100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश

Lokesh Pal January 17, 2026 02:30 100 0

संदर्भ

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के अंतर्गत वंचित बच्चों के लिए 25% आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्यों को निर्देश जारी किए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी प्रमुख निर्देश

  • अनिवार्य नियम-निर्माण: शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE अधिनियम) की धारा 38 के अंतर्गत राज्यों को विधिक रूप से बाध्यकारी प्रवेश नियमों का निर्माण एवं अधिसूचना करना अनिवार्य है। केवल परामर्शात्मक दिशा-निर्देशों या मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) पर निर्भर नहीं रहा जा सकता।
  • एक ‘राष्ट्रीय मिशन’: न्यायालय ने यह कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) एवं वंचित समूहों (DG) के लिए 25% आरक्षण का क्रियान्वयन राज्य का मूल दायित्व है तथा प्रभावित अभिभावकों को राहत प्रदान करने के लिए न्यायालयों से अतिरिक्त प्रयास करने का आग्रह किया।
  • संस्थागत निगरानी: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को पूरे भारत में अनुपालन की निगरानी हेतु पक्षकार बनाया गया है तथा उसे 31 मार्च, 2026 तक नियम-निर्माण की स्थिति पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
    • बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित NCPCR एवं राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCRs) RTE अधिनियम, 2009 के अंतर्गत समीक्षा, निगरानी एवं शिकायत निवारण के लिए उत्तरदायी हैं।
  • डिजिटल विभाजन को पाटना: न्यायालय ने यह उल्लेख किया कि केवल ऑनलाइन प्रवेश पोर्टल अनेक गरीब अभिभावकों को बाहर कर देते हैं।
    • राज्यों को भौतिक सहायता-डेस्क स्थापित करनी होंगी तथा सुलभता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करनी होगी।
  • कक्षाओं में सद्भाव: 25% आरक्षण को सामाजिक एकीकरण का एक साधन बताया गया, जिससे अमीर और गरीब परिवारों के बच्चे एक साथ अध्ययन कर सकें तथा जाति एवं वर्ग की बाधाएँ टूट सकें।

पहलू RTE के तहत 25% आरक्षण के क्रियान्वयन का महत्त्व RTE के तहत 25% आरक्षण के क्रियान्वयन की चुनौतियाँ
समावेशी शिक्षा यह सुनिश्चित करता है कि EWS एवं वंचित समूहों के बच्चों को निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच मिले, जिससे समान अवसरों को बढ़ावा मिलता है। निजी विद्यालयों द्वारा 25% आरक्षण के क्रियान्वयन का प्रतिरोध, वित्तीय बोझ तथा प्रवेश प्रक्रियाओं में स्वायत्तता के संभावित ह्रास को लेकर चिंताएँ।
सामाजिक न्याय को बढ़ावा उन बच्चों को शिक्षा तक उचित पहुँच प्रदान करता है, जो अन्यथा गुणवत्तापूर्ण निजी विद्यालयों से वंचित रह जाते, जिससे सामाजिक समानता को बल मिलता है। EWS छात्रों की पहचान में संभावित असमानताएँ तथा सभी पात्र बच्चों के लिए निष्पक्ष प्रवेश प्रक्रिया सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ।
पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व वंचित बच्चों के लिए सीटों के स्पष्ट आवंटन को सुनिश्चित कर प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाता है तथा पक्षपात या पक्षधरता को कम करता है। राज्यों द्वारा नियमों एवं दिशा-निर्देशों के निर्माण और प्रवर्तन में प्रशासनिक विलंब, जिससे आरक्षण के पूर्ण क्रियान्वयन में देरी हो सकती है।
वंचित समूहों का सशक्तीकरण हाशिए पर स्थित समुदायों के बच्चों को बेहतर शैक्षिक विकल्प प्रदान कर समान अवसर उपलब्ध कराता है, जिससे वे गरीबी के चक्र को तोड़ सकें। राज्य प्राधिकारियों, निजी विद्यालयों एवं अभिभावकों के बीच जागरूकता एवं समन्वय का अभाव, विशेष रूप से ग्रामीण या वंचित क्षेत्रों में प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन सकता है।
सार्वजनिक-निजी सहयोग को सुदृढ़ करना शिक्षा में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करता है, जिससे निजी विद्यालय राष्ट्रीय शैक्षिक लक्ष्यों में योगदान कर सकें तथा EWS छात्रों हेतु सरकारी सहायता से लाभान्वित हों। निजी विद्यालयों पर वित्तीय भार, जिन्हें आरक्षण के क्रियान्वयन में पर्याप्त समर्थन न मिलने की भावना हो सकती है, जिससे प्रतिरोध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
शिक्षा की गुणवत्ता निजी विद्यालय विविध पृष्ठभूमि के छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान कर सकते हैं, जिससे भारत की समग्र शिक्षा प्रणाली सुदृढ़ होती है। यह सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है कि EWS छात्रों को निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं सहायक सेवाएँ प्राप्त हों, विशेषकर तब जब ध्यान केवल प्रवेश पर हो और शैक्षणिक परिणामों पर नहीं।

