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Lokesh Pal
May 11, 2026 03:24
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हाल ही में एक विश्लेषण ने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल और असम जैसे प्रमुख भारतीय राज्यों में ऋण भार में वृद्धि को उजागर किया।

केंद्र राज्यों के बढ़ते ऋण भार को संबोधित करने में वित्तीय समर्थक और राजकोषीय नियामक दोनों की दोहरी भूमिका निभाता है। सहकारी संघवाद को सुदृढ़ करना, संतुलित राजकोषीय अंतर सुनिश्चित करना और राजकोषीय अनुशासन को बढ़ावा देना राज्यों की सतत् वित्तीय स्थिरता के लिए आवश्यक है।
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