 13, 2026 05:15 37 0

ऑयलसीड्स किसान मित्र 

हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने “ऑयलसीड्स किसान मित्र (Oilseeds Kisaan Mitra)” की शुरुआत की है।

ऑयलसीड्स किसान मित्र के बारे में

  • यह भारत का पहला राष्ट्रीय स्तर का AI-संचालित व्हाट्सऐप चैटबॉट है, जो तिलहन किसानों को फसल उत्पादन एवं प्रबंधन पर निःशुल्क, बहुभाषी एवं 24×7 अनुसंधान-आधारित सलाह सेवाएँ प्रदान करता है।
  • विकसितकर्ता: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा ICAR–भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIOR) के माध्यम से विकसित किया गया है।
  • लॉन्च: इसे नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय तिलहन सम्मेलन के दौरान लॉन्च किया गया।
  • उद्देश्य: तिलहन उत्पादन में वृद्धि करना तथा भारत की खाद्य तेल आयात पर निर्भरता को कम करने के प्रयासों को सुदृढ़ करना।

ऑयलसीड्स किसान मित्र की मुख्य विशेषताएँ

  • बहुभाषी सुविधा: किसान भारत की किसी भी भाषा में इस प्लेटफॉर्म से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे इसकी पहुँच व्यापक बनती है।
  • तत्काल सलाह प्रदाता: AI-आधारित ज्ञान प्रणाली के माध्यम से किसानों को वास्तविक समय में निःशुल्क सलाह उपलब्ध कराई जाती है।
  • ऐप-रहित उपयोग: यह पूरी तरह व्हाट्सऐप (WhatsApp) पर आधारित है, इसलिए किसानों को किसी अलग ऐप या ब्राउजर की आवश्यकता नहीं होती।
  • फसल कवरेज: यह प्रमुख तिलहन फसलों जैसे मूँगफली, सरसों, तिल, सूरजमुखी, सोयाबीन, नाइजर आदि को कवर करता है।
  • व्यापक मार्गदर्शन: यह फसल प्रजाति चयन, फसल प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, सिंचाई प्रबंधन, कटाई के बाद प्रबंधन और बीज उपलब्धता जैसे विषयों पर विस्तृत सलाह प्रदान करता है।
  • विश्वसनीय वैज्ञानिक ज्ञान: यह ICAR एवं उसके संस्थानों जैसे ICAR–राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-NSRI), ICAR–भारतीय मूँगफली अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIGR), ICAR–भारतीय रेपसीड एवं सरसों अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIRMR) आदि द्वारा समर्थित अनुसंधान-आधारित एवं विश्वसनीय कृषि सलाह प्रदान करता है।

उच्च एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को केंद्रीय उत्पाद शुल्क से छूट प्रदान

भारत सरकार ने 22%–30% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E22, E25, E27, E30) को मिश्रण प्रक्रिया पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty) से छूट प्रदान की है।

संबंधित तथ्य 

  • उद्देश्य: यह निर्णय दोहरे कराधान (Double Taxation) से बचने के लिए लिया गया है, क्योंकि पेट्रोल पर पहले से ही केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) लगता है, जबकि एथेनॉल पर GST लागू होता है। मिश्रण प्रक्रिया पर अलग से कर लगने से दोहरा कर भार उत्पन्न हो सकता था।
  • E85 फ्यूल: यह निर्णय भारत में 5 जून, 2026 को E85 फ्यूल की शुरुआत के बाद लिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, E85 फ्यूल की कीमत E20 ईंधन से लगभग ₹20 प्रति लीटर कम है।

इस कदम के लाभ

  • जैव-ईंधन अपनाने को बढ़ावा: यह निर्णय भविष्य में E20 से अधिक उच्च एथेनॉल मिश्रण के विस्तार को सुगम बनाता है।
  • ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि: यह कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है।
  • किसानों को लाभ: यह गन्ना, मक्का एवं अन्य अनाज आधारित एथेनॉल फीडस्टॉक की माँग बढ़ाकर किसानों की आय में वृद्धि करता है।
  • निवेश आकर्षण: एथेनॉल उत्पादन, भंडारण, लॉजिस्टिक्स तथा फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में निवेश को प्रोत्साहन मिलता है।
  • पर्यावरणीय लाभ: उच्च एथेनॉल मिश्रण से जीवाश्म ईंधन के उपयोग में कमी आती है तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भी कम होता है।

