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क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक, 2026

Lokesh Pal May 28, 2026 03:15 6 0

संदर्भ

11वीं क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भारतीय विदेश मंत्री और उनके समकक्षों ने ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री निगरानी तथा समुद्री क्षेत्र जागरूकता से संबंधित पहल शुरू कीं, जिनका उद्देश्य समुद्र में आपातकालीन संचालन तथा मानवीय सहायता को सुदृढ़ करना है।

संबंधित तथ्य

  • शिखर सम्मेलन वैश्विक संघर्षों के कारण उत्पन्न बाजार तनावों के विरुद्ध क्षेत्रीय और एक मुक्त इंडो-पैसिफिक को बढ़ावा देने पर केंद्रित था।
  • इस बैठक से चार प्रमुख परिणाम दस्तावेज प्राप्त हुए— क्वाड विदेश मंत्रियों का संयुक्त वक्तव्य, क्वाड पहलों पर एक पत्र, इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा पर क्वाड का वक्तव्य, और क्वाड की महत्त्वपूर्ण खनिज पहल रूपरेखा।
  • मुख्य स्तंभ एवं सहयोग के स्तंभ: इस शिखर सम्मेलन ने क्वाड के लिए एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को चिह्नित किया, जो एक परामर्शात्मक कूटनीतिक मंच से आगे बढ़कर कार्य-उन्मुख, ठोस सार्वजनिक वस्तुओं की आपूर्ति की दिशा में परिवर्तित हो रहा है।

क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक, 2026 के प्रमुख परिणाम

  • इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा पर क्वाड पहल: कच्चे तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस तथा रासायनिक उर्वरकों जैसे महत्त्वपूर्ण कृषि क्षेत्रों में वैश्विक तनावों से आर्थिक रूप से कमजोर और छोटे द्वीपीय देशों को सुरक्षित रखने हेतु यह नई बहुपक्षीय रूपरेखा तीन मुख्य स्तंभों पर केंद्रित है:
    • सामरिक पेट्रोलियम प्रणाली: क्षेत्रीय साझेदार देशों को अपने सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) स्थापित, विस्तारित और सुदृढ़ करने में सहायता हेतु सामूहिक तकनीकी-आर्थिक विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा ताकि वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों का सामना किया जा सके।
    • क्वाड ईंधन सुरक्षा मंच: इस वर्ष के अंत में संयुक्त राज्य ऊर्जा विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले एक विशेष निकाय के माध्यम से उच्च स्तरीय नीतिगत समन्वय का संस्थानीकरण। यह मंच क्षेत्रीय ऊर्जा लचीलापन ढाँचे और संयुक्त आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यास (EREs) को डिजाइन और लागू करेगा।
    • चोक प्वाइंट सुरक्षा: संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) के तहत नेविगेशन की स्वतंत्रता (FoN) और निर्बाध समुद्री व्यापार के प्रति प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि। समूह ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्त्वपूर्ण वैश्विक मार्गों में अवैध प्रतिबंधों या एकतरफा शुल्क लगाने का विरोध किया।
      • यह समूह स्पष्ट रूप से अवैध पारगमन प्रतिबंधों या एकतरफा समुद्री शुल्कों के आरोपण का विरोध करता है, विशेषकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अत्यंत महत्त्वपूर्ण वैश्विक मार्गों में।

  • क्वाड ‘पोर्ट्स ऑफ द फ्यूचर’ साझेदारी (फिजी पोर्ट परियोजना)
    • पहली संयुक्त अवसंरचना परिसंपत्ति: गठबंधन ने फिजी की बंदरगाह अवसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण हेतु अपनी पहली संयुक्त भौतिक परियोजना की घोषणा की, जिससे प्रशांत द्वीपीय देशों में आपूर्ति-शृंखला बाधाओं को दूर किया जा सके।
    • रणनीतिक संतुलन: चूँकि फिजी बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के तहत चीन के साथ समझौता करने वाले पहले देशों में से एक था, यह साझेदारी पारदर्शी, वित्तीय रूप से सतत् विकल्प प्रस्तुत करती है।
  • महत्वपूर्ण खनिज पहल संबंधी रूपरेखा
    • आपूर्ति शृंखला जोखिम न्यूनीकरण: खनन, मूल्य संवर्द्धन और पुनर्चक्रण क्षेत्रों में सार्वजनिक-निजी निवेश को समन्वित करने हेतु व्यापक बहुपक्षीय ढाँचे का सक्रियण। इसका उद्देश्य चीन पर निर्भरता को कम करना है, जिसके पास दुर्लभ मृदा तत्त्वों के प्रसंस्करण में लगभग 85% वैश्विक प्रभुत्व है।
      • यह विशेष रूप से पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना पर अत्यधिक, संवेदनशील एकल-स्रोत निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई है, जो वर्तमान में दुर्लभ मृदा तत्त्वों की प्रसंस्करण क्षमता पर लगभग 85% वैश्विक एकाधिकार रखता है।
  • समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA) का विस्तार
    • IPMSC का शुभारंभ: मौजूदा इंडो-पैसिफिक समुद्री क्षेत्र जागरूकता साझेदारी को मजबूत करने हेतु इंडो-पैसिफिक समुद्री निगरानी सहयोग (IPMSC) का शुभारंभ किया गया है।
    • रियल-टाइम डेटा साझाकरण: प्रारंभिक रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में संचालित होकर, यह तंत्र वाणिज्यिक समुद्री डेटा का उपयोग करते हुए डार्क वेसल्स” की निगरानी करेगा।
    • अंतर-संचालन क्षमता: भारत क्वाड-एट-सी” मिशन के दूसरे संस्करण की मेजबानी करेगा, जिससे तटरक्षक सहयोग, समुद्री कानून प्रवर्तन तथा IUU फिशिंग जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण मजबूत होगा।
  • डिजिटल और दूरसंचार अवसंरचना
    • समुद्रतल केबल स्थापना: प्रशांत द्वीपीय देशों को सुरक्षित और सतत् समुद्रतल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने हेतु सहयोगात्मक निवेश।
    • अगली पीढ़ी दूरसंचार मानक: ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क (Open RAN) के लिए मानक निर्धारण सहयोग तथा 6G प्रौद्योगिकी के विकास हेतु संयुक्त प्रयास।

