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संक्षिप्त समाचार

Lokesh Pal July 14, 2026 03:40 4 0

टाइफून बावी (2026) 

चीन के झेजियांग प्रांत से टकराने के बाद टाइफून बावी कमजोर होकर उष्णकटिबंधीय तूफान में परिवर्तित हो गया है, जिससे पूर्वी एशिया में व्यापक व्यवधान उत्पन्न हुआ है।

टाइफून बावी (2026) के बारे में

  • टाइफून बावी वर्ष 2026 में पश्चिमी उत्तर प्रशांत महासागर के ऊपर विकसित होने वाला एक अत्यंत विशाल एवं अत्यधिक तीव्र श्रेणी 5 उष्णकटिबंधीय चक्रवात था।
  • यह गुआम, उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह, जापान, ताइवान तथा पूर्वी चीन को प्रभावित करने के बाद कमजोर होकर उष्णकटिबंधीय तूफान में परिवर्तित हो गया।
  • अवस्थिति: यह चक्रवात पश्चिमी प्रशांत महासागर के ऊपर उत्पन्न हुआ तथा फिलीपीन सागर से होकर उत्तर-पश्चिम दिशा में पूर्वी एशिया की ओर अग्रसर हुआ।
    • इसे फिलीपींस में सुपर टाइफून इंडे (Super Typhoon Inday) के नाम से भी जाना जाता है।
  • तट से टकराना (लैंडफॉल): इसने 6 जुलाई, 2026 को रोटा (उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह) में श्रेणी 5 की तीव्रता के साथ पहली बार तट से टकराया, इसके बाद जापान के साकिशिमा द्वीपसमूह को पार करते हुए चीन के झेजियांग में तट से टकराया।
  • व्यापक प्रभाव: इस टाइफून के कारण तूफानी ज्वार, मूसलाधार वर्षा, आकस्मिक बाढ़, भूस्खलन, बिजली आपूर्ति बाधित होने तथा बड़े पैमाने पर लोगों की निकासी जैसी घटनाएँ, प्रभावित क्षेत्रों में देखने को मिली हैं।
  • अत्यधिक तीव्रता: बावी में अधिकतम लगातार सतही पवनों की गति लगभग 285 किमी./घंटा दर्ज की गई तथा इसका व्यास लगभग 1,000 किमी. तक विस्तृत था।

टाइफून के बारे में

  • टाइफून एक परिपक्व उष्णकटिबंधीय चक्रवात है, जो पश्चिमी उत्तर प्रशांत महासागर के ऊपर निर्मित होता है तथा जिसकी अधिकतम पवन गति कम-से-कम 119 किमी./घंटा होती है।
  • टाइफून के उत्पन्न होने के कारण
    • गर्म महासागरीय जल: 26.5–27°C या उससे अधिक समुद्र सतह तापमान चक्रवात के निर्माण के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है।
    • कोरिओलिस बल: पृथ्वी के घूर्णन के कारण तूफान चक्रीय गति करता है, जिससे इसकी विशिष्ट चक्रवाती परिसंचरण संरचना बनती है।
    • वायुमंडलीय परिस्थितियाँ: उच्च आर्द्रता, वायुमंडलीय अस्थिरता तथा कम ऊर्ध्वाधर पवन कर्तन (Vertical Wind Shear) तीव्र गति से चक्रवात के सशक्त होने के लिए अनुकूल होती हैं।
    • पूर्व-विद्यमान विक्षोभ: निम्न दाब प्रणाली अथवा उष्णकटिबंधीय विक्षोभ चक्रवात के विकास के लिए प्रारंभिक प्रेरक के रूप में कार्य करता है।
  • टाइफून की विशेषताएँ
    • टाइफून की आँख: अपेक्षाकृत स्वच्छ आकाश वाला शांत, निम्न-दाब का केंद्रीय भाग।
    • आईवॉल (Eyewall): टाइफून की आँख के चारों ओर स्थित अत्यंत तीव्र गर्जन-तूफानों के वलय वाला क्षेत्र, जहाँ सर्वाधिक वेग वाली पवनें चलती हैं तथा अधिकतम वर्षा होती है।
    • सर्पिल वर्षा पट्टियाँ (Spiral Rainbands): बाहर की ओर फैली हुई गर्जन-तूफानों की वक्राकार पट्टियाँ, जो भारी वर्षा तथा तेज झोंकों वाली हवाएँ उत्पन्न करती हैं।
    • झंझा महोर्मि: तेज हवाओं के कारण समुद्र तल में होने वाली असामान्य वृद्धि, जो प्रायः तट से टकराने (Landfall) के दौरान सर्वाधिक तटीय क्षति का कारण बनती है।

