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लद्दाख में सभी सात जिलों के लिए AHDCs की स्थापना

Lokesh Pal July 15, 2026 02:11 8 0

संदर्भ

हाल ही में लद्दाख प्रशासन ने केंद्रशासित प्रदेश के सभी सात जिलों में स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों (Autonomous Hill Development Council-AHDCs) की स्थापना की घोषणा की है। इससे पूर्व केवल लेह एवं कारगिल जिलों में ही ऐसी परिषदें स्थापित की गई थीं।

संबंधित तथ्य

  • इससे पूर्व लद्दाख के उप-राज्यपाल ने जिलों की संख्या दो से बढ़ाकर सात कर दी थी तथा 17 अतिरिक्त तहसीलों का गठन किया था, जिससे इस प्रदेश में तहसीलों की कुल संख्या बढ़कर 32 हो गई।  

मुख्य बिंदु

  • स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों का विस्तार: लद्दाख प्रशासन ने केंद्रशासित प्रदेश के सभी सात जिलों में स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (AHDC) गठित करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत वर्तमान व्यवस्था को लेह एवं कारगिल से आगे बढ़ाते हुए नवगठित द्रास, शाम, नुब्रा, चांगथांग तथा जांस्कर जिलों तक विस्तारित किया जाएगा।

  • उद्देश्य: निर्वाचित स्थानीय निकायों को जिला-स्तरीय शासन एवं विकास में अधिक प्रभावी भागीदारी प्रदान कर लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण तथा जमीनी स्तर के सुशासन को सुदृढ़ करना।
  • वैधानिक आधार: यह प्रस्ताव लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद अधिनियम (LAHDC Act) की धारा 3(1) पर आधारित है, जो सरकार को राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से प्रत्येक जिले में स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद गठित करने का अधिकार प्रदान करती है।
  • केंद्रशासित प्रदेश-स्तरीय संस्थागत ढाँचा: प्रशासन ने संविधान के अनुच्छेद-371 पर आधारित एक विशिष्ट व्यवस्था के अंतर्गत केंद्रशासित प्रदेश-स्तरीय सर्वोच्च संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा है।
  • प्रस्तावित जिला परिषद की शक्तियाँ:
    • जिला नियोजन, भूमि प्रबंधन, जिला संवर्ग में भर्ती एवं पदोन्नति, कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन तथा स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पर्यटन जैसे क्षेत्रों का प्रशासन।
  • संवैधानिक संरक्षण: प्रस्तावित केंद्रशासित प्रदेश-स्तरीय निकाय को विधायी, कार्यपालिका, वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियाँ प्रदान किए जाने का प्रस्ताव है। साथ ही, यह भूमि अधिकारों, रोजगार के अवसरों तथा लद्दाख के लोगों की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण को सुनिश्चित करेगा।
  • क्रियान्वयन: नए परिषदों का गठन LAHDC अधिनियम में आवश्यक संशोधनों तथा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत किया जाएगा।

पृष्ठभूमि (लद्दाख में संवैधानिक संरक्षण की माँग)

  • केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा: जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के पश्चात् लद्दाख को विधानसभा रहित केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा प्राप्त हुआ, जिससे स्थानीय विधायी शक्तियों के सीमित होने संबंधी चिंताएँ उत्पन्न हुईं।
  • भूमि एवं रोजगार का संरक्षण: स्थानीय समुदायों ने भू-स्वामित्व, सरकारी रोजगार तथा प्राकृतिक संसाधनों को बाह्य दबावों से सुरक्षित रखने हेतु संवैधानिक संरक्षण की माँग की है।
  • सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण: लद्दाख की विशिष्ट जनजातीय, भाषायी, सांस्कृतिक तथा पारिस्थितिकी विरासत के संरक्षण की भी माँग की जा रही है।
  • अधिक लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व: नागरिक समाज के संगठनों ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व में वृद्धि तथा विकेंद्रीकृत शासन की माँग की है, जिसमें स्थानीय संस्थाओं को अधिक शक्तियाँ प्रदान करना भी शामिल है।
  • संवैधानिक ढाँचा: इन माँगों के परिणामस्वरूप संविधान के अनुच्छेद-371 पर आधारित एक विशिष्ट संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत विशेष संरक्षण प्रदान करने पर विचार-विमर्श प्रारंभ हुआ है।

