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Lokesh Pal
April 23, 2026 02:00
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हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति को निर्देश दिया है कि वह जेलों को दिव्यांग-अनुकूल बनाने हेतु एक समग्र कार्ययोजना तैयार करे।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप समावेशी और मानवीय सुविधाओं से युक्त जेलों की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि मौलिक अधिकार अभिरक्षा में भी बने रहते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि राज्य शक्ति, मानव गरिमा द्वारा सीमित रहे, ताकि स्वतंत्रता का ह्रास, गरिमा के ह्रास में परिवर्तित न हो।
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