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Lokesh Pal July 15, 2026 02:32 7 0

नेशनल इनोवेशन चैलेंज फॉर ड्रोन ऐप्लिकेशन एंड रिसर्च के दूसरे संस्करण (NIDAR 2.0) की शुरुआत

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) ने भारतीय-डिजाइन चिप्स से संचालित स्वदेशी ड्रोन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए NIDAR 2.0 (2026–27) का शुभारंभ किया।

नेशनल इनोवेशन चैलेंज फॉर ड्रोन ऐप्लिकेशन एंड रिसर्च  (NIDAR 2.0) के बारे में

  • NIDAR 2.0 एक राष्ट्रीय-स्तरीय नवाचार हैकाथॉन है, जो इंजीनियरिंग छात्रों को स्वदेशी स्वायत्त ड्रोन के सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर के डिजाइन तथा विकास के लिए प्रोत्साहित करता है।
  • उद्देश्य: भारत को ड्रोन असेंबली से आगे बढ़ाकर ड्रोन के मुख्य एवियोनिक्स तथा प्रोसेसरों सहित स्वदेशी डिजाइन एवं विनिर्माण की दिशा में अग्रसर करना।
  • नोडल निकाय: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के सहयोग से।
    • इसे स्वयान क्षमता निर्माण पहल (SwaYaan Capacity Building Initiative) के अंतर्गत क्रियान्वित किया जा रहा है।
  • उत्पत्ति: इसे जुलाई 2022 में लगभग 90 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ स्वीकृति प्रदान की गई थी।
  • अवधि: NIDAR 2.0 का कार्यान्वयन 2026–27 में किया जाएगा।
    • प्रथम संस्करण (2025–26) में 22 राज्यों एवं 4 केंद्रशासित प्रदेशों के 3,000 से अधिक छात्रों ने भाग लिया।
  • प्रमुख परिचालन विशेषताएँ
    • ड्रोन नवाचार ट्रैक (प्रणाली-स्तरीय): प्रतिभागियों को आपदा प्रतिक्रिया, जीवित बचे लोगों का पता लगाने, चिकित्सीय आपूर्ति वितरण तथा GPS-विहीन (GPS-Denied) इनडोर नेविगेशन के लिए पूर्णतः स्वायत्त ड्रोन विकसित करने की चुनौती देता है।
    • स्वदेशी हार्डवेयर विकास: टीमों को सी-डैक द्वारा विकसित स्वदेशी VEGA माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग करते हुए फ्लाइट कंट्रोलर एवं ऑटोपायलट प्रणाली विकसित करनी होगी, जिससे ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक्स में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
    • नवाचार हेतु सरकारी समर्थन: चयनित शीर्ष 100 टीमों को VEGA डेवलपमेंट किट, क्लाउड क्रेडिट, सॉफ्टवेयर सहायता, स्टार्ट-अप इन्क्यूबेशन, मेंटरशिप तथा इंटर्नशिप के अवसर प्रदान किए जाएँगे।
    • वित्तीय प्रोत्साहन: इसमें ₹65 लाख से अधिक की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है, जो नवाचार, प्रोटोटाइप विकास तथा स्वदेशी ड्रोन प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को प्रोत्साहित करती है।

स्वयान क्षमता निर्माण पहल 

  • स्वयान (SwaYaan) इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य मानवरहित विमान प्रणालियों (UAS) एवं ड्रोन प्रौद्योगिकियों में कुशल कार्यबल विकसित करना तथा स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करना है।
  • उद्देश्य: कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देकर एक सहयोगात्मक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना, ताकि वर्ष 2030 तक भारत को वैश्विक ड्रोन हब बनाने के लक्ष्य को समर्थन दिया जा सके।
  • नोडल एजेंसी: इसका कार्यान्वयन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से किया जाता है, जिसमें IITs, IIITs, NITs, सी-डैक (C-DAC) तथा NIELIT केंद्रों सहित 30 प्रमुख संस्थान शामिल हैं।
  • प्रमुख लक्ष्य: लगभग ₹90 करोड़ के परिव्यय से समर्थित यह कार्यक्रम 2027 तक 40,000 से अधिक कार्मिकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखता है, जिसमें ड्रोन प्रौद्योगिकी के पाँच प्रमुख क्षेत्रों तथा NIDAR जैसी नवाचार चैलेंजेज पर विशेष ध्यान दिया गया है।

ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के बारे में

  • यह एक गैर-सरकारी, गैर-लाभकारी औद्योगिक निकाय है, जो भारत के ड्रोन, मानवरहित विमानन तथा काउंटर-ड्रोन इकोसिस्टम को बढ़ावा देता है तथा आत्मनिर्भर भारत पहल का समर्थन करता है।
  • स्थापना: वर्ष 2019 में स्थापित DFI का मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है।
  • भूमिका: DFI, उद्योग, सरकार एवं अकादमिक संस्थानों के मध्य सेतु के रूप में कार्य करता है तथा नागर विमानन मंत्रालय एवं नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के साथ मिलकर नीति-निर्माण, मानकों, प्रमाणीकरण, नवाचार तथा कौशल विकास को समर्थन प्रदान करता है।

उमंग पोर्टल 

UMANG Portal

सुरक्षा शोधकर्ताओं ने उमंग पोर्टल में ऐसी कमजोरियों की पहचान की, जिनके कारण कथित रूप से अनेक सरकारी सेवाओं में उपयोगकर्ताओं के संवेदनशील डेटा के उजागर होने की आशंका उत्पन्न हुई।

उमंग से संबंधित प्रमुख चिंताएँ

  • संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा का उजागर होना: इन कमजोरियों के कारण कथित रूप से EPFO UAN, LPG बुकिंग विवरण तथा आधार संख्या उजागर हुई, जिससे निजता, पहचान की चोरी तथा वित्तीय धोखाधड़ी को लेकर चिंताएँ बढ़ गईं।
  • कमजोर प्रणाली संरचना: शोधकर्ताओं ने इन कमजोरियों का कारण प्रणालीगत संरचना में विद्यमान खामियाँ, अपर्याप्त एन्क्रिप्शन तथा असुरक्षित API को बताया, जो साइबर सुरक्षा से संबंधित प्रणालीगत कमजोरियों को दर्शाता है।
  • मजबूत साइबर सुरक्षा की आवश्यकता: यह घटना डिजिटल इंडिया प्लेटफॉर्मों पर नियमित सुरक्षा ऑडिट, सुरक्षित API संरचना, संवेदनशीलता के त्वरित प्रकटीकरण तथा सुदृढ़ डेटा संरक्षण के महत्त्व को रेखांकित करती है।

यूनिफाइड मोबाइल ऐप्लीकेशन फॉर न्यू-एज गवर्नेंस (UMANG) के बारे में

  • वर्ष 2017 में प्रारंभ किया गया यूनिफाइड मोबाइल ऐप्लीकेशन फॉर न्यू-एज गवर्नेंस (UMANG) एक सिंगल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो नागरिकों को एक ही एप्लीकेशन के माध्यम से केंद्र, राज्य तथा स्थानीय सरकारों की हजारों सेवाओं तक पहुँच प्रदान करता है।
  • नोडल निकाय: इसका विकास इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया है तथा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) इसकी कार्यान्वयन एजेंसी है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • सामान्य प्लेटफॉर्म: यह एक साझा मंच पर विभिन्न विभागों एवं राज्यों की 2,400 से अधिक सरकारी सेवाओं का एकीकरण करता है।
    • बहुभाषीय एवं बहु-माध्यम समर्थन: यह अनेक भारतीय भाषाओं, ऑनलाइन भुगतान, दस्तावेज एकीकरण तथा स्मार्टफोन एवं फीचर फोन (USSD के माध्यम से) दोनों के द्वारा सेवाओं तक पहुँच का समर्थन करता है।
    • विविध सेवाएँ: यह EPFO, आधार, डिजिलॉकर, उपयोगिता बिल भुगतान, LPG बुकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कराधान तथा नागरिक-केंद्रित शासन से संबंधित सेवाएँ प्रदान करता है।
    • भाषा: उमंग (UMANG) का वेब पोर्टल एवं ऐप 23 भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है, जिसमें अंग्रेजी, हिंदी तथा 21 अन्य क्षेत्रीय भाषाएँ शामिल हैं।

रामासामी वैरामुथु 

Ramasamy Vairamuthu

तमिल कवि एवं गीतकार आर. वैरामुथु को 60वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार (2025) प्रदान किया गया, जिससे वे भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान से सम्मानित होने वाले तीसरे तमिल साहित्यकार बन गए हैं।