ए-रेंडिल-1 मिशन (Eärendil-1 Mission)

संयुक्त राज्य अमेरिका के संघीय संचार आयोग (FCC) ने रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल के एरेंडिल-1 मिशन को स्वीकृति प्रदान की है, जो एक परीक्षण उपग्रह है और रात्रि के समय पृथ्वी पर सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करने के लिए एक विशाल दर्पण का उपयोग करेगा।

एरेंडिल-1 मिशन के बारे में

  • एरेंडिल-1 कैलिफोर्निया स्थित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल द्वारा विकसित एक प्रायोगिक कक्षीय प्रकाशन (Orbital Illumination) मिशन है।
  • उद्देश्य: अंतरिक्ष में स्थापित एक बड़े परिनियोज्य (Deployable) दर्पण का उपयोग कर रात्रि के दौरान पृथ्वी पर चयनित स्थानों पर प्राकृतिक सूर्य प्रकाश को परावर्तित करना।
  • लाइसेंस की अवधि: इसे अवधारणा-प्रमाण (Proof-of-Concept) प्रदर्शन के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के संघीय संचार आयोग (FCC) से दो वर्ष का प्रायोगिक लाइसेंस प्राप्त हुआ है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • परिनियोज्य परावर्तक (Deployable Reflector): इसमें 18 × 18 मीटर का अत्यंत पतला मायलर (Mylar) दर्पण लगा हुआ है, जो कक्षा में पहुँचने के बाद खुलता है।
    • कक्षीय विन्यास: यह लगभग 625 किमी. की ऊँचाई पर नॉन-जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में 88° कक्षीय झुकाव के साथ संचालित होता है।
    • सूर्य प्रकाश निर्देशन प्रणाली: यह मोटर चालित अभिविन्यास-नियंत्रण प्रणाली (Attitude-Control System) का उपयोग कर लगभग 5 किमी. व्यास वाले लक्ष्य क्षेत्र पर परावर्तित सूर्य प्रकाश को निर्देशित करता है।
    • प्रकाशन क्षमता: यह भूमि पर लगभग 0.1 लक्स (Lux) का प्रकाश उत्पन्न करता है, जो पूर्णिमा की चमक के तुलनीय है।
  • संभावित अनुप्रयोग
    • नवीकरणीय ऊर्जा: सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए सूर्यास्त के बाद भी सूर्य का प्रकाश पहुँचाकर विद्युत उत्पादन में वृद्धि करना।
    • आपातकालीन एवं मानवीय सहायता: आपदा प्रतिक्रिया, बचाव अभियान तथा मानवीय मिशनों के दौरान अस्थायी प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराना।
    • अवसंरचना समर्थन: रात्रिकालीन निर्माण, लॉजिस्टिक्स तथा अन्य महत्त्वपूर्ण कार्यों को सुगम बनाना, जिनमें कृत्रिम प्रकाश की आवश्यकता होती है।
    • प्रौद्योगिकी प्रदर्शन: भविष्य के व्यावसायिक अनुप्रयोगों के लिए नियंत्रित कक्षीय सूर्य प्रकाश परावर्तन की तकनीकी व्यवहार्यता का सत्यापन करना।
  • प्रमुख चिंताएँ
    • खगोल विज्ञान पर प्रभाव: कृत्रिम आकाशीय चमक (Artificial Skyglow) ऑप्टिकल दूरबीनों तथा खगोलीय प्रेक्षणों में बाधा उत्पन्न कर सकती है।
    • पारिस्थितिकीय प्रभाव: रात्रि के समय कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था रात्रिचर वन्यजीवों को प्रभावित कर सकती है।
    • विनियामक चुनौतियाँ: संघीय संचार आयोग (FCC) रेडियो आवृत्ति हस्तक्षेप तथा कक्षीय मलबे (Orbital Debris) का विनियमन करता है, किंतु दृश्य प्रभावों पर इसका वैधानिक अधिकार क्षेत्र नहीं है।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) संख्या स्थिति रिपोर्ट (2024–25)

भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने राजस्थान वन विभाग के सहयोग से वर्ष 2017–18 के बाद पहली आधिकारिक ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) जनसंख्या एवं आवास स्थिति रिपोर्ट जारी की है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • संख्या स्थिरता: GIB की अनुमानित जनसंख्या लगभग 130 (सीमा: 110–150) है तथा वर्ष 2017–18 के आकलन के बाद से यह स्थिर बनी हुई है।
  • आवास उपयोग में कमी: उपयुक्त बड़े आवास उपलब्ध होने के बावजूद यह प्रजाति वर्तमान में सर्वेक्षित परिदृश्य के केवल 16% भाग में ही पाई जाती है।
  • भौगोलिक वितरण: आकलन राजस्थान में किया गया, जबकि गुजरात में केवल कुछ ही जंगली मादा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) जीवित हैं।
  • आवास वरीयता: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) मुख्यतः डेजर्ट नेशनल पार्क तथा पोखरण रेंज के आसपास के समतल घास के मैदानों में पाई जाती है।
  • वन्यजीव अवलोकन: सर्वेक्षण के दौरान ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के 35 समूह, चिंकारा के 1,568 समूह, 79 मरुस्थलीय लोमड़ियाँ (Desert Foxes) तथा नीलगाय, जंगली सूअर एवं कुत्ते दर्ज किए गए।
  • अवसंरचना का विस्तार: विद्युत लाइनों, सौर ऊर्जा संयंत्रों, सड़कों, कृषि बाड़बंदी तथा जल स्रोतों के विस्तार से आवास विखंडन में वृद्धि हुई है।
  • मृत्यु का जोखिम: ऊपरी विद्युत संचरण लाइनों से टकराव ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के लिए सबसे प्रमुख खतरों में से एक बना हुआ है।
    • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) की कमजोर दृष्टि के कारण यह ऊपरी विद्युत संचरण लाइनों का समय पर पता लगाने तथा उनसे बचने में सक्षम नहीं होते हैं।
    • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) अभी भी आवास विखंडन, अवैध शिकार तथा जंगली पशुओं द्वारा अंडों के शिकार जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।
  • पुनर्प्राप्ति की संभावना: थार मरुस्थल अपने विस्तृत एवं सतत खुले आवासों के कारण दीर्घकालिक पुनर्प्राप्ति के लिए अंतिम व्यवहार्य परिदृश्य बना हुआ है।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Ardeotis nigriceps) के बारे में

