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Lokesh Pal
July 02, 2026 02:20
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राम मंदिर वित्तीय अनियमितता मामले में फैजाबाद बार एसोसिएशन द्वारा आरोपी का प्रतिनिधित्व करने से इनकार किए जाने के बाद विधिक प्रतिनिधित्व के संवैधानिक अधिकार पर पुनः बहस तीव्र हो गई है। इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय ने ए.एस. मोहम्मद रफी बनाम तमिलनाडु राज्य (2010) के निर्णय में इस अधिकार की पुनः पुष्टि की थी।


विधिक प्रतिनिधित्व की संवैधानिक गारंटी किसी कथित अपराध की नहीं, बल्कि आपराधिक न्याय प्रणाली की निष्पक्षता एवं वैधता की रक्षा करती है। प्रत्येक आरोपी को सक्षम विधिक प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराकर न्यायपालिका विधि के शासन, प्राकृतिक न्याय तथा इस संवैधानिक वचनबद्धता को सुदृढ़ करती है कि न्याय का प्रशासन भय, पक्षपात अथवा पूर्वाग्रह के बिना किया जाएगा।
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