आर. वैरामुथु के बारे में

  • आर. वैरामुथु एक प्रसिद्ध तमिल कवि, गीतकार, उपन्यासकार तथा लेखक हैं, जिन्हें शास्त्रीय तमिल साहित्यिक परंपराओं को समकालीन विषयों के साथ समन्वित करने के लिए जाना जाता है।
  • प्रमुख योगदान
    • साहित्यिक योगदान: उन्होंने 37 से अधिक पुस्तकों की रचना की है, जिनमें कल्लिकट्टु इथिकासम (Kallikattu Ithikasam), करुवाची कावियम (Karuvachi Kaaviyam) तथा थन्नी देसम (Thanni Desam) प्रमुख हैं, जो ग्रामीण जीवन, प्रकृति तथा सामाजिक मुद्दों को प्रतिबिंबित करती हैं।
    • तमिल सिनेमा में योगदान: उन्होंने 8,000 से अधिक तमिल फिल्मी गीत लिखे हैं तथा सर्वश्रेष्ठ गीत के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सात बार प्राप्त किया है, जिससे उन्होंने तमिल लोकप्रिय संस्कृति को उल्लेखनीय रूप से प्रभावित किया है।
    • साहित्यिक सम्मान: उन्हें कल्लिकट्टु इथिकासम के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार (2003) प्राप्त हुआ तथा पद्म श्री (2003) एवं पद्म भूषण (2014) से सम्मानित किया गया।
    • समकालीन साहित्यिक प्रभाव: उनकी रचनाएँ भावनात्मक गहराई, मानवतावाद तथा आधुनिक तमिल साहित्य में उनके योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं।

ज्ञानपीठ पुरस्कार के बारे में

  • ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जो किसी साहित्यकार के भारतीय साहित्य में आजीवन योगदान को मान्यता प्रदान करता है।
  • आयोजक: इसकी स्थापना 1961 में भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा की गई थी, जो भारतीय भाषाओं एवं साहित्य को बढ़ावा देने हेतु 1944 में स्थापित एक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संगठन है।
  • पात्रता एवं श्रेणियाँ: यह पुरस्कार प्रतिवर्ष भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं तथा अंग्रेजी में उत्कृष्ट आजीवन योगदान देने वाले किसी भारतीय साहित्यकार को प्रदान किया जाता है।
    • यह पुरस्कार केवल जीवित भारतीय नागरिकों को प्रदान किया जाता है (मरणोपरांत पुरस्कार नहीं दिया जाता)।
  • पुरस्कार के घटक: इस पुरस्कार में ₹11 लाख की नकद राशि, एक प्रशस्ति-पत्र तथा वाग्देवी (देवी सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा प्रदान की जाती है।
    • प्रथम प्राप्तकर्ता: जी. शंकर कुरुप (मलयालम) को वर्ष 1965 में यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
      • वर्ष 1982 से यह पुरस्कार किसी एकल कृति के स्थान पर समग्र साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।
    • प्रथम महिला प्राप्तकर्ता: आशापूर्णा देवी।
      • उन्हें वर्ष 1976 में उनके प्रसिद्ध बांग्ला उपन्यास प्रोथोम प्रोतिश्रुति (The First Promise) के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
    • अंग्रेज़ी भाषा के प्रथम विजेता: अमिताव घोष।
      • उन्हें वर्ष 2018 में अंग्रेजी में भारतीय साहित्य के प्रति उनके उत्कृष्ट आजीवन योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
    • सर्वाधिक विजेताओं वाली भाषा: हिंदी।
      • हिंदी साहित्य को यह पुरस्कार 11 बार प्राप्त हुआ है, जिसके बाद कन्नड़ भाषा का स्थान है, जिसके 8 विजेता रहे हैं।

भारत की प्रथम हाइड्रोजन ट्रेन 

India’s First Hydrogen Train

भारत में 17 जुलाई, 2026 को हरियाणा के जींद में पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन संचालित की जाएगी।

प्रमुख बिंदु:

  • विकास: इस ट्रेन का विकास इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF), चेन्नई द्वारा किया गया है।
    • यह ट्रेन विश्व की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेनसेट तथा ब्रॉड गेज (BG) प्लेटफॉर्म पर संचालित होने वाली विश्व की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन होगी।
  • प्रणोदन प्रणाली: इसे डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) रेक से परिवर्तित किया गया है।
    • यह 1,200 kW प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल (PEMFC) से संचालित होगी।
    • इसे औसत एवं अधिकतम विद्युत आवश्यकता की पूर्ति के लिए बैटरी बैंक का समर्थन प्राप्त है।
    • हाइड्रोजन, डीजल (43 MJ/kg) की तुलना में उच्च ऊर्जा घनत्व (120 MJ/kg) वाला ईंधन है तथा इसके रखरखाव की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है।
  • पर्यावरणीय महत्त्व: हाइड्रोजन फ्यूल सेल हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन के मध्य रासायनिक अभिक्रिया द्वारा विद्युत उत्पन्न करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप जलवाष्प ही एकमात्र प्रत्यक्ष उत्सर्जन होता है।
    • इसके परिणामस्वरूप कार्बन पदचिह्न कम होता है।
  • वैश्विक महत्त्व: भारत, जर्मनी, जापान, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा स्विट्जरलैंड के साथ स्वच्छ रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन-संचालित ट्रेनों का उपयोग करने वाले देशों में शामिल हो जाएगा।

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