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संक्षिप्त समाचार

Lokesh Pal July 07, 2026 03:06 7 0

माचा टी (Matcha Tea)

असम के छोटा तिंगराई चाय बागान, माचा टी (Matcha Tea) का व्यावसायिक उत्पादन करने वाला भारत का पहला चाय बागान बनकर देश के चाय उद्योग के विविधीकरण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

माचा टी के बारे में

  • माचा एक उच्च गुणवत्ता वाली पाउडरयुक्त ग्रीन टी है, जिसे कैमेलिया साइनेंसिस (Camellia sinensis) की विशेष रूप से उगाई गई पत्तियों से तैयार किया जाता है।
  • उत्पादन: परंपरागत रूप से इसका उत्पादन जापान में होता है। वर्तमान में इसका उत्पादन चीन और वियतनाम में भी किया जाता है, जबकि वैश्विक माँग आपूर्ति से अधिक है।
    • चीन विश्व का सबसे बड़ा माचा उत्पादक है और वैश्विक उत्पादन का लगभग 70% हिस्सा प्रदान करता है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • छाया में खेती: चाय के पौधों को कटाई से 3–4 सप्ताह पूर्व लगभग 90% सूर्य प्रकाश से ढककर रखा जाता है, जिससे क्लोरोफिल, अमीनो अम्ल तथा स्वाद में वृद्धि होती है।
    • संपूर्ण पत्ती का सेवन: सामान्य ग्रीन टी के विपरीत, इसकी बारीक पिसी हुई पत्तियों को पानी में फेंटकर (Whisk) पूरी तरह पिया जाता है, जिससे अधिक पोषण प्राप्त होता है।
    • पोषक तत्वों से भरपूर: इसमें एंटीऑक्सीडेंट (कैटेचिन), एल-थीनिन (L-theanine), क्लोरोफिल तथा प्राकृतिक कैफीन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
  • उत्पादन प्रक्रिया
    • छाया में उगाई गई पत्तियों की सावधानीपूर्वक तोड़ाई, भाप से प्रसंस्करण, सुखाने तथा डंठल हटाने (De-stemming) के बाद टेंचा (Tencha) तैयार किया जाता है।
    • इसके बाद टेंचा की पत्तियों को विशेष पत्थर की चक्कियों (Stone Mills) से बारीक पीसकर चमकीले हरे रंग का माचा पाउडर बनाया जाता है।
    • प्रामाणिक माचा के उत्पादन हेतु सटीक खेती, प्रसंस्करण तथा भंडारण आवश्यक होता है, ताकि उसका रंग, सुगंध और पोषण गुणवत्ता बनी रहे।
  • भारत–जापान सहयोग: भारत का पहला व्यावसायिक माचा लगभग एक दशक तक जापानी चाय विशेषज्ञों के साथ सहयोग से विकसित किया गया, जो प्रौद्योगिकी एवं ज्ञान हस्तांतरण का सफल उदाहरण है।

सब-ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल फॉर एक्सपेरिमेंट्स (SOLVE) 

इसरो (ISRO) ने सब-ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल फॉर एक्सपेरिमेंट्स (SOLVE) के सॉलिड मोटर (Solid Motor) का पहला सफल ग्राउंड परीक्षण किया। यह गगनयान क्रू मॉड्यूल की पैराशूट-आधारित डीसेलेरेशन (Deceleration) प्रणाली के प्रमाणीकरण के लिए एक महत्त्वपूर्ण परीक्षण मंच है।

सब-ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल फॉर एक्सपेरिमेंट्स (SOLVE) के बारे में

  • सब-ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल फॉर एक्सपेरिमेंट्स (SOLVE) एक सॉलिड मोटर (Solid Motor) आधारित परीक्षण यान है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान मिशन के लिए आवश्यक महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के प्रमाणीकरण हेतु विकसित किया है।
  • यह सिम्युलेटेड मिशन परिस्थितियों में क्रू मॉड्यूल की एकीकृत पैराशूट एवं डीसेलेरेशन (Deceleration) प्रणाली का परीक्षण करने में सक्षम है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • उप-कक्षीय परीक्षण प्लेटफार्म: यह क्रू मॉड्यूल को 10–17 किमी. की ऊँचाई तक ले जाकर पृथक्करण के बाद उसकी रिकवरी का परीक्षण करता है।
    • पैराशूट प्रमाणीकरण: सुरक्षित वायुमंडलीय डीसेलेरेशन एवं सी स्प्लैशडाउन (Splashdown) सुनिश्चित करने के लिए 10 पैराशूटों के क्रमिक संचालन का परीक्षण करता है।
    • संशोधित PSLV प्रौद्योगिकी: इसमें संशोधित PSLV स्ट्रैप-ऑन मोटर, मंद-दहन प्रणोदक तथा सेकेंडरी इंजेक्शन थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल (SITVC) तकनीक का उपयोग किया गया है।
  • गगनयान मिशन के अंतर्गत प्रमुख प्रारंभिक परीक्षण
    • पैड एबॉर्ट टेस्ट (PAT): प्रक्षेपण के दौरान आपातकालीन स्थिति में क्रू एस्केप प्रणाली का प्रमाणीकरण।
    • टेस्ट व्हीकल (TV) मिशन: विभिन्न उड़ान परिस्थितियों में एबॉर्ट क्षमता का प्रदर्शन।
    • एकीकृत एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT): पैराशूट एवं डीसेलेरेशन प्रणाली का प्रमाणीकरण।
    • SOLVE: क्रू मॉड्यूल की एकीकृत पैराशूट एवं रिकवरी प्रणाली का परीक्षण।
    • वाटर सर्वाइवल टेस्ट फैसिलिटी (WSTF): भारतीय नौसेना के सहयोग से सी स्प्लैशडाउन (Splashdown) के बाद रिकवरी प्रक्रियाओं का अनुकरण करती है।

