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Lokesh Pal
July 16, 2026 02:08
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सर्वोच्च न्यायालय में एक लंबित याचिका में जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा हेतु 24×7 न्यायिक उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु एक संस्थागत तंत्र स्थापित करने की माँग की गई है, विशेषकर देर रात की गई गिरफ्तारियों, विध्वंस अभियानों, निर्वासन तथा अन्य तात्कालिक कार्यपालिका संबंधी कार्रवाइयों के मामलों में।


अनुच्छेद-21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार भारत के संवैधानिक लोकतंत्र की आधारशिला है तथा इसे न्यायालयों के कार्य समय पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। एक एकसमान, प्रौद्योगिकी-सक्षम एवं 24×7 आपातकालीन न्यायिक तंत्र की स्थापना विधि के शासन को सुदृढ़ करेगी, संविधान की सर्वोच्चता को और मजबूत बनाएगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि जब भी जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता संकट में हों, तब न्याय सभी के लिए 24×7 उपलब्ध रहे।
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