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Lokesh Pal
June 01, 2026 04:25
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हाल ही में सेवलाइफ फाउंडेशन एवं अन्य बनाम भारत संघ (2026) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रॉमा-केयर (Trauma Care) तक पहुँच को अनुच्छेद-21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग माना है।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ट्रॉमा-केयर (Trauma Care) तक पहुँच अब केवल एक कल्याणकारी उपाय नहीं रह गई है, बल्कि यह अनुच्छेद-21 से उत्पन्न होने वाला एक संवैधानिक दायित्व है। इस प्रकार, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा को एक न्यायालय में प्रवर्तनीय अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की गई है।
अनुच्छेद-21 के अंतर्गत ट्रॉमा केयर (Trauma Care) को संवैधानिक अधिकार के रूप में मान्यता देकर सर्वोच्च न्यायालय ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मात्र एक नीतिगत उद्देश्य से आगे बढ़ाकर प्रवर्तनीय अधिकार का स्वरूप प्रदान किया है। यह निर्णय न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि समयबद्ध उपचार सुनिश्चित कर असंख्य जीवन बचाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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