क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक (QFMM) के बारे में 

  • संदर्भ: क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक (QFMM) क्वाड ढाँचे केशेरपा और वास्तुकार” के रूप में कार्य करती है।
  • आवृत्ति: यह प्रक्रिया एक चक्रीय कार्यक्रम द्वारा संचालित होती है, जो वर्ष में कम-से-कम एक या दो बार बैठक करती है (प्रायः संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान या सदस्य देशों की राजधानियों में आयोजित स्वतंत्र मंत्रिस्तरीय बैठकों के रूप में)।
  • उत्पत्ति और संरचनात्मक विकास: एक समर्पित मंत्रिस्तरीय प्रक्रिया का कार्यान्वयन संवाद को संस्थागत रूप देने के लिए उठाया गया एक सुनियोजित कदम था:
    • वर्ष 2007 (कार्य-स्तरीय शुरुआत): जब जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे द्वारा क्वाड की पहली बार अवधारणा प्रस्तुत की गई, इसके बाद इस समूह की फिलीपींस के मनीला में आसियान क्षेत्रीय मंच के दौरान बैठक हुई।
    • सितंबर 2019 (QFMM का आधिकारिक गठन): वर्ष 2017 के अंत में क्वाड 2.0” के रूप में औपचारिक पुनर्स्थापना के बाद, इस समूह को पहली बार 26 सितंबर, 2019 को न्यूयॉर्क में मंत्रिस्तरीय स्तर तक उन्नत किया गया।
      • यह QFMM की औपचारिक शुरुआत थी।
    • वर्ष 2021 (नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए उत्प्रेरक): वर्ष 2019–2020 के नियमित विदेश मंत्रियों की बैठकों के माध्यम से प्राप्त परिचालन संबंधी सफलता और संस्थागत कार्यप्रणालियों ने इस समूह को मार्च 2021 में कार्यकारी स्तर—राष्ट्राध्यक्ष (शिखर सम्मेलन) तक उन्नत करने में सक्षम बनाया।

PWOnlyIAS विशेष

मुख्य शब्द एवं अवधारणाएँ (पहल से संबंधित) 

  • क्वाड: भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान एवं ऑस्ट्रेलिया का एक रणनीतिक समूह, जिसका उद्देश्य मुक्त एवं समावेशी इंडो-पैसिफिक को प्रोत्साहित करना है।
  • रणनीतिक पेट्रोलियम प्रणालियाँ: आपूर्ति व्यवधान अथवा संकट की स्थिति में उपयोग हेतु आपातकालीन तेल भंडारण एवं ईंधन-प्रबंधन तंत्र।
  • महत्त्वपूर्ण खनिज: लीथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट एवं दुर्लभ मृदा तत्त्व, जो विद्युत वाहन बैटरियों, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा एवं रक्षा प्रौद्योगिकी के लिए अनिवार्य हैं।
  • इंडो-पैसिफिक समुद्री निगरानी सहयोग (IPMSC): समुद्री डेटा साझाकरण के माध्यम से समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA) को सुदृढ़ करने तथा समुद्री गतिविधियों की निगरानी हेतु क्वाड की पहल।
  • क्वाड-एट-सी शिप ऑब्जर्वर मिशन: क्वाड देशों के तटरक्षक बलों एवं नौसेनाओं के मध्य समन्वय एवं पारस्परिक कार्यक्षमता को सुदृढ़ करने हेतु संयुक्त समुद्री अभ्यास।
  • ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क (Open RAN): एक दूरसंचार ढाँचा, जो विभिन्न कंपनियों के उपकरण एवं सॉफ्टवेयर के परस्पर संचालन की अनुमति देता है, जिससे सीमित विक्रेताओं पर निर्भरता कम होती है।
  • पैसिफिक आइलैंड्स फोरम (PIF): प्रशांत द्वीपीय देशों का एक क्षेत्रीय संगठन, जो राजनीतिक, आर्थिक एवं सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित है।
  • समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS): समुद्री अधिकारों, नौवहन एवं महासागरीय संसाधनों के उपयोग को विनियमित करने वाला अंतरराष्ट्रीय विधिक ढाँचा।
  • समुद्री चोकपॉइंट्स: हॉर्मुज जलडमरूमध्य एवं मलक्का जलडमरूमध्य जैसे संकीर्ण समुद्री मार्ग, जिनसे वैश्विक व्यापार एवं ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा भाग होकर गुजरता है।
  • नेट सुरक्षा प्रदाता: ऐसा राष्ट्र जो सुरक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन एवं मानवीय सहायता के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता में सक्रिय योगदान देता है।

