100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

शांतिपूर्ण विरोध एक संवैधानिक अधिकार है

Lokesh Pal May 22, 2026 02:30 4 0

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय ने पुनः स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध एक संवैधानिक अधिकार है, किंतु प्रदर्शन सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित न करे और न ही सामान्य नागरिकों को असुविधा पहुँचानी चाहिए।

  • सुनवाई एक याचिका से संबंधित थी, जिसमें नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नामकरण का विरोध कर रहे युवाओं के विरुद्ध आपराधिक मामलों के पंजीकरण से संरक्षण की माँग की गई थी।

मामले के प्रमुख बिंदु

  • संवैधानिक अधिकार: सर्वोच्च न्यायालय ने यह पुष्टि की कि नागरिकों को लोकतंत्र में शांतिपूर्ण और विधिसम्मत विरोध के माध्यम से असहमति व्यक्त करने का अधिकार है।
  • सार्वजनिक व्यवस्था: न्यायालय ने अवलोकन किया कि विरोध प्रदर्शनों से कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न नहीं होनी चाहिए, शांति को खतरा नहीं होना चाहिए और सार्वजनिक सुविधा में बाधा नहीं डालनी चाहिए।
  • संतुलित दृष्टिकोण: न्यायालय ने जोर दिया कि विरोध का अधिकार यात्रियों और निवासियों के शांतिपूर्वक जीवन जीने के अधिकार के साथ सह-अस्तित्व में होना चाहिए।

विरोध का अधिकार के बारे में

विरोध का अधिकार एक निहित मौलिक अधिकार है, जो संविधान द्वारा प्रदत्त वाक् स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता से व्युत्पन्न होता है।

संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद-19(1)(a): वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
    • यह नागरिकों को सरकारी कार्यों के विरुद्ध अपने विचार, आलोचना और असहमति व्यक्त करने का अधिकार प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद-19(1)(b): शांतिपूर्ण सभा का अधिकार
    • यह नागरिकों को बिना हथियारों के शांतिपूर्वक एकत्र होने तथा प्रदर्शन और जन विरोध करने की अनुमति देता है।
  • अनुच्छेद-19(1)(c): संघ बनाने का अधिकार
    • यह नागरिकों को सामूहिक रूप से संघ, समूह और आंदोलनों का गठन करने की अनुमति देता है, ताकि वे सामान्य उद्देश्यों की प्राप्ति कर सकें।
  • अनुच्छेद-19(2) और 19(3): युक्तिसंगत प्रतिबंध
    • राज्य संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के हित में प्रतिबंध लगा सकता है।
  • अनुच्छेद-51A: मौलिक कर्तव्य
    • नागरिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें और विरोध एवं आंदोलनों के दौरान हिंसा से बचें।

प्रमुख न्यायिक दृष्टांत

  • हिमत लाल के. शाह बनाम पुलिस आयुक्त (1973): सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य सार्वजनिक सभाओं को विनियमित कर सकता है, किंतु मनमाने ढंग से प्रतिबंध नहीं लगा सकता।
  • रामलीला मैदान घटना संबंधी मामला (2012): न्यायालय ने शांतिपूर्ण विरोध को एक मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में मान्यता दी, जिसे मनमानी कार्यपालिका कार्रवाई से संरक्षण प्राप्त है।
  • मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ (2018): न्यायालय ने निर्णय दिया कि विरोध निर्धारित स्थानों पर किया जाना चाहिए, साथ ही सार्वजनिक सुविधा का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
  • अमित साहनी बनाम पुलिस आयुक्त, शाहीन बाग मामला (2020): न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चितकाल तक अधिकार नहीं किया जा सकता और विरोध का अधिकार यात्रियों के अधिकारों के साथ सह-अस्तित्व में होना चाहिए।

विरोध के अधिकार को सुनिश्चित करने का महत्त्व

  • लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करता है: शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों को सरकारी नीतियों पर प्रश्न उठाने और निगरानी करने में सक्षम बनाकर एक लोकतांत्रिक प्रहरी के रूप में कार्य करता है।
  • हाशिए पर स्थित समूहों को अभिव्यक्ति प्रदान करता है: विरोध के माध्यम से कमजोर और वंचित समुदाय अपनी सामाजिक और आर्थिक शिकायतों को सार्वजनिक विमर्श में ला सकते हैं।
  • सामाजिक और विधिक सुधारों को बढ़ावा देता है: जन आंदोलनों के माध्यम से जागरूकता उत्पन्न होती है तथा शासन, पर्यावरण और नागरिक अधिकारों में सुधार को प्रोत्साहन मिलता है।
  • सहभागी लोकतंत्र को प्रोत्साहित करता है: असहमति का अधिकार केवल चुनावों तक सीमित न रहकर सक्रिय नागरिक भागीदारी सुनिश्चित करता है।

युक्तिसंगत प्रतिबंधों की आवश्यकता

  • सार्वजनिक व्यवस्था का संरक्षण: प्रतिबंध यह सुनिश्चित करते हैं कि विरोध दंगों, हिंसा या व्यापक अव्यवस्था में परिवर्तित न हो।
  • सार्वजनिक और निजी संपत्ति की सुरक्षा: विनियमन के माध्यम से तोड़फोड़, अवसंरचना की क्षति और आर्थिक हानि को रोका जा सकता है।
  • अन्य नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा: प्रतिबंध विरोध के अधिकार और नागरिकों के आवागमन, आजीविका और आपातकालीन सेवाओं के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करते हैं।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा का संरक्षण: युक्तिसंगत सीमाएँ यह सुनिश्चित करती हैं कि विरोध का उपयोग संप्रभुता या आंतरिक स्थिरता को खतरा पहुँचाने के लिए न किया जाए।

वैश्विक प्रथाएँ और मानक

  • संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र का मानवाधिकार ढाँचा राज्यों को शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान, उसे सुगम बनाना और उसकी रक्षा करना अनिवार्य करता है।
    • पूर्व सूचना को सुविधा के रूप में, अनुमति नहीं: अंतरराष्ट्रीय मानक पूर्व सूचना को मुख्यतः यातायात प्रबंधन के उपाय के रूप में देखते हैं, न कि दमन के उपकरण के रूप में।
    • बल का सीमित और आनुपातिक उपयोग: वैश्विक मानदंडों के अनुसार, पुलिस बल का उपयोग केवल अंतिम उपाय के रूप में और उत्पन्न खतरे के अनुपात में ही किया जाना चाहिए।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका: प्रथम संशोधन विरोध प्रदर्शनों की रक्षा करता है, जबकि प्रतिबंध विषय-वस्तु तटस्थ” और भेदभावरहित होने चाहिए।
  • यूरोपीय मानवाधिकार ढाँचा: यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय देश मानवाधिकार अभिसमयों के तहत सभा करने के अधिकार को मान्यता प्रदान करते हैं, साथ ही सार्वजनिक व्यवस्था के साथ संतुलन बनाए रखते हैं।
  • वैश्विक नागरिक समाज संगठनों की भूमिका: एमनेस्टी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स जैसे संगठन वैश्विक स्तर पर उल्लंघनों की निगरानी करते हैं और विरोध के अधिकार की रक्षा करते हैं।

निष्कर्ष

एक लोकतांत्रिक समाज को शांतिपूर्ण असहमति की रक्षा करनी चाहिए, साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सार्वजनिक व्यवस्था, नागरिक सुविधा और अन्य नागरिकों के अधिकार भी सुरक्षित रहें।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.