PWOnlyIAS विशेष

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE) के बारे में

  • संवैधानिक आधार: यह अधिनियम अनुच्छेद-21A को प्रभावी बनाने हेतु अधिनियमित किया गया, जो 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाता है।
  • धारा 12(1)(c): यह प्रावधान निजी, अनुदान-रहित, गैर-अल्पसंख्यक विद्यालयों को उनके प्रवेश-स्तर (कक्षा 1 या पूर्व-प्राथमिक) की कम-से-कम 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) एवं वंचित समूहों (DG) के बच्चों के लिए आरक्षित करने का दायित्व देता है।
  • प्रतिपूर्ति: सरकार विधिक रूप से इन छात्रों के लिए निजी विद्यालयों को प्रतिपूर्ति करने के लिए बाध्य है, जो या तो सरकार द्वारा प्रति-छात्र किए गए व्यय के आधार पर अथवा वास्तविक विद्यालय शुल्क के आधार पर (जो भी कम हो) की जाती है।
  • उद्देश्य: शिक्षा के अतिरिक्त, यह अधिनियम सामाजिक न्याय एवं बंधुत्व को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है, ताकि एक समान विद्यालय प्रणाली का निर्माण हो सके, जहाँ विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चे एक साथ शिक्षा ग्रहण करें।

शिक्षा के अधिकार से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

  • मौलिक अधिकार: अनुच्छेद-21A, 6–14 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करता है।
  • मौलिक कर्तव्य: अनुच्छेद-51A(k) माता-पिता पर यह कर्तव्य आरोपित करता है कि वे 6–14 वर्ष आयु के अपने बच्चों को शिक्षा प्रदान कराएँ।
  • राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्व (DPSP): अनुच्छेद-45 राज्य को 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का निर्देश देता है।
    • इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद-46 अनुसूचित जातियों (SCs), अनुसूचित जनजातियों (STs) एवं अन्य पिछड़ा वर्गों (OBCs) सहित वंचित वर्गों की शिक्षा को बढ़ावा देता है।
  • समानता एवं गैर-भेदभाव का अधिकार: अनुच्छेद-14 विधि के समक्ष समानता सुनिश्चित करता है, जबकि अनुच्छेद-15 जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव को निषिद्ध करता है, जिससे सभी बच्चों के लिए शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित होती है।

निष्कर्ष

RTE के तहत 25% आरक्षण वंचित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण निजी विद्यालयों तक पहुँच प्रदान कर समावेशी शिक्षा एवं सामाजिक न्याय को प्रोत्साहित करता है। तथापि, निजी विद्यालयों के प्रतिरोध एवं प्रशासनिक विलंब जैसी चुनौतियों का समाधान किया जाना, इसके सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक है।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.