  • स्थानिक: भारतीय उपमहाद्वीप की मूल प्रजाति।
  • राजकीय पक्षी: राजस्थान।
  • आवास: शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क घासस्थल, झाड़ीदार क्षेत्र तथा खुले मैदान
  • वितरण: मुख्यतः राजस्थान (थार मरुस्थल) में पाया जाता है; साथ ही गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश में इसकी छोटी आबादी पाई जाती है।
  • भौतिक विशेषताएँ
    • विश्व के सबसे बड़े पक्षियों में से एक।
    • भारत का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी।
    • लंबे पैर, गर्दन तथा क्षैतिज शारीरिक मुद्रा इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।
  • आहार: ये प्राय: सर्वाहारी होते हैं और कीट, पादप बीज, छोटे सरीसृप, कृंतक तथा जामुन खाता है।
  • पारिस्थितिकीय महत्त्व: घासस्थल पारिस्थितिकी तंत्र की फ्लैगशिप (Flagship) एवं संकेतक (Indicator) प्रजाति।
  • संरक्षण स्थिति
    • IUCN रेड लिस्ट: गंभीर रूप से संकटग्रस्त  (Critically Endangered)
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-I
    • CITES: परिशिष्ट-I
    • प्रवासी प्रजातियों पर अभिसमय (CMS): परिशिष्ट-I

मन्नाथु पद्मनाभ पिल्लै (Mannathu Padmanabha Pillai)

 

 

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सामाजिक सुधारक मन्नाथु पद्मनाभन के सम्मान में नई दिल्ली में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया तथा मन्नम स्मृति मंडपम् का उद्घाटन किया।

मन्नाथु पद्मनाभन के बारे में

  • मन्नाथु पद्मनाभन (1878–1970) केरल के एक प्रसिद्ध सामाजिक सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी तथा शिक्षाविद् थे।
  • प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 2 जनवरी, 1878 को त्रावणकोर (वर्तमान केरल) के पेरुन्ना गाँव में हुआ था।
    • उन्होंने पहले के विद्यालय के शिक्षक के रूप में योगदान दिया उसके बाद वर्ष 1905 में विधि व्यवसाय को अपनाया।
    • गरीबी तथा सामाजिक भेदभाव के उनके प्रारंभिक अनुभवों ने उन्हें सामाजिक न्याय, शैक्षिक उन्नति तथा सामुदायिक उत्थान के लिए कार्य करने हेतु प्रेरित किया।
  • प्रमुख योगदान
    • नायर सर्विस सोसायटी (NSS) के संस्थापक: उन्होंने 31 अक्टूबर, 1914 को शिक्षा, सामाजिक सुधार, आत्मनिर्भरता तथा सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए नायर सर्विस सोसायटी (NSS) की स्थापना की।
    • सामाजिक समानता एवं मंदिर प्रवेश आंदोलन: उन्होंने अस्पृश्यता के विरुद्ध वायकॉम  सत्याग्रह (1924–25) तथा गुरुवायूर सत्याग्रह (1931–32) में सक्रिय रूप से भाग लिया।
      • उन्होंने मंदिरों के आस-पास की सड़कों पर सभी हिंदुओं के समान अधिकार की माँग करते हुए ऐतिहासिक सवर्ण जथा (Savarna Jatha) का नेतृत्व किया।
    • स्वतंत्रता संग्राम एवं लोकतांत्रिक आंदोलन: उन्होंने वर्ष 1946 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की तथा त्रावणकोर में सर सी. पी. रामास्वामी अय्यर के प्रशासन के विरुद्ध आंदोलन में भाग लिया।
      • बाद में उन्होंने वर्ष 1959 के विमोचन समरम् (मुक्ति संघर्ष) में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • शैक्षिक एवं सामाजिक सुधार: उन्होंने नायर विनियमन (Nair Regulation) (1924–25) को बढ़ावा दिया, जिसने पारिवारिक कानूनों तथा संपत्ति अधिकारों का आधुनिकीकरण किया।
  • विरासत: मन्नाथु पद्मनाभन को केरल के सामाजिक पुनर्जागरण के अग्रदूत तथा समानता, शिक्षा एवं राष्ट्रीय सेवा के समर्थक के रूप में स्मरण किया जाता है।
    • उन्हें उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म भूषण (1966) तथा ‘भारत केसरी’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।

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