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महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में क्वांटम-सेफ एन्क्रिप्शन

Lokesh Pal May 30, 2026 02:29 8 0

संदर्भ

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की एक टास्क फोर्स ने उभरते क्वांटम कंप्यूटिंग खतरों से संवेदनशील डेटा की सुरक्षा हेतु भारत के महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (Critical Information Infrastructure-CII) क्षेत्रों में पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) को तीव्र गति से अपनाने का आह्वान किया है।

पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) के बारे में

  • पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) क्रिप्टोग्राफिक प्रणालियों की एक नई पीढ़ी है, जिसे शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटरों द्वारा किए जाने वाले हमलों के विरुद्ध भी सुरक्षित बनाए रखने हेतु विकसित किया गया है।
    • पारंपरिक एन्क्रिप्शन विधियों के विपरीत, PQC एल्गोरिदम इस प्रकार विकसित किए गए हैं कि वे क्वांटम प्रौद्योगिकियों की उन संगणनात्मक क्षमताओं का सामना कर सकें, जो वर्तमान इंटरनेट सुरक्षा प्रणालियों को भंग करने में सक्षम हो सकती हैं।
  • PQC बनाम क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन (QKD)
    • पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC): यह एक सॉफ्टवेयर-आधारित उन्नयन है, जो उन्नत गणितीय समीकरणों का उपयोग करता है। यह सामान्य इंटरनेट, उपग्रह एवं सेलुलर नेटवर्क पर कार्य कर सकता है।
    • क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन (QKD): यह एक हार्डवेयर-आधारित समाधान है, जो एन्क्रिप्शन कुंजियों को सुरक्षित रूप से साझा करने हेतु प्रकाश कणों (फोटोन) के भौतिक गुणों का उपयोग करता है। इसके लिए विशेष फाइबर-ऑप्टिक कनेक्शन एवं समर्पित हार्डवेयर अवसंरचना की आवश्यकता होती है।

टास्क फोर्स रिपोर्ट की प्रमुख विशेषताएँ

यह रिपोर्ट भारत की डिजिटल संरचना को भविष्य के क्वांटम खतरों से सुरक्षित रखने हेतु एक सक्रिय (Proactive) दृष्टिकोण पर बल देती है।