एशियाई शेर 

हालिया एशियाई शेर गणना में 891 शेरों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिसके बाद दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए गिर परिदृश्य के बाहर दूसरी स्वतंत्र विचरण करने वाली शेर आबादी स्थापित करने की माँग पुनः तीव्र हो गई।

एशियाई शेर की आबादी में प्रमुख रुझान

  • गुजरात में वर्ष 2025 की शेरों की गणना में 891 एशियाई शेर दर्ज किए गए, जो वर्ष 2020 के 674 शेरों की तुलना में 32.2% की वृद्धि दर्शाते हैं।
  • वर्तमान में लगभग 44.22% एशियाई शेर संरक्षित वनों के बाहर पाए जाते हैं, जो मानव-प्रधान भू-परिदृश्यों में उनके विस्तार को दर्शाता है।
  • गिर राष्ट्रीय उद्यान–गिर वन्यजीव अभयारण्य–पनिया वन्यजीव अभयारण्य का भू-परिदृश्य अभी भी एशियाई शेरों की मुख्य प्रजनन आबादी का प्रमुख आवास बना हुआ है।
    • बरडा वन्यजीव अभयारण्य एशियाई शेरों के नए आवास के रूप में उभरकर सामने आया है, यद्यपि यह भी गुजरात राज्य के भीतर ही स्थित है।

एशियाई शेर के बारे में

  • एशियाई शेर (पैंथेरा लियो पर्सिका) एशिया में पाया जाने वाला एकमात्र जंगली शेर उप-प्रजाति है तथा भारत का स्थानिक (Endemic) वन्यजीव है।
  • आवास: यह शुष्क पर्णपाती वनों, झाड़ीदार क्षेत्रों, सवाना तथा खुले घास के मैदानों में पाया जाता है, जहाँ पर्याप्त शिकार एवं जल उपलब्ध हो।
  • वितरण: यह प्रजाति केवल गुजरात के गिर भू-परिदृश्य (Gir Landscape) में पाई जाती है, जिसमें संरक्षित वन एवं उनके आस-पास के बहुउद्देशीय परिदृश्य शामिल हैं।
  • संरक्षण स्थिति
    • IUCN रेड लिस्ट: संकटग्रस्त (Endangered)
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-I
    • CITES: परिशिष्ट-I (Appendix I)।
  • प्रमुख चिंताएँ
    • एकल आबादी का जोखिम: एक ही भू-परिदृश्य में सीमित होने के कारण महामारी, वनाग्नि तथा प्राकृतिक आपदाओं से पूरी आबादी प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।
    • रोगों का खतरा: वर्ष 2018 में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के प्रकोप ने सामूहिक मृत्यु के जोखिम को उजागर किया।
    • कम आनुवंशिक विविधता: सीमित आनुवंशिक विविधता रोगों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाती है तथा दीर्घकालिक अनुकूलन क्षमता को कम करती है।
    • मानव–सिंह अंतःक्रिया: संरक्षित क्षेत्रों के बाहर बढ़ते प्रसार से मानव–वन्यजीव संघर्ष, सड़क दुर्घटनाओं एवं विद्युताघात का खतरा बढ़ रहा है।
  • संरक्षण पहलें
    • प्रोजेक्ट लायन (2020): इसका उद्देश्य आवास सुधार, रोग निगरानी, वन्यजीव गलियारों का विकास तथा शेरों की आबादी का वैज्ञानिक प्रबंधन करना है।
    • सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय (2013): न्यायालय ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान में एशियाई शेरों के स्थानांतरण का निर्देश दिया, ताकि गिर के बाहर दूसरी स्वतंत्र विचरण करने वाली आबादी स्थापित की जा सके।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्रीय एकीकरण तथा राष्ट्र-निर्माण में उनके योगदान को स्मरण किया।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बारे में