बैठक का सामरिक महत्त्व

  • संवाद से क्रियान्वयन की ओर संक्रमण: क्वाड के परामर्शात्मक मंच से क्रियान्वयन-उन्मुख वैश्विक सार्वजनिक प्रदाता के रूप में विकसित होने को परिलक्षित करता है, जैसा कि फिजी पोर्ट परियोजना जैसी पहलों में देखा गया है।
  • आर्थिक एवं आपूर्ति-शृंखला सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण: ऊर्जा एवं महत्त्वपूर्ण खनिजों में विविधीकृत आपूर्ति-शृंखलाओं को प्रोत्साहित करता है, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम होती है तथा निर्यात प्रतिबंधों या आपूर्ति-शृंखला के रणनीतिक उपयोग से उत्पन्न जोखिम सीमित होते हैं।
  • समुद्री स्थिरता का सुदृढ़ीकरण: इंडो-पैसिफिक में नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था का समर्थन करते हुए, IPMSC जैसे तंत्रों के माध्यम से भारत की सुरक्षा प्रदाता के रूप में भूमिका को सुदृढ़ करता है।
  • बाह्य आघातों के प्रति संवेदनशीलता में कमी: विकासशील एवं द्वीपीय देशों को वस्तु मूल्यों की अस्थिरता तथा प्रमुख समुद्री चोकपॉइंट्स पर व्यवधानों से उत्पन्न आर्थिक दबावों से निपटने में सहायता प्रदान करता है।

मुख्य चुनौतियाँ, जिनका समाधान आवश्यक है

  • शिखर सम्मेलन कार्यक्रम की अनिश्चितता: आगामी क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की निश्चित तिथि एवं स्थान का अभाव सहयोग की गति को धीमा कर सकता है।
  • व्यापार-संबंधी मतभेद: सदस्य देशों के मध्य आर्थिक असहमति एवं संरक्षणवादी शुल्क नीतियों के कारण रणनीतिक एकता पर दबाव उत्पन्न हो सकता है।
  • चीन का विरोध: चीन निरंतर क्वाड की आलोचना करते हुए इसे एक विशिष्ट (Exclusive) समूह बताता है, जो ब्लॉक राजनीति एवं संघर्ष को बढ़ावा देता है।
  • अवसंरचना वित्तपोषण अंतर: प्रशांत देशों को समयबद्ध एवं पारदर्शी अवसंरचना वित्तपोषण उपलब्ध कराना, क्षेत्रीय आवश्यकताओं में वृद्धि के मध्य एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है।

आगे की राह

  • क्वाड शिखर सम्मेलनों का संस्थानीकरण: सहयोग की निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलनों के लिए निश्चित एवं नियमित कार्यक्रम स्थापित किया जाना चाहिए।
  • परिचालन समन्वय का सुदृढ़ीकरण: काउंटरटेररिज्म टेबलटॉप एक्सरसाइज एवं क्वाड-एट-सी मिशन जैसी पहलों का उपयोग करते हुए संयुक्त समुद्री समन्वय एवं प्रतिक्रिया तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
  • समावेशी क्षेत्रीय साझेदारियों को प्रोत्साहन: आसियान एवं पैसिफिक आइलैंड्स फोरम के साथ घनिष्ठ सहयोग स्थापित कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि क्वाड की पहलें पारदर्शी, समावेशी बनी रहें।

निष्कर्ष

नई दिल्ली मंत्रिस्तरीय शिखर सम्मेलन क्वाड के एक अधिक क्रियान्वयन-उन्मुख समूह में रूपांतरण को दर्शाता है, जो समुद्री सुरक्षा को ऊर्जा, अवसंरचना एवं प्रौद्योगिकी सहयोग के साथ जोड़ते हुए मुक्त, इंडो-पैसिफिक के निर्माण को सुदृढ़ करता है।

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