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Lokesh Pal
July 23, 2026 04:44
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा संसद की ओर निकाले गए विरोध मार्च तथा उसके पश्चात् हुई पुलिस कार्रवाई ने विरोध-प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार, उस पर लगाए जा सकने वाले युक्तियुक्त प्रतिबंधों तथा नागरिक स्वतंत्रताओं एवं लोक व्यवस्था के मध्य संतुलन को लेकर बहस को पुनः जीवित कर दिया है।
इस प्रकार, शांतिपूर्ण एवं अहिंसक विरोध-प्रदर्शन एक संवैधानिक रूप से संरक्षित लोकतांत्रिक अधिकार है।


शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का अधिकार भारत के संवैधानिक लोकतंत्र की आधारशिला है, जो नागरिकों को लोक मामलों में भागीदारी करने तथा सरकारों को उत्तरदायी बनाने में सक्षम बनाता है। यद्यपि यह अधिकार लोक व्यवस्था एवं सुरक्षा के हित में युक्तियुक्त प्रतिबंधों के अधीन है, तथापि किसी भी प्रकार का विनियमन निष्पक्ष, आनुपातिक एवं मनमाना न होने वाला होना चाहिए, ताकि व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं एवं सामाजिक हितों के मध्य संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।
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