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Lokesh Pal
July 14, 2026 05:00
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भारत में घटती प्रजनन दर (Fertility Rate) और बढ़ती वृद्धजन आबादी को लेकर हाल में यह चर्चा काफी जोर पकड़ लिया है कि इसने जनसंख्या में गिरावट, श्रमबल की कमी और जनसांख्यिकीय असंतुलन संबंधी चिंताओं को पुनर्जीवित कर दिया है। हालाँकि, वास्तविक चुनौती भय-आधारित विमर्श को बढ़ावा देने के बजाय साक्ष्य-आधारित नीतियों के माध्यम से जनसांख्यिकीय संक्रमण का प्रभावी प्रबंधन करना है।
निष्कर्षतः भारत की प्राथमिकता जनसंख्या को बढ़ाना या घटाना नहीं, बल्कि समावेशी विकास, उच्च उत्पादकता, लैंगिक समानता तथा सुदृढ़ मानव पूँजी के माध्यम से जनसांख्यिकीय संक्रमण का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। संतुलित एवं साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण भारत को जनसांख्यिकीय परिवर्तन को दीर्घकालिक विकास के अवसर में परिवर्तित करने में सक्षम बनाएगा।
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