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Lokesh Pal
March 11, 2026 03:50
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नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन “ब्रिजिंग द बेंच गैप: वीमेन एंड ज्यूडिशियल लीडरशिप” को संबोधित करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
यह कार्यक्रम भारतीय महिला विधि संगठन द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के सभागार में आयोजित किया गया।
भारतीय न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व को अक्सर “फनल प्रभाव” के रूप में वर्णित किया जाता है, जहाँ प्रवेश स्तर पर संख्या अपेक्षाकृत मजबूत होती है, लेकिन नेतृत्व के उच्चतम स्तरों पर यह काफी कम हो जाती है।
न्यायपालिका में लैंगिक विविधता को बढ़ावा देना केवल समान अवसर के लिए ही नहीं, अपितु भारत की न्याय वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। कानूनी शिक्षा से लेकर बेंच में उपस्थिति तक की राह को सुदृढ़ करके तथा समानता और न्याय के संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखते हुए, भारत वास्तव में एक ऐसी समावेशी न्यायपालिका का निर्माण कर सकता है, जो अपने सभी नागरिकों की सेवा प्रदान करती है।
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