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Lokesh Pal
May 22, 2026 02:30
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सर्वोच्च न्यायालय ने पुनः स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध एक संवैधानिक अधिकार है, किंतु प्रदर्शन सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित न करे और न ही सामान्य नागरिकों को असुविधा पहुँचानी चाहिए।
विरोध का अधिकार एक निहित मौलिक अधिकार है, जो संविधान द्वारा प्रदत्त वाक् स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता से व्युत्पन्न होता है।
एक लोकतांत्रिक समाज को शांतिपूर्ण असहमति की रक्षा करनी चाहिए, साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सार्वजनिक व्यवस्था, नागरिक सुविधा और अन्य नागरिकों के अधिकार भी सुरक्षित रहें।
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