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राज्यों में बढ़ता सब्सिडी बोझ: CAG वित्त वर्ष 2025 रिपोर्ट

Lokesh Pal June 20, 2026 04:02 15 0

संदर्भ

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने राज्य वित्त पर अपनी वित्त वर्ष 2025 रिपोर्ट जारी की है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • असंगत वृद्धि: पिछले दशक (वित्त वर्ष 2016 से वित्त वर्ष 2025) में 28 राज्यों का कुल सब्सिडी व्यय ₹1.4 लाख करोड़ से बढ़कर ₹4.4 लाख करोड़ हो गया, जो तीन गुना वृद्धि को दर्शाता है। यह वृद्धि कुल राजकोषीय व्यय की तुलना में कहीं अधिक है, जो केवल 2.3 गुना बढ़ा है।

  • समष्टि-राजकोषीय तनाव संकेतक: राज्यों की सब्सिडी वित्त वर्ष 2025 में पहली बार दो अंकों में पहुँच गई और यह कुल राजस्व व्यय का 10.2% तथा भारत के कुल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 7.7% से बढ़कर महत्त्वपूर्ण स्तर पर पहुँच गई।
  • क्षेत्रीय प्रभुत्व: राजकोषीय बोझ मुख्यतः दो क्षेत्रों में केंद्रित है:-
    • ऊर्जा (मुख्यतः विद्युत सब्सिडी) का हिस्सा 43% है, जबकि कृषि (मूल्य समर्थन, बीज/उर्वरक वितरण और ऋण माफी) का हिस्सा 30% है।
  • अत्यधिक क्षेत्रीय संकेंद्रण: राजकोषीय असमानता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जहाँ केवल पाँच राज्य (महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान) कुल राष्ट्रीय सब्सिडी का 54% (₹2.3 लाख करोड़) खर्च करते हैं।
    • कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और पंजाब शीर्ष खर्च करने वाले राज्य रहे, जहाँ सब्सिडी उनके कुल बजट का 13.5% से अधिक है।
  • कम खर्च वाले क्षेत्र: छह पूर्वोत्तर राज्य (अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा, असम) अपने कुल बजट का 1% से भी कम सब्सिडी पर खर्च करते हैं, जबकि केरल और उत्तराखंड 2% से कम खर्च करते हैं।
    • CAG के अनुसार, इसका कारण छोटा उपभोक्ता आधार, कम औद्योगिक घनत्व और कम जल-आधारित कृषि है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के बारे में

  • यह एक संवैधानिक प्राधिकरण है, जो केंद्र और राज्य स्तर पर सरकार के वित्तीय कार्यों के ऑडिट तथा रिपोर्टिंग के लिए उत्तरदायी होता है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद-148 के तहत स्थापित, CAG शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

CAG के प्रमुख कार्य

  • सरकारी लेखाओं का ऑडिट: केंद्र और राज्य सरकारों की प्राप्तियों तथा व्यय का ऑडिट करता है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) भी शामिल होते हैं।
  • विधायिका को रिपोर्टिंग: ऑडिट रिपोर्ट, राष्ट्रपति (केंद्र के लिए) या राज्यपाल (राज्य के लिए) को प्रस्तुत की जाती है, जिसे बाद में संसद या राज्य विधानसभाओं में रखा जाता है।
  • सार्वजनिक उद्यमों का ऑडिट: सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन की जाँच करता है।
  • संचित निधि का संरक्षक: यह सुनिश्चित करता है कि भारत या राज्यों की संचित निधि (Consolidated Fund) से निकासी केवल विधायी अनुमोदन के साथ ही की जाए।
  • विशेष ऑडिट: राष्ट्रपति या राज्यपाल के अनुरोध पर विशेष ऑडिट करता है, विशेषकर अनियमितताओं के मामलों में।

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