100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

भारत में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार

Lokesh Pal July 23, 2026 04:44 4 0

संदर्भ 

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा संसद की ओर निकाले गए विरोध मार्च तथा उसके पश्चात् हुई पुलिस कार्रवाई ने विरोध-प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार, उस पर लगाए जा सकने वाले युक्तियुक्त प्रतिबंधों तथा नागरिक स्वतंत्रताओं एवं लोक व्यवस्था के मध्य संतुलन को लेकर बहस को पुनः जीवित कर दिया है।

संबंधित तथ्य

  • यह घटना मौलिक अधिकारों की सुरक्षा और लोक व्यवस्था बनाए रखने की राज्य की शक्ति के बीच संवैधानिक संतुलन की निरंतर चुनौती को दर्शाती है।

विरोध-प्रदर्शन का अधिकार क्या है?

  • विरोध-प्रदर्शन का अधिकार संविधान के अनुच्छेद-19 से व्युत्पन्न एक मौलिक अधिकार है। यद्यपि संविधान में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार शब्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, तथापि यह निम्नलिखित अनुच्छेदों के संयुक्त पठन से प्राप्त होता है:
    • अनुच्छेद-19(1)(a)
    • अनुच्छेद-19(1)(b)
    • अनुच्छेद-19(1)(c)
  • अनुच्छेद-19 के अधीन युक्तियुक्त प्रतिबंध: यह अधिकार निरपेक्ष नहीं है। राज्य निम्नलिखित हितों में युक्तियुक्त प्रतिबंध लगा सकता है:
    • भारत की संप्रभुता एवं अखंडता
    • राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध
    • शिष्टता अथवा नैतिकता
    • न्यायालय की अवमानना, मानहानि, अपराध के लिए उकसाना।

इस प्रकार, शांतिपूर्ण एवं अहिंसक विरोध-प्रदर्शन एक संवैधानिक रूप से संरक्षित लोकतांत्रिक अधिकार है।

संवैधानिक आधार

अनुच्छेद प्रावधान
अनुच्छेद-19(1)(a) वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद-19(1)(b) बिना शस्त्र के शांतिपूर्वक एकत्र होने का अधिकार
अनुच्छेद-19(1)(c) संघ या संगठन बनाने का अधिकार
अनुच्छेद-21 जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार (जिसमें गरिमापूर्ण लोकतांत्रिक भागीदारी का अधिकार भी सम्मिलित है)

विरोध-प्रदर्शनों को नियंत्रित करने वाला विधिक ढाँचा

  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023
    • धारा 163 (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 का उत्तराधिकारी):
      • कार्यपालिका मजिस्ट्रेटों को निम्नलिखित पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार प्रदान करती है:
        • अवैध सभाएँ, सार्वजनिक जमावड़े, जुलूस तथा लोक शांति भंग करने की संभावना वाली गतिविधियाँ।
      • इसका उपयोग निम्नलिखित की रोकथाम के लिए किया जाता है:
        • दंगे
        • हिंसा
        • सांप्रदायिक तनाव
        • लोक सुरक्षा के लिए खतरे।
  • पुलिस की अनुमति: अधिकांश राज्यों में सार्वजनिक बैठकों, रैलियों, मार्च, प्रदर्शनों तथा लाउडस्पीकरों के उपयोग के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होती है।
    • यह अनुमति निम्नलिखित के विनियमन में सहायक होती है:
      • यातायात
      • सुरक्षा
      • आपातकालीन सेवाएँ
      • जनसुविधा।
  • निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थल: प्राधिकरण सामान्यतः जंतर-मंतर (दिल्ली), रामलीला मैदान तथा आजाद मैदान (मुंबई) जैसे विशिष्ट स्थानों को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित करते हैं।
    • उद्देश्य: लोक व्यवस्था के साथ लोकतांत्रिक अधिकारों के संतुलन को सुनिश्चित करना।

