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‘अर्बन मलेरिया’ भारत के वर्ष 2030 के मलेरिया उन्मूलन लक्ष्य के लिए खतरा है

Lokesh Pal December 29, 2025 02:51 81 0

संदर्भ

मलेरिया एलिमिनेशन टेक्निकल रिपोर्ट, 2025 में आक्रामक एनोफेल्स स्टेफेन्सी (Anopheles Stephensi) से बढ़ते खतरे पर प्रकाश डाला गया है, जो शहरी वातावरण में पनपता है और भारत के वर्ष 2030 के मलेरिया उन्मूलन लक्ष्य को असफल कर सकता है।

संबंधित तथ्य 

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मलेरिया एलिमिनेशन टेक्निकल रिपोर्ट, 2025 जारी की गई।
  • मुख्य वाहक: आक्रामक एनोफेल्स स्टेफेन्सी मच्छर को अर्बन मलेरिया संचरण का प्रमुख वाहक माना गया है।

एनोफेल्स स्टेफेन्सी के बारे में

  • मलेरिया का वाहक: अर्बन मलेरिया का प्राथमिक वाहक, जो प्लास्मोडियम फैल्सीपेरम और प्लास्मोडियम वाइवैक्स का संचरण करता है।
    • यह घनी आबादी वाले मानव बस्तियों में अत्यधिक प्रभावी होता है।
  • कंटेनर ब्रीडर: यह कृत्रिम जल पात्रों (भंडारण टैंक, फेंके गए टायर, निर्माण स्थल) में कुशलतापूर्वक प्रजनन करता है, जिससे ग्रामीण जल निकायों पर केंद्रित पारंपरिक नियंत्रण विधियों को दरकिनार कर देता है।
  • भौगोलिक वितरण: यह दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व की मूल प्रजाति है।
    • हाल ही में इसने अफ्रीका के कुछ हिस्सों (हॉर्न ऑफ अफ्रीका के क्षेत्र) को प्रभावित किया है, जिससे अर्बन मलेरिया के प्रसार की चिंता बढ़ गई है।
  • प्रजनन व्यवहार: स्वच्छ या कम प्रदूषित जल इसके प्रजनन के लिए अनुकूल होता है। अंडे और लार्वा संगृहीत जल में अच्छी तरह से जीवित रहते हैं, जिससे नियंत्रण मुश्किल हो जाता है।
  • जन स्वास्थ्य संबंधी चिंता: मलेरिया उन्मूलन लक्ष्यों के लिए खतरा है, जिसके निम्नलिखित कारण हैं:-
    • तीव्र शहरीकरण
    • जल भंडारण प्रथाएँ
    • कुछ क्षेत्रों में कीटनाशक प्रतिरोध।
  • WHO वर्गीकरण: WHO द्वारा उच्च जन स्वास्थ्य महत्त्व के आक्रामक मलेरिया वाहक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

भारत का लक्ष्य

  • स्थानीय स्तर पर मलेरिया के शून्य मामले: भारत का लक्ष्य वर्ष 2027 तक स्थानीय स्तर पर मलेरिया के सभी मामलों को समाप्त करना है।
  • पूर्ण उन्मूलन: वर्ष 2030 तक पूरे देश से मलेरिया का उन्मूलन करना।

वर्तमान प्रगति

  • गिरावट में वृद्धि: मलेरिया के मामलों में भारी गिरावट आई है, जो वर्ष 2015 में 11.7 लाख से घटकर वर्ष 2024 में लगभग 2.27 लाख रह गए हैं। मृत्यु दर में 78% की कमी आई है।
  • संक्रमण के स्वरूप में बदलाव: मलेरिया अब व्यापक रूप से नहीं फैला है, लेकिन स्थानीय पारिस्थितिकी और बुनियादी ढाँचे से प्रभावित सीमित, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में अभी भी मौजूद है।

शहरी क्षेत्रों में मलेरिया क्यों बढ़ रहा है?

  • शहरी चुनौतियाँ: कंटेनर ब्रीडर, उच्च घनत्व, अनौपचारिक बस्तियाँ और शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं का खंडित होना।
  • उच्च-प्रभावित क्षेत्र: ओडिशा, त्रिपुरा और मिजोरम के जिले।
  • सीमा-पार संचरण: म्याँमार और बांग्लादेश से पूर्वोत्तर सीमावर्ती जिलों में निरंतर प्रसार।
  • प्रणालीगत कमियाँ: निजी क्षेत्र से रिपोर्टिंग में असंगति, परीक्षण/उपचार की कमी और दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में परिचालन संबंधी कठिनाइयाँ।

राष्ट्रीय रणनीति और प्राथमिकताएँ

  • इस रिपोर्ट में इन उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।
  • सर्वोच्च प्राथमिकताएँ
    • निगरानी प्रणालियों को सुदृढ़ करना।
    • कीट प्रकीर्णन निगरानी को बढ़ाना (विशेष रूप से एनोफेल्स स्टेफेन्सी के लिए)।
    • निदान और दवाओं के लिए आपूर्ति शृंखला की विश्वसनीयता में सुधार करना।
  • गहन निगरानी: जनजातीय/वन क्षेत्रों, सीमावर्ती क्षेत्रों और प्रवासी आबादी वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना।
  • शहर-विशिष्ट रणनीतियाँ: यह मानते हुए कि शहरी मलेरिया के लिए प्रत्येक महानगरीय क्षेत्र के लिए अनुकूलित नियंत्रण योजनाओं की आवश्यकता होती है।

मलेरिया के बारे में

  • मलेरिया प्लास्मोडियम प्रजाति के परजीवी संक्रमण से होने वाला एक जानलेवा रोग है।
  • यह संक्रमित मादा एनोफिलीस मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है।
  • रोगजनक परजीवी: मनुष्यों को संक्रमित करने वाली प्रमुख प्रजातियाँ:-
    • प्लास्मोडियम फैल्सीपेरम (सबसे गंभीर, सबसे अधिक मृत्यु दर)
    • प्लास्मोडियम वाइवैक्स (व्यापक रूप से फैला हुआ, बार-बार होने वाला)
    • प्लास्मोडियम मलेरियाई, प्लास्मोडियम ओवेल, प्लास्मोडियम नोलेसी
  • लक्षण: सामान्य लक्षण: बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, पसीना आना, मतली।
    • गंभीर मलेरिया से एनीमिया, मस्तिष्क मलेरिया, अंग विफलता और मृत्यु हो सकती है।
  • संचरण चक्र: परजीवी मानव मेजबान (यकृत एवं लाल रक्त कोशिकाएँ) और मच्छर वाहक के बीच बारी-बारी से संचरण करता है।
    • मानव-से-मानव में प्रत्यक्ष संचरण नहीं होता है (रक्त आधान जैसे दुर्लभ मामलों को छोड़कर)।
  • भौगोलिक वितरण: उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों, विशेष रूप से उप-सहारा अफ्रीका, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थानिक है।
    • WHO की मलेरिया के लिए वैश्विक तकनीकी रणनीति 2016-2030 का लक्ष्य वर्ष 2030 तक मलेरिया के मामलों की संख्या और मृत्यु दर को कम-से-कम 90% तक कम करना है।

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