  • प्रारंभिक जीवन: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई, 1901 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल के एक प्रतिष्ठित बंगाली परिवार में हुआ।
  • शैक्षणिक उत्कृष्टता: उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी, बंगाली एवं विधि (Law) विषय में डिग्रियाँ प्राप्त कीं।
    • वर्ष 1922 में उन्होंने ‘बंग वाणी’ नामक बंगाली पत्रिका का प्रकाशन प्रारंभ किया।
  • विधिक जीवन: वर्ष 1926 में लंदन स्थित लिंकन्स इन (Lincoln’s Inn) से इंग्लिश बार में नामांकित होकर बैरिस्टर बने।
  • स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान एवं वैचारिक दृष्टिकोण
    • भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध: उन्होंने वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया, क्योंकि उनका मानना था कि इससे द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारत की स्थिति कमजोर होगी।
    • हिंदू अधिकारों के पक्षधर: वे हिंदू महासभा से जुड़े तथा विशेष रूप से बंगाल के हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य किया।
    • लियाकत–नेहरू समझौते का विरोध: वर्ष 1950 में उन्होंने लियाकत–नेहरू समझौते के विरोध में जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। उनका मानना था कि यह समझौता पूर्वी बंगाल (वर्तमान बांग्लादेश) के हिंदुओं के हितों एवं सुरक्षा की पर्याप्त रक्षा करने में विफल रहा।
  • राजनीतिक विचारधारा: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, अखंड राष्ट्रीय एकता तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता पर आधारित थी।
  • राजनीतिक योगदान
    • सबसे कम आयु के कुलपति: वर्ष 1934 में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम आयु के कुलपति बने।
    • बंगाल में गठबंधन राजनीति: उन्होंने हिंदू महासभा समर्थित गठबंधन सरकार में बंगाल के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया।
    • संविधान सभा के सदस्य: वे संविधान सभा की मौलिक अधिकार, अल्पसंख्यक, जनजातीय एवं बहिष्कृत क्षेत्रों संबंधी सलाहकार समिति के सदस्य थे।
    • भारतीय जनसंघ के संस्थापक: वर्ष 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ (BJS) की स्थापना की, जिसने आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वैचारिक एवं संगठनात्मक नींव रखी।
    • संसदीय योगदान: उन्होंने भारत में सशक्त विपक्ष की प्रारंभिक संरचना को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा संसद में नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (National Democratic Party) के गठन में योगदान दिया।
    • ‘द लायन ऑफ पार्लियामेंट’: अपनी प्रभावशाली वाक्पटुता, दृढ़ व्यक्तित्व तथा भारत की एकता एवं अखंडता के प्रति अडिग रुख के कारण उन्हें ‘द लायन ऑफ पार्लियामेंट’ की उपाधि से सम्मानित किया जाता है।
      • अनुच्छेद-370 का विरोध: उन्होंने अनुच्छेद-370 का विरोध करते हुए यह उद्घोष किया कि “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।”
  • विरासत
    • स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री थे।
    • साहित्यिक योगदान: “लीव्स फ्रॉम अ डायरी” में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आत्मकथात्मक लेखन एवं संस्मरण संकलित हैं।
  • बलिदान: 23 जून, 1953 को जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के विरोध के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और विवादास्पद परिस्थितियों में उनका निधन हो गया। उनके निधन को व्यापक रूप से उनके बलिदान के रूप में स्मरण किया जाता है।

पचपदरा ग्रीनफील्ड रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स 

हाल ही में प्रधानमंत्री ने राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में भारत के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया।

पचपदरा ग्रीनफील्ड रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के बारे में

  • विकसितकर्ता: इसका विकास हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) एवं राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में किया गया है।
  • निवेश: इस परियोजना में ₹79,450 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है।
  • रिफाइनिंग क्षमता: 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA)।
  • पेट्रोकेमिकल क्षमता: 2.4 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA)।
  • विशिष्टता: यह भारत का पहला ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है।
    • ग्रीनफील्ड परियोजना: ऐसी परियोजना, जिसका निर्माण अप्रयुक्त भूमि पर पूर्णतः नई अवसंरचना विकसित करके किया जाता है।
  • उन्नत विशेषताएँ
    • नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI): इस रिफाइनरी का NCI 17.0 है, जो इसे अत्यधिक उन्नत रिफाइनरी बनाता है। यह भारी कच्चे तेल (Heavy Crude Oil) का प्रसंस्करण कर उच्च-मूल्य वाले पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन करने में सक्षम है।
    • पेट्रोकेमिकल उत्पादन: इसका पेट्रोकेमिकल यील्ड 26% से अधिक है, जो दक्षता एवं मूल्य संवर्द्धन के वैश्विक मानकों के अनुरूप है।
    • एकीकृत डिजाइन: इस परिसर में रिफाइनिंग एवं पेट्रोकेमिकल उत्पादन को एक ही स्थान पर एकीकृत किया गया है।
  • परियोजना का आर्थिक महत्त्व
    • ऊर्जा सुरक्षा एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करेगा।
    • पेट्रोकेमिकल एवं प्लास्टिक पार्क के लिए एंकर उद्योग (Anchor Industry) के रूप में कार्य करेगा।
    • डाउनस्ट्रीम उद्योगों, रोजगार सृजन तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।

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