महत्त्वपूर्ण न्यायिक निर्णय

सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय मुद्दा प्रमुख निर्णय महत्त्व
हिमत लाल के. शाह बनाम पुलिस आयुक्त (1973) सार्वजनिक सभाओं एवं सम्मेलनों का विनियमन शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता लोकतंत्र का एक अनिवार्य तत्त्व है। नागरिकों को अपने राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक विचार व्यक्त करने हेतु शांतिपूर्वक एकत्र होने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। राज्य सार्वजनिक स्थलों के उपयोग का विनियमन कर सकता है, परंतु ऐसा विनियमन मनमाने प्रतिबंध का रूप नहीं ले सकता। विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की। यह स्थापित किया कि सरकारी प्रतिबंध युक्तिसंगत, न्यायसंगत एवं गैर-मनमाने होने चाहिए।
मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) बनाम भारत संघ (2018) संसद एवं ‘सेंट्रल विस्टा’ क्षेत्र के आस-पास दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के बार-बार प्रयोग को चुनौती राज्य को लोक व्यवस्था एवं लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं के मध्य संतुलन स्थापित करना चाहिए। शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों का विनियमन किया जाना चाहिए, न कि उन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। न्यायालय ने प्रतिभागियों की संख्या सीमित करने, संवेदनशील संस्थानों से दूरी बनाए रखने, हथियारों पर प्रतिबंध लगाने तथा जंतर-मंतर जैसे निर्धारित विरोध स्थलों को जारी रखने जैसे उपाय सुझाए। पुनः स्पष्ट किया कि युक्तिसंगत विनियमन संवैधानिक रूप से वैध है। यह भी स्पष्ट किया कि विनियमन प्रतिबंध का रूप नहीं ले सकता।
अमित साहनी बनाम पुलिस आयुक्त (2020) (शाहीन बाग प्रकरण) विरोध-प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सड़कों का अनिश्चितकालीन अवरोध सार्वजनिक सड़कों को अनिश्चितकाल तक अवरुद्ध नहीं किया जा सकता। विरोध-प्रदर्शन निर्धारित स्थलों पर आयोजित किए जाने चाहिए। यात्रियों एवं अन्य नागरिकों के अधिकारों का भी संरक्षण किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकार अन्य नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं कर सकते। प्रतिस्पर्द्धी मौलिक अधिकारों के मध्य संतुलन की आवश्यकता को पुनः रेखांकित किया। यह स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन संरक्षित है, किंतु सार्वजनिक स्थलों पर स्थायी कब्जा असंवैधानिक है।

संयुक्त राष्ट्र का दृष्टिकोण एवं भारत का रुख

  • संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 47वें सत्र (2021) में भारत ने कहा:-
    • शांतिपूर्ण सभा एक लोकतांत्रिक परंपरा है।
    • अहिंसक विरोध-प्रदर्शन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का केंद्रीय आधार थे।
    • संविधान शांतिपूर्ण सभा की गारंटी प्रदान करता है।
  • राज्य को निम्नलिखित के मध्य संतुलन बनाए रखना चाहिए:-
    • विरोध-प्रदर्शन की स्वतंत्रता
    • जीवन की सुरक्षा
    • लोक व्यवस्था

विरोध-प्रदर्शनों के विनियमन से संबंधित मुद्दे

  • धारा 163 BNSS का बार-बार उपयोग: BNSS की धारा 163 के अंतर्गत निषेधात्मक आदेशों का बार-बार प्रयोग इस चिंता को जन्म देता है कि निवारक प्रतिबंध शांतिपूर्ण सभा के मौलिक अधिकार को असंगत रूप से सीमित कर सकते हैं।
  • अत्यधिक पुलिस कार्रवाई: लाठीचार्ज, निरोध, आँसू गैस तथा बल प्रयोग से संबंधित आरोपों ने इस आवश्यकता को रेखांकित किया है कि पुलिसिंग विधिसम्मत, आनुपातिक तथा अधिकार-आधारित हो।
  • अनुमति में विलंब: पर्याप्त पारदर्शिता के बिना विरोध-प्रदर्शन की अनुमति देने में विलंब अथवा उसे अस्वीकार करना संवैधानिक स्वतंत्रताओं के निष्पक्ष एवं प्रभावी प्रयोग को कमजोर कर सकता है।
  • अधिकार बनाम लोक व्यवस्था: प्राधिकरणों को लोक व्यवस्था, सुरक्षा तथा आवश्यक सेवाओं के संरक्षण और नागरिकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण सभा के अधिकार के मध्य संतुलन बनाए रखना चाहिए।
  • एकरूप ढाँचे का अभाव: राष्ट्रीय स्तर पर एक समान दिशा-निर्देशों के अभाव के कारण विभिन्न राज्यों में विरोध-प्रदर्शनों के विनियमन के अलग-अलग मानदंड विकसित हो गए हैं।
  • बढ़ती डिजिटल निगरानी: CCTV, फेशियल रिकग्निशन तथा डिजिटल निगरानी के बढ़ते उपयोग ने गोपनीयता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर चिंताएँ उत्पन्न की हैं।
  • सुरक्षा-स्वतंत्रता संतुलन: सरकारों के समक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा एवं लोक सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक असहमति पर अनावश्यक प्रतिबंध न लगाने की चुनौती है।