भारत में एथेनॉल मिश्रण का कालक्रम

  • वर्ष 2001: कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने एवं जैव-ईंधन को बढ़ावा देने हेतु चुनिंदा राज्यों में पायलट एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम शुरू किया गया।
  • वर्ष 2003: भारत सरकार द्वारा एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम औपचारिक रूप से शुरू किया गया।
  • वर्ष 2014: एथेनॉल मिश्रण स्तर मात्र 1.53% था; इसके पश्चात् प्रशासनिक मूल्य निर्धारण एवं फीडस्टॉक विविधीकरण जैसे प्रमुख नीति सुधार किए गए।
  • वर्ष 2021: सरकार ने E20 (20% एथेनॉल मिश्रण) के लक्ष्य को वर्ष 2030 से संशोधित कर वर्ष 2025–26 कर दिया, जिससे बायो-फ्यूल रोडमैप के क्रियान्वयन में तेजी आई है।
  • वर्ष 2024–25: भारत ने 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) लक्ष्य को निर्धारित समय से 5 वर्ष पहले प्राप्त कर लिया और अमेरिका तथा ब्राजील के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एथेनॉल उत्पादक बना।
  • जून 2026: भारत ने E85 फ्यूल (85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल) की शुरुआत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) के लिए की, जो एथेनॉल अपनाने के अगले चरण को दर्शाता है।

भारत–नेपाल सीमा-पार प्रेषण तंत्र 

भारत और नेपाल ने भारत के UPI और नेपाल के नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस (NPI) को जोड़कर एक रियल-टाइम सीमा-पार प्रेषण तंत्र (Real-Time Cross-Border Remittance Mechanism) शुरू किया है।

भारत–नेपाल सीमा-पार प्रेषण तंत्र के बारे में

  • भारत और नेपाल ने एक पीयर-टू-पीयर (P2P) क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस (प्रेषण) तंत्र को क्रियान्वित किया है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के नागरिकों के मध्य सहज डिजिटल मनी ट्रांसफर को सक्षम बनाना है।
  • यह प्रणाली भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और नेपाल के नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस (NPI) के मध्य प्रत्यक्ष लिंक स्थापित करती है।
  • यह उपयोगकर्ताओं को मोबाइल बैंकिंग ऐप्लिकेशन और डिजिटल वॉलेट्स के माध्यम से तत्काल, सुरक्षित एवं रियल-टाइम में मनी ट्रांसफर करने की सुविधा प्रदान करती है।
  • कार्यान्वयनकर्ता: एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) और नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड (NCHL)।
    • एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की अंतरराष्ट्रीय शाखा है, जो UPI एवं अन्य भारतीय भुगतान प्रणालियों के वैश्विक विस्तार के लिए उत्तरदायी है।
    • इसने क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट कॉरिडोर स्थापित करने के लिए नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड (NCHL) के साथ सहयोग किया है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • प्रत्यक्ष UPI–NPI कनेक्टिविटी: यह तंत्र भारत और नेपाल के मध्य बिना किसी पारंपरिक बैंकिंग मध्यस्थ के प्रत्यक्ष अकाउंट-टू-अकाउंट मनी ट्रांसफर को सक्षम बनाता है।
    • सुगम यात्रा एवं प्रेषण: भारत और नेपाल के नागरिक बिना नकदी के आसानी से मनी ट्रांसफर कर सकते हैं।
    • सुरक्षित एवं रियल-टाइम भुगतान: यह प्रणाली सुरक्षित, पारदर्शी एवं त्वरित मनी ट्रांसफर सुनिश्चित करती है।यह पहल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती है तथा वहनीय डिजिटल भुगतान सेवाओं तक पहुँच का विस्तार करती है।
  • महत्त्व: यह पहल वित्तीय संपर्क और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देती है तथा भारत–नेपाल के आर्थिक एवं दोनों देशों के नागरिकों संबंधों को सुदृढ़ बनाती है।

UPI के वैश्विक विस्तार के बारे में

  • UPI वर्तमान में नौ अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं में स्वीकार किया जाता है।
    • इनमें शामिल हैं: सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), फ्राँस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका और कंबोडिया।
  • यह भारत की डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) कूटनीति का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरा है।

बेदुइन समुदाय (Bedouin Communities)

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इजरायल पर आरोप लगाया है कि उसने वेस्ट बैंक में बेदुइन और फिलिस्तीनी पशुपालक समुदायों को जबरन विस्थापित किया है और इसे एथनिक क्लींजिंग (Ethnic Cleansing) के अभियान के रूप में वर्णित किया है।