स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (AHDCs) के बारे में

  • ये स्थानीय स्वशासन की वैधानिक संस्थाएँ हैं, जिनकी स्थापना लद्दाख के भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम एवं सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण जिलों में विकेंद्रीकृत प्रशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
  • स्थापना: लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद, लेह की स्थापना वर्ष 1995 में तथा लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद, कारगिल की स्थापना वर्ष 2003 में की गई।
  • संरचना: प्रत्येक परिषद में सामान्यतः 30 पार्षद होते हैं, जिनमें 26 प्रत्यक्ष निर्वाचित तथा 4 उपराज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं। परिषद का कार्यकाल पाँच वर्ष होता है।
  • कार्य: परिषदें जिला विकास योजनाएँ तैयार करती हैं, सरकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की निगरानी करती हैं तथा स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पर्यटन, ग्रामीण विकास एवं लोक निर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करती हैं।
  • वैधानिक ढाँचा: ये परिषदें लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद अधिनियम के अंतर्गत कार्य करती हैं, जो उन्हें जिला स्तर पर नियोजन एवं शासन संबंधी अधिकार प्रदान करता है।

लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद अधिनियम (LAHDC Act) के बारे में

  • इस अधिनियम को लद्दाख क्षेत्र में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण, स्थानीय स्वशासन तथा जनसहभागितापूर्ण विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों की स्थापना के लिए अधिनियमित किया गया था।
  • परिषदों का गठन: अधिनियम की धारा 3(1) सरकार को राजपत्र अधिसूचना द्वारा प्रत्येक जिले में स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद गठित करने का अधिकार देती है।
  • शक्तियाँ एवं कार्य: परिषदों को जिला विकास योजनाएँ तैयार करने, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, ग्रामीण विकास एवं स्थानीय अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में प्रशासनिक कार्यों के निर्वहन का दायित्व सौंपा गया है।
  • वर्तमान प्रासंगिकता: लद्दाख प्रशासन ने केंद्रशासित प्रदेश के सभी सात जिलों में स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद व्यवस्था का विस्तार करने के लिए अधिनियम की धारा 3(1) का उपयोग किया है, जिससे जमीनी स्तर के सुशासन तथा लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को सुदृढ़ किया जा सके।

नोट: वर्तमान में लद्दाख अनुच्छेद-371 के किसी भी विद्यमान उपबंध के अंतर्गत नहीं आता है। केंद्र सरकार लद्दाख के लिए अनुच्छेद-371 के अंतर्गत एक विशिष्ट संवैधानिक व्यवस्था पर विचार कर रही है, जिसमें भूमि, रोजगार, सांस्कृतिक पहचान तथा क्षेत्र की विशिष्ट प्रशासनिक आवश्यकताओं के संरक्षण हेतु अनुच्छेद-371 के वर्तमान मॉडलों से उपयुक्त प्रावधानों को सम्मिलित किया जा सकता है।

संविधान का अनुच्छेद-371

  • संवैधानिक प्रावधान: संविधान के भाग XXI (अस्थायी, संक्रमणकालीन एवं विशेष उपबंध) में निहित अनुच्छेद-371 से 371J तक के प्रावधान कुछ राज्यों एवं क्षेत्रों के लिए विशेष संवैधानिक व्यवस्थाएँ प्रदान करते हैं।
  • उद्देश्य: इन प्रावधानों का उद्देश्य विशिष्ट ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं जातीय विशेषताओं वाले क्षेत्रों के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा प्रशासनिक हितों का संरक्षण करना है।
  • संरक्षण का स्वरूप: इन प्रावधानों के अंतर्गत भू-स्वामित्व, सरकारी रोजगार, रूढ़िगत विधियाँ, जनजातीय अधिकार, सांस्कृतिक पहचान तथा संतुलित क्षेत्रीय विकास से संबंधित विशेष संरक्षण प्रदान किए जा सकते हैं।
  • राज्य-विशिष्ट व्यवस्था: अनुच्छेद-371 के विभिन्न उपबंध अलग-अलग राज्यों के लिए उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप विशिष्ट संवैधानिक संरक्षण प्रदान करते हैं। अतः विभिन्न राज्यों को प्राप्त स्वायत्तता का स्वरूप एवं सीमा परस्पर भिन्न है।

निष्कर्ष

लद्दाख के सभी सात जिलों में स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों की स्थापना तथा अनुच्छेद-371 के अंतर्गत प्रस्तावित विशिष्ट संवैधानिक संरक्षण की व्यवस्था विकेंद्रीकृत शासन, स्थानीय हितों के संरक्षण तथा समावेशी विकास की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। साथ ही, यह लद्दाख की विशिष्ट भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं सामरिक आवश्यकताओं को भी संबोधित करता है।

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