  • लक्षित महत्त्वपूर्ण क्षेत्र: यह संक्रमण सरकार, रक्षा, विद्युत, दूरसंचार, परिवहन तथा बैंकिंग एवं वित्त जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता देगा।
  •  अस्यूम-ब्रीच” सिद्धांत: माइग्रेशन प्लानिंग इस धारणा पर आधारित होनी चाहिए कि वर्तमान सुरक्षा तंत्र कमजोर हैं। विशेष रूप सेहार्वेस्ट नाउ, डिक्रिप्ट लेटर(Harvest Now, Decrypt Later) रणनीति से सुरक्षा पर बल दिया गया है, जिसमें विरोधी पक्ष एन्क्रिप्टेड डेटा को चुराकर संगृहीत कर लेते हैं और भविष्य में क्वांटम कंप्यूटरों को डिक्रिप्ट करते हैं।
  • लूमिंग “Q-Day”: रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि “Q-Day” — वह समय जब क्वांटम कंप्यूटर व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले सार्वजनिक-कुंजी क्रिप्टोग्राफी को पूरी तरह भंग करने में सक्षम हो जाएँगे — अगले तीन वर्षों के भीतर आ सकता है।
  • चरणबद्ध माइग्रेशन कैलेंडर
    • महत्त्वपूर्ण क्षेत्र: वर्ष 2027 तक आधारभूत तैयारी, वर्ष 2028 तक उच्च-प्राथमिकता प्रणालियों का माइग्रेशन तथा वर्ष 2029 तक पूर्ण PQC अपनाना।
    • अन्य उद्यम: अपेक्षाकृत विस्तारित समय-सीमा —वर्ष  2028 तक आधारभूत तैयारी, वर्ष 2030 तक उच्च-प्राथमिकता माइग्रेशन तथा वर्ष 2033 तक पूर्ण PQC अपनाना।
  • अल्प एवं मध्यम अवधि का रोडमैप: “सैंडबॉक्स पायलट्स” (Sandbox Pilots) अर्थात् नियंत्रित एवं पृथक परीक्षण वातावरण तथा मौजूदा एन्क्रिप्शन को नए PQC एल्गोरिदम के साथ जोड़ने वाली “हाइब्रिड” प्रणालियों को लागू करने की अनुशंसा की गई है।
    • राष्ट्रीय PQC परीक्षण एवं प्रमाणन कार्यक्रम: दिसंबर 2026 तक प्रथम परीक्षण प्रयोगशालाओं को संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
    • राष्ट्रीय QKD बैकबोन का निर्माण: महत्त्वपूर्ण प्रणालियों हेतु वर्ष 2029 तक तथा अन्य सभी प्रणालियों हेतु वर्ष 2033 तक राष्ट्रीय क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन (QKD) बैकबोन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • समेकित सुरक्षा संरचना: जहाँ अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, कनाडा एवं ऑस्ट्रेलिया जैसे देश मुख्यतः सॉफ्टवेयर-आधारित PQC पर निर्भर हैं, वहीं टास्क फोर्स ने भारत के लिए दीर्घकालिक रूप से सॉफ्टवेयर-आधारित PQC तथा हार्डवेयर-आधारित QKD बैकबोन के संयोजन वाली एक विशिष्ट समेकित सुरक्षा संरचना की अनुशंसा की है।
  • क्षेत्र-विशिष्ट विनियमन: रिपोर्ट ने SEBI, RBI एवं CERC जैसे वित्तीय एवं ऊर्जा नियामकों को अपने-अपने क्षेत्रों के लिए अनुकूलित साइबर सुरक्षा नियम तत्काल तैयार करने की सलाह दी है।
  • उभरते संवेदनशीलता के स्रोत: एंथ्रोपिक के अप्रकाशित मिथोस” (Mythos) मॉडल जैसे उन्नत AI मॉडल लिनक्स कर्नेल (Linux Kernel) एवं ओपनबीएसडी (OpenBSD)  जैसे महत्त्वपूर्ण प्लेटफॉर्मों में अज्ञात सॉफ्टवेयर कमजोरियों की पहचान करने में सक्षम हैं।
    • इससे इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा CERT-In द्वारा राष्ट्रीय तैयारी की समीक्षा की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।
  • संस्थागत ढाँचा: यह टास्क फोर्स राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के तत्त्वावधान में गठित किया गया था।
    • इसकी अध्यक्षता सी-डॉट (C-DOT) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने की तथा IIT कानपुर के निदेशक ने सह-अध्यक्षता की।
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM): इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अप्रैल 2023 में ₹6,003.65 करोड़ के बजट के साथ अनुमोदित किया गया था, जिसकी अवधि वर्ष 2030–31 तक है।
    • यह IISc एवं विभिन्न IITs में स्थापित चार विषयगत केंद्रों (Thematic Hubs/T-Hubs) के माध्यम से कार्य करता है, जो क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग एवं क्वांटम सामग्री पर केंद्रित हैं।
  • पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC):  यह ऐसे गणितीय एल्गोरिदम को संदर्भित करता है, जो सामान्य कंप्यूटरों पर चलते हैं, किंतु उन्हें विशेष रूप से भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों द्वारा किए जाने वाले क्रिप्टोग्राफिक हमलों का सामना करने हेतु विकसित किया गया है।
  • क्वांटम कुंजी डिस्ट्रिब्यूशन (QKD): यह एक हार्डवेयर-आधारित सुरक्षित संचार पद्धति है, जो एन्क्रिप्शन कुंजियों के आदान-प्रदान हेतु प्रकाश कणों (Photons) के क्वांटम गुणों का उपयोग करती है।
    • इसकी सुरक्षा भौतिकी के मूलभूत नियमों द्वारा सुनिश्चित होती है; अर्थात् कोई भी हस्तक्षेपकर्ता (Interceptor) क्वांटम अवस्था को तुरंत परिवर्तित कर देगा और प्रणाली को इसकी सूचना मिल जाएगी।
  • क्वांटम बनाम पारंपरिक कंप्यूटर: पारंपरिक कंप्यूटर बाइनरी तर्क (Binary Logic) अर्थात् 0 एवं 1 के बिट्स (Bits) पर आधारित होते हैं।
    • इसके विपरीत, क्वांटम कंप्यूटर क्यूबिट्स (Qubits) का उपयोग करते हैं, जो सुपरपोजीशन (Superposition) एवं एंटैंगलमेंट (Entanglement) जैसी विशेषताओं से युक्त होते हैं। इससे वे अत्यंत जटिल गणनाएँ बहुत कम समय में कर सकते हैं तथा वर्तमान सार्वजनिक-कुंजी अवसंरचना (Public-Key Infrastructure) जैसे RSA को आसानी से भंग करने की क्षमता रखते हैं।

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