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Lokesh Pal
July 22, 2026 05:00
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भारत में लोकोपकार का स्वरूप विदेशी वित्तपोषण से हटकर घरेलू संसाधनों पर आधारित सामाजिक विकास की ओर अग्रसर है। इसमें पारिवारिक लोकोपकार, निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व, व्यक्तिगत दानदाताओं तथा डिजिटल माध्यम से दान की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए विदेशी अंशदान विनियमन व्यवस्था के बेहतर प्रशासन तथा घरेलू लोकोपकार को अधिक प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।
निष्कर्षतः एक आत्मनिर्भर लोकोपकार व्यवस्था का अर्थ विदेशी वित्तपोषण को समाप्त करना नहीं; बल्कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी अंशदान एक विशाल, पारदर्शी और सहभागी घरेलू व्यवस्था का पूरक बने, जहाँ भारत का सामाजिक परिवर्तन बढ़ते हुए भारतीय नागरिकों, संस्थाओं और व्यवसायों द्वारा वित्तपोषित, संचालित और स्वामित्वयुक्त हो।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्नप्रश्न: “आत्मनिर्भर लोकोपकार व्यवस्था” भारत के सामाजिक विकास को अधिक जवाबदेह, सहभागी और टिकाऊ बना सकती है। इस संदर्भ में विदेशी अंशदान विनियमन व्यवस्था, घरेलू लोकोपकार तथा निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्नप्रश्न : विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (a) केवल 1 |
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