वेस्ट बैंक में बेदुइन समुदायों से संबंधित आरोप

  • जबरन विस्थापन और हिंसा: संयुक्त राष्ट्र (UN) के आँकड़ों के अनुसार, रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2023 के बाद से 100 से अधिक समुदायों को आंशिक या पूर्ण रूप से विस्थापित होना पड़ा है।
  • बस्तियों का विस्तार: रिपोर्ट में वेस्ट बैंक के एरिया C में इजरायली बस्तियों और पशुपालक चौकियों के तेजी से विस्तार को उजागर किया गया है।
    • आलोचकों का तर्क है कि इससे फिलिस्तीनियों की भूमि और आजीविका तक पहुँच सीमित हो रही है।
  • अंतरराष्ट्रीय कानून संबंधी चिंताएँ: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस विस्थापन को जबरन स्थानांतरण का रूप बताया है और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के रूप में आरोपित किया है।
    • इजरायल इन आरोपों को अस्वीकार करता है, इजरायल सरकार के अनुसार, उसकी सुरक्षा सेनाएँ, केवल आवश्यकतानुसार अवैध हिंसा के विरुद्ध कार्रवाई करती हैं।

बेदुइन और फिलिस्तीनी पशुपालक समुदायों के बारे में

  • बेदुइन समुदाय: बेदुइन पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका में पाए जाने वाले पारंपरिक रूप से खानाबदोश अरब पशुपालक समुदाय हैं।
  • पारंपरिक आजीविका: ये समुदाय मुख्यतः भेड़, बकरी और ऊँट पालन करते हैं तथा चराई भूमि एवं जल संसाधनों पर निर्भर रहते हैं।
    • इनकी आर्थिक एवं सांस्कृतिक पहचान गहरे रूप से पशुपालन (Pastoralism) से जुड़ी है।
    • ये प्रायः छोटे-छोटे शिविरों में रहते हैं और खुले चरागाह क्षेत्रों पर निर्भर होते हैं।
  • वेस्ट बैंक में उपस्थिति: वेस्ट बैंक के अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों, विशेषकर एरिया C, में अनेक बेदुइन समुदाय रहते हैं, जो इजरायली सुरक्षा एवं प्रशासनिक नियंत्रण में आता है।
  • सामाजिक-आर्थिक संवेदनशीलता: इनकी गतिशील जीवनशैली और साझा चरागाह भूमि पर निर्भरता इन्हें विस्थापन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है।
  • महत्त्व: यह मुद्दा मानवीय चिंताओं, भूमि अधिकारों, बस्ती नीतियों और व्यापक इजरायल–फिलिस्तीन संघर्ष के मध्य जटिल संबंधों को दर्शाता है।

नरसंहार पर अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढाँचा

  • जिनेवा कन्वेंशन्स (1949): वर्ष 1949 के जिनेवा कन्वेंशन्स और उनके अतिरिक्त प्रोटोकॉल, सशस्त्र संघर्षों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा के नियम निर्धारित करते हैं तथा सामूहिक हत्याओं, यातना और अमानवीय व्यवहार जैसे कृत्यों को प्रतिबंधित करते हैं, जो नरसंहार की स्थिति में योगदान कर सकते हैं।
  • नरसंहार अभिसमय (1948): नरसंहार के अपराध की रोकथाम और दंड संबंधी अभिसमय (1948) नरसंहार की परिभाषा प्रस्तुत करता है तथा राज्यों को इस बात के लिए बाध्य करता है कि वे किसी राष्ट्रीय, नृजातीय, नस्लीय या धार्मिक समूह को समाप्त करने के इरादे से किए गए कृत्यों को रोकें और दंडित करें।
  • रोम संविधि (1998): वर्ष 1998 की रोम संविधि, जिसने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की स्थापना की, नरसंहार को सबसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों में से एक मानती है और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) को ऐसे व्यक्तियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार देती है, जो नरसंहार, युद्ध अपराध या मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार हों।

13वाँ ब्रिक्स शहरीकरण मंच 

भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत नई दिल्ली में 13वें ब्रिक्स शहरीकरण मंच (13th BRICS Urbanisation Forum) का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य समावेशी एवं लचीले शहरी भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना है।

  • भारत द्वारा 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit) भी 12–13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

ब्रिक्स शहरीकरण मंच, 2026 के बारे में

  • 13वाँ ब्रिक्स शहरीकरण मंच 11–12 जून, 2026 को सुषमा स्वराज भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जो आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तत्त्वावधान में संपन्न हुआ।
  • उद्देश्य: ब्रिक्स देशों के मध्य सतत् शहरी विकास एवं शहरी शासन पर सहयोग को सुदृढ़ करना।
  • मेजबान: भारत ने इस मंच की मेजबानी चौथी बार की है, इससे पूर्व यह नई दिल्ली (2013), विशाखापत्तनम (2016) और वर्चुअल संस्करण (2021) में आयोजित किया जा चुका है।
  • थीम: “सिटीज फॉर पीपल: ब्रिक्स कोऑपरेशन फॉर इन्क्लूसिव एंड रेजिलिएंट अर्बन फ्यूचर्स (Cities for People: BRICS Cooperation for Inclusive and Resilient Urban Futures)”।
  • प्रतिभागी: इस मंच में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया के मंत्री एवं अधिकारी शामिल हुए।

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