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Lokesh Pal
July 18, 2026 02:53
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जम्मू एवं कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी केंद्र सरकार के आश्वासन को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अभिलेखित किए जाने के ढाई वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।


| पहलू | राज्य | संघ राज्य क्षेत्र (UT) |
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद-152-237 के अंतर्गत शासित। | अनुच्छेद-239-241 के अंतर्गत शासित। |
| कार्यपालिका का प्रमुख | राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख होता है, जबकि वास्तविक कार्यपालिका मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद होती है। | प्रशासक/उपराज्यपाल (LG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है; कुछ संघ राज्य क्षेत्रों में मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद भी होती है। |
| विधायी शक्तियाँ | राज्य सूची एवं समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बना सकते हैं। | संसद के पास सर्वोपरि विधायी शक्ति होती है; केवल कुछ संघ राज्य क्षेत्रों को सीमित विधायी शक्तियाँ प्राप्त हैं। |
| प्रशासनिक नियंत्रण | संघीय व्यवस्था के अंतर्गत अपेक्षाकृत अधिक संवैधानिक स्वायत्तता प्राप्त होती है। | राष्ट्रपति के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से संघ सरकार द्वारा प्रशासित किए जाते हैं। |
| वित्तीय एवं राजनीतिक स्वायत्तता | अधिक वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वायत्तता प्राप्त होती है; सभी राज्यों का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व होता है। | संघीय अनुदानों पर अधिक निर्भर होते हैं; केवल कुछ संघ राज्य क्षेत्रों का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व होता है। |
जम्मू एवं कश्मीर (J&K) को राज्य का दर्जा बहाल करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि संवैधानिक शासन, लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व तथा सहकारी संघवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की परीक्षा है। यद्यपि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है, तथापि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी शांति सुनिश्चित करने का सर्वोत्तम उपाय समावेशी राजनीतिक भागीदारी, सशक्त स्थानीय शासन तथा संवैधानिक प्रतिबद्धताओं की समयबद्ध पूर्ति है।
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