आगे की राह

  • शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों को प्रोत्साहित करना: विरोध-प्रदर्शन के आयोजकों एवं प्रतिभागियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण, विधिसम्मत हों तथा सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करें।
  • पारदर्शी अनुमति व्यवस्था: सरकारों को विरोध-प्रदर्शन की अनुमति प्रदान करने के लिए स्पष्ट, वस्तुनिष्ठ तथा समयबद्ध प्रक्रियाएँ अपनानी चाहिए।
  • आनुपातिक प्रतिबंध: प्रतिबंध केवल आवश्यकता होने पर ही लगाए जाने चाहिए तथा उन्हें युक्तियुक्तता एवं आनुपातिकता के संवैधानिक सिद्धांतों की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए।
  • संवाद को प्राथमिकता देना: प्राधिकरणों को बलपूर्वक उपायों का सहारा लेने से पहले आयोजकों के साथ परामर्श एवं मध्यस्थता को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • न्यायिक पर्यवेक्षण को सुदृढ़ करना: न्यायालयों को मनमाने निषेधात्मक आदेशों की समीक्षा जारी रखनी चाहिए, ताकि संवैधानिक अधिकारों एवं विधि के शासन की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
  • विरोध-प्रदर्शन स्थलों का विकास: प्रमुख शहरों में सुव्यवस्थित निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थलों का विकास किया जाना चाहिए, जिससे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को सुविधाजनक बनाया जा सके तथा जनजीवन में व्यवधान न्यूनतम रहे।
  • स्मार्ट प्रबंधन का उपयोग: प्रौद्योगिकी-सक्षम यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन तथा सार्वजनिक संचार को सर्वव्यापी प्रतिबंधों की अपेक्षा प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • लोकतंत्र की रक्षा करना: राज्य को संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप मौलिक स्वतंत्रताओं एवं लोक व्यवस्था के मध्य संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

अन्य देशों में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार

देश विधिक आधार प्रमुख प्रतिबंध
संयुक्त राज्य अमेरिका प्रथम संशोधन बड़े विरोध-प्रदर्शनों हेतु अनुमति आवश्यक; समय, स्थान एवं आयोजन की पद्धति पर प्रतिबंध।
यूनाइटेड किंगडम मानवाधिकार अधिनियम, 1998 (यूरोपीय मानवाधिकार अभिसमय का अनुच्छेद-11) गंभीर व्यवधान को रोकने एवं लोक व्यवस्था बनाए रखने हेतु प्रतिबंध।
जर्मनी मूल विधि (Basic Law) का अनुच्छेद-8 पूर्व सूचना आवश्यक; हिंसक अथवा सशस्त्र सभाएँ निषिद्ध।
फ्राँस संवैधानिक सिद्धांत पूर्व सूचना आवश्यक; लोक सुरक्षा के हित में विरोध-प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
कनाडा कनाडाई अधिकार एवं स्वतंत्रता घोषणा-पत्र (धारा 2) लोक सुरक्षा एवं सार्वजनिक व्यवस्था के हित में युक्तिसंगत प्रतिबंध।
दक्षिण अफ्रीका संविधान का अनुच्छेद-17 शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन संरक्षित; हिंसा एवं सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाना निषिद्ध।
सिंगापुर संविधान का अनुच्छेद-14 सामान्यतः पुलिस की पूर्व अनुमति आवश्यक; लोक व्यवस्था संबंधी कठोर नियम लागू।
चीन संविधान का अनुच्छेद-35 सरकारी स्वीकृति आवश्यक; व्यवहार में अत्यंत कठोर नियमन।

निष्कर्ष

शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का अधिकार भारत के संवैधानिक लोकतंत्र की आधारशिला है, जो नागरिकों को लोक मामलों में भागीदारी करने तथा सरकारों को उत्तरदायी बनाने में सक्षम बनाता है। यद्यपि यह अधिकार लोक व्यवस्था एवं सुरक्षा के हित में युक्तियुक्त प्रतिबंधों के अधीन है, तथापि किसी भी प्रकार का विनियमन निष्पक्ष, आनुपातिक एवं मनमाना न होने वाला होना चाहिए, ताकि व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं एवं सामाजिक हितों के मध्य संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.