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Lokesh Pal
May 05, 2026 05:15
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जबकि यरुशलम ईसाई धर्म का हृदय है और मक्का/मदीना इस्लाम का केंद्र है, भारत ने वैश्विक तीर्थयात्रियों और प्रभाव को आकर्षित करने के लिए बौद्ध धर्म के जन्मस्थान के रूप में अपनी स्थिति का पूरी तरह से लाभ नहीं उठाया है।
भारत को बौद्ध धर्म को एक सभ्यतागत पुनर्मिलन उपकरण के रूप में देखना चाहिए, तथा वैश्विक संबंधों को मजबूत करने के लिए ‘अवशेष कूटनीति’ (Relic Diplomacy) का उपयोग करना चाहिए।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न: दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की सॉफ्ट पावर और ‘अवशेष कूटनीति’ (Relic Diplomacy) को बढ़ाने में भारत की बौद्ध विरासत की भूमिका का परीक्षण कीजिए। बौद्ध सर्किट की आर्थिक क्षमता में कौन-सी प्रणालीगत बाधाएँ बाधक हैं? (15 अंक, 250 शब्द) |
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